zero law of thermodynamics in hindi definition formula ऊष्मागतिकी का शून्य नियम किस अवधारणा को आगे बढ़ता है

ऊष्मागतिकी का शून्य नियम किस अवधारणा को आगे बढ़ता है शून्य कोटि सिद्धांत किसे कहते हैं zero law of thermodynamics in hindi definition formula ?

रुद्धोष्म अनुत्क्रमणीय प्रक्रम में प्रसार कार्य (Expansions Adiabatic in Irreversble Process)– जैसा कि पूर्व में बताया जा चुका है, अनुत्क्रमणीय प्रसार में या तो गैस के दाब में अचानक कमी कर दी जाती है या फिर गैस को एक स्थिर दाब के विरूद्ध प्रसारित होने दिया जाता है। माना कि एक गैस का प्रारम्भिक दाब P है। अब इस गैस को एक स्थिर दाब P2 के विरूद्ध प्रसा होने दिया जाता है। यदि गैस द्वारा किया कार्य w हो तो

यहाँ V1तथा V2 क्रमशः प्रारम्भिक व अन्तिम आयतन है।

समीकरण (87) का उपयोग प्रसार के बाद अन्तिम ताप ज्ञात करने के लिये किया जाता है। प्रसार कार्य का मान ज्ञात करने के लिये समीकरण ( 87 ) से T2 का मान समीकरण (82) में रखने

ऊष्मागतिकी का शून्य नियम (Zeroth law of Thermodynamics)

ऊष्मागतिकी का शून्य नियम ताप (Temperature) की अवधारणा को समझाता है। इसके अनुसार “यदि दो वस्तुयें तापीय साम्य में होती हैं तो उनमें ऊष्णता की मात्रा (degree of hotness) समान होती है। ऊष्णता की मात्रा को ही ताप कहा जाता है।”

थर्मामीटर के उपयोग के सिद्धान्त को समझने के लिये शून्य नियम को निम्न प्रकार से परिभाषित किया जा सकता है। यदि कोई वस्तु A, वस्तु C के साथ तापीय साम्य में है तथा दूसरी कोई वस्तु B भी वस्तु C के साथ तापीय साम्य में है तो वस्तु A तथा वस्तु B भी तापीय साम्य में होगी ।

माना कि वस्तु C एक थर्मामीटर है। थर्मामीटर को जब वस्तु A के साथ रखा जाता है तो वे दोनों तापीय साम्य में आ जाते हैं। इस अवस्था में थर्मामीटर के पारे का तल नोट कर लेते हैं। अब थर्मामीटर (वस्तु C) को B के साथ रखा जाता है जब तापीय साम्य स्थापित हो जाता है तो थर्मामीटर के पारे का तल नोट कर लेते हैं। थर्मामीटर के दोनों तलों की स्थिति से वस्तु A तथा वस्तु B की ऊष्णता की मात्रा (ताप) की तुलना की जा सकती है।

ऊष्मा रसायन (Thermo chemistry)

जब कभी दो या दो से अधिक पदार्थ आपस में संयोग करते हैं तो या तो ऊष्मा अवशोषित होती है या उत्सर्जित होती है। अर्थात् लगभग सभी रासायनिक अभिक्रियाओं एवं भौतिक परिवर्तनों में ऊर्जा का परिवर्तन होता है। उदाहरणार्थ – यदि किसी क्षार में अम्ल मिलाया जाये तो विलयन गर्म हो जाता है चूंकि ऊष्मा ऊर्जा के रूप में निकलती है। अतः रासायनिक परिवर्तन में ऊर्जा परिवर्तन होते हैं। वे अभिक्रियाऐं जिनमें ऊष्मा मुक्त होती हैं, ऊष्माक्षेपी (Endothermic) अभिक्रियाऐं कहलाती है तथा जिन अभिक्रियाओं में ऊष्मा अवशोषित होती है, ऊष्माशोषी (Endothermic ) अभिक्रियाऐं कहलाती हैं।

भौतिक रसायन की जिस शाखा के अन्तर्गत रासायनिक अभिक्रियाओं में होने वाले ऊष्मा परिवर्तन का अध्ययन किया जाता है। उसे ऊष्मा रसायन (Thermo chemistry) कहते हैं।

