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विलयन क्या है , परिभाषा , विलायक , विलेय किसे कहते है , विलयन के गुण (what is solution in chemistry in hindi)

(what is solution in chemistry in hindi) विलयन क्या है , परिभाषा , विलायक , विलेय किसे कहते है , विलयन के गुण
परिभाषा : दो या दो से अधिक पदार्थों के समांगी मिश्रण को विलयन कहा जाता है , विलयन में पदार्थ के कणों का आकार बहुत छोटा है लगभग 1 नैनो मीटर से भी छोटा रखा जाता है।
उदाहरण : जब किसी पानी में नमक या शक्कर को घोला जाता है तो परिणामी पदार्थ को विलयन कहते है।
जब कोई विलयन दो पदार्थों से मिलकर बना होता है तो ऐसे विलयन को द्वि अंगी विलयन कहते है इसी प्रकार जब कोई विलयन तीन पदार्थों से मिलकर बना होता है तो ऐसे विलयन को त्रि अंगी विलयन कहते है।
विलायक और विलेय : किसी समांगी विलयन में जो पदार्थ अधिक मात्रा में होता है उस पदार्थ को विलायक कहते है और जो पदार्थ कम मात्रा में होता है उसे विलेय कहते है।
अर्थात कोई भी विलयन विलायक और विलेय दोनों से मिलकर बना होता है।
विलायक (Solvent) वह होता है जिसमें जो किसी पदार्थ को घोलता है , अर्थात विलायक की प्रकृति घोलने वाली होती है।
विलेय (Solute) वह पदार्थ होता है जो विलायक में घुल जाता है अर्थात इसमें घुलने की प्रकृति होती है।
किसी विलयन में विलायक की मात्रा अधिक होती है तथा विलेय की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है जैसे किसी नमक और पानी के विलयन में , नमक विलेय की भाँती होता है तथा पानी विलायक होता है अर्थात विलयन में नमक की मात्रा बहुत कम होती है लेकिन जल की मात्रा अधिक होती है।
विलयन में विले य के कणों का आकार लगभग10-7से लेकर10-8तक होता है। जब विलायक तथा विलेय से मिलाकर कोई विलयन एक बार बना लिया जाता है तो विलयन बनने के बाद इन दोनों घटकों को अर्थात विलायक तथा विलेय को आसानी से अलग नहीं किया जा सकता है।
विलयन बनने के बाद विलायक तथा विलेय के गुण खो जाते है जो उनमें बिना विलयन बनाये हुए थे।

विलयन

 विलयनःविलयन दो या दो से अधिक पदार्थों का एक समांग मिश्रण है, जिसमें किसी निश्चित ताप पर विलेय और विलायक की आपेक्षिक मात्राएँ एक निश्चित सीमा तक निरंतर परिवर्तित हो सकती है। जैसे – नमक का जल में विलयन, चीनी का जल में विलयन आदि।

 विलयन की विशेषताएँः(1) विलयन दो या दो से अधिक पदार्थों का समांग मिश्रण है। (2) किसी विलयन में विलेय के कणों की त्रिज्या 10-7 सेमी. से कम होती है। अतः इन कणों को सूक्ष्मदर्शी द्वारा भी नहीं देखा जा सकता है। (3) विलयन में विलेय के कण विलायक में इस प्रकार घुलमिल जाते हैं कि एक-दूसरे से विभेद करना संभव नहीं होता है। (4) विलयन में उपस्थित विलेय के कण छानने पर छन्ना पत्र के आर-पार जा सकते हैं। (अ) विलयन स्थायी एवं पारदर्शक होता है।

 विलेय और विलायकःविलयन में जो पदार्थ अपेक्षाकृत अधिक मात्रा में होता है, उसे विलायक कहते हैं, तथा जो पदार्थ कम मात्रा में उपस्थित रहता है, उसे विलेय कहते हैं। जिस विलायक का डाइइलेक्ट्रिक नियतांक जितना अधिक होता है, वह उतना ही अच्छा विलायक माना जाता है। जल के डाइइलेक्ट्रिक नियतांक का मान अधिक होने कारण इसे सर्वाधिक विलायक कहा जाता है।

 विलायकों के उपयोगः(1) औषधियों के निर्माण में, (2) निर्जल धुलाई में (बेंजीन एवं पेट्रोल जैसे विलायकों का), (3) इत्र निर्माण में, (4) रंग, रोगन को घोलने में, (अ) अनेक प्रकार के पेय एवं खाद्य पदार्थों के निर्माण में आदि।

विलयनों का वर्गीकरण

विलयनों के प्रकार उदाहरण

गैस में गैस का विलयन वायु, गैसों मिश्रण

गैस में द्रव का विलयन ब्रोमीन, कार्बन डाईआॅक्साइड, अमोनिया आदि गैसों का जलन में विलयन, बादल, कुहरा आदि।

गैस में ठोस का विलयन वायु में आयोडीन का विलयन, धुआँ आदि।

द्रव में गैस का विलयन जल में कार्बन डाईआॅक्साइड का विलयन, बेंजीन में हाइड्रोजन क्लोराइड गैस का विलयन आदि।

