राजस्थान का दूसरा भामाशाह किसे कहा जाता है | द्वितीय भामाशाह किसे कहते है second Bhamashah of rajasthan in hindi

By   February 6, 2021

second Bhamashah of rajasthan in hindi राजस्थान का दूसरा भामाशाह किसे कहा जाता है | द्वितीय भामाशाह किसे कहते है ?

प्रश्न : अमरचंद बांठिया (दूसरा भामाशाह) के बारे में लिखिए। 

उत्तर : देश के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम (1857) में जिस प्रथम व्यक्ति को ब्रिटिश सत्ता ने फाँसी पर लटकाया वह राजस्थान निवासी अमरचंद बांठिया था जो ग्वालियर में अपना व्यापार चलाता था। उसने अपनी पूरी धन सम्पति तात्यां टोपे को देने का प्रस्ताव किया जिससे वह आजादी की लड़ाई को चालू रख सके। यही कुर्बानी बाद में उसकी फांसी का कारण बनी।

 प्रश्न : विजयसिंह पथिक के बारे में जानकारी दीजिये। 

उत्तर : विजय सिंह पथिक जी ने ‘तरुण राजस्थान’ आदि समाचार पत्रों के माध्यम से राजस्थान में जनजागृति फैलाने में महती भूमिका निभाई। संकट की घड़ी में राजस्थान की जनता और स्वतंत्रता सेनानी विजयसिंह पथिक जी से ही प्रेरणा पाते थे।

प्रश्न : वर्धमान विद्यालय क्या है ?

उत्तर : अर्जुनलाल सेठी द्वारा 1917 में जयपुर में इस क्रांतिकारी संस्था की स्थापना की। अभिनव भारत द्वारा भर्ती युवकों को प्रशिक्षण इसी संस्था द्वारा दिया जाता था। जोरावरसिंह बारहठ और प्रतापसिंह बारहठ इसी स्कूल से थे।

प्रश्न : पुत्री पाठशाला ?

उत्तर : कन्हैयालाल ढूंढ और गोपालदास द्वारा 1934 में चुरू में इस सामाजिक संस्था की स्थापना की। इस संस्था ने स्त्री शिक्षा के लिए महत्वपूर्ण कार्य किये।

प्रश्न : हरदयाल भटनागर ?

उत्तर : प्रोफेसर रूपलाल भटनागर के पुत्र हरदयाल (1817-57 ईस्वीं) का जन्म भरतपुर जिले के ‘कामा’ में 1817 ईस्वीं में हुआ। 1857 ईस्वीं की क्रान्ति के समय इसने सक्रीय भूमिका अदा की। उस समय कोटा का मुख्य प्रशासक जयदयाल भटनागर इसका बड़ा भाई था। मार्च , 1857 में जनरल राबर्ट्स की सेना से युद्ध करते हुए हरदयाल भटनागर शहीद हुआ।

राजस्थान के प्रमुख पुरुष स्वतंत्रता सेनानी

प्रश्न : पं. अभिन्न हरि ?
उत्तर : कोटा में जनजागृति के पुरोधा। 1927 में ‘कल्पवृक्ष’ और 1930 ईस्वीं में ‘कर्मवीर’ , ‘रणभेरी’ कोटा से ‘लोक सेवक’ और दिल्ली से ‘अग्रसर’ नामक पत्र प्रकाशित किये। 1934 में पं. नयनूराम शर्मा के साथ ‘हाड़ौती प्रजा मण्डल’ की स्थापना की।
प्रश्न : पं. नयनू राम शर्मा ?
उत्तर : हाड़ौती में जनसाधारण का अग्रदूत। ‘हाड़ौती सेवा संघ’ , हाड़ौती शिक्षा मंडल , हाड़ौती प्रजामण्डल (1934 ईस्वीं) और कोटा राज्य प्रजामण्डल (1938 ईस्वीं) की स्थापना की।
प्रश्न : पं. ताड़केश्वर शर्मा ?
उत्तर : खादी प्रचार , हरिजन सेवा और शिक्षा कार्य , नमक विरोधी आंदोलन किया। शर्मा जाट सभा , किसान सभा और जाट किसान पंचायत से सम्बद्ध रहे। आगरा से ‘गणेश’ नामक पत्र का प्रकाशन किया।
प्रश्न : पं. नरोत्तमलाल जोशी ?
उत्तर : शेखावाटी में ‘जकात आंदोलन’ का नेतृत्व किया। जयपुर प्रजामण्डल के सक्रीय कार्यकर्त्ता रहे। 1945 में संविधान निर्मात्री समिति के सदस्य रहे। प्रथम विधानसभा के अध्यक्ष बने।
प्रश्न : कुंज बिहारी लाल मोदी ?
उत्तर : अलवर में जनजागृति का कार्य किया। 1937 में ‘अलवर पत्रिका’ प्रकाशित कर जनसमस्याओं से लोगों और राज्य को अवगत कराया।
प्रश्न : जुगल किशोर चतुर्वेदी। 
उत्तर : 1939 में भरतपुर में राजनितिक आंदोलन से जुड़े। जबरन बेगार के विरोध में आंदोलन का संचालन किया।
प्रश्न : मास्टर आदियेन्द्र ?
उत्तर : 1938 में भरतपुर प्रजामंडल के माध्यम से जनता में राजनितिक चेतना पैदा की।

