आतंकवाद की परिभाषा क्या है | आतंकवाद किसे कहते है | निबन्ध विरोधी निरोधक कानून terrorism definition in hindi

By   October 4, 2020

what is terrorism definition in hindi आतंकवाद की परिभाषा क्या है | आतंकवाद किसे कहते है | निबन्ध विरोधी निरोधक कानून , प्रकार अर्थ लिखिए |

अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद
इकाई की रूपरेखा
उद्देश्य
प्रस्तावना
अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद की प्रकृति
अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद की प्रकृति
अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद के रूप,
भूमण्डलीय आतंकवाद के प्रारूप
शहरी आतंकवाद
शहरी आतंकवादी निकाय
शहरी आतंकवादियों की तकनीकें
शहरी आतंकवाद को रोकने के उपाय
ग्रामीण आतंकवाद
ग्रामीण आतंकवाद का विकास
एशिया तथा अफ्रीका में ग्रामीण आतंकवादी समस्याएं
लैटिन अमरीका में ग्रामीण आतंकवादी गतिविधियां
आतंकवाद-विश्वस्तरीय संघर्ष
एक दूसरे की हत्या करने की प्रक्रिया की रोकथाम
आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के कानून
सारांश
शब्दावली
कुछ उपयोगी पुस्तकें
बोध प्रश्नों के उत्तर

उद्देश्य
इस इकाई में भूमंडलीय आतंकवाद की प्रकृति और प्रारूप, शहरी तथा ग्रामीण स्तर पर किये गये उपाय, तथा उन प्रयत्नों जो अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर आतंकवादी गतिविधियों को नियंत्रित करने के लिए हो सकते हैं के बारे में बताया गया है। इस इकाई का अध्ययन करने के बाद आपः
ऽ आतंकवाद को परिभाषित कर सकेंगे तथा इसे अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर समझ सकेंगे।
ऽ विभिन्न प्रकार के अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद की व्याख्या कर सकेंगे,
ऽ भूमंडलीय आतंकवाद के प्रतिमान को समझ सकेंगे,
ऽ उन दो प्रमुख स्तरों शहरी और ग्रामीण जहां अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद व्याप्त है को जान सकेंगे,
ऽ आतंकवादी गतिविधियों की रोकथाम के महत्व का विश्लेषण कर सकेंगे।

प्रस्तावना
आतंकवाद शब्द की उत्पत्ति लैटिन भाषा के “टेरैर‘‘ और ‘‘डीटेर‘‘ शब्दों से हुई है जिसका अर्थ है वह कार्य जो क्रमशः कंपाता और डराता है, अर्थात् अपने प्रकट उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए, एक राज्य या सरकार की कानूनी अधिकारिता को तरीके बद्ध हिंसा का प्रयोग करके दुर्बल करते हैं जो कि इनकी आतंकित गतिविधियों में नीहित होता है जब सरकार या राज्य जनता की शिकायतों को हल करने में असफल हो जाती है तथा अपने प्रभाव से जनता के अधिकारों को अनुचित तरीके से अतिक्रमण करती है तो यह अवश्यंभावी हो जाता है कि आतंकवादी भय पैदा करके संबंधित अधिकारियों के संदर्भ राजनीतिक प्रस्ताव रखते हैं तथा इसके लिए राजनीति व सरकार को प्रभावित करने के लिए प्रतिकूल तरीके अपनाते हैं। लेकिन इन आतंकवादी गतिविधियों को कुछ समय जनता के द्वारा मोन रूप से अनुमोदित कर दिया जाता है जिससे आतंकवादी राजनीतिक मशीनरी की असफलता को दर्शाने में सफल हो जाते हैं। इस हेतू कभी कभी जनता द्वारा इन आतंकवादियों की मांग को मौन रूप से स्वीकार कर लिया जाता है। जब इस प्रकार की सरकार बहुत बड़े स्तर पर शक्ति का दुरूपयोग करती है तब उसे आतंकवादियों के हमले से निपटना होता है जो कि इसे कमजोर बना देता है। यद्यपि आतंकवादी समुदाय से विमुख जो जाते हैं। आतंकवादी गतिविधियों से संबंधित देश की अर्थव्यवस्था को सीधे नुक्सान पहुंचता है तथा बेरोजगारी भी बढ़ती है।

आतंकवाद की कोई एक सर्वमान्य परिभाषा नहीं है। जैसे कि बिना किसी वास्तविक संघर्ष के चलना इसके लड़ने का सबसे घटिया तरीका है तथा हमेशा विश्व के प्रत्येक भाग में आतंकवादी गतिविधियां जारी रही हैं जो कि इतिहास के प्रत्येक पन्ने या चरण में एक धब्बा छोड़ती आयी है। लेकिन यह धारणा 1790 तथा इसके बाद ही लोकप्रिय हो पाई जबकि क्रांतिकारी फ्रांस ने अपना रास्ता बनाने के लिए वहां कुलीनतंत्र व उसके सहवर्तीयों को निशाना बनाया, अर्थात् फ्रांस ने आतंकवाद को अपनाया।

अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद की प्रकृति
अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद की प्रकृति
जैसा कि विदित है, आतंकवाद एक विश्वव्यापी तथ्य है तथा इससे संबंधित कार्य में कोई राष्ट्र शामिल होकर उनके द्वारा इस प्रक्रिया को और अधिक जटिल बना लिया है और इन स्थितियों ने आतंकवादी संगठनों व गुटों का अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद में आपसी सम्पर्क अत्यावश्यक बना दिया है जिससे आतंकवादियों के द्वारा किसी भी समय हिंसा का प्रयोग, इनके लक्ष्यों व उद्देश्यों को अस्पष्ट कर देता है। हालांकि ये संगठन आपस में यंत्रों व हथियारों का आदान प्रदान करते हैं। एक दूसरे के द्वारा की गई कार्यवाहियों में संयुक्त रूप से भाग लेते हैं। एक दूसरे के प्रशिक्षण क्षेत्रों को लाभ उठाने के लिए उपयोगी बनाते हैं तथा प्रशासनिक व तर्कसंगत बिंदुओं पर एक दूसरे का समर्थन करते हैं। वास्तव में आतंकवादी संसार को एक ऐसा मंच मानते हैं जहां इनकी समस्याएं, इरादे तथा इनकी कल्पनाएं जनता के सामने आती हैं। आतंकवादियों के लिए राष्ट्रीय सीमाओं का कोई महत्व नहीं है। आतंकवादी किसी एक देश के होते हैं लेकिन इन लोगों को प्रशिक्षित किसी दूसरे देश में किया जाता है तथा इनके लिए धन की व्यवस्था की जाती है और अंततः ये अपनी आतंकवादी गतिविधियां किसी अन्य देश में चलाते हैं। तकनीकि उन्नति से आज आतंकवाद के क्षेत्र में कई प्रकार के उन्नत हथियार व विस्फोटक आ गये हैं। लेकिन सबसे ज्यादा चिंताजनक स्थिति अपराधियों का व्यक्तिगत स्तर पर व अपराधिक गुटों के रूप में उदय होने से हो गई है जिसने आतंकवाद के रूप को ही बदल डाला है। यानि कि एक राजनीतिक उद्देश्य प्ररित से एक अपराध उद्देश्य प्रेरति गुट का उदय हो गया है जो कि अपेक्षाकृत अधिक खतरनाक है।

अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद के रूप
आतंकवाद के कई रूप हैं जो कई स्तरों पर क्रियान्वित होते हैं, जैसेः
क) पृथकीय और अप्रथकीय आतंकवादः यह अंतर आतंकवादियों द्वारा की जाने वाली गतिविधियों पर आधारित है। पृथकीय को हम आसानी से समझ सकते हैं जैसे कि पृथकीय आतंकवादी अपने सुनिश्चित दुश्मन पर हमला करता है। उसके सभी शिकार या तो योद्धा होते हैं या संभावित युद्धकारी होते हैं। ऐसा आतंकवाद स्वाभाविक रूप से न्यायसंगत होता है। दूसरे अर्थात् अपृथकीय आतंकवाद को समझना हमेशा मुश्किल होता है। यह आम जनता पर बिना किसी अंतर के अर्थात् निर्दोष लोगों पर भी हमला करता है। क्योंकि हमले वाले स्थान पर हर प्रकार के लोग होते हैं। इस प्रकार के हमले के बारे में कहना मुश्किल होता है कि इसके पीछे भी कोई न्यायसंगतता है।
ख) दक्षिणपंथी आतंकवाद और वामपंथी आतंकवादः दक्षिणपंथी अपने आपको सरकार समर्थक आतंकवादी गतिविधियों में शामिल करते हैं अर्थात ये प्रकृति से प्रतिक्रियावादी हैं। लेकिन वामपंथ का उदय समाज के प्रबुद्ध वर्ग से हुआ है जो कि आर्थिक व्यवस्था को सही दिशा अर्थात् आर्थिक रूप से समान वर्ग को स्थापित करने में अपना गहरा विश्वास रखते हैं उनमें से कुछ एक विशेष समस्याओं के बारे में संबोधित करते हैं तथा अपने कारण को जाहिर करने में आतंक से संबधित तरीका अपनाते हैं और इस प्रकार जनता की सहानुभूति प्राप्त करते हैं।
ग) राष्ट्रवादी और पृथकतावादी: इस प्रकार के आतंकवादी राष्ट्रत्व के भाव से ओतप्रोत होते हैं और अपने देश या भू-भाग को उसी रूप में स्थापित करना चाहते हैं जो इतिहास के पन्नों में इनके उत्तराधिकारियों की मातृभूमि की स्वतंत्र पहचान थी। उनकी इच्छा है कि वे अपनी मौलिकता से संबंध रखे अर्थात् ये अपनी मौलिक संस्कृति को बनाये रखने के पक्षधर हैं।

भूमण्डलीय आतंकवाद का प्रारूप
आतंकवाद का प्रचलन संपूर्ण इतिहास में रहा है जो कि भूमंडल के सभी क्षेत्रों को अपने में निगले हुए है। शासन के विरूद्ध गुटबंदी के द्वारा आतंकवादी तकनीकों का प्रयोग एक बहुत पुराना तथ्य है। जैसा कि हम जानते हैं कि रोमन शासकों के द्वारा इस तरह की तकनीकों और साधनों का प्रयोग शासन के विरुद्ध उठती चुनौतियों को निरूत्साहित करने के लिए किया जाता था। यद्यपि सबसे पहला विख्यात दृष्टांत जिसमें आतंकवाद को मुख्य साधन के रूप में अपनाया था वह 11वीं तथा 12वीं शताब्दी का मध्य पूर्व का एसासिन सेक्ट आंदोलन था जिसने सम्पूर्ण मुस्लिम दुनिया में अपने अभिकर्ता अर्थात् गुप्तचर भेज कर हत्याओं की कतार लगवा दी थी। वैसे संकेत के लिए पर्याप्त है कि विश्व की वर्तमान धारा में भी 1960 के दशक के दौरान से आतंकवाद फिर इसी क्षेत्र में तीव्र गति से बढ़ा।

