यौगिक की परिभाषा क्या है ? यौगिक किसे कहते है , उदाहरण। compound meaning in hindi definition

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(compound meaning in hindi definition) यौगिक की परिभाषा क्या है ? यौगिक किसे कहते है , उदाहरण ?

प्रश्न 25 : यौगिक की परिभाषा लिखकर एक उदाहरण दीजिये।

उत्तर : जब दो या दो से अधिक तत्वों को एक निश्चित अनुपात में रासायनिक संयोजित किया जाता है तो इस प्रकार बने नए पदार्थ को यौगिक कहते है। यौगिक के गुण , संयोजित तत्वों के गुणों से बिल्कुल अलग होते है।
उदाहरण : जल , एक यौगिक है जो हाइड्रोजन और ऑक्सीजन तत्वों से मिलकर बनता है।
या
दो या दो से अधिक तत्व या पदार्थ जब एक निश्चित भार के अनुपात में रासायनिक क्रिया करके या रासायनिक बन्धो द्वारा जुड़कर एक नए पदार्थ का निर्माण करते है तो इस प्रकार बने इस नए पदार्थ को यौगिक कहा जाता है। उदाहरण : गंधक का अम्ल , साधारण नमक आदि यौगिक के उदाहरण है।
या
दो या दो से अधिक तत्व आपस में संयोग करके एक नए पदार्थ का निर्माण करते है जिसे यौगिक कहते है , इस प्रकार दो तत्वों के संयोग जो जो पदार्थ बनता है अर्थात यौगिक बनता है वह पदार्थ या यौगिक स्थायी अवस्था में पाया जाता है , लेकिन इस यौगिक के गुण , इसके तत्वों के गुणों से भिन्न पाए जाते है।
वह पदार्थ जो दो या दो से अधिक प्रकार के परमाणुओं से या तत्वों से एक निश्चित अनुपात में मिलकर बनता है उसे यौगिक या रासायनिक यौगिक कहते है , यौगिक का निर्माण तभी होता है जब ये तत्व एक निश्चित अनुपात में रासायनिक बन्धो या रासायनिक क्रिया द्वारा जुड़े हुए रहते है। जब किसी यौगिक का सूत्र लिखा जाता है तो इसमें इन तत्वों के अनुपात को भी प्रदर्शित किया जाता है , जैसे जल एक यौगिक का निर्माण है जो हाइड्रोजन और ऑक्सीजन तत्वों के संयोग से बनता है।
जल के निर्माण के लिए ऑक्सीजन हाइड्रोजन के दो परमाणु , ऑक्सीजन के एक परमाणु के साथ बंध द्वारा जुड़े रहते है अर्थात जल के एक अणु के निर्माण में हाइड्रोजन परमाणु के दो परमाणु और ऑक्सीजन का एक परमाणु संयोग करता है इसलिए जल के रासायनिक सूत्र को H2O द्वारा प्रदर्शित किया जाता है।
प्रत्येक यौगिक की एक अद्वितीय संरचना होती है , क्यूंकि प्रत्येक प्रकार के यौगिक में परमाणु एक निश्चित व्यवस्था में बन्धो में व्यवस्थित रहते है जिससे एक अद्वितीय संरचना का निर्माण करते है।

यौगिक :

 तत्व आपस में निश्चित अनुपात में मिलकर यौगिक का निर्माण करते हैं। दूसरे शब्दों में कहा जाय तो भिन्न-भिन्न प्रकार के परमाणुओं के एक निश्चित अनुपात में संयोजन से बने शुद्ध पदार्थ को यौगिक कहते हैंय जैसे- पानी, हाइड्रोजन और आक्सीजन के 2 रू 1 के अनुपात में मिलने से बनता है। यौगिक दो प्रकार के होते हैं –

(1)  कार्बनिक यौगिक रू कार्बन, हाइड्रोजन के व्युत्पन्न इस श्रेणी में आते हैं।

(2)  अकार्बनिक यौगिक रू हाइड्रोकार्बन को छोड़कर शेष सभी यौगिक इसके अन्तर्गत आते हैं।

मिश्रण एवं मिश्र धातु

 दो या दो से अधिक यौगिकों या तत्वों को अनिश्चित अनुपात में मिलाने पर प्राप्त द्रव्य को मिश्रण कहते हैं। यह दो प्रकार का होता है –

(1)  समांगी मिश्रणः इसमें प्रत्येक भाग के गुण तथा धर्म एक समान होते हैंय जैसे – नमक का जलीय विलयन।

(2)  विषमांगी मिश्रणः इसमें प्रत्येक भाग के गुण, तथा धर्म एवं संघटन भिन्न-भिन्न होते हैंय जैसे – बारूद।

मिश्र धातु

 दो या दो से अधिक तत्वों को एक साथ द्रवित अवस्था में मिलाकर पुनः ठोस में परिवर्तित कर लेने पर प्राप्त उत्पाद को मिश्र धातु कहते हैं। इसमें धातु के सभी गुण सन्निहित रहते हैं।

मिश्रणों को अलग करन

(1)  क्रिस्टलः इस विधि में अशुद्ध ठोस या मिश्रण को उचित विलायक के साथ घोलकर छान लेते हैं। छानने के पश्चात् ठोस पदार्थ अलग हो जाता है।

(2)  आसवनः जब मिश्रण में उपस्थित द्रवों के क्वथनांकों में अधिक अंतर होता है तो इनके मिश्रण को आसवन विधि से पृथक करते हैं। आसवन से कम क्वथनांक वाला तत्व पहले वाष्पित होने लगता है। इसे संघनित करके अलग कर लिया जाता है। आसवन दो प्रकार का होता है

(i)  प्रभाजी आसवनः इस विधि द्वारा उन द्रवों को अलग करते हैं, जिनके क्वथनांकों में बहुत कम अंतर होता है। भूगर्भ से निकाले गए खनिज तेल पेट्रोल, डीजल, मिट्टी का तेल आदि इस विधि से अलग किए जाते हैं।

(ii) भाप आसवनः भाप आसवन के द्वारा ऐसे कार्बनिक पदार्थों का शुद्धिकरण किया जाता है, जो जल में अघुलनशील,

परन्तु भाप के साथ वाष्पशील होते हैं।

(3) ऊर्ध्वपातनः ठोस पदार्थों को गर्म करने पर सामान्यतः वे द्रव अवस्था में और ऊष्मा देने पर वाष्प अवस्था में परिवर्तित हो जाते हैं, परन्तु कुछ पदार्थ जैसे- कपूर तथा नौसादर गर्म करने पर ठोस अवस्था में आये बिना सीधे गैस में परिवर्तित हो जाते हैं। ऐसे पदार्थों को ऊर्ध्वपात तथा इस क्रिया को ऊर्ध्वपातन कहते हैं। ऊर्ध्वपातन की क्रिया द्वारा दो ऐसे ठोस मिश्रणों को पृथक् करते हैं, जिसमें एक ठोस ऊर्ध्वपात होता है, दूसरा नहीं। इसे गर्म करने पर ऊर्ध्वपात ठोस सीधे वाष्प में परिवर्तित हो जाता है। इसको ठण्डा करके दोनों को पृथक् कर लेते हैं।

(4) वर्णलेखनः यदि किसी मिश्रण के विभिन्न घटकों की अधिशोषण क्षमता भिन्न-भिन्न होती है तथा वे किसी अधिशोषक पदार्थ में विभिन्न दूरियों पर अवशोषित होते हैं तो वो अलग हो जाते हैंय जैसे – हरी सब्जियों से रंगीन द्रव्यों का अलग होना।

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