वर्चस्व किसे कहते हैं | वर्चस्व की परिभाषा क्या होती है अवधारणा अर्थ मतलब in english Supremacy in hindi

By   December 9, 2020

Supremacy in hindi वर्चस्व किसे कहते हैं | वर्चस्व की परिभाषा क्या होती है अवधारणा अर्थ मतलब in english ?

शब्दावली वर्चस्व
वर्चस्व: यह संख्यात्मक, आर्थिक और राजनैतिक महत्ता है।
ओबीसी: पारंपरिक क्रम-परंपरा में निम्न क्रम में स्थिति जातियां (अन्य पिछड़ा वर्ग)
संस्कृतीकरण: यह ऐसी प्रक्रिया है जिसमें निम्न जाति ऊर्ध्व गतिशीलता प्राप्त करने की दृष्टि से ऊंची जाति के गुणों और जीवनशैली की नकल करती है।

कुछ उपयोगी पुस्तकें
सत्यमूर्ति, टी.वी. (संपा) .1996, रीजन, रिलीजन, जेंडर एंड कल्चर इन कंटेम्परेरी इंडिया, दिल्ली ऑक्सफर्ड यूनि. प्रेस
पनंदिकर पई, वी.ए. (संपा) 1997, द पॉलिटिक्स ऑव बैकवार्डनेस, नई दिल्ली कोर्णाक पब्लिशर्स
जेलियट, ई. 1992, फ्रॉम अनटचेबल टू दलित, नई दिल्ली मनोहर

सारांश
भारतीय संविधान के प्रावधानों के अंतर्गत राज्य से अन्य पिछड़ी जातियों समेत तमाम सभी निर्बल वर्गों की समस्याओं की ओर विशेष ध्यान देने की अपेक्षा की जाती है। सरकार को यह जिम्मेदारी दी गई है कि इन वर्गों की रक्षा के लिए प्रावधान करे ताकि वे उन लोगों से स्पर्धा कर सकें जिनकी स्थिति मजबूत रही है और जिनकी गतिशीलता जन्म से मिली वंचना के कारण पंगु नहीं रहती। उनके उत्थान के लिए अनुसूचित जातियों, जनजातियों और ओबीसी के लिए सरकारी नौकरियों में दिया गया आरक्षण ऐसा ही प्रावधान है। इसके अलावा स्कूलों, कॉलेजों और उच्च शैक्षणिक व्यावसायिक संस्थानों में भी उनके बच्चों के लिए सीटें आरक्षित रखी गई हैं। सकारात्मक भेदभाव के ये उपाय वंचितों को अधिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए किए गए हैं, ताकि साधन संपन्न लोग अपनी स्थिति का अनुचित लाभ नहीं उठा सकें।

बोध प्रश्न 1
1) ज्योति राव फुले और बहुजन समाज पर पांच पंक्तियों में एक नोट लिखिए।
2) कर्नाटक में जातिगत संगठनों के प्रभाव के बारे में पांच पंक्तियों में बताइए।
3) उत्तर प्रदेश में ओबीसी की दशा के बारे में बताइए। वे दृढ़ क्यों नहीं हैं? पांच पंक्तियों में उत्तर दीजिए।

बोध प्रश्न 2
1) ज्योति राव फुले ने सबसे पहले महाराष्ट्र बहुजन समाज का गठन करके अल्पसंख्यक ब्राह्मणों की श्रेष्ठता को चुनौती देने का प्रयास किया था। फुले ने अ-ब्राह्मण लोगों, के अनुष्ठानों से ब्राह्मणों को अलग रखने के लिए आंदोलन छेड़ा।
2) कर्नाटक में शक्तिशाली पिछड़ी जातियों के संगठनों ने प्रजामित्र मंडल के परचम तलेब्राह्मणों के विरुद्ध आंदोलन किया। उनके सफल आंदोलन के फलस्वरूप नौकरशाही और राजनीति पर ब्राह्मणों की पकड़ कमजोर हुई।
3) उत्तर प्रदेश में मध्यवर्ती जातियां या ओबीसी मजबूती से नहीं उभरी। मझोली जातियों ने ऊर्ध्व गतिशीलता के लिए संस्कृतीकरण का मार्ग अपनाया। स्थितियां मध्यवर्ती जातियों और उनके आंदोलन के लिए प्रतिकूल रहीं। यह स्थिति स्वतंत्रता तक बनी रही, जिसके बाद कुछ राजनेताओं ने स्थिति को बदलने का प्रयास किया।

इकाई 22 अन्य पिछड़ी जातियां
इकाई की रूपरेखा
उद्देश्य
प्रस्तावना
अन्य पिछड़ी जातियों में आंतरिक भेद
राज्यवार वितरण
संस्कृतीकरण और सामाजिक गतिशीलता
पिछड़े वर्गों के आंदोलन और उनका राजनीतिक-आर्थिक उदय
आत्म-सम्मान आंदोलन
कर्नाटक प्रजामित्र मंडल
आंध्र और केरल के आंदोलन
उत्तर प्रदेश में अन्य पिछड़ी जातियां
बिहार में अन्य पिछड़ी जातियां
शिक्षा और मूल्य
जाति, वर्ग और सत्ताधिकार
सारांश
शब्दावली
कुछ उपयोगी पुस्तकें
बोध प्रश्नों के उत्तर

उद्देश्य
इस इकाई को पढ़ लेने के बाद आपः
ऽ अन्य पिछड़ी जातियां या वर्ग कौन हैं यह बता पाएंगे,
ऽ अन्य पिछड़ी जातियों में आंतरिक विभेदन को स्पष्ट कर सकेंगे,
ऽ अन्य पिछड़ी जातियों की मौजूदा रचना और उनका राज्यवार वितरण समझ पाएंगे,
ऽ पिछड़ी जातियों के बारे में बता सकेंगे, और
ऽ पिछड़े वर्ग के आंदोलनों और उनके राजनीतिक-आर्थिक उदय के बारे में बता सकेंगे।