फ्रांस की क्रांति के दौरान आतंक को खुले रूप से समर्थित व प्रायोजित किया गया, जिसमें जनता की क्रांतिकारी भावना व भक्ति प्रकट हुई। धीरे धीरे रूस में अराजकतावाद के समर्थकों व अमेरिका तथा इनके साधन क्रांतिकारी राजनीतिक व सामाजिक व परिवर्तन लाये। लेकिन इन देशों में अराजकतावादियों द्वारा बंदूकों व बमों से प्रमुख अधिकारियों की हत्या कर देने से 1865 से 1905 तक भूमंडलीय आतंकवाद को प्रतिबंधित कर दिया था।

20वीं शताब्दी में आतकंवाद के प्रयोग व इसकी तकनीकों में क्रांतिकारी परिवर्तन आये हैं और इस तकनीकि उन्नति ने आतंकवादियों को गतिशीलता तथा प्राणघातकता दी है। राजनीतिक आंदोलन के सभी रूप राजनीतिक इंद्रधनुष में इन सभी तरीकों का प्रयोग करने लगे। वास्तविक रूप में नाजी जर्मनी का निरंकुश शासक एडोल्फ हिटलर तथा सोवियत संघ में स्टालिन में अपनी राज्य नीतियों में आतंकवादी गतिविधियों को अपनाया था। हालांकि इन्होंने इस सत्य को जनता के सामने स्वीकार नहीं किया। इन राज्यों में शासकों ने अपनी नीतियों व विचारधारा मनवाने के लिए जनता में भय पैदा किया तथा इसके लिए बिना किसी कानूनी निर्वधन के यातना व प्राणदण्ड जैसी तकनीकों को अपनाया था। माओ ने स्टालिन से भी बड़े स्तर पर आतंक के शासन की स्थापना की। ईरान को भी रेजशाह और खेमैन के शासन के समय आतंक व मुठभेड से आतंक का अनुभव है जिसमें प्राणदण्ड एवं जन संहार एक बड़े पैमाने पर किया जाता था। इसी प्रकार से स्पेन को भी कई प्रकार की आतंकवादी हिंसात्मक गतिविधियोंय वामपंथी राज्य संचालन तथा इसी प्रकार के अनुभव हैं।

आतंकवाद उन प्रयत्नों की पहचान है जिसमें व्यक्तियों या गुटों के द्वारा विद्यमान राजनीतिक संस्थान को विखंडित या उखाड़ दिया जाता है। विश्व स्तर पर आतंकवाद का प्रयोग औपनिवेशिक शासन के विरूद्ध संघर्ष में एक गुट के द्वारा या परस्पर गुटों के द्वारा एक दूसरे को नीचा दिखाने के लिए किया जाता है (जैसे कि अल्जीरिया और फ्रांस में) इसे विभिन्न धार्मिक सम्प्रदायों के द्वारा भी प्रयोग किया जाता है (जैसे उत्तरी आयरलैण्ड में कैथोलिक और प्रोटेस्टंट सम्प्रदाय द्वारा), उस संकट में भी जिसमें दो राष्ट्रीय वर्ग अपनी गृहभूमि पर अधिकार के लिए संघर्ष कर रहे हैं (जैसे फिलिस्तिनी एवं इजराइल) तथा उनके विवाद में भी जो क्रांतिकारी ताकतों व विद्यमान सरकार के बीच है, इत्यादि में आतंकवाद का प्रयोग किया जाता है।

संचार मीडिया के साधनों की उन्नति होने से आज आतंकवादी कार्यों का जनता पर प्रभावों को व्यापक रूप से प्रसारित किया जाता है जो कि कोई भी घटना सीधे विश्वव्यापी रूप से लाखों विचारकर्ताओं के सामने आती है जिनसे आम जनता भी अनभिज्ञ नहीं रहती है। लेकिन आधुनिक युग में आतंकवादियों की शियास्तों या राजनीतिक हितों की वास्तविकता से भी अनभिज्ञ नहीं रहती है। आधानिक राग में आतंकवादी अपने अवास्ततिक उददेशगों को बताते हैं जो राशार्थ में अपने को राजनीति की मुख्य धारा से अलग कर लेते हैं और इस प्रकार ये विमान अपहरण, बमबारी तथा अपहरण जैसे हिंसात्मक साधनों का सहारा लेते हैं। 20वीं शताब्दी के सबसे कुख्यात आतंकवादी गुटों में पश्चिमी जर्मनी का बाडेर मैनहोफ गेंग, इटली का रेड ब्रिगेड, फ्रांस का डॉइरेक्ट एक्शन, अल फरात तथा कुछ दूसरे फिलिस्तिनी संगठन हैं। आज विश्व आतंकवाद की सबसे महत्वपूर्ण व अत्यावश्यक विशेषता है इनका अंतर्राष्ट्रीय सहयोग।

