फास्फोरस पेन्टा क्लोराइड (PCl5) Phosphorus penta chloride

Phosphorus penta chloride फास्फोरस पेन्टा क्लोराइड (PCl5) : 

बनाने की विधि :
1. श्वेत फास्फोरस की क्रिया क्लोरीन से करने पर –
P4 + 10Cl2 → 4PCl5
2. फास्फोरस की क्रिया सल्फ्यूरिक क्लोराइड से करने पर –
P4 + 10SO2Cl2 → 4PCl2 + 10SO2
गुण :
1. यह हल्के पिले रंग का ठोस पदार्थ है।
2. जल से क्रिया
PCl + 4H2O → 5HCl + H3PO4
3. धातुओं से क्रिया –
2Ag + PCl5 → 2AgCl + PCl3
Sn + 2PCl5 → SnCl4 + 2PCl3
4. गर्म करने पर यह वियोजित हो जाता है –
PCl5   →(गर्म करने पर)  PCl3 + Cl2
5. एथिल एल्कोहल (C2H5-OH) से क्रिया –
C2H5-OH + PCl5 → C2H5-Cl  + POCl3 + HCl
6. ऐसिटिक अम्ल से क्रिया –
CH3COOH + PCl5 → CH5-COCl + POCl3 + HCl
(PCl5) की संरचना :
1. (PCl5में केंद्रीय परमाणु P का SP3d संकरण होता है।
2. इसकी ज्यामिति त्रिभुजीय द्वी पिरामिडी होती है।
3. इसमें तीन निरक्षीय बंध होते है जबकि दो बंध अक्षीय बन्ध कहलाते है।
4. निरक्षीय बंधो की बन्ध लम्बाई कम तथा अक्षीय बंधो की बन्ध लम्बाई ज़्यादा होती है।
5. अक्षीय बंध निरक्षीय बंधो से अधिक प्रतिकर्षित होते है अतः अक्षीय बन्ध की बंध लम्बाई अधिक होती है।
6. यह संरचना असममित होने के कारण PClको गर्म करने पर यह वियोजित हो जाता है।
7. ठोस अवस्था में यह आयनित होता है क्योंकि ठोस अवस्था में यह PCl4+ (चतुष्फलकीय ) तथा PCl6 (अष्ठफलकीय ) आयनों से मिलकर बना होता है।

फास्फीन (PH3) , फास्फोरस ट्राई क्लोराइड (PCl3) बनाने की विधि , गुण , उपयोग

फास्फीन (PH3) (Phosphine)

बनाने की विधियां :

  1. स्वेत फास्फोरस की क्रिया NaOH के सान्द्र विलयन से करने पर

P4 + 3NaOH + 3H2O → PH3 + 3NaH2PO2

  1. कैल्शियम फास्फाइड की क्रिया HCl या H2Oसे करने पर

Ca2P2 + 6HCl → 3CaCl2 + 2PH3

Ca3P2 + 6H2O → 3Ca(OH)2 + 2PH3

गुण (properties) :

  1. यह रंगहीन सड़ी मछली के समान गंध युक्त अत्यंत विषैली गैस है।
  2. यह CuSO4 तथा मरक्यूरिक क्लोराइड से निम्न प्रकार से क्रिया करती है।

3CuSO + 2PH3 → Cu3P2 + 3H2SO4

3HgCl2 + 2PH3 → Hg3P2 + 6HCl

उपयोग (uses):

इसका उपयोग होम सिग्नल में किया जाता है ,  एक छिद्र युक्त पात्र में कैल्शियम कार्बाइड तथा केल्सियम फास्फाइड लेकर उसे समुद्र में डाल देते हैं ,  यह जल से क्रिया करके गैस बनाते हैं यह ज्वलनशील होती है अर्थार्थ आग को पकड़ लेती है जिससे पानी के जहाज के आगे आने वाले अवरोध के बारे में पता लग जाता है।

