आखा तीज क्या होती है | आखा तीज किसे कहते है कब मनाई जाती है कारण अर्थ मतलब akha teej in hindi

By   February 17, 2021

आखा तीज पर क्या करना चाहिए akha teej in hindi आखा तीज क्या होती है | आखा तीज किसे कहते है कब मनाई जाती है कारण अर्थ मतलब महत्व क्या है ? क्या करते है और क्यों करते है ?

प्रश्न: आखा तीज/अक्षय तृतीया (बैशाख शुक्ला तृतीया)
उत्तर: राज्य में कृषक सात अन्नों तथा हल का पूजन करके शीघ्र वर्षा की कामना के साथ यह त्यौहार मनाते हैं। शास्त्रानुसार इस दिन से सतयुग और त्रेतायुग का आरम्भ माना गया है क्योंकि इस दिन किया हुआ तप, जप, ज्ञान तथा दान अक्षय फलदायक होता है। संपूर्ण वर्ष में यह एकमात्र अबूझ सावा है। इस दिन राज्य में हजारों विवाह विशेषतः बाल विवाह सम्पन्न होते हैं।

प्रश्न: कृष्ण जन्माष्टमी (भाद्रपद कृष्णा अष्टमी)
उत्तर: इसे कृष्ण जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन मंदिरों में श्रीकृष्ण के जीवन से संबंधित झाँकियाँ सजाई जाती हैं। पूरे दिन उपवास के बाद रात के बारह बजे श्रीकृष्ण जन्म होने पर श्रीकृष्ण की आरती व विशेष पूजा-अर्चना करके भोजन किया जाता है।
प्रश्न: देवउठनी ग्यारस (कार्तिक शुक्ला एकादशी)
उत्तर: इसे प्रबोधिनी एकादशी भी कहते हैं। इस दिन भगवान विष्णु चार माह तक निद्रावस्था में रहने के बाद जागते हैं। इस दिन से ही समस्त मांगलिक कार्य/शादी-विवाह प्रारम्भ हो जाते हैं। प्रातः काल स्नान करके घर के आँगन में चैका पूरा कर भगवान विष्णु के चरणों को कलात्मक रूप से अंकित करते हैं। भगवान विष्णु की कदम्ब पुष्पों तथा तुलसी की मंजरियों द्वारा पूजा की जाती है।
प्रश्न: शिवरात्रि (फाल्गुन कृष्णा त्रयोदशी)
उत्तर: इस दिन को भगवान शिवजी के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है। इस दिन श्रद्धालुगण व्रत रखते हैं व शिव पुराण का पाठ करते हैं। दूसरे दिन प्रातः जौ, तिल, खीर, बिल्व पत्रों का हवन करके ब्राह्मणों को भोजन कराकर व्रत का पारण किया जाता है।
प्रश्न: घुड़ला का त्यौहार (चैत्र कृष्णा अष्टमी)
उत्तर: यह त्यौहार राजस्थान के मारवाड़ क्षेत्र में चैत्र कृष्णा अष्टमी से लेकर चैत्र शुक्ला तृतीया तक मनाया जाता है। इस दिन स्त्रियाँ एकत्रित होकर कुम्हार के घर जाकर छिद्र किए हुए एक घड़े में दीपक रखकर अपने घर गीत गाती हुई लौटती है। यह घड़ा बाद में तालाब में बहा दिया जाता है। इस त्यौहार पर चैत्र सुदी तीज को मेला भरता है।
प्रश्न: दशहरा (आश्विन शुक्ला दशमी)
उत्तर: यह त्यौहार संपूर्ण भारत में मनाया जाता है। इस दिन भगवान राम ने रावण का वध कर बुराई पर विजय पाई थी। इसलिए इस ‘विजयदशमी‘ भी कहते हैं। इस दिन सर्यास्त होते ही रावण कुंभकरण व मेघनाद के पतले जलाए जाते हैं। राजस्थान के कोटा शहर में तथा भारत के मैसूर शहर में दशहरे का बहुत बड़ा मेला लगता है। दशहरे पर शमी वृक्ष (खेजड़ी) की पूजा की जाती है और लीलटास पक्षी का दर्शन शुभ माना जाता है।
