ह्रदय की संरचना समझाइये ? हृदय कितने प्रकार के होते हैं कार्य क्या है ? structure of heart in hindi

By  

structure of heart in hindi ह्रदय की संरचना समझाइये ? हृदय कितने प्रकार के होते हैं कार्य क्या है ?

ह्रदय :

ह्रदय के प्रकार

  • प्राप्त करने वाले रक्त के प्रकार के आधार पर –
  • venous heart : केवल अनोक्सीकृत रूधिर प्राप्त करता है | उदाहरण – मछलियों का ह्रदय केवल गिल्स को छोड़कर सारे शरीर से अनाक्सीकृत रूधिर प्राप्त करता है |
  • Arterio venous heart :शरीर से अनोक्सीकृत रूधिर प्राप्त करता है और फेफड़े से ऑक्सीकृत रूधिर प्राप्त करता है | उदाहरण –Amphibians , Reptiles , Birds , Mammals.
  • Impulse की उत्पत्ति के आधार पर ह्रदय दो प्रकार का होता है –
मायोजैनिक न्यूरोजैनिक
ह्रदय धड़कन के लिए आवेग ह्रदय पेशियों में उत्पन्न होते हैं |

उदाहरण – कॉर्डेट्स और सिफैलोपोडा (ऑक्टोपस)

ह्रदय धडकन के आवेग तंत्रिकाओं से उत्पन्न होते है |

उदाहरण – अधिकांश इन्वर्टीब्रेट

 

  • संरचना के आधार पर ह्रदय निम्नलिखित प्रकार का होता है –
  • नलिकाकार ह्रदय – उदाहरण – इन्सेक्ट (कॉकरोच – 13 कोष्ठीय)
  • स्पंदन वाहिनी – ऐनेलिड्स , होलोथूरियन्स और एम्फिऑक्सस |
  • कोष्ठीय ह्रदय – वर्टीब्रेट और मोलस्क का ह्रदय |
  • Ampullar accessory hearts – Branchial heart of cephalopods (e.g. Octopus) , insects , heart bulbils of amphioxus , lymph heart of frog.

यह अधिकांशत: वक्ष गुहा के मध्य फेफड़ों के मध्य स्थित होता है | इसका निचला शंकुनुमा भाग बायीं तरफ होता है | यह खोखला पेशीय शंकुनुमा अंग है | यह मुट्ठी के आकार का होता है और वजन लगभग 300 ग्राम होता है | यह एक झिल्लीनुमा आवरण में बंद होता है | जिसे पैरीकार्डियम कहते हैं | यह निम्नलिखित परतों से मिलकर बना होता है –

  • तंतुनुमा पेरीकार्डियम – यह ढीली व्यवस्थित और अप्रत्यास्थ आवरण है | यह सफ़ेद तन्तु उत्तकों से बनी होती है |
  • सीरस पेरीकार्डियम – यह चिकनी और नम होती है और दो पतली परतों से बनी होती है –
  • पेराइटल परत : रेशेदार पेरीकार्डियम की लाइनिंग बनाती है |
  • विसरल परत अथवा एपिकार्डियम ह्रदय से चिपकी रहती है और इसका बाह्य आवरण बनाती है |

सीरस पैरीकार्डियम की पैराइटल और विसरल परत के मध्य पैरीकार्डियल स्थान होता है | जिसमें पैरीकार्डियल द्रव भरा होता है |

कार्य : पेरिकार्डियम ह्रदय की घर्षण और क्षति से सुरक्षा करता है | पेरीकार्डियल द्रव ह्रदय को नम बनाए रखता हैं |

ह्रदय भित्ति की संरचना : ह्रदय की दीवार दोनों आलिन्द और निलय में निम्न तीन परतों से बनी होती है –

  • बाहरी पतली परत – एपिकार्डियम सीरस पैरीकार्डियम से व्युत्पन्न होती है |
  • मध्य पेशीय परत – मायोकार्डियम , कार्डियम पेशियों से बनी होती है | इनमें सम्पूर्ण जीवन बिना रुके संकुचन और शिथिलन होता रहता है |
  • अन्तस्थ परत (inner layer) – एन्डोकार्डियम , एण्डोथिलियल लाइनिंग से बनी होती है |

ह्रदय की संरचना : ह्रदय चार प्रकोष्ठीय संरचना है जिसमें दो आलिन्द और दो निलय होते है | ह्रदय , मोटे तौर पर अग्र छोटा भाग आलिन्द और पश्च बड़ा भाग निलय में विभाजित होता है | यह क्षैतिज खाँच जिसे आलिन्दनिलयी खाँच कहते है , की सहायता से विभाजित होते हैं | अन्य तिर्यक खाँच बड़े निलय भाग को दायें और बाएँ निलय में बाँटती है | यह खाँच अन्तरा निलय खांच कहलाती है | यह ह्रदय के ऊपरी भाग से आगे की तरफ और पीछे की ओर और बायीं तरफ विस्तरित होती है लेकिन एपेक्स तक नहीं पहुँचती |