ऊष्मा के अवशोषण अथवा उत्सर्जन से अभिकारकों एवं उत्पादों की आन्तरिक ऊर्जा (E) अथवा एन्थैल्पी (पूर्ण ऊष्मा H) में क्रमशः वृद्धि या कमी होती है। यदि अभिक्रिया स्थिर दाब पर संपन्न होती है तो एन्थैल्पी (H) का उपयोग करते हैं, और यदि अभिक्रिया स्थिर आयतन पर होती है तो आन्तरिक ऊर्जा (E) का उपयोग करते हैं। चूंकि सामान्यतः रासायनिक अभिक्रियाऐं खुले पात्रों में की जाती है। अतः ये स्थिर वायुमण्डलीय दाब पर ही उत्पन्न होती है। अतः ऊष्मा परिवर्तनों के लिए एैन्यैल्पी (H) का प्रयोग अधिक उपयुक्त है।

माना कि एक सामान्य अभिक्रिया

n1 A+ n2B – m1C +m 2D

स्थिर दाब पर हो रही है। HA, HB, HC तथा HD क्रमश: A, B, C, तथा D की पूर्ण ऊष्माऐं (एन्यैल्पी)

अतः अभिकारकों की पूर्ण ऊष्मा = n1HA + n2HB

तथा उत्पादों की पूर्ण ऊष्मा = m1HC + m2HD

अभिकारकों के उत्पादों में बदलने की प्रक्रिया (अर्थात् रासायनिक अभिक्रिया) में- पूर्ण ऊष्मा परिवर्तन = उत्पादों की पूर्ण ऊष्मा – अभिकारकों की पूर्ण ऊष्मा

अर्थात् अभिक्रिया होने पर ऊष्मा का अवशोषण होता है, अतः H का मान धनात्मक होगा। इस प्रकार ऊष्माशोषी अभिक्रियाओं में H का मान धनात्मक (+ve) होता है।

अर्थात् अभिक्रिया होने पर ऊष्मा मुक्त होती है। अतः H का मान ऋणात्मक होगा। इस प्रकार ऊष्माक्षेपी अभिक्रियाओं में H का मान ऋणात्मक (-ve) होता है। चित्रानुसार इसको निम्न प्रकार प्रदर्शित किया जाता है

अर्थात् अभिक्रिया होने पर न तो ऊष्मा अवशोषित होती है और न ही मुक्त होती हैं। अतः H का मान शून्य होगा। इस प्रकार अभिक्रियाऐं ऊष्मा उदासीन या ताप निरपेक्ष ( Thermoneutral) अभिक्रियाऐं कहलाती हैं।

 ऊष्मा रासायनिक समीकरण (Thermo Chemical Equations )

वह रासायनिक समीकरण जिसमें अभिकारक एवं उत्पाद के अतिरिक्त उस में होने वाली आन्तरिक ऊर्जा परिवर्तन (E) अथवा पूर्ण ऊष्मा परिवर्तन (H) की सूचना भी हो। ऊष्मा रासायनिक समीकरण (Thermochemical Equation) कहलाती है। ऊष्मा परिवर्तन को कैलोरी, किलो- कैलोरी, जूल (J) अथवा किलो जूल (kJ) में व्यक्त करते हैं। उदाहरण के लिये-

प्रथम अभिक्रिया के अनुसार जब एक मोल HCl का जलीय विलयन एक मोल NH3 के जलीय विलयन से क्रिया करता है तो एक मोल NH4 CI का जलीय विलयन बनता है, तथा मुक्त होने वाली ऊष्मा का मान 51.42 कि. जूल है।

दूसरी अभिक्रिया के अनुसार, स्थिर दाब पर एक मोल गैसीय CH4 दो मोल O2 गैस से क्रिया करती है तो एक मोल CO2 गैस तथा दो मोल H2O द्रव बनते हैं, तथा मुक्त हुई ऊष्मा 891 कि. जूल है।

इसी प्रकार इस समीकरण को ऊष्मीय (Thermally ) रूप से संतुलित करके भी लिख सकते हैं। चूंकि यह अभिक्रिया ऊष्माक्षेपी (exothermic ) हैं अतः पारिपाश्विक को 891.0 कि. जूल ऊष्मा देगी। अर्थात् उत्पादों की एैन्थैल्पी अभिकारकों की ऐन्थेल्पी से 891.0 कि जूल कम होगी। यदि ऊष्मा की इस मात्रा को उत्पादों की तरफ जोड़े तो ऊष्मीय संतुलित समीकरण प्राप्त होगी-