संकरण SP3 होता है।

फास्फीन की ज्यामिति पिरामिडी होती है।

फास्फोरस ट्राई क्लोराइड (PCl3) (Phosphorus tri chloride) बनाने की विधि :

  1. श्वेत फास्फोरस की क्रिया क्लोरीन से करने पर

P4 + 3Cl2 → 4PCl3

  1. फास्फोरस की क्रिया थायोनिल क्लोराइड से करने पर

P4 + 8SOCl2  → 4PCl3 + 4SO2 + 2S2Cl2

गुण (properties): 

  1. यह रंगहीन द्रव है।
  2. एथिल एल्कोहल (C2H5-OH) से क्रिया

3C2H5-OH + PH3 → 3C2H5Cl + H3PO3

  1. एसिटिक अम्ल से क्रिया –

3CH3COOH + PCl3 → 3CH3-COCl + H3PO3

  1. जल के साथ क्रिया करके सफ़ेद धुआँ देता है

3H2O + PCl3 → 3HCl + H3PO3

संरचना (structure):

संकरण SP3 होता है।

ज्यामिति पिरामिड होती है।

फास्फोरस (P) के अपरूप Phosphorus in hindi

Phosphorus in hindi फास्फोरस (P) के अपरूप :

यह निम्न है

श्वेत फास्फोरस (White phosphorus):

  • यह श्वेत पारभासी मोम के समान ठोस पदार्थ है
  • इसमें लहसुन जैसी गंध आती है
  • इसे चाकू से आसानी से काटा जा सकता है
  • यह अंधेरे में चमकता है क्योंकि वायु में इसका ऑक्सीकरण हो जाता है ,  ऑक्सीकरण से प्राप्त ऊर्जा ऊष्मा के रूप में  न होकर प्रकाश के रूप में होती है ,  इस गुण को स्फुरदीप्ति का गुण भी कहते हैं
  • वायु की उपस्थिति में यह  श्वेत  धूआ बनाता है
  • इसका अणुसूत्र P4 होता है इसमें फास्फोरस के परमाणु चतुष्फलकीय के रूप में व्यवस्थित रहते हैं

नोट :  श्वेत फास्फोरस में प्रत्येक P का SP3 संकरण होता है,  जिससे बंध कोण 109’28 मिनट का होना चाहिए परंतु P4  मैं बंध कोण केवल 60 डिग्री का होता है जिससे  कोणीय तनाव अधिक होने के कारण क्रियाशीलता अधिक हो जाती है अतः श्वेत फास्फोरस क्रियाशील है |

  • श्वेत फास्फोरस  की क्रिया सांद्र NaOH के बिलियन से करने पर विषैली गैस फास्फीन बनती है
  • यह जल में विलय परंतु कार्बन डाई सल्फाइड में विलय होता है

लाल फास्फोरस (Red phosphorus):

  • यह लोहे के समान  धूसर रंग का होता है
  • श्वेत फास्फोरस को 573k  अक्रिय वातावरण मैं कई दिनों तक गर्म करने पर लाल फास्फोरस प्राप्त होता है
  • यह जलवे CS2 दोनों में    अविलय होता है
  • यह श्वेत फास्फोरस से अधिक स्थाई होता है
  • इसमें P4   की चतुष्फलकीय की इकाइयां श्रंखला के रूप में होती है

काला फास्फोरस (Black phosphorus):

इसके दो अपरूप ज्ञात है

  1. अल्फा –  काला फास्फोरस
  2. Beta –  काला फास्फोरस

इन्हें निम्न प्रकार से बनाया जाता है

लाल फास्फोरस को 803kपर गर्म करने पर  एल्फा- काला फास्फोरस बनता है

श्वेत फास्फोरस को उच्च दाब और बंद नली में 473k पर गर्म करने पर  Beta- काला फास्फोरस बनता है

काला फास्फोरस परतों के रूप में होता है यह रूप सबसे स्थाई होता है

 

HNO3 नाइट्रिक अम्ल क्रियाएं तथा गुण परिक्षण Nitric acid reactions and properties test

Nitric acid reactions and properties test (HNO3 नाइट्रिक अम्ल क्रियाएं तथा गुण परिक्षण) नोट : Note : N2Oमें N की संयोजकता चार होती है।

प्रश्न 1: द्विवयीकृत हो जाता है क्यों ?

