अपवर्तनांक का मात्रक क्या होता है ? प्रकाश का अपवर्तनांक बताइए unit of refractive index of a medium in hindi

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unit of refractive index of a medium in hindi अपवर्तनांक का मात्रक क्या होता है ? प्रकाश का अपवर्तनांक बताइए ?

मौखिक प्रश्न व उत्तर  (Viva Voce)
प्रश्न 1. अपवर्तन किसे कहते हैं?
उत्तर- जब कोई प्रकाश किरण एक पारदर्शक माध्यम से दूसरे पारदर्शक माध्यम में जाती है तो वह अपने मार्ग में विचलित हो जाती है। इसे प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं।

प्रश्न 2. अपवर्तनांक का मात्रक क्या है?
उत्तर- अपवर्तनांक का कोई मात्रक नहीं होता है।
प्रश्न 2. यदि कोई प्रकाश किरण विरल माध्यम से सघन माध्यम में जाती है तो वह किस ओर हटती है?
उत्तर- विरल माध्यम से सघन माध्यम में जाने पर प्रकाश किरण अभिलम्ब की ओर मुड़ती है।
प्रश्न 3. यदि कोई प्रकाश किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाती है तो वह किस ओर हटती है?
उत्तर- सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाने पर प्रकाश किरण अभिलम्ब से दूर हटती है।
प्रश्न 4. आपके प्रयोग में क्या निर्गत किरण, आपतित किरण की अपेक्षा कुछ विचलित हो जाती है?
उत्तर- नहीं। निर्गत किरण, आपतित किरण के समान्तर रहती है, लेकिन उसमें कुछ पार्शि्वक विस्थापन होता है (अर्थात् निर्गत किरण, आपतित किरण की सीध में नहीं होती है।)
प्रश्न 5. पार्शि्वक विस्थापन से आपका क्या तात्पर्य है?
उत्तर- चूंकि काँच के गुटके में अपवर्तन दो परस्पर समान्तर पृष्ठों से होता है, अतः निर्गत किरण, आपतित किरण के समान्तर होती है। आपतित किरण तथा निर्गत किरण के बीच की लम्बवत् दूरी को पार्शि्वक विस्थापन कहते है।
प्रश्न 6. पार्शि्वक विस्थापन का मान किन-किन कारकों पर निर्भर करता है?
उत्तर- (i) गुटके की मोटाई पर, (ii) गुटके के पदार्थ पर, (iii) आपतन कोण पर, तथा (iv) प्रयुक्त प्रकाश के रंग (या तरंगदैर्ध्य पर)।
प्रश्न 7. प्रकाश के अपवर्तन के कौन-कौन से नियम है?
उत्तर- (i) आपतन कोण की ज्या तथा अपवर्तन कोण की ज्यां की निष्पति एक नियतांक होती है जिसे पहले माध्यम से सापेक्ष द्वितीय माध्यम का अपवर्तनांक कहते हैं, अर्थात्
1μ2 = sin i/sin r
(ii) आपतित किरण, अपवर्तित किरण तथा अभिलम्ब तीनों एक ही तल में होते हैं।
प्रश्न 8. अपवर्तनांक का प्रकाश की चाल से क्या सम्बन्ध है?
उत्तर- पहले माध्यम के सापेक्ष दूसरे माध्यम का अपवर्तनांक
1μ2 त्र पहले माध्यम में प्रकाश की चाल / दूसरे माध्यम में प्रकाश की चाल = C1/C2