प्रश्न: बसंत पंचमी (माघ शुक्ला पंचमी)
उत्तर: यह दिन ऋतुराज बसंत के आगमन का प्रथम दिन माना जाता है। भगवान श्रीकृष्ण इस उत्सव के अधिदेवता हैं इसलिए ब्रज प्रदेश में इस दिन राधा और कृष्ण की लीलाएँ रचाई जाती हैं। इस दिन से फाग उड़ाना प्रारंभ करते हैं जिसका क्रम फाल्गुन की पूर्णिमा तक चलता है। गेहूँ और जौ की स्वर्णिम बालियाँ भगवान को अर्पित की जाती है। बसंत ऋतु कामोद्दीपक होती है। इस दिन कामदेव और रति का प्रधान रूप से पूजन करते हैं। इस दिन लोग पीले वस्त्र धारण करते हैं व घरों में पीले मीठे चावल बनाकर खाते हैं। इस दिन सरस्वती की पूजा की जाती है।
प्रश्न: गणगौर (चैत्र शुक्ला तृतीया)
उत्तर: यह सुहागिन स्त्रियों का महत्त्वपूर्ण त्यौहार है। यह शिव व पार्वती के अखंड प्रेम का प्रतीक पर्व है। गणगौर में ‘गण‘ महादेव का व ‘गौरी‘ पार्वती का प्रतीक है। इस दिन कुंवारी कन्याएँ मनपसंद वर प्राप्ति का तथा सुहागन स्त्रियाँ अपने अखंड सौभाग्य की कामना करती हैं। चैत्र कृष्णा एकम् से ही गणगौर पूजन आरम्भ हो जाता है व चैत्र शुक्ला तृतीया तक यह क्रम चलता रहता है। इस दिन गणगौर माता की सवारी निकाली जाती है। जयपुर व उदयपुर की गणगौर प्रसिद्ध हैं।
प्रश्न: होली (फाल्गुन पूर्णिमा)
उत्तर: इस दिन हिरण्यकश्यप की आज्ञा पर उसकी बहन होलिका प्रहलाद को गोद में लेकर अग्नि में प्रविष्ट हुई थी लेकिन प्रहलाद बचे होता है व होलिका जल जाती है। अतः भक्त प्रहलाद की स्मृति में इस पर्व सब स्त्रियाँ कच्चे सत की ककडी. जल का लोटा, नारियल आदि द्वारा होली की पूजा करती हैं। होली में कच्चे चने युक्त हरी डालियाँ व कच्चे गेहूँ की बालियाँ आदि भूनकर घर लाई जाती हैं। होली जलने पर पुरुष होली के डंडे को बाहर निकालते हैं क्योंकि इस डंडे को भक्त प्रहलाद का प्रतीक माना जाता है।
प्रश्न: ‘चतड़ा/चतरा चैथ‘ गणेश चतुर्थी (भाद्रपद शुक्ला चतुर्थी) ख्त्।ै डंपदश्े 2010,
उत्तर: इसे संपूर्ण भारत में धूमधाम से मनाया जाता है। विघ्न विनायक श्री गणेशजी को देवताओं में सर्वोच्च स्थान प्राप्त है। महाराष्ट में यह त्यौहार विशिष्ट रूप से मनाया जाता है व जुलूस निकालकर गणपति की प्रतिमा को जल में विसर्जित किया जाता है। इस पर्व को गणेश जन्मोत्सव के रूप में मनाते हैं। मंदिरों में गणेशजी की झाँकियाँ सजाई जाती है। यह त्यौहार ‘चतरा चैथ‘ के नाम से भी जाना जाता है। चतरा चैथ के दिन नवविवाहित पुरुषों को सिंजारा भेजा जाता है। गणेश चतर्थी का महत्त्व इस दृष्टि से अधिक है कि यह बालकों का विशेष त्यौहार हैं। गणेश चतुर्थी से दो दिन पूर्व बच्चों का सिंजारा दिया जाता है।
प्रश्न: दीपावली (कार्तिक अमावस्या)