आतंकवाद को भूमंडलीय स्तर पर स्थापित करने के लिए ये अपना विश्वव्यापी संपर्क रखते हैं जिसका आधार होता है इनका एक धर्म होना, एक नस्ल होना या एक राजनीतिक विचारधारा का होना । कभी कभी आतंकवादी संगठनों को प्रशिक्षण, वित्तीय सहायता तथा हथियार किसी दूसरे देश की एजेंसियों से प्राप्त होता है तथा ये आतंकवादी गतिविधियां किसी अन्य देश में करते हैं जिससे आतंकवादी घटनाएं भयप्रद रूप में होने लगी हैं। कुछ देश विशेषकर महाशक्तियां आज अपनी विदेशनीति के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए आतंक तथा हिंसा जैसे रास्तों का प्रयोग कर रही हैं। इस प्रकार आतंकवाद को बढ़ाने का क्षेत्र इन महाशक्तियों को है जो कि अंतर्राष्ट्रीय सीमाओं का भी सम्मान नहीं करती है तथा इन्होंने आतंकवाद को कभी नहीं थमने वाला तथ्य बना दिया है।

सरकार के व्यवहार की वजह से आतंकवाद ने विभिन्न देशों में विभिन्न रूप धारण कर लिया है तथा जिससे संबंधित सरकारों के भी उनके लिए परिवर्तित रूप रहे हैं। संघीय गणराज्य जर्मनी में अपराधों का विस्तृत रूप से विश्लेषण एवं वर्गीकरण किया । वहाँ पर आतंकवाद की प्रकृति या रूप को उजागर किया तथा, इस देश में आतंकवाद के विरूद्ध पुलिस कार्यवाही बहुत ही संगठित रूप से होती है जिससे प्रत्येक आतंकवादी सूचना स्वतः ही कृत्रिम रेडियो नेटवर्क से जुड़ी होती है। फ्रांस में तो आतंकवाद ने युद्ध का रूप ले लिया है तथा सरकार आतंकवादी अपराधों के अध्ययन व इनके पंजीकरण में कंप्यूटर रिकार्ड का प्रयोग कर रही है। ब्रिटेन में मुख्य आतंकवादी गतिविधियां प्रतिबंधित आतंकवादी संगठन आइरिस रिपब्लिक आर्मी (आई आर ए) के द्वारा की जाती है। निकाय का आतंकवादी होने का कारण ब्रिटेन में बहुल प्रोटेस्टेंट के द्वारा आईरिश रोमन कैथोलिक के विरूद्ध किया गया अन्याय है जिसने इनके विद्वेष को चरमोत्कर्ष पर पहँचा दिया है। इसने 1919 में अस्तित्व में आने के बाद से हत्यायें तथा इसी प्रकार की कार्यवाहियां कभी छोटे पैमाने पर तथा कभी बड़े पैमाने पर जारी रखी हैं। लेकिन इसका श्रेय ब्रिटेन की लोकतांत्रिक सरकार को ही जाता है जिसने आतंकवादियों को अवैध रूप से मार डालना तथा यातनाए देने के बजाय इस समस्या के समाधान के लिए असाधारण सख्त व्यवस्थापन, एवं समर्थित न्यायपालिका तथा जनता का सहारा लिया।

आज आतंकवादी विखंडन की प्रक्रिया को बढ़ाने में हथियार हो गये हैं यह उन कुछ दुष्ट लोगों का आभारी है जिन्होंने आतंकवादी गतिविधियों के लिए कुछ आधार निर्धारित किये हों तथा प्रयोग के लिए खूनी तथा हिंसक अभियान चलाए। इनमें सबसे ज्यादा ध्यान दिया जाता है कारलोस जो वेनेजुएला का था तथा जैकाल नाम से भी जाना जाता है। जिसने सामान्यतय आतंकवाद के मुख्य नेता के रूप में पहचान बनायी। उसने आतंकवादियों के उद्देश्यों को संहिताबद्ध किया तथा उसे प्राप्त करने के साधनों को बताया व इन्हें प्राप्त करने की चतुरता का भी वर्णन किया। वह अपनी मृत्यु तक सरकार के लिए समस्त भूमंण्डल में एक चुनौती बना रहा।

इन सालों में राजनीतिक उद्देश्यों से प्रेरित आतंकवाद व अपराध प्रेरति आतंकवाद में स्पष्ट रूप से अंतर किया जा सकता है। राजनीतिक उद्देश्य प्रेरित आंतकवाद के गुट को बनाये रखने के लिए ये जनता से धन ऐंठते हैं। इन संगठनों को विदेशी समर्थन व. आंतरिक जनता की सहानुभूति दोनों ही प्राप्त होती है। लेकिन अपराध प्रेरित आतंकवाद अपराध आर्थिक फायदे के लिए करते हैं और इनका नेतृत्व एक अपराधिक गेंग के द्वारा किया जाता है जो कि अपहरण व फिरौती को महत्व देते हैं। राजनीतिक उद्देश्य प्रेरित आंतकवाद को लोकप्रिय समर्थन की वजह से रोका नहीं जा सकता लेकिन अपराध प्रेरित आतंकवाद को प्रभावकारी व पर्याप्त नीतियों व खुफिया कार्यो के द्वारा रोका जा सकता है।

बोध प्रश्न 1
टिप्पणी क) अपने उत्तर के लिए नीचे दिए गए रिक्त स्थान का प्रयोग कीजिए।
ख) इस इकाई के अंत में दिए गए उत्तर से अपने उत्तर की तुलना किजिए ।
1) अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद क्या है।
2) क्या आप आतंकवाद के विभिन्न रूपों को बता सकते हैं।

