अम्ल और क्षार उदाहरण , अंतर , अम्ल और क्षार के रासायनिक गुण और पहचान , acid and base in hindi

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इससे पहले के article मे , अम्ल और क्षार की रासायनिक और भोतिक गुणों को discuss किया था | लेकिन पिछले article मे discuss रासायनिक गुण केवल अम्ल और क्षार मे से एक chemicals पर लागु होते है | in article मे discuss करेगे जो की अम्ल और क्षार दोनों पर भी लागु होता है |इससे पहले के article मे देखा की सभी अम्लों में समान रासायनिक गुणधर्म होते हैं। जब अम्ल को किसी दुसरे रसायन के साथ अभिकिया किया जाता है तब इस रासायनिक अभिकिया मे उत्पाद की तरह हाइड्रोजन गैस मिलती है | और इस fact से निष्काषित होता है जिस chemical मे ‘H’ हाइड्रोजन आयन होता है तब ये chemical अम्ल होता है | निन्म उदाहरन को consider करेगे :-
धातु के साथ अभिक्रिया करने पर सभी अम्ल हाइड्रोजन गैस उत्पन्न करते हैं। और धातु को आध्त्विक ऑक्साइड की साथ अभिकिया करने पर भी जल प्राप्त होता है |नीचे दिए गये प्रयोग मे ये बात सिद्ध होती है की अम्ल मे हाइड्रोजन आयन होता है अतः इस प्रयोग को consider करेगे :-
1.ग्लूकोज़(C12O36H12), ऐल्कोहॉल (CH3OH), हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCL), सल्फ्रयूरिक अम्ल ( H2SO4) आदि का विलयन बनायेगे । और इस विलयन को अलग अलग बिकर मे le लेते है |
2. एक कॉर्क पर दो कीलें लगाकर कॉर्क को ग्लूकोज़(C12O36H12) के बीकर में रख दीजिए।
3.6 वोल्ट की बैटरी बल्ब स्विच बीकर कील  पर लगा लेते है जिससे एक विद्युत् परिपथ का निर्माण हो जाता है |
4. अब बीकर के परिपथ मे विद्युत धारा प्रवाहित कीजिए।
5. इसी क्रिया को ऐल्कोहॉल (CH3OH), हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCL), सल्फ्रयूरिक अम्ल ( H2SO4)अम्ल के विलयन के साथ दोहराइए।
इस परयोग से  निन्म प्रेक्षण प्राप्त होता है :-
ग्लूकोज एवं ऐल्कोहॉल का विलयन मे बल्ब नहीं जलता है क्योकि ग्लूकोज एवं ऐल्कोहॉल का विलयन विद्युत का चालन नहीं करते हैं। और अम्ल की विलयन मे बल्ब जलता है | इस प्रयोग से निन्म निष्काषित होता है |अम्लो के विलयन मे आयन हिता है जो की विदुत को पर्वाहित करने मे मदद करता है |
जब ये प्रयोग HCL के साथ होता है तब इस विलयन मे H positive या CL negatative आयन होते है |
और ये प्रयोग H2SO4 के साथ होता है तब इस विलयन मे H positive या SO4 negatative आयन होते है |
या ये प्रयोग HNO3 के साथ होता है तब इस विलयन मे H positive या NO3 negatative आयन होते है |
या ये प्रयोग CH3COOH के साथ होता है तब इस विलयन मे H positive या CH3COO negatative आयन होते है |
अतः इसे प्राप्त होता है की अम्ल मे H POSITIVE आयन होता है जो अम्ल की नयी परिभाषा को बनता है :-
जिस भी chemical मे H पॉजिटिव होत्ता है use अम्ल कहते है |

जलीय विलयन में अम्ल या क्षारक का क्या होता है?
अम्ल केवल जलीय विलयन में ही आयन उत्पन्न करते हैं लेकिन इस विलयन मे H आयन का होना जरुरी नहीं होता है इस जलीय विलयन में अम्ल या क्षारक के साथ अभिकिया को सामने के लिए निन्म पयोग को use किया जाता है :-
1.एक स्वच्छ एवं शुष्क परखनली में लगभ NACL को लेगे और इसमें  कुछ मात्र में सांद्र सल्फ्रयूरिक अम्ल को मिलाया जाता है | जस्ब इसमें अभिकिया होती है तब इसमें से गैस बहार निकलती है | इस गैस को check करने केलिए निन्म प्रयोग को करते है :
2. इस प्रकार उत्सर्जित गैस  के ऊपर सूखे तथा नम नीले लिटमस पत्र le जाते है । और लिटमस पत्र का रंग परिवर्तित हो जाता है | जो की गैस को अम्ल होने की PROOF करता है |