उत्तर : 2NO → N2O4

NOमें विषम संख्या में इलेक्ट्रॉन होते है यह अधिक स्थायित्व प्राप्त करने के लिए द्वित्यकृत हो जाता है द्विवयीकृत अणु (N2O4) में सम संख्या इलेक्ट्रॉन होते है।

नाइट्रोजन के ऑक्सी अम्ल :

ये निम्न है।

1.    H2N2O2    हाइपो नाइट्रस अम्ल

2.    HNOनाइट्रस अम्ल

 3.    HNOनाइट्रिक अम्ल

    HNOनाइट्रिक अम्ल : 

(1) प्रयोगशाला विधि :
NaNO3 + H2SO4   NaHSO4 + HNO3
(2) औद्योगिक विधि या वर्क लैण्ड आइड विधि :

4NH3 + 5O2 4NO + 6H2O
2NO + O2 2NO2

3NO2 + H2 2HNO3 + NO
प्राप्त HNO3 का आसवन करने पर 68% HNOबनता है , सान्द्र H2SOद्वारा इसका निर्जलीकरण करने पर 98% HNO3 बनता है। 
रासायनिक गुण : 
(A) अधातुओं से क्रिया :
1. कार्बन (C) से क्रिया करने पर कार्बन डाई ऑक्साइड (CO2) बनती है 
C + 4HNO3 CO2 + 2H2O + 4NO2
2 . यह सल्फर (s) से क्रिया करके H2SOबनाती है 

S + 6HNO3 6NO2 + 2H2O + H2SO4
Or

S8 + 48HNO3 48NO + 16H2O + 8H2SO4
3. यह फॉस्फोरस (P) को फॉस्फेरिक अम्ल (H3PO4) में ऑक्सीकृत कर देता है। 
P4 +  20 HNO3   4H3PO4 + 4H2O + 20NO2
4. यह I2 को आयोडिक अम्ल (HIO3) में ऑक्सीकृत कर देता है 
I2 + 10HNO3 10NO2 + 4H2O + 2HIO3
(B) धातुओं से क्रिया :
1. कॉपर से क्रिया 

3Cu + 8HNO3 3Cu(NO3)2 + 4H2O + 2NO

Cu + 4HNO3 Cu(NO3)2 + 2NO2 + 2H2O
2. Zn  से क्रिया  

4Zn + 10HNO3 4Zn(NO3)2 + 5H2O + N2O

Zn + 4HNO3 Zn (NO3)2
नोट : Cr तथा Al , NO3 में निष्क्रिय हो जाते है क्योंकि इन धातुओं की सतह पर ऑक्साइड की निष्क्रिय पतली परत बन जाती है। 
HNOके उपयोग :
1. उर्वरक बनाने में  (NH3 + NO3)
2. नाइट्रो ग्लिसरीन , ट्राई नाइट्रो टॉलूइन (TNT) विस्फोट पदार्थ बनाने में। 
नाइट्रेट का परिक्षण या छल्ला परिक्षण या वलय परिक्षण या ring test :
मिश्रण के जलीय विलयन में FeSO4 का ताजा विलयन डालते है , परखनली की दिवार के सहारे सहारे सांद्र H2SO4 डालते है , जिससे भूरे रंग का झल्ला बनता है। 

NO3 + 3Fe2+ + 4H+   3Fe3+ + NO + 2H2O

[Fe(H2O)6]2+ + NO  [Fe(H2O)5(NO)]2+ + H2O

नाइट्रोजन (N2) , (NH3)अमोनिया बनाने की विधि व गुण Nitrogen and Ammonia properties