बोध प्रश्न 1 उत्तर
1) अंतर्राष्ट्रीय आंतकवाद में आतंकवादी संगठनों व ग्रुपों के बीच अंतर्राष्ट्रीय संपर्क होता है। ये संगठन एक दूसरे के समर्थन व धन को बढ़ाने में सहायता करते हैं तथा एक दूसरे के देशों में फायदे के लिए उपयोगी सिद्ध होते हैं उनके लिए अंतर्राष्ट्रीय सीमाएं. कोई मायना नहीं रखती तथा ये अपनी मांग को विश्वस्तर पर प्रचारित करने का इरादा रखते हैं।
2) आतंकवाद के भिन्न भिन्न रूप निम्न प्रकार से है।
क) पृथकीय और अपृथकीय आतंकवाद
ख) दक्षिणपंथी आतंकवाद और वामपंथी आतंकवाद
ग) राष्ट्रवादी और पृथकतावादी आंदोलन।

आतंकवाद-विश्वस्तरीय संघर्ष
आतंकवाद लोकतांत्रिक समाज के संचालन में विघ्न डालता है तथा स्पष्टीकरण में यह बताता है कि जो सरकारे प्रचलन में हैं वह जनता की सुरक्षा के आधारभूत साधन मुहैय्या नहीं कराती है। आतंकवाद का विरोध एक आम मानव इच्छा है लेकिन कुछ मौको में यह असफल हो जाता है। सरकार को अपनी जनता व उसकी सम्पत्ति की सुरक्षा के लिए कई प्रकार के कदम उठाने चाहिए। इसके लिए सबसे महत्वपूर्ण यह होगा कि आतंकवादी गतिविधियों, बमबारी, अपहरण व विमान । अपहरण इत्यादि को रोकने के लिए एक सुदृढ़ पुलिस बल का निर्माण करना चाहिए। आतंकवादी सामान्यतया कार्यवाहियों में पृथक पृथक तरीकों का प्रयोग करते हैं जैसे कि खुफिया दस्तों द्वारा न पकड़े जाने के लिए अपने को गुप्त रखते हैं। इनकी इस पद्धति को असफल करने के लिए खुफिया पद्धति सूचना एकत्रीकरण, घुसपैठ, निगरानी इत्यादि में सुधार करना जरूरी है। जनता को संयुक्त योजना में सूचना व शिक्षा देकर उनसे आतंकवाद से लड़ने के लिए जन सहयोग लेना चाहिए। जनता की सुरक्षा के प्रति अत्यधिक सचेत रहने के लिए शिक्षित करना चाहिए।

बंदी को मुक्त कराना एक जोखिमपूर्ण कार्य है इसलिए पुलिस का मुख्य लक्ष्य बन्दी को बिना किसी क्षति छुड़ाना तथा अपराधी को पकड़ना होना चाहिए। यदि अपराधी की पकड़ बहुत महत्वपूर्ण है तो हमला करके पकड़ना चाहिए। और बंदी को छुड़ाना बहुत जरूरी है लेकिन मांग पूरी नहीं की जा सकती हो तो पुलिस को आतंकवादी को मार डालना चाहिए। इस प्रकार अपराधी को पकड़ना एक बहुत ही पेचिदा प्रक्रिया है। भिन्न घटना के लिए भिन्न पद्धति का प्रयोग करना चाहिए क्योंकि प्रत्येक घटना अपने आप में अनोखी होती है।

एक दूसरे की हत्या करने की प्रक्रिया की रोकथाम
प्रत्येक बदलती हुई पीढ़ी के साथ आतंकवाद का नया रूप आतां रहा। अतः प्रत्येक चुनौती से । निपटने के लिए शांति निर्माण प्रक्रिया में और ज्यादा सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करना चाहिए जिससे कि जनता को आतंकवाद से सुरक्षित रखा जा सके। प्रौद्योगिकी विकास विशेषकर । विस्फोटकों की तहकीकात, बढ़ती नियंत्रित निगरानी व खुफिया को आतंकवादियों की जनता के तथा लोगों के जान लेने की नितांत को रोकने के लिए एक साधन के रूप में लागू करना चाहिए। इस स्थिति में विश्व के लिए सैनिक ताकतों का .. त्याग.असंभव है क्योंकि ऐसे लोग हमेशा ही होंगे जो प्रदेशों या साधनों पर अनुचित कब्जा करने की महत्वाकांक्षा रखते हैं। वर्तमान स्थिति में सैनिक बलों का रूप ऐसा होना चाहिए जो शांति बनाये रखने तथा शांति निर्माण की भूमिका को धारण कर सके। हालांकि शांति निर्माण की भूमिका में ज्यादा दुर्घटनाएं होती हैं। जहां कहीं भी संभव हो प्रत्येक देश को अपने बलों को क्षेत्रीय आधार पर अपने पड़ोसी देश के लिए उपलब्ध कराना चाहिए। यह उसके लिए भी फायदेमंद होगा जिससे बल उपलब्ध कराया जाये क्योंकि विवाद का बढ़ जाना उसके लिए भी खतरनाक हो सकता है। इस प्रकार के. विवाद यदि क्षेत्रीय स्तर पर नहीं सुलझ पाये तो विश्व समाज का इसे रोकने का । दायित्व होगा तथा मानवतावादी सहायता उपलब्ध करानी चाहिए। इस हेतु संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के स्थाई सदस्यों में एकता जरूरी है। जैसे कि 1990 के खाड़ी संकट के दौरान देखने को मिला था विश्व के किसी भी भाग में आतंकवाद से निपटने के लिए इन महाशक्तियों को अपनी पूरी क्षमता एक साथ लगानी पड़ी व सैनिक बल उपलब्ध कराना पड़ा। बड़ी दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सरकारों को संयुक्त राष्ट्र शांति स्थापक दल हेतु धन देना चाहिए। जिससे इसे रोका जा .. सके। शांति स्थापना की गतिविधी आज आम धारणा कार्य हो गई है। इस हेतु संयुक्त राष्ट्र संघ में देशों को पर्याप्त मात्रा में धन का योगदान देना चाहिए जिससे की संकट के समय सक्रिय व सकारात्मक कदम उठाये जा सके। स्पष्ट है कि संयुक्त राष्ट्र संघ जैसे मंच से सभी देशों को आतंकवाद के विरूद्ध पूरी क्षमता से लड़ना चाहिए जो कि विश्व समाज के हित में होगा।