द्रव में द्रव का विलयन जल में एल्कोहल का विलयन, कार्बन डाईसल्फाइड में ब्रोमीन का विलयन, सल्फ्यूरिक अम्ल का जल में विलयन आदि।

द्रव में ठोस का विलयन जल में चीनी का विलयन, पारा में लेड का विलयन, कार्बन टेट्राक्लोराइड में आयोडीन का विलयन।

ठोस में गैस का विलयन पैलेडियम धातु में हाइड्रोजन का विलयन, कपूर का वायु में विलयन आदि।

ठोस में द्रव का विलयन थैलियम में पारा का विलयन, चीनी में जल का विलयन, नमक में जल का विलयन आदि।

ठोस में ठोस का विलयन तांबा में जस्ता, तांबा में टिन, तांबा में एल्युमिनियम, तांबा में जस्ता एवं निकेल आदि का विलयन (मिश्रधातुए)।

विलयन (solution): दो अथवा दो से अधिक पदार्थो के समांगी मिश्रण को विलयन कहते है। समांगी मिश्रण (विलयन) के प्रत्येक भाग का संघटन समान होता है। दो पदार्थो से मिलकर बने विलयन को द्विअंगी विलयन , तीन पदार्थो से मिलकर बने विलयन को त्रिअंगी विलयन कहते है।

सामान्यतया समांगी मिश्रण में जो अवयव अधिक मात्रा में होता है उसे विलायक (Solvent) कहते है। और जो अवयव कम मात्रा में होता है , उसे विलेय (Solute) कहते है।

अर्थात

विलयन = विलेय + विलायक

विलयन के गुण (properties of solution)

  1. विलयन में एक ही प्रावस्था होती है , अत: यह एक एकल प्रावस्था तंत्र है।
  2. विलयन में विलेय के कणों का आकार 10-7से 10-8सेंटीमीटर होता है।
  3. विलयन के घटकों [विलेय और विलायक] को भौतिक विधियों द्वारा आसानी से पृथक नहीं किया जा सकता।
  4. विलयन के गुणधर्म इनके घटकों के गुणधर्म होते है अर्थात घटक जब विलयन बनाते है तो अपने गुणधर्म को नहीं खोते।
  5. विलयन के कुछ गुण धर्म जैसे घनत्व , श्यानता , पृष्ठ तनाव , क्वथनांक , हिमांक आदि विलयन के संघटन के साथ साथ परिवर्तित होते है।
  6. इस टॉपिक में हम मुख्यतः द्रव विलयनों के संघटक , उनके बनाने की विधियों , उनके गुणों विशेष रूप से अनुसंख्य गुणों का अध्ययन करेंगे। विलयनों के उदाहरण के रूप में हम यहाँ केवल द्विअंगी विलयनों पर विचार करेंगे।

विलयनों के प्रकार (types of solution)

(अ) विलेय की मात्रा के आधार पर– विलेय की मात्रा के आधार पर विलयन पाँच प्रकार के होते है।

(i) तनु विलयन: वह विलयन जिसमें विलेय पदार्थ की मात्रा , विलायक की तुलना में बहुत कम घुली हो , तनु विलयन कहलाता है।

(ii) सान्द्र विलयन: वह विलयन जिसमें विलेय की अधिक मात्रा , विलायक में घुली हो , सान्द्र विलयन कहलाता है।(iii) असंतृप्त विलयन: ऐसा विलयन जिसमें उसी ताप पर विलेय पदार्थ को और अधिक मात्रा में घोला जा सके असंतृप्त विलयन कहलाता है।

Ksp> [A+][B]

तनु विलयन (i) और सान्द्र विलयन (ii) को असंतृप्त विलयन कह सकते है।

(iv) संतृप्त विलयन: किसी विलेय पदार्थ की वह अधिकतम मात्रा जो कि एक निश्चित ताप पर 100 ग्राम विलायक में घुल सके , विलेय पदार्थ की विलेयता कहलाती है। इस प्रकार बने विलयन को संतृप्त विलयन कहते है।

Ksp= [A+][B]

जब पदार्थ के आयनी सांद्रता का गुणनफल विलेयता गुणनफल के बराबर हो।

(v) अतिसंतृप्त विलयन: विलयन जिसमें एक निश्चित ताप पर , उस विलयन की संतृप्त अवस्था के लिए आवश्यक मात्रा में अधिक मात्रा में विलेय पदार्थ उपस्थित हो , अतिसंतृप्त विलयन कहलाता है।

अतिसंतृप्तता की स्थिति में विलेय का आयनिक गुणनफल उसके विलेयता गुणनफल से अधिक होता है।

[A+][B] > Ksp

अतिसंतृप्त विलयन मितस्थायी होता है। कुछ ही समय में विलेय की अधिक मात्रा विलयन से पृथक हो जाती है तथा संतृप्त विलयन बन जाता है।