प्रमुख महिला स्वतंत्रता सेनानी

प्रश्न : श्रीमती भारती देवी ?
उत्तर : 1939 ईस्वीं में ये जयपुर प्रजामण्डल के सत्याग्रह में महिलाओं के जत्थे के साथ रही , गिरफ्तार हुई और 3 महीने की सजा हुई।
प्रश्न : श्रीमती सरस्वती देवी पांडे ?
उत्तर : श्रीमती सरस्वती देवी पांडे 1939 ईस्वीं में प्रजामण्डल के आन्दोलन में गिरफ्तार हुई और जेल गयी।
प्रश्न : श्रीमती कोकिला देवी ?
उत्तर : नमक सत्याग्रह में अन्य महिलाओं के साथ कोकिला देवी ने अजमेर में सत्याग्रह किया तथा गिरफ्तार हुई।
प्रश्न : रामप्यारी शास्त्री ?
उत्तर : ये काशी नागरी प्रचारिणी सभा से सम्बद्ध रही और अपने ओजस्वी भाषणों से राष्ट्रीय भावना को उभारने में सफल रहा करती थी।
प्रश्न : श्रीमती रामदुलारी शर्मा ?
उत्तर : कोटा के रामपुरा क्षेत्र में 13 अगस्त 1942 ईस्वीं को क्रोधित होकर महिलाओं की भीड़ ने रामप्यारी के नेतृत्व में कोतवाली को घेर लिया।
प्रश्न : श्रीमती खेतु बाई ?
उत्तर : बीकानेर की महिलाओं में राष्ट्रीय भावनाओं का प्रसार करके अत्याचारों का मुकाबला करने को प्रेरित करना इनका मुख्य लक्ष्य रहा था।
प्रश्न : श्रीमती शांता त्रिवेदी ?
उत्तर : उदयपुर में प्रजामण्डल आन्दोलन में स्वयंसेविका के रूप में इन्होने भाग लिया तथा विद्यार्थियों में राष्ट्रीय चेतना का संचार किया।
प्रश्न : श्रीमती रामलोरी देवी , मांडासी ?
उत्तर : 1930 से 1947 ईस्वीं तक इन्होने प्रत्येक आन्दोलन , सभा , जुलूस तथा राजनितिक समारोह में भाग लिया। ये शेखावाटी किसान आन्दोलन से सम्बद्ध रही तथा अपने 6 माह के पुत्र के साथ जेल गयी।
प्रश्न : श्रीमती दुर्गा देवी शर्मा ?
उत्तर : नमक सत्याग्रह के दिनों में इन्होने अपने विवाह तक के महंगे वस्त्रों की चौमूं में होली जला दी थी। बाद में अजमेर , ब्यावर की महिलाओं के साथ प्रभात फेरी आदि काम में लग गयी। 1931-32 ईस्वीं में दो बार जेल गयी।
प्रश्न : श्रीमती मेहता ?
उत्तर : राजनारायण मेहता की पत्नी और बूंदी राज्य के भूतपूर्व प्रधान सेनापति पंडित निरंजनदास नागर की पुत्रवधु श्रीमती मेहता ने अजमेर-मेरवाड़ा प्रांत में कांग्रेस के कार्यक्रम को आगे बढाया। ये ब्यावर कांग्रेस कमेटी से सम्बद्ध रही। महिलाओं में जन चेतना को बढाने का दायित्व इन्होने बखूबी से निभाया।
प्रश्न : सुशीला त्रिपाठी ?
उत्तर : ये अलवर के लोक जागरण के अग्रदूत लक्ष्मणस्वरूप त्रिपाठी की पत्नी थी। अपने पति के साथ हिंदी प्रचार का कार्य मद्रास में किया , हिन्दुस्तानी सेवा दल की शाखा को सहयोग दिया। 1933 ईस्वीं में दिल्ली के चांदनी चौक में सत्याग्रह किया और 6 महीने की कारावास का दण्ड मिला।
प्रश्न : श्रीमती भगवती देवी विश्नोई ?
उत्तर : इन्होंने 1933-34 ईस्वीं में अजमेर नरेली आश्रम में रह कर हरिजन जाति में समाज सुधार तथा शिक्षा प्रसार का कार्य किया था। 1938 ईस्वीं में प्रजामण्डल के आंदोलनों में वे एक बार भीलवाड़ा में गिरफ्तार हुई। 1942 में भी ये 6 महीने उदयपुर सेंट्रल जेल में नजरबन्द रही।
प्रश्न : श्रीमती गंगा बाई (कजोड़ देवी)
उत्तर : इन्होने भी प्रजामण्डल के आन्दोलन में भाग लिया। ये महिला वर्ग में प्रथम थी , जो परिवार की सीमाओं को तोड़कर आयी। नाथद्वार में रात-दिन की हड़ताल के समय पुलिस ने इन्हें गिरफ्तार कर बहुत यातनाएँ दी।