प्रश्न 10. किसी माध्यम का अपवर्तनांक किन-किन कारकों पर निर्भर करता है?
उत्तर- किसी माध्यम का अपवर्तनांक (i) उस माध्यम पर जिससे होकर किरण आती है (प्रथम माध्यम) (ii) प्रयुक्त प्रकाश के रंग पर तथा (iii) ताप पर निर्भर करता है।
प्रश्न 11. किसी माध्यम का अपतर्वनांक किस रंग के प्रकाश के लिए अधिकतम तथा किस रंग के प्रकाश के लिए न्यूनतम होता है?
उत्तर- किसी माध्यम का अपवर्तनांक बैंगनी रंग के प्रकाश के लिए अधिकतम तथा लाल रंग के प्रकाश के लिए न्यूनतम होता है।
प्रश्न 12. प्रयुक्त प्रकाश का रंग बदल जाने से माध्यम का अपवर्तनांक बदल जाता है, क्यों?
उत्तर- किसी माध्यम में अलग-अलग रंग के प्रकाश की चाल अलग-अलग होती है। किसी माध्यम में बैंगनी रंग के प्रकाश की चाल न्यूनतम तथा लाल रंग के प्रकाश की चाल अधिकतम होती है। अतः माध्यम का अपवर्तनांक बैंगनी रंग के लिए सर्वाधिक तथा लाल रंग के लिए न्यूनतम होता है।
प्रश्न 13. क्या हवा या निर्वात् में भी विभिन्न रंगों के प्रकाश की चाल भिन्न-भिन्न होती है?
उत्तर- नहीं। हवा या निर्वात में सभी रंगों के प्रकाश की चाल समान होती है जिसका मान 3 × 108 मीटर/सेकण्ड है।
प्रश्न 14. अपवर्तन में क्या नहीं बदलता है-प्रकाश की चाल, तरंगदैर्ध्य, आवृत्ति, तीव्रता?
उत्तर – अपवर्तन में प्रकाश की आवृत्ति नहीं बदलती है।
प्रश्न 15. काँच का अपवर्तनांक कितना होता है?
उत्तर- लगभग 1.5।
प्रश्न 16. वायु के सापेक्ष कौन अधिक सघन है-जल अथवा काँच?
उत्तर- वायु के सापेक्ष जल की अपेक्षा काँच अधिक सघन है।

क्रियाकलाप – 4
[Activity] 4,
उद्देश्य (object) – काँच के एक गुटके पर प्रकाश किरणें तिरछी आपतित होने पर अपवर्तन एवं पालिक विस्थापन का अध्ययन करना।
उपकरण (Apparatus) – काँच का आयताकार गुटका, ड्राइंग बोर्ड, बोर्ड पिनें, सफेद कागज, आलपिनें, स्केल।
सिद्धान्त (Theory) – जब प्रकाश किरण विरल माध्यम से सघन माध्यम में जाती है तो वह अभिलम्ब की ओर मुड़ जाती है तथा जब प्रकाश किरण सघन माध्यम से विरल माध्यम में जाती है तो वह अभिलम्ब से दूर हट जाती है। इसे प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं।
प्रकाश के अपवर्तन के निम्नलिखित दो नियम है-
(i) आपतित किरण, अपवर्तित किरण तथा आपतन बिन्दु पर अभिलम्ब एक ही तल में होते हैं।
(ii) आपतन कोण की ज्या (sine) तथा अपवर्तन कोण की ज्या (sine) का अनुपात एक नियतांक होता है जिसे पहले माध्यम के सापेक्ष दूसरे माध्यम का अपवर्तनांक कहते हैं।
चित्र में काँच के एक आयताकार गुटके PQRS से प्रकाश का अपवर्तन दिखाया गया है। इसमें प्रकाश का अपवर्तन दो समान्तर पृष्ठों PQ तथा RS से होता है। प्रथम अपवर्तन, पृष्ठ PQ पर वायु से काँच में होता है तथा तिरछी आपतित प्रकाश किरण AB, आपतन बिन्दु B पर खींचे गये अभिलम्ब NN’ की ओर झुककर काँच के अन्दर – BC दिशा में जाती है। BC अपवर्तित किरण है। दूसरा अपवर्तन, पृष्ठ  RS पर काँच से वायु में किरण BC का होता है, जो आपतन बिन्दु ब् पर खींचे गये अभिलम्ब MM’ से दूर हटकर वायु में CD दिशा में निर्गत होती है। CD निर्गत किरण है।
चित्र 12.13 से स्पष्ट है कि निर्गत किरण CD, आपतित किरण AB के समान्तर है। इनमें पार्श्व विस्थापन XY – है, जहाँ XY आपतित किरण तथा निर्गत किरण के बीच की लम्बवत् दूरी है।
ज्यामिति से पार्श्व विस्थापन
XY = d = BC sin (i-r)
या . पार्श्व विस्थापन d = t sec r sin- (i-r)
जहाँ t काँच के गुटके की मोटाई है।