नाइट्रोजन (N2) (Nitrogen)

बनाने की विधि : गुण

प्रयोगशाला विधि :

  1.      NaNO2 + NH4Cl → NaCl + N2 + 2H2O
  2.     2NaN3→ 2Na + 3N2
  3. Ca(N3)2 → Ca + 2N2
  1. अमोनियम डाइक्रोमेट को गर्म करने पर

(NH4)2Cr2O7 → N2 + 4H2O + Cr2O3

गुण :

  1. यह रंगहीन , गंधहीन,  स्वादहीन अक्रिय गैस है
  2. Oसे क्रिया

N2  + O2 → 2NO

  1. N2+ 3H2 → 2NH3

4 . धातुओं से क्रिया करके यह नाइट्राइड बनाती है

6Li + N2 → 2Li3N

3Mg + N2 → Mg3N2

नोट : नाइट्रोजन का उपयोग क्रायो सर्जरी में किया जाता है।

(NH3)अमोनिया (Ammonia) :

 बनाने की विधियां (Methods to make)

  1. प्रयोगशाला विधि (Laboratory method)

2NH4Cl + Ca(OH)→ CaCl2 + 2H2O + 2NH3

  1. औद्योगिक विधि – इसे हैबर विधि द्वारा बनाया जाता है

N2 + 3H2 → 2NH3

अमोनिया की अधिक मात्रा प्राप्त करने के लिए आवश्यक शर्तें निम्न है

  1. इस क्रिया के लिए दाब अधिक होना चाहिए (200 atm)
  2. इस क्रिया में ताप कम होना चाहिए अर्थार्थ न्यूनतम ताप 750k
  3. लोह चूर्ण उत्प्रेरक का कार्य करता है इसमें K2O तथा Al2Oमिलाने से उत्प्रेरक की क्रियाशीलता बढ़ जाती है |

गुण (properties):

  1. यह रंगहीन तीक्ष्ण गंध युक्त गैस है
  2. किसका जलीय विलयन क्षारीय प्रकृति का होता है

NH3 + HOH → NH4OH

  1. यह फेरिक क्लोराइड व ZnSO4से क्रिया करके क्रमशः फेरिक हाइड्रोक्साइड व जिंक हाइड्रोक्साइड के अवक्षेप बनाती है।

FeCl + 3NH4OH → Fe(OH)3 + 3NH4Cl

ZnSO4 + 2NH4OH → Zn(OH)2 + (NH4)2SO4

  1. यह कॉपर आयन के विलयन से क्रिया करके नीले कलर का संकुल यौगिक बनाती है

Cu2+ + 4NH3 → [Cu(NH3)4]2+

5 . यह AgCl के श्वेत अवक्षेप को विलेय कर लेती है

AgCl + 2NH3 → [Ag(NH3)2]Cl

हाइड्रोजन के प्रति क्रियाशीलता Hydrogen Perfection in hindi

Hydrogen Perfection हाइड्रोजन के प्रति क्रियाशीलता :

यह सभी तत्व हाइड्रोजन से क्रिया करके EH3 प्रकार के यौगिक बनाते हैं |

NH3 अमोनिया
PH3  फास्फीन
AsH3  आर्सीन
SbH3 स्टीबीन
BiH3 बिस्मथिन   
  1. NH3 के अतिरिक्त सभी गैस विषैली होती हैं
  2. E-H की बंध लंबाई बढ़ने पर बंद सुगमता ( आसानी) से टूटता है जिससे हाइड्रोजन त्यागने की प्रवृति बढ़ती है अर्थार्थ अपचायक गुण बढ़ जाते हैं अतः 15 वर्ग के हाइड्राइड के अपचायक गुणों का बढ़ता क्रम

