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airy’s concept of isostasy in hindi sir george airy theory एयरी के भू संतुलन सिद्धांत की आलोचनात्मक व्याख्या करें ?

 जार्ज एअरी की धारणा
(G- Aairy’s Concept)
1859 में एअरी महोदय ने प्राट के विचारों से असहमति जताई। उन्होंने प्राट के इस मत का खण्डन किया कि पर्वत, पठार मैदान. अलग खण्डों में विभिन्न पदार्थों से बने है। एअरी का मत था कि सम्पूर्ण भूपृष्ठ एक ही प्रकार के पदार्थ से बना है। विभिन्न भूरूप भिन्न-भिन्न आकार रखते हैं अतः उनके आयतन (Volume) में अन्तर पाया जाता है। अधिक आयतन वाला भूभाग पृथ्वी के अधःस्तर (Substratum) में अधिक गहराई तक धंसा होगा। ऊँचे व विशाल भूभाग तभी स्थिर रहेंगे जब उनका अधिक भाग नीचे तक डूबा हो। कम आयतन वाले भूभाग कम डबेगे। एअरी ने आर्कमिडीज के सिद्धान्त का अनुसरण किया कि प्रत्येक उतरती हई वस्त अपने द्रव्यमान (Mass) के बराबर ही द्रव्य को हटाती है।
उपरोक्त आधार पर हिमालय के कम आकर्षण की समस्या का समाधान एअरी ने भिन्न प्रकार से किया।
ऊँचे पर्वतों ने अपने अधःस्तर में काफी मात्रा में अधिक पदार्थ को हटा दिया था जिस कारण उसके आकर्षण में कमी आ गई। एअरी के मत का समर्थन गहरी खदानों से भी मिलता ही घनत्व की शैलें पायी जाती हैं।
एअरी ने अपने मत को समझाने के लिये ताँबे के विभिन्न आकार के टुकड़े पारे में डुबाये। इन टुकड़ों का घनत्व एक ही था पर भार अलग-अलग था। भारी टुकड़े अधिक गहराई तक डबे वर गहराई तक डूबे व हल्के टुकड़े कम गहराई तक डूबे। यही व्यवस्था एअरी के अनुसार पर्वत व मैदानों के मध्य पायी जाती है।