दो दलीय व्यवस्था क्या है या द्विदलीय प्रणाली किसे कहते है परिभाषा गुण फायदे Two-party system in hindi

By   October 29, 2020

Two-party system in hindi definition advantages meaning दो दलीय व्यवस्था क्या है या द्विदलीय प्रणाली किसे कहते है परिभाषा गुण फायदे  ?

द्वि दलीय प्रणाली : ऐसी व्यवस्था जिसमें मुख्य रूप से दो दल होते है , एक दल को पूर्ण बहुमत के साथ सरकार बनाने की अनुमति प्राप्त हो जाती है जिसे शासक अथवा बहुमत दल कहा जाता है जबकि दुसरे दल को पूर्ण मत प्राप्त नहीं होता है उसे सरकार बनाने की अनुमति नहीं होती है उसे विपक्ष कहते है |

दो-दलीय व्यवस्था
दो-दलीय (या द्विदलीय) व्यवस्था उसे कहते हैं जिसमें केवल दो प्रमुख राजनीतिक दल होते हैं और जिन्हें जन-समर्थन प्राप्त होता है, तथा जिनसे सत्ता संभालने की अपेक्षा की जाती है। इस व्यवस्था में भले ही कुछ अन्य छोटे दल भी हो सकते हैं, परन्तु उनकी भूमिका न होने के बराबर होती है। इस व्यवस्था में, किसी भी समय-विशेष पर, निर्वाचन के फलस्वरूप दोनों में से एक दल को बहुमत प्राप्त होता है, तथा वह सरकार का गठन करता है। दूसरा दल अल्पमत में होने के कारण विपक्ष की भूमिका निभाता है। इस व्यवस्था में छोटे दलों के होने के बावजूद, सत्ता पर दो प्रमुख दलों में से एक का ही अधिकार होता है। संयुक्त राज्य अमेरिका तथा इंगलैण्ड दो-दलीय व्यवस्था के सर्वश्रेष्ठ उदाहरण हैं। अमेरिका में ये दल हैंय डेमोक्रेटिक पार्टी तथा रिपब्लिकन पार्टी। इंगलैण्ड में सरकार का निर्माण लेबर पार्टी (श्रमिक दल) तथा कन्जर्वेटिव पार्टी (अनुदार दल) में से एक दल करता है।

हालांकि यह सही है कि इंगलैण्ड और अमेरिका की दो-दलीय व्यवस्थाओं में भी अंतर है। इंगलैण्ड के दोनों राजनीतिक दल भले ही प्रगतिशील हैं, और समय के अनुसार स्वयं को ढालते रहने वाले हैं किन्तु फिर भी इन दोनों दलों में स्पष्ट वैचारिक भिन्नता है। उधर, अमेरिका के दोनों दलों में कोई विशेष वैचारिक भेद नहीं हैय उनके कार्यक्रमों में चुनाव को जीतने की दृष्टि से फेर-बदल होते रहते हैं। इन विभिन्नताओं को देखते हुए, दो-दलीय व्यवस्था की भी दो श्रेणियाँ हो सकती हैं (1) अस्पष्ट (indistinct) दो-दलीय व्यवस्था (जैसी कि संयुक्त राज्य अमेरिका में है) तथा (2) स्पष्ट (distinct) दो-दलीय व्यवस्था (जिसका उदाहरण इंगलैण्ड है)।

प्रश्न 1 : दो दलीय व्यवस्था के पक्ष में पारम्परिक तर्क क्या है?

