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मैैथुन व वीर्य संचन ( semen irritation) , निषेचन(Fertilization) in hindi

semen irritation Fertilization in hindi मैैथुन व वीर्य संचन , निषेचन

मैैथुन व वीर्य संचन ( semen irritation) :-

लैगिम उतेजित अवस्था में शिश लम्बा एवं कठोर हो जाता है तथा पुरूष के द्वारा शिशन मादा की योनि में प्रयोग कराया जाता है इस क्रिया को मैथुन या संभोग भी कहते है पुरूष एवं स्त्री की मैथुन क्रिया के दौरान शुक्रजनक नलिकाओं से शुक्राणु मोचित उत्सर्जितहोते है तथा मादा की योनि में छोडे जाते है इस क्रिया को वीर्य मोचन कहते है।

मैथून क्रिया के दौरान एक बार में 20-30 करोड शुक्राणु मादा की योनि में छोडे जाते है सामान्य उर्वरता हेतु लगभग 60 प्रतिशत शुक्राणु सामान्य आकार एवं आकृति वाले होने चाहिए इसी प्रकार सामान्य जनन क्षमता हेतु लगभग 40 प्रतिशत शुक्राणु तीव्र गतिशीलता प्रदर्शित करने चाहिए।

निषेचन(Fertilization):-

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योनि से शुक्राणु लेनी से गति करते हुए गर्भाशय जीवा में पहुंचते है तथा वहाँ से क्रमशः गर्भाशय एवं अण्डवाहिनी ेमें संकीर्ण पथ एवं तुम्बिका के संधि स्थल तक पहुंचते है इसी दौरान अण्डोत्सर्ग के कारण द्वितीय अण्ड कोशिका की संधि स्थल तक पहुंच जाती है इसमें अर्द्धसूत्री विभाजन:-प्प् होता है। तथा यह अण्डाणु में बदल जाता है। शुक्राणु का एक्रोसोम अण्ड के भेदन में सतायता करता है शुक्राणु अण्डाणु में प्रवेश करता है तथाअण्डाणु एवं शुक्राणु के केन्द्रक आपस में संयुक्त हो जाते है इस क्रिया को निषेचन कहते है। शुक्राणु के प्रवेश के पश्चात् अण्डाणु के बाहरी स्तर में बदलाव आता है जो अतिरिक्त शुक्राणुओं के प्रवेश को रोकता है।

प्रत्येक संभोग क्रिया निषेचन तक नहीं पहुंचती है क्योकि निषेचन हेतु शुक्राणु एवं अण्डाणु का एक ही समय अण्डवाहिनी के संकीर्ण पथ एवं तुम्बिका के संधिस्थल तक पहुंचना आवश्यक है।

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