उत्तर: यह भारत हिन्दुओं का सबसे बड़ा त्यौहार है। इस दिन भगवान राम चैदह वर्ष का वनवास पूर्ण करके सीता, लक्ष्मण, हनुमान आदि के साथ अयोध्या लौटे थे। यह पर्व लक्ष्मी का उत्सव है। यह आर्य समाज के संस्थापक महर्षि दयानन्द व भगवान महावीर का निर्वाण दिवस भी माना जाता है। इस दिन वैश्य लोग अपने-अपने बही खाते बदलते हैं और वर्ष भर की लाभ-हानि का विवरण बनाते हैं। इस दिन घर, दुकानों व शहरों को खूब सजाया जाता है। सभी नए कपड़े पहनते हैं, मिठाइयाँ बनाई जाती हैं, शाम को लक्ष्मी पूजन किया जाता है व पटाखे छोड़े जाते हैं।
प्रश्न: गणगौर
उत्तर: राजस्थान का प्रमुख लोकोत्सव गणगौर अर्थात् गण (शिव) गोरी (पार्वती) चैत्र तृतीया को सधवा स्त्रियाँ एवं कमारियाँ असीम श्रदा एवं निष्ठा से मनाती हैं। इस त्यौहार पर कुमारियाँ मन पसंद वर एवं सधवा अखण्ड सुहाग एवं भाई की दीर्घाय की मंगल कामना करती है। यह त्यौहार आदिवासियों में भी बड़े उत्साह से मनाया जाता है। आर्य एवं द्रविड संस्कृति के समन्वय का यह त्यौहार एक अच्छा उदाहरण है। इस दिन ईसर एवं गणगौर की सवारी निकाली जाती है। जयपर की गणगौर देश-विदेश में प्रसिद्ध है। गणगौर राजस्थान का प्रमुख लोकोत्सव बनकर उभरा है।
प्रश्न: पुष्कर मेला
उत्तर: तीर्थराज पुष्कर (अजमेर) धार्मिक, सांस्कृतिक और पशु मेले का अनूठा संगम है। यहाँ कार्तिक शुक्ला प्रथमा से पूर्णिमा तक मेले का आयोजन होता है। देश-विदेश के हिन्दू, आदिवासी एवं अन्य श्रद्धालु पुष्कर तीर्थ में स्नान कर ब्रह्माजी, श्रीरंगजी आदि देवों के दर्शन कर पापमुक्त हो जाते हैं। राजस्थान सरकार यहाँ राजस्थानी संस्कृति के सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करती है। जिसमें विदेशी पर्यटकों का जमावड़ा रहता है। यहाँ के विशाल पश मेले में श्रेष्ठ नस्ल के पशुओं को पुरस्कृत कर नस्ल सुधार को बढ़ावा दिया जाता है। यह राजस्थान का सबसे बड़ा व रंग-बिरंगा मेला है।
प्रश्न: भर्तृहरि मेला
उत्तर: राजस्थान के इस प्रमुख धार्मिक-सांस्कृतिक मेले का आयोजन उज्जैन के राजा एवं नाथपंथ के महान् योगी भर्तृहरि की याद में वर्ष में दो बार अलवर में होता है। भर्तृहरि (अलवर) कनफड़े नाथों का प्रमुख तीर्थस्थल है। मेले में अधिकांश ग्रामीण कृषक समुदाय, आदिवासी लोग भाग लेते हैं जो राजस्थान की लोकसंस्कृति की छटा बिखेरते हैं। देश के सभी हिस्सों के साधु संत, सन्यासी, नागा लोगों के समूह यहाँ आते हैं जिससे यहाँ कुंभ जैसा दृश्य हो जाता है।
प्रश्न: मोहर्रम
उत्तर: यह मुसलमानों के हिजरी सन् का पहला महीना है। इस माह में हजरत मोहम्मद साहब के नवासे हजरत इमाम हुसैन ने सत्य और इंसाफ के लिए जुल्म और सितम से लड़ते हुए कर्बला के मैदान में शहादत पाई थी लेकिन धर्म विरोधियों के आगे सिर नहीं झुकाया था। उसी की याद में मोहर्रम मनाया जाता है। इस दिन ताजिए निकाले जाते हैं। इन ताजियों को कर्बला के मैदान में दफनाया जाता है।