उत्तर : दो दलीय प्रणाली बेहतर है, क्योंकि इसमें किसी एक दल की सरकार बनती है जो सशक्त होती है, तथा आसानी से निर्णय कर सकती है। इसके विपरीत, बहु-दलीय प्रणाली की मिली-जुली सरकारें अस्थायित्व का शिकार होती हैं, तथा उन्हें नीतियों के साथ समझौते करने पड़ते हैं।

शब्दावली
साधारण बहुमत प्रणाली ः इस पद्धति में कुल डाले गए मतों की बहुसंख्या की चिंता किए बिना, जिस भी उम्मीदवार अथवा विजय स्तम्भ पर पहले पहुँचने को वाली प्रणाली साधारण बहुमत मिलता है, अर्थात् सबसे अधिक मत मिलते हैं (जो वाली प्राणी सबसे पहले विजय स्तम्भ पर पहुँच जाता है) उसे ही निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है।
बारम्बार अथवा अनेक ः इस पद्धति में दो, तीन, चार या उससे अधिक बार तब तक मतदान करवाया जाता रहता (Repeat) मतदान प्रणाली है जब तक कि किसी उम्मीदवार को डाले गए मतों का स्पष्ट बहुमत (आधे से अधिक मत) प्राप्त न हो जाए।
साधारण द्वितीय मतदान प्रणाली ः सामान्यतया किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए स्पष्ट बहुमत मिलना चाहिए। यदि प्रथम मतदान में किसी को आधे से अधिक मत मिलें तो वह जीत जाता है, अन्यथा दूसरी बार मतदान करवाया जाता है। इस बार जिसे भी सर्वाधिक मत मिलते हैं, उसे निर्वाचित घोषित कर दिया जाता है।
बहुमत द्वितीय मतदान प्रणाली ः इस पद्धति में विजय के लिए स्पष्ट बहुमत अवश्य मिलना चाहिए। यदि प्रथम दौर के मतदान में किसी भी उम्मीदवार को स्पष्ट बहुमत न मिले तो दूसरी बार मतदान होता है जिसमें मतपत्र पर केवल उन दो उम्मीदवारों के नाम होते हैं जिन्हें (प्रथम मतदान में) सबसे अधिक मत मिले हों। इन दो में से अधिक वोट पाने वाला विजयी होता है।
सामूहिक मत प्रणाली ः इस पद्धति में मतदाताओं को प्रत्याशियों को प्राथमिकता के क्रम से लगाने के लिए कहा जाता है। मतगणना के पहले चरण में केवल प्रथम वरीयता प्राप्त उम्मीदवारों पर विचार किया जाता है। यदि कोई उम्मीदवार बहुमत प्राप्त नहीं कर पाता तो उसका नाम हटा दिया जाता है और दूसरे क्रम के अनुसार कमजोर उम्मीदवार को पड़े मतो को प्रथम प्राथमिकता प्रदान कर दी जाती है।
दोहरा समानान्तर मत ः इस पद्धति में विभिन्न दलों के उम्मीदवार खुले तौर पर (बिना पार्टी सूची में) चुनाव लड़ते हैं। मतदाता किसी भी एक उम्मीदवार के पक्ष में मतदान कर सकते हैं। इसका अर्थ सम्बद्ध उम्मीदवार की पार्टी के लिए किया गया मतदान भी माना जाता है।
स्वीकृति मतदान ः मतदान की इस प्रणाली के अनुसार, मतदाता किसी एक उम्मीदवार के स्थान पर अपनी पसंद के एक से अधिक उम्मीदवारों को मत दे सकते हैं।
कॉन्डरसेट प्रणाली ः इस पद्धति में दो-दो उम्मीदवारों की जोड़ियों में से मतदाता किसी भी जोड़ी के पक्ष में वोट देता है। विभिन्न जोड़ियों में कोई न कोई साझा उम्मीदवार होता है। जिस उम्मीदवार को अधिकांश मत मिलते हैं उसे विजयी घोषित कर दिया जाता है।

 पार्टी एकता और लगाव
राजनीतिक दलों की एकता और लगाव (बवीमेपवद) तथा दलों के मध्य गठबंधनों पर चुनावी प्रक्रिया का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है। यदि किसी एक ही दल के सदस्य एक-दूसरे के विरुद्ध चुनाव लड़ते हैं तो इससे पार्टी की एकता को धक्का लगता है।