आगर इस प्रयोग मे जलवायु अत्यधिक आर्द्र हो तो गैस को शुष्क करने के लिए आपको कैल्सियम क्लोराइड वाली शुष्क नली से गैस प्रवाहित करना होगा।
इस प्रयोग से यह स्पष्ट होता है कि जल की उपस्थिति में अम्ल में हाइड्रोजन आयन उत्पन्न होते हैं। जल की अनुपस्थिति में अम्ल अणुओं से H आयन पृथक नहीं हो सकते हैं। HCL के साथ , जल की उपस्थिति मे अम्ल से हाइड्रोजन आयन अलग हो जाता है |
HCl + H2O ——–> H3O+ + Cl–
जब अम्ल से हाइड्रोजन आयन अलग होता है तब हाइड्रोजन आयन स्वतंत्र रूप में नहीं रह सकत इसलिए  ये जल के अणुओं के साथ मिलकर रह सकते हैं। इसलिए हाइड्रोजन आयन  सदैव  हाइड्रोनियम
आयन (H3O) बनाता  है ।
H+ + H2O ——> H3O+
अम्ल जल में  H3O+ आयन प्रदान करता है। जब क्षारक के अभिकिया जल के साथ किया जाता है तब निन्म अभिकिया होती है :
NaOH(s) + H2O ——–> Na+(aq)+OH–(aq)
KOH(s) +   H2O ——-> K+(aq) +OH–(aq)
Mg(OH)2(s) + H2O —–> Mg2+(aq)+2OH–(aq)
क्षारक जल में हाइड्रॉक्साइड OH–आयन मिलता  हैं। जल में घुलनशील क्षारक को क्षार कहते हैं।
सभी क्षारक जल में घुलनशील नहीं होते हैं। जल में घुलनशील क्षारक को ही क्षार कहते हैं | इस घोल की  प्रकृति संक्षारक होती है। इन्हें कभी भी छूना या चखना नहीं चाहिए क्योंकि ये खतरनाक हो सकता  हैं।

जब अम्ल और क्षार को जल के साथ अभिकिया की जाती है तो निन्म पॉइंट्स को consider किया जाता है :-
जल में अम्ल या क्षारक के घुलने की अभिकिया  ऊष्माक्षेपी होती है। अतः इस अभिकिया से बहुत ज्यदा मात्रा मे ऊष्मा बहार निकलती है | अतः जल में अम्ल या क्षारक के घुलने की की प्रकिया को बहुत सावधानी से किया जाता है |सांद्र नाइट्रिक अम्ल या सल्फ्ऱ यूरिक अम्ल के साथ बहुत ही ज्यादा  | क्योकि सांद्र नाइट्रिक अम्ल या सल्फ्ऱ यूरिक अम्ल को मिलाते समय अत्यंत सावधानी रखनी चाहिए। अम्ल को सदैव धीरे-धीरे तथा जल को लगातार हिलाते हुए जल में मिलाना चाहिए। जिससे अभिकिया मे निकलने वाली ऊष्मा वातावरण मे मिल जाये इसका दुस्प्रभाव कम हो जाये | इसके अलवा बहुत ज्यादा  स्थानीय ताप के कारण प्रयोग में उपयोग किया जा रहा काँच का पात्र भी टूट सकता है। इसलिए पात्र हमेशा तांबा का होता है |
2.इसके अलावा अम्ल या क्षारक मे जल को मिलाने पर आयन की सांद्रता  में प्रति इकाई आयतन में कमी हो जाती है। इस प्रक्रिया को तनुकरण कहते हैं एवं अम्ल या क्षारक तनुकृत होते हैं | जैसे अम्ल दो प्रकार के होते है :
सान्द्र अम्ल : इस विलयन मे आयन की सांद्रता  में प्रति इकाई आयतन मे बहुत ज्यादा होती है और इसका प्रभाव भी बहुत ज्यादा होता है |
तनु  अम्ल : इस विलयन मे आयन की सांद्रता  में प्रति इकाई आयतन मे बहुत कम  होती है और इसका प्रभाव भी बहुत कम होता है |

इस article मे , अम्ल और क्षार की common गुणों को discuss किया है अब आगे के article मे अम्ल और क्षार के और गुणों को discuss करगे |

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