आतंकवादी गतिविधियों को रोकने के कानून
इन सालों में बढ़ती आतंकवादी हिंसा ने संपूर्ण विश्व समुदाय का ध्यान आकृषित किया है। संयुक्त राज्य अमरीका ने आतंक से निपटने के लिए अंतर्राष्ट्रीय प्रयत्नों को विकसित करने में अहम भूमिका अदा की। संपूर्ण विश्व के देशों ने कूटनीतिक और दूतावास की सुरक्षा के लिए कठोर कदम उठाये हैं, जिससे विदेशी दूतावास को कब्जे में करने की घटनाओं में कमी आई है। इसी तरह 1910 से विश्व ने हवाई सुरक्षा साधनों को विकसित करने को गंभीरता से लिया और यह तब संभव हुआ जबकि एरियल नेवीगेशन को नियमित करने के संबंध में एक सम्मेलन हुआ था। अपहरणकर्ता पर अभियोग चलाने में सबसे कठिन बाधा दूसरे देशों द्वारा अपराधी को शरण दे देने की प्रवृत्ति है जिससे कि अबाध रूप से हवाई जहाज को कब्जे में करने को रोकने के अंतर्राष्ट्रीय प्रयत्न विफल हो रहे हैं।

राजनीतिक अपराध शब्द अभी भी अस्पष्ट होने की वजह से राजनीतिक शर्णार्थियों या राजनीतिक दलों को शरण देने का राष्ट्र हमेशा औचित सिद्ध करते हैं। फरारी अपराधियों को राजनीतिक अपराध के बहाने शरण देकर अंतर्राष्ट्रीय वायुमार्गों के लिए गंभीर खतरा पैदा करते हैं क्योंकि हवाई जहाज का अवैध रूप से कब्जा करना अनेक गंभीर अपराधों से संबंधित है।

ऐसी घटनाओं की गंभीरता को देखते हुए यूरोपिय देशों ने आतंकवाद को रोकने के लिए अनेक कदम उठाये । यद्यपि इन देशों का प्राथमिक उद्देश्य नागरिक उड्डयन में अवैध हस्तक्षेप को रोकना था लेकिन इसके अंतर्गत बम हथगोला, रॉकेट इत्यादि के प्रयोग को रोकना भी आता है। 17 जुलाई 1978 में विमान अपहरण पर एक अनौपचारिक अंतर्राष्ट्रीय संधि हुई जिसमें न केवल अपहरणकर्ता को प्रतयावर्तित या अभियोग चलाने का निर्णय लिया बल्कि उन देशों का बहिष्कार करने का निर्णय भी हुआ जो इस कार्य में सहयोग नहीं देते हैं। देशों की पुलिस व खुफिया एजेंसियों के बीच आपसी सहयोग को बढ़ाने के लिए इनकी नियमित बैठकें हो रही हैं। लेकिन वास्तव में इन संधियों का कोई सकारात्मक प्रभाव नहीं हुआ क्योंकि ज्यादातर सरकारें अपने राष्ट्रीय हितों से निर्देशित होती हैं। संयुक्त राष्ट्र संघ भी इस हेतु ज्यादा कुछ नही कर पा रहा है। क्योंकि अरब अफ्रीका व लैटिन अमरीका के देशों में आतंकवाद को खुले आम प्रायोजित व समर्थन किया जाता रहा है। दरअसल ये देश आतंकवाद को अपने राजनीतिक तथा आर्थिक लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए एक वैध व उचित साधन मानते हैं।

आतंकवाद का एक उद्देश्य यह भी है कि वे गवाहों तथा जूरी को धमका कर वैध प्रणाली को असफल करना हैं। सरकार पर उत्पीड़न और दमन करने का आरोप लगाने के लिए ये एक विश्वस्त आधार का निर्माण करते है। संदेशवाहक के द्वारा प्रमाण तथा खबर देने के लिए उसे आर्थिक रूप से प्रोत्साहित करते हैं तथा जरूरत के समय संरक्षण भी देते हैं। अतः सरकार को यदि इच्छित हो तथा संभव हो तो संदेशवाहक को आर्थिक सहयोग करना चाहिए जिससे वे नई जगह अपना जीवन बिता सके। संदेशवाहक को दिये जाने वाला धन आतंकवादियों से क्षति वस्तु की कीमत से ज्यादा है तो इसे नजरंदाज किया जा सकता है। इसके अलावा दूसरे भयभीत करने के तरीकों को भी बहुत सतर्कता से लेना चाहिए।