पार्टी एकता के सम्बन्ध में, बहुमत-आधारित (साधारण बहुमत) प्रणाली तथा आनुपातिक प्रतिनिधित्व पद्धतियों में स्पष्ट भेद दिखाई देता है। बहुमत पर आधारित व्यवस्था में एक ही दल के सदस्यों के मध्य प्रतिद्वन्द्विता नहीं होती है, परन्तु अमेरिका में राष्ट्रपति चुनाव से पूर्व जो पार्टी प्राईमरी होती हैं उनमें अवश्य ही एक ही दल के सदस्यों में आपसी प्रतिद्वन्द्विता अवश्य होती है।

सूची प्रणाली के दो रूप होते हैं। वे हैं बन्द-सूची तथा खुली-सूची पद्धतियाँ। बन्द सूची में मतदाता किसी न किसी पूरी सूची के पक्ष में मतदान करते हैं। इजराइल में यही होता है। उन्हें सूचियों में परिवर्तन करने का अधिकार नहीं होता। दूसरी ओर सूचियाँ पूरी तरह खुली होती हैं। फिनलैण्ड में यह परम्परा है कि मतदाता किसी एक सूची के पक्ष में मतदान करने के साथ-साथ पार्टी के किसी एक उम्मीदवार के पक्ष में भी मत देते हैं। इस प्रकार मतदाता यह सुनिश्चित करते हैं कि विजयी सूची में से कौन-से उम्मीदवार चुनाव जीतेंगे। इन दोनों के मध्यम बेल्जियम की सूची प्रणाली है। वहाँ मतदाता चाहे तो किसी सम्पूर्ण सूची के पक्ष में मतदान कर सकता है, या फिर वह किसी एक उम्मीदवार के पक्ष में भी। वहाँ सूची में जिन लोगों के नाम नीचे की ओर दर्ज होते हैं यदि उन्हें ऊपर दर्ज नाम व्यक्ति से अधिक संख्या में व्यक्तिगत मत मिल जाएँ तो वे भी विजयी हो सकते हैं।

पार्टियों के बीच गठबंधनों को वैकल्पिक मत, एकल संक्रमणीय मत पद्धति, द्वितीय मतदान प्रणाली तथा सूची प्रणाली से प्रोत्साहन मिलता है। ऑस्ट्रेलिया की लिबरल पार्टी तथा नेशनल पार्टी के बीच स्थायी गठबंधन को चुनावी प्रक्रिया से प्रोत्साहन मिला है। इसी प्रकार, अस्थायी रूप से अर्थात् कभी-कभी, आयरलैण्ड की लेबर पार्टी तथा फाईन जेल (थ्पदम ळंमस) के बीच भी गठबंधन चुनावी प्रक्रिया के कारण सम्भव हो पाता है। कुछ इसी प्रकार का गठबंधन फ्रांस की बहुदलीय, परन्तु दो गुटों की, दलीय व्यवस्था में भी पाया जाता है। वहाँ वामपंथी दलों तथा दक्षिण पंथी दलों के दो गठबंधन, या गुट, प्रायः उभर कर आते हैं।

बोध प्रश्न 3.
नोटः क) अपने उत्तरों के लिए नीचे दिए गए स्थान का प्रयोग कीजिए।
ख) इस इकाई के अंत में दिए गए उत्तरों से अपने उत्तर मिलाइएद्य
1) चुनाव प्रक्रिया सम्बन्धी विवाद या चर्चा के प्रमुख प्रकरण क्या हैं?