आलिन्द : आलिन्द पतली भित्तियुक्त संरचना है | दो आलिन्द एक दूसरे से उधर्व भाग द्वारा पृथक होते है जिसे अंत: आलिन्द पट अथवा अन्तराआलिन्द पट कहते हैं | इस पट में एक छोटा अंडाकार छिद्र होता है | जिसे फोसा ओवेलिस कहते है जो कि आलिन्दों को जोड़ने वाले फोरामेन ओवेल का बचा हुआ भाग है | भ्रूणावस्था के दौरान रक्त दायें आलिन्द से बाएँ आलिन्द में प्रवेश करता था क्योंकि फेफड़े अभी तक क्रियात्मक नहीं होते हैं | हालाँकि वयस्कावस्था में फोरामेन आवेल बंद हो जाता है और फेफड़े क्रियाशील हो जाते हैं |

आलिन्दों की आंतरिक सतह चिकनी होती है यद्यपि आलिन्दीय उपांग उभारों का नेटवर्क होता है , जिन्हें पेशीय pectinati (musculi pectinati) कहते हैं | दायाँ आलिन्द (superior vena cava) उच्च महाशिरा , निम्न महाशिरा और कोरोनरी साइनस से अनाक्सीकृत (अशुद्ध) रक्त प्राप्त करता है | Postcaval की ओपनिंग एक झिल्लीनुमा वलन द्वारा सुरक्षित होती है जिसे यूस्टेकियन वाल्व कहते है |

दायाँ आलिन्द ह्रदय की दीवारों से कोरोनरी साइनस द्वारा शिरीय रक्त प्राप्त करता है | इसकी ओपनिंग थीबेसियन कपाट (thebasian valve)द्वारा रक्षित होती है | बायां आलिन्द पल्मोनरी शिरा से ऑक्सीकृत रूधिर प्राप्त करता है | आलिन्द सम्बन्धित आलिन्द निलयी छिद्र द्वारा निलय में खुलता है | दायाँ आलिन्द निलयी छिद्र त्रिवलनी कपाट द्वारा रक्षित होता है |

बायाँ आलिन्द निलयी छिद्र द्विवलनी कपाट (मिट्रल कपाट) द्वारा रक्षित होता है | कपाटों के मुक्त किनारें chordae tendinaeद्वारा पैपिलरी पेशियों अथवा columnaecarneaeसे जुड़े होते हैं |

निलय : निलय मोटी भित्ति युक्त संरचना है | इसमें शरीर के दूरस्थ भागों में रक्त को पम्प किया जाता है | बाएँ निलय की भित्ति तुलनात्मक रूप से अधिक मोटी होती है | दोनों निलय एक दूसरे से पूर्ण रूप से एक तिर्यक अंतर निलय पट द्वारा पृथक होते हैं | निलयों की आंतरिक सतह एक निम्न पेशीय उभार के छोटे जाल को उत्पत्ति देती है जिसे columnaecarneaeकहते हैं | इनमें से कुछ उभार बड़े शंकुनुमा होते है और musculipapillarisकहलाते है | त्रिवलन और द्विवलन कपाट के मुक्त किनारे ह्रदयारज्जु (chordae tendinae)द्वारा जुड़कर आलिन्द निलयी छिद्र की रक्षी करते हैं |

पल्मोनरी aorta दायें निलय से उत्पन्न होता है और शिरीय रक्त को ऑक्सीकृत होने के लिए फेफड़ों में ले जाता है | पल्मोनरी aorta के आधार पर तीन अर्धचंद्रकार कपाट उपस्थित होते हैं जो कि रक्त के व्युत्क्रम प्रवाह को रोकते हैं | बायीं महाधमनी बाएँ निलय के दायें अन्त सिरे में उत्पन्न होती है और शरीर के विभिन्न भागों में ऑक्सीकृत (शुद्ध) रूधिर ले जाती है | तीन अर्द्धचंद्राकर कपाट रक्त को केवल निलय से aorta में जाने देते हैं | वयस्क में जहाँ पल्मोनरी , aorta , सिस्टेमिक aorta को पार करता है वहां एक पेशीय स्ट्रेंड जिसे लिगामेन्ट्स आर्टियोसम कहते हैं , उपस्थित होता है | भ्रूणीय स्थिति के दौरान दोनों महाधमनी एक धमनी द्वारा एक दूसरे से जुड़ी होती है जिसे ductusarteriosus (duct of botalus) कहते हैं |