इसके अलावा विस्फोटकों, सेनाओं तथा गोलाबारूद्ध के आवागमन व स्थिति के कार्यान्वयन की कड़ी निगरानी के लिए कानूनी प्रक्रिया को मजबूत करना चाहिए। सभ्य राष्ट्रों को एक ऐसा समझौता करना चाहिए जिससे विस्फोटक सामग्री को रंगीन प्रणाली कोड में रखा जा सके। जिससे अपने स्रोतों की खोज की जा सके तथा अपनी प्रगति को रिकार्ड कर सके। कानून जो न केवल .अपराधियों के संदेशवाहक तथा समर्थकों को तलाश कर सकेंगे बल्कि उन घरों की भी खोज कर सकेंगे जो इन्हें शरण देते हैं। ये कदम आतंकवाद को रोकने में सहायक होंगे। प्रश्नकाल के दौरान उन लोगों को कुछ समय भी राहत नहीं देनी चाहिए जिससे कि आतंकवाद इन्हें अपने अनुसार फसाने में सफल हो सके। आतंकवाद से लड़ने के लिए जो नियम बनाये जाते हैं उसके दायरे में वकीलों को भी लेना चाहिए जिससे कि ये लोग अधिकारों का दुरूपयोग व कानूनी प्रक्रिया में बाधा पहुंचा कर आतंकवादियों के कार्यों को समर्थन न दे सकें।

आतंकवादी व आपराधिक हिंसाओं को चलाने या प्रायोजित करने में नशीली दवाओं के व्यापार से आने वाले लाभ का सबसे बड़ा हाथ है। नशीली दवाओं की तस्करी न केवल अवैध धन को बढ़ाता है बल्कि नकली नोटों की छपाई आदि को भी बढ़ाने में सहयोग देता है। इस प्रकार नशीली दवाओं की तस्करी को ही नहीं रोकना अंपितु अनुचित तरीके से अर्जित धन को भी रोकना होगा। इसे सार्थक बनाने के लिए बैंक को खातेदारी के खातों की पुलिस व न्यायिक अधिकारियों के लिए. उपलब्ध करने के लिए बाध्य होना पड़ेगा। इस हेतु पश्चिमी देशों की सरकारों को इस प्रकार का विधान बनाना चाहिए जिससे विदेशी बैंको जो अपना ब्यौरा नहीं रखते उनसे सौदेबाजी को रोका जा सके। कुछ आवश्यक क्षेत्रों में आतंकवाद को रोकने के लिए तकनीकि अनुसंधान को विकसित करना चाहिए। ये क्षेत्र हैं विस्फोटकों की खोज, प्रतिरूप धारण प्रक्रिया तथा खुफिया यंत्रों के सहयोग इत्यादि। हथियारों की प्रकृति में कुछ सालों से कोई ज्यादा बदलाव नहीं आया है। हाथ से संचालित मिसाइल जो कि आतंकवादियों को हाल ही में उपलब्ध हुई वह 1984 में विकसित हुआ था। लेकिन एक सकारात्मक लक्षण यह आया कि विकास की वजह से विशेषकर विस्फोटक खोज तकनीक में, सुरक्षा तकनीक में भी काफी उत्तमता आई है। हालांकि आतंकवादी दल हमेशा ही हर प्रकार के हथियार व विस्फोटकों की खोज में लगे रहते हैं। लेकिन वास्तविक रूप से जो खतरनाक स्थिति आई है वह है आतंकवाद के क्षेत्र में आपराधिक तत्वों के आ जाने से राजनीतिक उददेश्य प्रेरित आतंकवादी अपराध उद्देश्य प्रेरितं आतंकवादियों के रूप में बदल गए हैं। लेकिन यह ध्यान देना महत्वपूर्ण है कि ऐसे कुछ ही गिने चुने लोग हैं जो लोकतांत्रिक सरकार पर अपनी मांग को। मनवाने के लिए दबाव, आतंकवादी तकनीक से डालते हैं। विचारों की भिन्नता को यदि वे प्रकृति में रचनात्मक है तो प्रोत्साहित करना चाहिए लेकिन विसम्मति चाहे कितनी भी ज्यादा हो उसकी औचित्यता को हत्या, बमबारी या जख्मी करने से नहीं माप सकते हैं। अपराध नागरिक समाज की स्वतंत्रता को कम करता है। युग के चलते हुए तथा संपूर्ण इतिहास में नागरिक बहुमत ने दूसरों पर हमला करने या हानि पहुंचाने की स्वेच्छा परं. विधि के शासन का हमेशा समर्थन किया है। हर समाज चाहे उसका राजनीतिक रूप कैसा भी हो उसे आतंकवाद से अपने को बचाने का हक होना चाहिए। प्रत्येक लोकतांत्रिक समाज को अपना विधि का शासन बनाये रखना चाहिए तथा नागरिक समाज की स्वतंत्रता को कायम रखने और लोगों को आतंकवाद से बचाने के साधनों के बीच एक संतुलन बनाये रखना चाहिए। अल्पसंख्यक आतंकवादियों की अपहरण व हत्या की प्रक्रिया को बहुमत को शांति से जीने व नागरिक समाज की स्वेच्छा को कुलचना नहीं चाहिए चाहे कैसी भी परिस्थिति क्यों न हो। आतंकवाद की रोकथाम की प्रक्रिया अंतिम रूप से सरकार की नीतियों की प्रकृति पर आधारित है तथा यह कानून लागू करने वाली ऐसी एजेंसी है जिसे गैर राजनीतिक संदर्भ में काम करना पड़ता है।

बोध प्रश्न 3
टिप्पणी प) अपने उत्तर के लिए नीचे दिए गए रिक्त स्थान का प्रयोग कीजिए।
पप) इस इकाई के अंत में दिए गए उत्तर से अपने उत्तर की तुलना किजिए।
1) आतंकवाद को रोकने का कोई एक तरीका सुझाएं।
2) नागरिकों को आतंकवादियों के विरूद्ध संदेश या प्रमाण देने के लिए कैसे प्रोत्साहित किया जाये।

