वायुमण्डल की परिभाषा क्या है ? वायुमण्डल परतें , वायुमंडल का महत्व , संरचना चित्र , atmosphere of earth in hindi

By   February 13, 2020

atmosphere of earth in hindi , वायुमण्डल की परिभाषा क्या है ? वायुमण्डल परतें , वायुमंडल का महत्व , संरचना चित्र :-

वायुमण्डल (atmosphere) : पृथ्वी के चारो ओर पायी जाने वाली वायु की परत को वायुमंडल कहते है।

पृथ्वी के गुरुत्वाकर्षण बल के कारण वायुमंडल पृथ्वी के चारो ओर बना रहता है।

वायुमण्डल के तीन प्रमुख घटक है –

(i) गैसे  (ii) जलवाष्प  (iii) धुल के कण

गैसे :-

नाइट्रोजन – 78%

ऑक्सीजन – 21%

आर्गन – 0.9%

कार्बन डाइ ऑक्साइड – 0.03%

जलवाष्प (water vapour) : यह वायुमंडल की सबसे निचली परत में सर्वाधिक पायी जाती है |

जलवाष्प , वर्षा और बादल निर्माण के लिए आवश्यक होता है | जलवाष्प का भी हरित गृह प्रभाव होता है इसलिए जलवाष्प भी वायुमंडल के तापमान को बढाता है |

धूल के कण (dust particles) : धुल के कणों की सर्वाधिक मात्रा वायुमंडल की सबसे निचली परत में पायी जाती है , धूल के कण सौर विकिरणों का प्रकीर्णन करते है | जिसके कारण आकाश में रंग नजर आते है | वायुमंडल में संघनन की क्रिया धुल के कणों के चारों ओर होती है अत: धूल के कण बादल निर्माण एवं वर्षा के लिए आवश्यक होते है |

वायुमण्डल की संरचना (structure of atmosphere)

1. क्षोभमण्डल (troposhere) : इस परत की ऊँचाई विषुवत रेखीय क्षेत्रो में 14-16 किलोमीटर होती है , तथा ध्रुवीय क्षेत्रो में इसकी ऊंचाई लगभग 8 किलोमीटर होती है |
विषुवतीय क्षेत्रों में गर्म वायु ऊपर उठती है और वायु के संवहन के कारण इस क्षेत्र में क्षोभमण्डल की ऊँचाई बढ़ जाती है |
ध्रुवीय क्षेत्रों में ठंडी वायु का अवतलन होता है , इसके कारण ध्रुवों पर क्षोभमंडल की ऊंचाई कम हो जाती है |
वायु की अधिकतम सांद्रता इसी परत में पायी जाती है इसलिए सौर विकिरणों का अधिकतम प्रकीर्णन इसी परत में होता है |
लगभग सभी मौसम परिघटनाएँ इसी परत में घटित होती है , ऊंचाई में जाने पर तापमान एक निश्चित दर से कम होता है और दर को सामान्य तापमान परत दर कहते है |
इस दर के अनुसार 1 किलोमीटर की ऊंचाई पर 6.5 डिग्री सेल्सियस तापमान कम हो जाता है और 165 मीटर की ऊँचाई पर तापमान 1 डिग्री सेल्सियस कम हो जाता है |
क्षोभमण्डल और समताप मंडल के बीच एक संक्रमण परत पायी जाती है जिसे “क्षोभ सीमा” कहते है |
2. समताप मण्डल : यह परत क्षोभ सीमा से 50 किलोमीटर तक ऊँचाई पर पायी जाती है |
इस परत में मौसम परिघटनाएं न के बराबर होती है अत: इस परत का उपयोग जेट विमान की उड़ान के लिए किया जाता है | इस परत में 20 से 40 किलोमीटर की ऊँचाई के बीच ओजोन परत पायी जाती है |
ओजोन परत सूर्य से आने वाली हानिकारक पैराबैंगनी किरणों (UV) को अवशोषित करती है अत: ओजोन परत को पृथ्वी की सुरक्षा परत कहते है |
पैराबैंगनी किरणों के अवशोषण के कारण इस परत में ऊष्मा मुक्त होती है , जिसके कारण इस परत में ऊंचाई बढने के साथ तापमान बढ़ता है |
समताप मंडल तथा मध्य मंडल के बीच समताप सीमा स्थित है |
3. मध्यमण्डल : यह परत 50 किलोमीटर से 80 किलोमीटर के बीच पायी जाती है | इस परत में ऊँचाई बढने के साथ तापमान कम होता है | 80 किलोमीटर ऊँचाई पर तापमान लगभग -100 डिग्री सेल्सियस हो जाता है |
यह वायुमंडल की सबसे अधिक ठण्डी परत है , इस परत में घर्षण के कारण उल्का जल जाते है |
समताप मंडल और मध्य मंडल के मध्य एक संक्रमण परत पायी जाती है जिसे मध्य सीमा कहते है |
4. तापमण्डल : तापमंडल 80 किलोमीटर से अधिक ऊंचाई पर पाया जाता है , इस परत में दो उप परतें पायी जाती है |
(i) आयन मण्डल : यह 80 से 640 किलोमीटर के बीच स्थित है | इस परत में सौर विकिरणों के कारण आवेशित कणों का निर्माण होता है | इन आवेशित कणों को आयन कहते है | इस परत का उपयोग पृथ्वी से रेडियो तरंगो की सहायता द्वारा दूर संचार सेवाओ के लिए किया जाता है |
सूर्य से आने वाले आवेशित कण ध्रुवीय क्षेत्रों के ऊपर पृथ्वी के चुम्बकीय क्षेत्र में इस परत के आवेशित कणों के साथ क्रिया करते है |आवेशित कणों की क्रिया के कारण फोटोन का उत्सर्जन होता है , जिससे रंग बिरंगे प्रकाश का निर्माण होता है | इसे ध्रुवीय प्रकाश या अरोरा कहा जाता है |
उत्तरी ध्रुवीय क्षेत्र में नाम – अरोरा बोरियोलिस
दक्षिणी ध्रुवीय क्षेत्र में नाम – अरोरा ऑस्ट्रेलिस
आवेशित कणों के कारण इस परत में ऊंचाई बढने के साथ तापमान बढ़ता है |
(ii) बहिर्मण्डल : यह परत 640 से 10,000 किलोमीटर के बीच पायी जाती है , इस परत में वायु की सांद्रता बहुत कम पायी जाती है | इस परत में ऊँचाई बढने के साथ तापमान बढ़ता है , इस परत में तापमान 1700 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक भी हो जाता है |