राष्ट्रपति को कौन चुनता है who elects the president of india in hindi भारत के राष्ट्रपति का चुनाव कौन करता है ?

By   October 17, 2020

(who elects the president of india in hindi) भारत के राष्ट्रपति का चुनाव कौन करता है ? राष्ट्रपति को कौन चुनता है ?

राष्ट्रपति की चुनाव विधि
हमारा संविधान आनुपातिक प्रतिनिधित्व के आधार पर और एकल हस्तांतरणीय वोट द्वारा एक निर्वाचन मंडल (संसद के मनोनीत सदस्यों और राज्य विधानसभाओं के मनोनीत सदस्यों से मिलकर बना) के माध्यम से एक परोक्ष निर्वाचन विहित करता है। राज्यों के बीच एकरूपता और केंद्र व राज्यों के बीच तुल्यता के सिद्धांतों को प्रणाली पर आधारित, यह चुनाव-विधि एक विश्वस्त रूप से राष्ट्रपति प्रत्याशी के चुनाव को ही सुनिश्चित करने के लिए निर्दिष्ट है।

राज्यों के बीच एकरूपता सुनिश्चित करने के लिए निर्वाचित राज्य विधानसभा सदस्यों के वोटों का मूल्य राज्य-विशेष की कुल आबादी के आधार पर आंका जाता है। एक राज्य मतदाता के वोट का मूल्य राज्य की कुल आबादी को सभा में कुल निर्वाचित सदस्य-संख्या से विभाजित कर परिकलित किया जाता है। राष्ट्रपति चुनाव में सभा के प्रत्येक सदस्य के वोट का मूल्य आंकने के लिए प्राप्त भागफल को 1000 से विभाजित कर दिया जाता है। एक संसद-सदस्य के वोट का मूल्य संसद के दोनों सदनों के निर्वाचित सदस्यों की संख्या द्वारा राज्य विधानसभाओं के सभी निर्वाचित सदस्यों को दिए गए कुल वोटों की संख्या से विभाजित करके आकलित किया जाता है।

मतदान एकल हस्तांतरणीय वोट द्वारा होता हैय निर्वाचक प्रथम तथा द्वितीय वरीयता के अनुसार मतदान करते हैं। प्रत्याशी जो निर्वाचक मंडल द्वारा डाले गए वोटों का स्पष्ट बहुमत प्राप्त कर लेता है विजित घोषित कर दिया जाता है। ऐसी स्थिति में जब प्रथम गणना में कोई भी प्रत्याशी स्पष्ट बहमत प्राप्त नहीं कर पाता है, निम्नतम मतदान प्रत्याशी के द्वितीय वरीयता मत अन्य शेष प्रत्याशियों को उतने तक हस्तांतरित किए जाते हैं जहाँ तक कि एक प्रत्याशी डाले गए वोटों के 50 प्रतिशत की सीमा पार कर जाता है।

चुनाव की यह विधि केंद्र व राज्यों के बीच राजनीतिक संतुलन बनाने हेतु राष्ट्रपति चुनाव को व्यापक आधार वाला बनाने से अभिप्रेत थी। परिणामतः राष्ट्रपति न सिर्फ संघ बल्कि राज्यों का भी प्रतिनिधित्व करता है। ऐसा भारतीय राज्य व्यवस्था के संघीय अभिलक्षण के प्रति सद्भाव बनाए रखने के लिए है।

सारांश
ब्रिटिश वैस्टमिन्सटर मॉडल की रीति पर चलते हुए, भारत ने सरकार के संसदीय स्वरूप वाली अपनी निजी प्रणाली विकसित कर ली। भारत सरकार की कार्यकारी शक्ति भारत के राष्ट्रपति में निहित है, जो औपचारिक राज्य प्रमुख और राष्ट्र का प्रतीक, दोनों होता है। राष्ट्रपति समुचित शक्तियों के बगैर ही प्रभुत्व तथा प्रतिष्ठासंपन्न है। राष्ट्रपति प्रधानमंत्री के नेतृत्व वाली मंत्रिपरिषद् की मदद तथा सलाह से ही अपने अधिकार का प्रयोग कर सकता है। प्रधानमंत्री ही भारतीय राजनीतिक व्यवस्था में वास्तविक कार्यकारी शक्ति का प्रयोग करता है। मंत्रिपरिषद्-प्रमुख, लोकसभा में बहमत दल का नेता और प्रायः संसद का नेता यानी प्रधानमंत्री महत्त्वपूर्ण शक्ति व अधिकारों का उपभोग करता है। यद्यपि प्रधानमंत्री राष्ट्रपति द्वारा ही नियुक्त किया जाता है और उसकी इच्छा पर ही पद पर रहता है, प्रधानमंत्री वस्तुतः संसद के प्रति उत्तरदायी है। प्रधानमंत्री के नेतृत्व में मंत्रिपरिषद् और अनौपचारिक मंत्रिमंडल सामूहिक दायित्व के सिद्धांत पर काम करते हैं। जैसा कि हमने देखा, राष्ट्रपति तथा प्रधानमंत्री के बीच मतभेद रहे हैं, किसी संवैधानिक संकट में पराकाष्ठा पर पहुँचकर इन्होंने कोई गंभीर आयाम ग्रहण नहीं किए। राष्ट्रपति ने कुल मिलाकर एक संवैधानिक प्रमुख के रूप में ही कार्य किया है।

 कुछ उपयोगी पुस्तकें
कश्यम, सुभाष, हिस्ट्री ऑव दि पार्लियामेण्ट ऑव इण्डिया, भाग-2, शिप्रा पब्लिकेशन्ज, नई दिल्ली, 1995।
जैनिन्स, सर, आइवर, कैबिनेट गवर्नमेंट, कैंब्रिज यूनिवर्सिटी प्रैस, कैंब्रिज, 1969 ।
दास, बी०सी०, दि प्रैजिडेण्ट ऑव इंडिया, आर.आर. प्रिंटर्स, नई दिल्ली, 1977।
पटनायक, रघुनाथ, पाउअर्स ऑव दि प्रैजिडेण्ट एण्ड गवर्नर्स ऑव इण्डिया, दीप एण्ड दीप, नई दिल्ली, 1996।