विधि (Method) –
ड्राइंग बोर्ड पर सफेद कागज बिछाकर उसके चारों कोनों पर बोर्ड पिनें लगा देते हैं।
कागज के बीचों-बीच दिये गये काँच के गुटके को रखकर उसकी सीमा रेखा PQRS खींच लेते हैं।
अब गुटके को हटाकर रेखा PQ पर सिरे P से PQ के लगभग 1/3 भाग पर एक बिन्दु O लेकर एक तिरछी रेखा
OA खींचते हैं जो रेखा PQ से न्यूनकोण बनाती है।
4. गुटके को पुनः सीमा रेखा PQRS पर रखकर, रेखा OA पर दो आलपिनें  A व B एक-दूसरे से लगभग 5 सेमी दूरी
पर ऊर्ध्वाधर लगा देते हैं। पिनें पूर्णतः ऊर्ध्वाधर होनी चाहिए।
5. गुटके के दूसरी ओर से गुटके में इन पिनों के प्रतिबिम्ब A’ व B’ क्रमशः देखते हैं। इन प्रतिबिम्बों की सीध और आलपिने C व D लगाते हैं। A’ व B’ और पिनें C व D एक सीध में होने पर हमको केवल पिन D ही दिखाया था पिन C व प्रतिबिम्ब A’ व B’ इसके पीछे होंगे।
6. अब पिनों को हटाकर उनके स्थान पर पेन्सिल से निशान लगा लेते हैं तथा गुटके को भी हटा देते हैं। पिन C व D के निशानों को मिलाते हुए सीधी रेखा खींचते हैं जो गुटके की सीमा रेखा RS से बिन्दु O’ पर मिलती है। अब बिन्दु O व O’ को एक सरल रेखा खींचकर मिला देते हैं। इस प्रकार AO आपतित किरण, OO’ अपवर्तित किरण तथा O’D निर्गत किरण प्राप्त होती है।
7. बिन्दु O पर सीमा रेखा PQ पर अभिलम्ब NN’ खींचते हैं तथा बिन्दु O’ पर सीमा रेखा RS पर अभिलम्ब MM’ खींचते हैं। हम देखते हैं कि आपतित किरण AO का वायु से काँच में अपवर्तन होने पर अपवर्तित किरण QO’ , अभिलम्ब NN’ की ओर झुक जाती है तथा किरण OO’ का काँच से वायु में पुनः अपवर्तन होने पर निर्गत् किरण O’D अभिलम्ब MM’ से दूर हट जाती है।
8. अब आपतित किरण AO को आगे AE तक बढ़ाते हैं तथा निर्गत किरण OD एवं AE रेखा के बीच की लम्बवत् दूरी XY माप लेते हैं। यही तिरछी आपतित किरण AO के लिए गुटके से अपवर्तन होने पर पार्श्व विस्थापन है।
परिणाम (Result) –
आपतित किरण OQ , अपवर्तित किरण- QR तथा अभिलम्ब NN’ एक ही तल (कागज के तल) में हैं।
वायु से काँच में जाने पर प्रकाश किरण अभिलम्ब की ओर झुक जाती है तथा काँच से वायु में जाने पर प्रकाश किरण अभिलम्ब से दूर झुक जाती है।
आपतित किरण ।व् के लिए गुटके से अपवर्तन होने पर पार्शि्वक विस्थापन d = … सेमी प्राप्त होता है।।
सावधानियाँ (Precautions) –
प्रयोग के दौरान काँच का गुटका हिलना नहीं चाहिए।
पिनें ऊर्ध्वाधर लगानी चाहिए तथा सावधानी से यह देख लेना चाहिए कि सभी पिनें एक सीध में हों।
पिन C व D लगाते समय पिनों के मध्य लम्बन पूर्णतः दूर कर लेना चाहिए।
गुटके का तल स्वच्छ एवं धब्बे रहित होना चाहिए।
गुटका आयताकार होना चाहिए।