बारावफात का मतलब क्या है | बारावफात किसे कहते है अर्थ क्या है कब मनाया जाता है barawafat in hindi

By   February 18, 2021

barawafat in hindi बारावफात का मतलब क्या है | बारावफात किसे कहते है अर्थ क्या है कब मनाया जाता है ?

प्रश्न: इद-उल-मिलादुलनबी (बारावफात)
उत्तर: यह त्यौहार पैगम्बर हजरत मोहम्मद के जन्मदिन की याद में मनाया जाता है। मोहम्मद साहब का जन्म 570 ई. में मक्का (सउदी अरब) में हुआ था। इस दिन जगह-जगह जुलूस निकाले जाते हैं व हजरत मोहम्मद की जीवनी व शिक्षाओं पर प्रकाश डाला जाता है व विशेष प्रार्थनाएँ की जाती है।
प्रश्न: इद-उल-फितर (मीठी ईद)
उत्तर: इसे ‘सिवैयों की ईद‘ भी कहा जाता है। ‘ईद‘ शब्द का अर्थ ‘खुशी‘ या ‘हर्ष‘ होता है। मुस्लिम लोग रमजान के पवित्र माह में 30 दिन तक रोजे करने के बाद शुक्रिया के तौर पर इस त्यौहार को मनाते हैं। ईदगाह में सामूहिक नमाज अदा करने के बाद सभी एक दूसरे से गले मिलकर ईद की मुबारकबाद देते हैं। मीठी सिवैयाँ व अन्य पकवान बनाकर खिलाये जाते हैं। यह भाईचारे का त्यौहार है।
प्रश्न: इदुलजुहा (बकरा ईद)
उत्तर: यह कुर्बानी का त्यौहार है जो पैगम्बर हजरत इब्राहीम द्वारा अपने लड़के हजरत इस्माइल की अल्लाह को कुर्बानी देने का समति में मनाया जाता है। इस दिन मुसलमान कुर्बानी के प्रतीक के रूप में बकरे की कुर्बानी देते हैं। इदुलजुहा के माह में ही मुसलमान हज करते हैं।
प्रश्न: शबे बारात बना
उत्तर: यह त्यौहार शाबान माह की 14वीं तारीख की शाम को मनाया जाता है। यह माना जाता है कि इस दिन हजरत मुहम्मद साहब की आकाश में ईश्वर से मुलाकात हुई थी। इस दिन मुसलमान भाई अपनी भूलों व पापों की माफी के लिए खुदा से प्रार्थना करते हैं।
प्रश्न: राजस्थान के आदिवासी मेले
उत्तर: राजस राजस्थान के दक्षिणांचल में डूंगरपुर में आदिवासियों के 21 मेले भरते हैं जिनमें आदिवासियों का कुम्भ बेणेश्वर मेला सर्वाधिक लोकप्रिय एवं विख्यात है। नीलपानी, भेड़माता, खंडिया महादेव, हडभतियां, हनुमान, दाउदी बोहरा उस शीतलामाता व गौवर (गलियाकोट) आदि प्रसिद्ध मेले हैं। इनके अतिरिक्त बाँसवाडा में घोटिया अम्बा व संगमेश्वर, उदया में केसरिया जी, प्रतापगढ़ में गौतमेश्वर मेला विभिन्न क्षेत्रों के आदिवासियों का संगम स्थल है। इनके अलावा शिव (सिरोही) का पाबूजी तथा मारवाड़ का ‘गौतमबाबा‘ का मेला प्रसिद्ध जनजातीय मेले हैं। ये सभी मेले आदिवासिया । धार्मिक-सांस्कृतिक मान्यताओं और आस्थाओं से जुड़े हैं, यहाँ आदिवासी लोक संस्कृति जीवन्त हो उठती है।
प्रश्न: राजस्थान के पशु मेले [RAS Main’s 1999]
उत्तर: राजस्थान रान्य में प्रतिवर्ष 250 से अधिक पशु मेलों का आयोजन होता है। इसमें पशुपालन विभाग द्वारा 10 राज्य स्तरीय पशु मेलों का आयोजन किया जाता है। अधिकांशतः मेले व्यक्तिगत देवताओं एवं महापुरुषों के नाम से जुड़े हुए है।

प्रश्न: लोक नृत्य
उत्तर: किसा क्षेत्र विशेष में लोगों द्वारा सामहिक रूप से लोक गीतों को लोक वाद्यों की संगति में लयबद्ध रूप से गीत को नृत्य द्वारा साकार करना ‘लोकनृत्य‘ कहलाता है। जैसे डांडिया।
प्रश्न: डांडिया
उत्तर: यह मारवाड का प्रसिद्ध लोक नृत्य है जो पुरुषों द्वारा होली के अवसर पर शहनाई, नगाड़ा वाद्य यंत्रों व ख्याल भी शैली में सामूहिक रूप से किया जाता है।
प्रश्न: चंग नृत्य
उत्तर: यह शेखावाटी क्षेत्र का प्रसिद्ध लोक नृत्य है जो पुरुषों के द्वारा चंग बजाते एवं गीत गाते हुए वृत्ताकार रूप में होली अवसर पर किया जाता है।
प्रश्न: जंतर [RAS Main’s 2003]
उत्तर: जंतर राजस्थान का प्रसिद्ध तत् लोकवाद्य है जो वीणाा के समान 2 तुम्बों में 5-6 तार कसकर मगरमच्छ की खाल से बनाया जाता है – जिसे गुर्जरों के भोपे देवनारायण जी की फड़ वाचन में प्रयुक्त करते हैं।
प्रश्न: अलगोजा [RAS Main’s 1999]
उत्तर: दो बांस की नलियों से निर्मित राजस्थान का प्रसिद्ध सुषिर लोकवाद्य जो नकसांसी से बजाया जाता है। अलबर, सवाईमाधोपुर क्षेत्रों एवं भील, कालबोलियों आदि में बहुत लोकप्रिय है।
प्रश्न: सहरिया जनजाति के नृत्य
उत्तर: शिकारी नृत्य: सहरिया पुरुषों द्वारा शिकार का अभिनय करते हुए किया जाने वाला नृत्य है।
झेला नृत्य: सहरिया स्त्री-पुरुषों द्वारा सामूहिक रूप से गायन के साथ किया जाने वाला नृत्य।
निम्नलिखित सारणी में राजस्थान की संगीतजीवी जातियों का उल्लेख किया गया है। इनमें से किसी एक जाति पर अतिलघुत्तरात्मक में तथा सामूहिक रूप से लघुत्तरात्मक या निबंधात्मक प्रकार में शब्दों में प्रश्न पूछ लिया जाता है। अतः सारणी की सहायता से अपना उत्तर लिखें।