BiH3 < SbH3 < AsH3 < PH3 < NH3

  1. E-H की बंध की बंध लंबाई कितनी कम होती है तापीय स्थायित्व अधिक होता है अतः तापीय स्थायित्व का बढ़ता क्रम |

BiH3 < SbH3 < AsH3 < PH3 < NH3

  1. प्रत्येक  योगिक संकरण SP3 होता है इसकी आकृति पिरामिड होती है |
  2. अमोनिया में अन्तराणुक हाइड्रोजन बंध पाए जाते हैं अतः अमोनिया का क्वथनांक अधिक होता है जबकि PH3 मैं दुर्बल वांडरवाल बल अधिक होते हैं अतः PH3 का क्वथनांक कम होता है |

प्रश्न 1 : NH3 प्रबल क्षार है क्यों ? (Why is strong acid ?)

उत्तर : N पर इलेक्ट्रॉन का घनत्व अधिक होने के कारण यह आसानी से लोन पेअर ऑफ़ इलेक्ट्रॉन्स त्यागते हैं अतः यह प्रबल क्षार है |

 

कुछ प्रश्न उत्तर N2 गैस है जबकि अन्य तत्व ठोस अवस्था में होते हैं क्यों ?

प्रश्न 1 : N2 गैस है जबकि अन्य तत्व ठोस अवस्था में होते हैं क्यों ?

उत्तर : N का आकार छोटा होने के कारण यह दूसरे नाइट्रोजन परमाणु से pπ -pπ बंध बना लेता है अर्थार्थ नाइट्रोजन के परमाणुओं के मध्य तीन बंद पाए जाते हैं ,N2 के  अणुओं के मध्य दुर्बल वांडरवाल बल होता है अतः N2 गैस है |

फास्फोरस का परमाणु आकार बड़ा होता है यह pπ -pπ बंध नहीं बना सकता परंतु प्रत्येक फास्फोरस 3 फास्फोरस के परमाणु से एकल बंध द्वारा जुड़ा रहता है जिससे P4 का निर्माण होता है ,  अनुभव अधिक होने के कारण वांडरवाल बल अधिक होते हैं अतः फास्फोरस होता है |

प्रश्न 2 :  N2 अक्रिय गैस है जबकि फास्फोरस क्रियाशील होता है क्यों ?

उत्तर : N2 कि बंध वियोजन ऊर्जा बहुत अधिक होती है अतः  N2 अक्रिय गैस है

फास्फोरस में प्रत्येक p  का SP3  संकरण होता है इसमें बंध कोण 109’28 मिनट का होना चाहिए परंतु यह मात्र 60’ का होता है जिससे अणु में अत्यधिक तनाव उत्पन्न होता है अतः फास्फोरस अधिक क्रियाशील है |

प्रश्न 3 : R3P=O का अस्तित्व है जबकि R3N=Oका अस्तित्व नहीं होता है क्यों ?

उत्तर :  P मैं खाली d कक्षक होने के कारण यह है अपनी संयोजकता पांच कर सकता है अतः R3P=O का अस्तित्व है  ,  जबकि N मैं खाली d कक्षक नहीं होते हैं अतः यह अपनी संयोजकता 5:00 नहीं कर सकता इसलिए R3N=Oका अस्तित्व नहीं होता है |

 

15 वर्ग के तत्वों के गुण क्या क्या होते है properties of elements of 15 block

What are the properties of elements of 15 classes 15 वर्ग के तत्वों के गुण क्या क्या होते है

पी ब्लॉक एलिमेंट्स :

  1. वह तत्व जिनमें आखरी इलेक्ट्रॉन p कक्षक में पाया जाता है उन्हें p खंड के तत्व कहते हैं
  2. यह आवर्त सारणी के 13 से लेकर 18 तक के वर्ग में आते हैं
  3. इस खंड में धातु- अधातु व उपधातु आती है
  4. इनका बाह्य इलेक्ट्रॉनिक विन्यास ns2 np1-6 तक होता है

