गैस का ऊष्मीय प्रसार , गैसों में ऊष्मीय प्रसार क्या है , परिभाषा , उदाहरण , सूत्र (thermal expansion of gases in hindi)

(thermal expansion of gases in hindi) गैस का ऊष्मीय प्रसार , गैसों में ऊष्मीय प्रसार क्या है , परिभाषा , उदाहरण , सूत्र : जब किसी गैस को ऊष्मा दी जाती है तो ऊष्मा ग्रहण करके गैस का आयतन बढ़ जाता है , ऊष्मा के कारण गैस के आयतन में विस्तार को गैस का ऊष्मीय प्रसार कहते है।
जब ठोस , द्रव और गैस को समान ताप दिया जाता है तो इनमे से गैस के आयतन में सबसे अधिक प्रसार होता है।
गैस के प्रसार गुणांक का मान ताप पर निर्भर करता है अर्थात जितना अधिक ताप होगा गैस में प्रसार उतना ही अधिक होगा।
यदि किसी आदर्श गैस के लिए दाब को नियत रखकर गैस के आयतन में प्रसार गुणांक का मान ज्ञात करने के लिए आदर्श गैस समीकरण काम में ले सकते है –
PV = μRT
जब हम गैस के ऊष्मीय प्रसार का अध्ययन करते है तो ताप वृद्धि के साथ आयतन में वृद्धि तो होती ही है लेकिन दाब में भी वृद्धि होती है अत: हमेशा दाब को भी ध्यान में रखना चाहिए।
और इसलिए ही हमें गैसों में ऊष्मीय प्रसार के समय आदर्श गैस समीकरण याद रखनी चाहिए क्योंकि इसी की सहायता से हम किसी गैस का ताप , दाब , आयतन , मोल आदि में सम्बन्ध ज्ञात करते है और किसी अज्ञात राशी का मान भी ज्ञात कर सकते है।
चार्ल्स नियम के अनुसार जब किसी गैस के लिए दाब का मान नियत रखा जाए और ताप का मान बढाया जाए तो इसके आयतन में वृद्धि होती है इसका कारण ऊष्मा होती है।
क्यूंकि ऊष्मा पाकर गैस के कणों की गतिज ऊर्जा बढ़ जाती है जिससे ये एक दुसरे को धक्का देते है या दूर जाने का प्रयास करते है जिससे आयतन में वृद्धि हो जाती है इसे ही गैस का ऊष्मीय प्रसार कहते है।

 

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