 बोध प्रश्नों के उत्तर

बोध प्रश्न 3
1) प्रथम, प्रतिनिधित्व का आनुपातिकता पर प्रभाव, तथा द्वितीय, चुनावी प्रक्रिया का राजनीतिक दलों पर प्रभाव। (देखें भाग 22.4)

सारांश
आधुनिक प्रतिनिधि लोकतान्त्रिक सरकारों के लिए चुनावी प्रक्रियाएँ, अनेक कारणों से महत्वपूर्ण होती हैं। प्रथम, चुनावों के परिणामों से प्राप्त आनुपातिकता के मान, दलीय व्यवस्था, स्थापित किए जा सकने वाले मन्त्रिमंडलों के स्वरूप, सरकार के उत्तरदायित्व तथा दलों की एकता इत्यादि पर चुनावी प्रक्रिया के महत्वपूर्ण परिणाम होते हैं। द्वितीय, लोकतान्त्रिक व्यवस्था के अन्य तत्वों की अपेक्षा चुनावी प्रक्रिया को अधिक सरलता से संचालित किया जा सकता है। इसका अभिप्राय यह है कि यदि लोकतान्त्रिक सरकार की प्रणाली में कोई परिवर्तन करना हो तो ऐसा करने के लिए निर्वाचन पद्धति सर्वश्रेष्ठ साधन है।

चुनावों की सबसे अधिक प्रचलित प्रणाली है – साधारण बहुमत प्रणाली या विजय स्तम्भ पर सबसे पहले पहुँचने वाली प्रणाली। इस पद्धति में उस उम्मीदवार को विजयी घोषित किया जाता है जिसे सबसे अधिक मत प्राप्त होते हैं, (भले ही वे कुल डाले गए मतों के आधे से कम ही क्यों न हों)। इस पद्धति मे उदाहरण के लिए चालीस प्रतिशत मत पाने वाला भी चुना जा सकता है, क्योंकि शेष मत अनेक अन्य उम्मीदवारों में विभाजित हो जाते हैं। लेकिन इससे बहुसंख्यक जनता को प्रतिनिधित्व प्राप्त ही नहीं हो पाता है।

दूसरी ओर, साधारण बहुमत प्रणाली के दोषों को दूर करने के लिए अनेक देशों में आनुपातिक प्रतिनिधित्व प्रणालियाँ अपनाई गई हैं। इनके द्वारा डाले गए मतों तथा विभिन्न दलों और वर्गों को प्राप्त सीटों में प्रायः उचित अनुपात पाया जाता है। आनुपातिक प्रतिनिधित्व की प्रणालियाँ बहुसदस्यीय चुनाव क्षेत्रों में लागू की जाती हैं।

परन्तु, उचित आनुपातिक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित करने के अलावा भी इन पद्धतियों के अनेक लाभ हैं। अधिक विकल्प उपलब्ध होने तथा मतों के व्यर्थ न चले जाने की सम्भावना के फलस्वरूप अधिक संख्या में मतदाता मतदान करने आते हैं। द्वितीय, आनुपातिक प्रतिनिधित्व के द्वारा राष्ट्रव्यापी पार्टी-गतिविधियों को प्रोत्साहन मिलता है। उन क्षेत्रों में भी जहाँ किसी पार्टी का संगठन कम शक्तिशाली हो, तथा जहाँ उसकी पकड़ कम हो वहाँ भी प्रत्येक पार्टी को कुछ न कुछ मत प्राप्त करने की सम्भावना रहती है।

 कुछ उपयोगी पुस्तकें

Barber, Benjamin R- ;1984) Strong Democracy, Berkeley: University fo California Pres.
Grfoman, Bernard and Arend Lijphart ;eds.) ;1986) Electoral Lwa and Their Political Consequences, New York: Agathon Pres.
Lijphart, Arend.k~ ;1994) Electoral Systems and Party Systems, OÛford: OÛford University Pres.
Lipset, S.k~ and S.k~ Rokan ;eds.) ;1967)Party Systems and Voter Alignments, New York.
Nurmi, Hannu ;1987) Comparing Voting Sysfems, Dordrecht, The Netherlands: Reidel.
Rokan, S.k~ ;1970) Citçens, Elections, Parties, New York.