प्रश्न :    फ्लोरीन की तुलना में क्लोरीन की इलेक्ट्रॉन लब्धि एंथैल्पी कम है लेकिन फ्लोरीन क्लोरीन से प्रबल ऑक्सीकारक है

उत्तर : 1.  क्लोरीन की बंध वियोजन एंथैल्पी का मान फ्लोरीन से कम होता है

  1.  F की जलयोजन एंथैल्पी का मान अधिक होता है

 15 वें वर्ग के तत्व  :

  1. इलेक्ट्रॉनिक विन्यास (Electronic configuration)
परमाणु क्रमांक  प्रतीक  इलेक्ट्रॉनिक विन्यास
7 N [He] 2s2 2p3
15 P [Ne] 3s2 3p3
33 As [Ar] 3d10 4s2 4p3
51 Sb [Kr] 4d10 5s2 5p3
83 Bi [Xe] 4f14 5d10 6s2 6p3

 

  1.  परमाणु आकार (Atomic size):

वर्ग में ऊपर से नीचे जाने पर कोशों की संख्या बढ़ती जाती है बाह्य इलेक्ट्रॉन की आख़िरी इलेक्ट्रॉन से दूरी अर्थार्थ नाभिक से दूरी बढ़ती जाती है अतः परमाणु आकार बढ़ता जाता है

  1. आयनन एंथैल्पी (Ionan anthology):

बाह्यतम कक्षा से इलेक्ट्रॉन को बाहर निकालने के लिए आवश्यक ऊर्जा को आयनन एंथैल्पी कहती है ,  आकार बढ़ने के साथ-साथ आयनन एंथैल्पी कम होती जाती है

नोट :  इनकी आयनन एंथैल्पी 14 वर्ग के तत्वों से अधिक होती है

  1.  विद्युत ऋणता (Electricity loan)

बंद के इलेक्ट्रॉनों को अपनी ओर आकर्षित करने के गुण को विद्युत ऋणता कहते हैं , परमाणु का आकार बढ़ने पर विद्युत ऋणता कम होती है

  1.  भौतिक गुण (physical properties):
  • इस समूह में नाइट्रोजन गैस है जबकि अन्य सदस्य  ठोस हैं
  • नाइट्रोजन  द्वि परमाणु गैस है
  • N  व P अधातु , As  व Sb उपधातु , Bi  धातु
  • N  से लेकर As तक गलनाक बढ़ता है इसके बाद गलनांक कम होता जाता है
  1.  ऑक्सीकरण अवस्था (oxidation state):
  • इन तत्वों की ऑक्सीकरण अवस्था +5 +4 +3 +2 +1 0 -1 -2 -3 होती है
  • इनमें से +5 , +3 , -3  अधिक सामान्य ऑक्सीकरण अवस्थाएं हैं
  • नाइट्रोजन में खाली d कक्षक नहीं होते हैं अतः NF5 नहीं बनता जबकि p मैं खाली 3d कक्षक होने के कारण PF5 का निर्माण होता है
  • नाइट्रोजन की अधिकतम संयोजकता 4 होती है जबकि अन्य तत्वों की संयोजकता 5होती है
  • Bi की ऑक्सीकरण अवस्था अधिक स्थाई होती है ( अक्रिय युग्म प्रभाव के कारण)

उपसहसंयोजक यौगिक (Coordination Compounds) notes in hindi

12th class chemistry hindi notes उपसहसंयोजक यौगिक (Coordination Compounds)

द्विकलवण , संकुल या उपसहसंयोजक यौगिक , Ligand definition लिगेंड का वर्गीकरण

 

कीलेट  लिगेंड ,समन्वय मंडल , उपसहसंयोजन संख्या , होमोलेप्टिक , हेट्रो लेप्टिक संकुल

 

उपसहसंयोजक यौगिकों का नामकरण Naming Sub-coordinator compounds

 

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समावयवता की परिभाषा क्या है , प्रकार , वर्गीकरण

 

वेर्नेर सिद्धांत , संयोजकता बंध सिद्धांत (Connective bond theory) , (werner theory)