(ब) विलयन की भौतिक अवस्था के आधार पर

विलयन की भौतिक अवस्था के आधार पर तीन प्रकार के विलयन बनते है।

(i) गैसीय विलयन: जब दो अथवा दो से अधिक गैसें मिश्रित की जाती है तो गैसीय विलयन बनता है। गैसीय मिश्रण समांग होता है। गैसीय विलयन में विलेय गैस , द्रव अथवा ठोस हो सकता है लेकिन विलायक गैस होती है।

(ii) द्रव विलयन: जब किसी गैस , द्रव या ठोस को द्रव में घोला जाता है तो द्रव विलयन बनता है अर्थात विलायक द्रव होता है तथा विलेय गैस , द्रव या ठोस हो सकता है।

(iii) ठोस विलयन: जब कोई गैस द्रव अथवा ठोस पदार्थ परमाणुवीय या आणुविक आकार में दुसरे ठोस में अनियमित रूप से परिक्षिप्त होता है तो बनने वाला विलयन ठोस विलयन कहलाता है। अर्थात विलयन में विलायक तो ठोस होता है जबकि विलेय गैस , द्रव या ठोस हो सकता है।

विलायक तथा विलेय की भौतिक अवस्था के आधार पर विलयनों के निम्नलिखित निकाय बन सकते है –

(i) गैस का गैस में विलयन: विलायक तथा विलेय दोनों ही गैसीय अवस्था में होते है जैसे ऑक्सीजन तथा नाइट्रोजन का मिश्रण , वायु अनेक गैसों O2, N2, CO2जलवाष्प आदि का समांगी मिश्रण है।

(ii) द्रव का गैस में विलयन: विलायक गैसीय अवस्था में तथा विलेय द्रव अवस्था में होते है जैसे – क्लोरोफॉर्म की वाष्प को N2में मिश्रित किया जाए या जल वाष्प वायु में उपस्थित हो।

(iii) ठोस का गैस में विलयन: विलायक गैसीय अवस्था में हो तथा विलेय ठोस अवस्था में हो जैसे कपूर का N2गैस में विलयन आयोडीन का वायु में मिश्रण। ठोस का गैस में उधर्वपातन करके विलयन बनाया जाता है।

उपरोक्त तीनों निकाय गैसीय विलयन की श्रेणी में आते है।

(iv) गैस का द्रव में विलयन: विलायक द्रव अवस्था में तथा विलेय गैसीय अवस्था में होता है। O2गैस का जल में घुलना , सोडावाटर ( CO2का जल में घुलना) आदि।

(v) द्रव का द्रव में विलयन: विलायक तथा विलेय दोनों ही द्रव अवस्था में होते है। जैसे एल्कोहल का जल में विलयन।

(vi) ठोस का द्रव में विलयन: विलायक द्रव अवस्था में तथा विलेय ठोस अवस्था में होते है जैसे शर्करा का जल में विलयन , सोडियम क्लोराइड का जल में विलयन आदि।

उपरोक्त तीनों निकाय द्रव विलयन की श्रेणी में आते है।

(vii) गैस का ठोस में विलयन: इस प्रकार के निकाय में विलायक ठोस तथा विलेय गैसीय अवस्था में होता है। जैसे पैलेडियम (Pd) द्वारा हाइड्रोजन गैस का अधिशोषण।

(viii) द्रव का ठोस में विलयन: विलायक ठोस अवस्था में और विलेय द्रव अवस्था में होता है। उदाहरण के लिए पारे का सोडियम के साथ अमलगम।

(ix) ठोस का ठोस में विलयन: विलायक तथा विलेय दोनों ही ठोस अवस्था में होते है। जैसे तांबे का सोने में मिश्रण पीतल जस्ता तथा ताम्बे का मिश्रण होता है। इन विलयनों को मिश्रधातु कहते है। मिश्र धातु उन धातुओं के बनते है जिनके परमाणुओं के आकार लगभग समान होते है।

संक्षेप में विलयनों के प्रकार सारणी में दर्शाए गए है –

विलयनों के प्रकारविलायकविलेयउदाहरण
गैसीय विलयनगैस

गैस

गैस

गैस

द्रव

ठोस

O2और N2का मिश्रण वायु।

क्लोरोफॉर्म की वाष्प तथा N2का मिश्रण , जलवाष्प का वायु में मिश्रण।

ठोस गैस में उधर्वपातन , धुआं , कपूर का N2में विलयन

द्रव विलयनद्रव

द्रव

द्रव

गैस

द्रव

ठोस

जल में घुली O2गैस , सोडा वाटर अथवा अमोनियाकृत जल।

एल्कोहल का जल में विलयन

शर्करा , नमक आदि का जल में विलयन।

ठोस विलयनठोस

ठोस

ठोस

गैस

द्रव

ठोस

Pd द्वारा H2गैस का अधिशोषण।

पारे का Na के साथ अमलगम

ताम्बे और सोने का मिश्रण , ताम्बा और जिंक का मिश्रण पीतल।

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