 बोध प्रश्नों के उत्तर

बोध प्रश्न 3
1) आतंकवाद को रोकने के महत्वपूर्ण साधनों में एक खुफिया एजेंसी। अतः खुफिया तकनीक में सुधार करके आतंकवाद को रोका जा सकता है।
2) नागरिकों की सुरक्षा को बढ़ाकर व उन्हें पर्याप्त मात्रा में पुरस्कार देकर, इन्हें आतंकवाद के विरूद्ध में प्रमाण व संदेश देने के लिए प्रोत्साहित किया जा सकता है।

साराश
हमने इस इकाई में आतंकवाद एक हिंसात्मक रणनीति, जो जनता के द्वारा बिना किसी कारण को समझे सरकार या राज्य के विरूद्ध अपने उद्देश्यों को प्राप्त करने के लिए प्रयोग की जाती है का वर्णन किया है। जब विभिन्न आतंकवादी दलों के बीच अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर संपर्क स्थापित हो जाता है तब अंतर्राष्ट्रीय अस्तित्व में आता है। आतंकवाद को राष्ट्रीय व अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर इन रूपों में दर्शाया जा सकता है। (क) पृथकीय और अपृथकीय आतंकवाद (ख) दक्षिणपंथी और वामपंथी आतंकवाद, (ग) राष्ट्रवादी और पृथकतावादी आतंकवाद । इनको हल करने के लिए अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद के विविध तरीकों को गिना जाता है। समकालीन भूमंडलीय आतंकवाद मध्यपूर्व में उदय हुआ तथा धीरे धीरे इसकी शाखाएं अमरीका व पश्चिमी यूरोप के देशों में फैलती जा रही हैं। तकनीकि रूप से उन्नत हथियारों के प्रयोग ने आतंकवाद को गतिशील व प्राणघातक बना दिया है। आतंकवाद भिन्न देशों में भिन्न रूप में व्याप्त है तथा सरकार के भी इसे समाप्त करने के भिन्न-भिन्न तरीके होते हैं। इस हेतु, अंतर्राष्ट्रीय आतंकवाद का ग्रामीण व शहरी दृष्टिकोण से अध्ययन किया जाता है। इन क्षेत्रों में आतंकवाद के भिन्न रूप होने की वजह से इन्हें रोकने के तरीके भी सामान्यतया भिन्न होते हैं। अंत में हमने यह बताया कि भूमंडलीय पैमाने पर बंद रहे आतंकवाद को कैसे रोका जा सकता है। प्रत्येक नई पीढ़ी के साथ उभरते हुए आतंकवाद के रूप के लिए कुछ। कदम उठाने चाहिए जैसे जन दुर्घटनाओं को रोकना, नागरिकों व राज्य अधिकारियों के बीच सकारात्मक संपर्क स्थापित करना. इत्यादि। शांति निर्माण में संयुक्त राष्ट्र संघ एक महत्वपूर्ण भूमिका अदा कर सकता है। विश्व के सभी देशों को साथ मिलकर इस संगठन के लिए धन की व्यवस्था करनी चाहिए जिससे यह संकट के समयं सकारात्मक कदम उठा सके। इसके अलावा, विश्व के अग्रिम देश विशेषकर अमरीका को आतंकवाद को रोकने के लिए प्रभावकारी कानून व नियम बनाने चाहिए। क्योंकि अंतिम रूप से ये ही देश प्रभावकारी होंगे। कानूनी प्रक्रिया को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ करना चाहिए तथा नियंत्रण के साधनों को सख्ती से लागू करना चाहिए।

शब्दावली
भयभीत करना ः अधीनता स्वीकार कराने के लिए किसी से लड़ना। आतंकवादी भयभीत करने की तकनीक का प्रयोग सरकार या नागरिकों को धमकाने के लिए करते हैं तथा उन्हें अपनी अवैध मांगों के सामने समर्पण के लिए तैयार करते हैं।
निगरानी ः इसका अर्थ है गहराई से देखना। इसे निरीक्षण के विकल्प के रूप में प्रयोग किया जाता है।
गुरिल्ला ः यह अनियमित सशस्त्रबल का एक सदस्य है जो कि अपने अपको स्थापित शक्ति अर्थात् सरकार से संघर्षरत्त रखता है।
प्राणघातक ः घातक या खतरनाक। यह सामान्यतया हथियार से संबंधित है जिसका प्रयोग विध्वसंक काम में होता है जैसे कि आण्विक हथियार।

कुछ उपयोगी पुस्तकें
कलुटरबक, रिचार्ड, ‘‘टेरैरिज्म इन एन अनसटेबलवर्ल्ड (रॉटलेज, लंदन एण्ड न्यूयार्क, 1994)
घोष, एस के, ‘‘टेरेरिज्म: वर्ल्ड अण्डरसीज (आशीष पब्लिशिंग हाऊस, नई दिल्ली, 1995)
क्वारलेस, सी एल, ‘‘टेरेरिज्म-अवाइडेन्स एण्ड संईिवल (लूटर वर्ल्ड -हेनिभान, यू एस ए, 1991)
राय, एन पी, टेरेरिज्म -वाइलेन्स एण्ड हयुमैन डिस्ट्रेक्शन-क्योजिज, इफेक्ट्स एण्ड कंट्रोल
मिर्जेर्सेज (अनमोल पब्लिशर्स, नई दिल्ली 1992)
वार्डलेक, जी ‘‘पॉलिटिकल टेरैरिज्म (कैम्बिज यूनिवर्टी प्रेस, 1982)