 

Valence bond theory (VBT) की कमियां drawbacks in hindi

 

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धातु कार्बोनिल यौगिकों में बंधन Bonding between metal carbonyl compounds

 

उपसहसंयोजक यौगिकों के गुण तथा उपयोग , स्थायित्व Properties and Uses

 

Coordination compounds – Introduction, ligands, coordination number in hindi, colour, magnetic properties and shapes, IUPAC nomenclature of mononuclear coordination compounds hindi me. Bonding, Werner’s theory, VBT, and CFT hindi; structure and stereo isomerism, importance of coordination compounds (in qualitative inclusion, extraction of metals and biological system) hindi language.

उपसहसंयोजक यौगिकों के गुण तथा उपयोग , स्थायित्व Properties and Uses

Properties and Use of Sub-Covalent Compounds उपसहसंयोजक यौगिकों के गुण तथा उपयोग :

  1. औषधि के रूप में (As medicine) :
  1. सिस –  प्लेटिनम का उपयोग ट्यूमर के निदान में किया जाता है
  2. शरीर में कॉपर की अधिकता को कम करने के लिए d- पेनिसिल एमीन से क्रिया की जाती है
  3. लेड ( शीशा) के विषैले पन को दूर करने के लिए EDTA काम में लिया जाता है
  4. शरीर में आयरन की अधिकता को कम करने के लिए डेसफेरीऑक्सिम -B काम में लिया जाता है

(b)  जैव प्रणाली में (In bio system):

  1. पेड़ पौधों में उपस्थित क्लोरोफिल Mg2+आयन का संकुल यौगिक है जो प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में सहायक है
  2. रक्त में उपस्थित हीमोग्लोबिन Fe2+आयन का संकुल यौगिक है जो शरीर में ऑक्सीजन की पूर्ति करता है
  3. विटामिन B-12 में सायनो कोबालेमिनपाया जाता है जो Ca2+आयन का संकुल यौगिक है यह प्रति प्रणाली अरक्तता कारक है

(c) उद्योगों में (In the industries):

  1. विलकिंसन उत्प्रेरक का IUPAC नाम क्लोरीडो ट्रिस -(टाई फेनिल फास्फीन ) रोहड़ियम (I) यह एल्कीन का  हाइड्रोजनीकरण करता है
  2. धातुओं की सतह पर Ag अथवा Au की परत चढ़ाने के लिए निम्न संकुल आयन काम में लेते हैं [Ag(CN)2]  , [Au(CN)2]
  3. फोटोग्राफी में फिल्म ( नेगेटिव) पर AgBr के क न लगे रहते हैं इस फिल्म को हाइपो के विलियन में डुबो देते हैं जिससे AgBr के कण हट जाते हैं
  4. धातु निष्कर्षण में अशुद्ध निकल का शोधन  मांड विधि से करते हैं
  5. Ag  या Au का निष्कर्षण निक्षालन विधि से किया जाता है

(d)  गुणात्मक विश्लेषण में (In qualitative analysis):

  1. Ni2+ आयन डाई मेथिल    गलाई  ऑक्सीन (DMG) से क्रिया करके संकुल यौगिक का निर्माण करते हैं जिससे Ni2+ आयन की पहचान की जाती है
  2. कठोर जल में उपस्थित Cl2+आयन  वह मैग्नीशियम आयन की पहचान EDTA द्वारा की जाती है

उपसहसंयोजक यौगिकों का स्थायित्व (Stability of Sub-connector compounds):

धातू व लिगेंड के मध्य जितना प्रबल बंद बनता है उपसहसंयोजक यौगिक का स्थायित्व उतना ही अधिक होता है इनके स्थायित्व को स्थायित्व स्थिरांक द्वारा व्यक्त करते हैं

यह दो प्रकार का होता है

  1. पदश: स्थायित्व स्थिरांक
  2. समग्र स्थायित्व स्थिरांक