CH4 (g) +2O2 (g) → CO2 (g) +2H2O (I) + 891.0 कि. जूल

ऊष्माशोषी अभिक्रियाओं को भी E व H को चिन्ह बदलकर निम्नानुसार लिख सकते हैं-

N2 (8) +O2 (g) → 2NO (g) – 180 कि. जूल

ऊष्मा रासायनिक अभिक्रिया में अभिक्रिया ऊष्मा अभिकारकों तथा उत्पादों की भौतिक स्थिति पर निर्भर करती है। ऊष्मा रासायनिक समीकरण में ठोस या क्रिस्टल, द्रव तथा गैसीय अवस्था को रासायनिक प्रतीकों के आगे क्रमशः s या c / तथा g लिखकर व्यक्त करते हैं। यदि कोई पदार्थ जलीय विलयन में उपस्थित होता है तो उसके प्रतीक के आगे aq लिखा जाता है। उदाहरणार्थ कुछ ऊष्मा रासायनिक समीकरण निम्न प्रकार लिख सकते हैं-

यदि पदार्थ का कोई विशेष अपररूप (Allotropic form) लिया गया हो तो वह भी निर्दिष्ट होना चाहिए। उदाहरणार्थ-

अभिक्रिया ऊष्मा, दाब तथा ताप पर भी निर्भर करती है। दाब सामान्यतः एक वायुमण्डलीय ही होता है जिसे मूर्धांक (Superscipt) द्वारा निर्दिष्ट करते हैं तथा ताप को परम ताप में पदांक (subscirpt) के रूप में रखकर निर्दिष्ट करते हैं-

उदाहरणार्थ-

समीकरण बताती है कि 1 मोल गैसीय हाइड्रोजन तथा आधा मोल गैसीय ऑक्सीजन 323K या 50° से. एवं 1 वायुमण्डलीय दाब पर परस्पर मिलकर एक मोल H2O द्रव बनाते हैं तथा 284.8 कि. जूल ऊष्मा मुक्त करते हैं। यह एक पूर्ण ऊष्मा रासायनिक समीकरण है।

 अभिक्रिया ऊष्मा (Heat of Reation)

निश्चित ताप व दाब पर रासायनिक समीकरण द्वारा दर्शाये गये अभिकारकों के मोल, उसी ताप व दाब पर उत्पादों के मोल में पूर्णतया अभिकृत होने पर पूर्ण ऊष्मा परितर्वन (Change in enthalpy) या प्राप्त उत्पादों तथा अभिकारकों की एन्थैल्पी में अन्तर अभिक्रिया ऊष्मा कहलाती है।

यदि अभिक्रिया स्थिर दाब पर होती है तो अभिक्रिया ऊष्मा H द्वारा तथा अभिक्रिया स्थिर आयतन पर होती है तो अभिक्रिया ऊष्मा E द्वारा व्यक्त की जाती है।

उदाहरण के लिये-

प्रथम अभिक्रिया में, स्थिर दाब पर एक मोल H2 (g) तथा एक मोल Cl2 (g) आपस में क्रिया करके दो मोल HCI (g) बनाती है। इस अभिक्रिया में 184.1 कि. जूल ऊष्मा मुक्त होती है। दूसरी अभिक्रिया में एक मोल C (s) एक मोल O2 (8) से स्थिर आयतन पर क्रिया करके एक मोल CO2 (g) बनाती है तथा इस अभिक्रिया में 393.5 कि. जूल ऊष्मा मुक्त होती है।

मानक अभिक्रिया ऊष्मा (Standard Heat of Reaction) H298

एक वायुमण्डल दाब तथा 25°C (298K) मानक अवस्था (Standard state) मानी गई है। यदि अभिक्रिया मानक अवस्था में होती है तो पूर्ण ऊष्मा परिवर्तन मानक अभिक्रिया ऊष्मा कहलाती है। यह पूर्ण ऊष्मा परिवर्तन H” द्वारा व्यक्त की जाती है।

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