आसियान क्या है | आसियान का पूरा नाम किसे कहते है , देशों के नाम उद्देश्य स्थापना a s e a n full form in hindi

By   October 3, 2020

a s e a n full form in hindi आसियान क्या है | आसियान का पूरा नाम किसे कहते है , देशों के नाम उद्देश्य स्थापना फुल फॉर्म हिंदी में क्या होगी ?

दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ (एशियन)
एशियन बैंकाक उद्घोषणा जिस पर 8 अगस्त 1967 को पाँच राज्यों इंडोनेशिया, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर तथा थाईलैंड – ने हस्ताक्षर किए थे, का नतीजा था। बुनेई 1984 में इसका सदस्य बना तथा हाल में वियतनाम भी इसका सदस्य बन गया है। यद्यपि एशियान प्रधान रूप से वियतनाम युद्ध तथा दक्षिण पूर्व एशिया के गैर साम्यवादी राज्यों पर उसके खतरे के परिणामस्वरूप अस्तित्व में आया था, तथापि अब यह अपने साम्यवादी पूर्वाग्रह से मुक्त हो चुका है क्योंकि यह वियतनाम को साम्यवादी राज्य के रूप में स्वीकार कर चुका है। यूरोपिय संघ की तरह यह भी अनेक देशों को आकर्षित कर रहा है। 20 जुलाई 1996 को हुई इसके विदेश मंत्रियों की बैठक में म्यांमार को पर्यवेक्षक की हैसियत प्रदान की गयी है । आशा की जाती है कि लाओस और कम्बोडिया के साथ – साथ म्यांमार भी इसका शीघ्र ही एशियान का सदस्य बन जायेगा।

लक्ष्य एवं उद्देश्य
एशियान के घोषणा-पत्र में सात लक्ष्यों व उद्देश्यों को सम्मिलित किया गया था। ये है-
1) समृद्ध व शांतिपूर्ण दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र समुदाय के आधार को पुख्ता करने के लिए क्षेत्र ने समानता व सहभागिता की नीयत से तथा साझे प्रयासों के जरिये आर्थिक विकास, सामाजिक उन्नति व सांस्कृतिक विकास को तेज करना।
2) क्षेत्र के देशों के बीच के संबंधों में न्याय और कानून के शासन के प्रति अटूट विश्वास तथा संयुक्त राष्ट्र-घोषणा-पत्र के सिद्धांतों के अनुपालन के आधार पर शांति व स्थायित्व को बढ़ावा देना,
3) आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक, तकनीकी वैज्ञानिक व प्रशासनिक क्षेत्रों में साझे हित के मसलों पर सहभागिता व पारस्परिक सहयोग को बढ़ावा देना,
4) शैक्षिक, पेशागत, तकनीकी और प्रशासनिक क्षेत्रों में प्रशिक्षण एवं शोध सुविधाओं के जरिये एक दूसरे की सहायता करना,
5) कृषि तथा उद्योग के बेहतर इस्तेमाल, उनके व्यापार के विस्तार जिसमें अंतर्राष्ट्रीय वस्तु व्यापार की समस्याओं का अध्ययन भी शमिल है, उनके आवागमन व संचार की सुविधाओं में बेहतरी तथा उनके लोगों के जीवन स्तर को ऊँचा करने के लिए और ज्यादा सक्रिय रूप से साझेदारी करना,
6) दक्षिण पूर्व एशियाई अध्ययना को बढ़ावा देना,
7) समान लक्ष्य व उद्देश्य वाले मौजूदा दूसरे अंतर्राष्ट्रीय व क्षेत्रीय संगठनों के साथ निकटवर्ती व लाभकारी सहयोग कायम करना तथा आपस में सहयोग को बेहतर बनाने के लिए जो भी तरीके उपलब्ध हैं, उनकी खोज करना ।
18.3.2 संस्थाएँ और संरचना
सदस्य राज्यों की सरकार-प्रमुखों का शिखर सम्मेलन एशियान का सर्वोच्च प्राधिकरण है। शिखर की बैठक जरूरत पड़ने पर ही होती है। ऐसी पहली शिखर बैठक 1976 में तथा तीसरी और सबसे हाल की बैठक 1987 में हुई थी। मंत्रीमंडलीय सम्मेलन विदेश मंत्रियों की वार्षिक बैठक है और बारी बारी से प्रत्येक देश में बैठक आयोजित होती है।
दूसरी स्थायी समितियाँ हैंः 1) व्यापार व पर्यटन, 2) उद्योग,खनिज तथा ऊर्जा, 3) आहार, कृषि व वन संपदा, 4) यातायात व संचार, 5) वित्त व बैंकिग,6) विज्ञान व प्रौद्योगिकी, 7) सामाजिक विकास, 8) संस्कृति व सूचना, और 9) बजट ।

अधिकार, कर्तव्य और भूमिका
एशियन सदस्य राज्यों व किसी तीसरी पार्टी के बीच व्यापार, विकास – साहायता, तथा विदेश नीति के कुछ मामलों में संयुक्त मोर्चे का काम करता है ।
एशियान अपनी आंतरिक शक्ति का इजहार अलग-अलग स्थायी समितियों के जरिये करता है। साझे औद्योगिक व तकनीकी परियोजनाओं के बीच समन्वय का काम करना तथा नीतियों, मानकों व विनियमों के बीत संगति सथापित करना, ये ही दो इसके बुनियादी कार्य हैं।
दो क्षेत्रों में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका रही है: 1) क्षेत्र में शांति व स्थायीत्व स्थापित करने की गरज से 1981 में इसने कम्बोडिया के सवाल पर संयुक्त राष्ट्र सम्मेलन का आयोजन किया था ।1977 में पक्षपातपूर्ण व्यापार समझौता (पी टी ए ) का गठन किया जिसका नतीजा यह हुआ कि एशियान का जो अंतः व्यापार । 2) 1977 में 15 प्रतिशत था, वह 1983 में बढ़कर 21 प्रतिशत पर पहुंच गया।