सतत विकास रिपोर्ट कौन जारी करता है ? sdsn report in hindi published by खुशहाली (Happiness) सस्टेनेबल

By   December 4, 2021

sdsn report in hindi published by सतत विकास रिपोर्ट कौन जारी करता है ?

खुशहाली (Happiness) सस्टेनेबल
डेवलपमेंट साॅल्युशन नेटवर्क (SDSN), एक संयुक्त राष्ट्र संघ का गिकाय, द्वारा मध्य-मार्च 2018 में विश्व खुशहाली रिपोर्ट 2018 का प्रकाशन किया गया। विश्व के 156 देशों के सर्वेक्षण पर आधारित यह इस शृंख का छठा रिपोर्ट है (वर्ष 2014 में इसका प्रकाशन नहीं हुआ था) जिसे अनुसंधगकर्ताओं के गठबंधन द्वारा तैयार किया जाता है। इस रिपोर्ट द्वारा संबंधित देशों की खुशहाली एवं कल्याण (well being) की माप करता है ताकि राष्ट्रों की लोक नीति निर्माण को दिशा-निर्देश मिल सके। खुशहाली की माप के लिए इसमें 6 प्राचल (parameter) को आधार बनाया जाता हैः
1- प्रति व्यक्ति जी.डी.पीच (क्रय शक्ति तुल्यता के आधार पर)
2- सामाजिक सहयोग (किसी विश्वासी का होना)
3- स्वस्थ जीवन प्रत्याशा (जन्म के समय)
4- जीवन में इच्छाओं की स्वच्छंदता
5- उदारता (Generosity)
6- भ्रष्टाचार का बोधा (Perception of Corruption)
इस रिपोर्ट के प्रमख अंश का विवरण निम्न प्रकार हैः
ऽ विश्व के 10 सबसे खुशहाल देश (उगके घटते पादान के अनुसार) हैं-फिनलैंड (5), नार्वे (1), डेनमार्क (2), आइसलैंड (2), स्विटजरलैंड (4), नीदरलैंड (6), कनाडा (7), न्यूजीलैंड (8), स्वीडन (10) एवं आस्ट्रेलिया (9)। देशों के पिछले वर्ष के पादान कोष्ठकांे (इतंबामजे) में दिए गए हैं।
ऽ बुरुंडी विश्व में सबसे निम्न खुशहाल देश है जिसका पादान इस वर्ष 156वां है (पिछले वर्ष के 147वें की जगह पर)। इसके बाद के दो स्थानों (155वें एवं 154वें) पर क्रमशः सेंट्रल अफ्रीकी गणराज्य (पिछले वर्ष 155वां) और दक्षिणी सूडान (पिछले वर्ष 148वां) है।
ऽ भारत को 133वां रैंक मि है जो पिछले रिपोर्ट की तुलना में 11 पादान नीचे है (वर्ष 2016 के रिपोर्ट में भारत का स्थान 122वां था जो वर्ष 2015 की रिपोर्ट से 4 पादान नीचे था)। भारत का रैंक ‘सार्क’ देशों में सबसे नीचे है (र्सिफ युद्ध-विध्वंसित अफगनिस्तान को छोड़कर जिसका पादान 145वां है)-पाकिस्तान 75वें पादान पर (पिछले वर्ष से 5 पादान ऊपर), नेपाल 101वें स्थन पर, भूटान 97वें स्थान, बांग्देश 115वें, श्री लंका 116वें स्थान एवं चीन 86वें स्थान पर।
ऽ फिनलैंड विश्व के खुशहालतम देश होने के साथ-साथ कई मामलों में सर्वोच्चता हासिल कर सका है, यथा-विश्व का सर्वोच्च स्थायी, सर्वोच्च सुरक्षित एवं सबसे अभिशासित देश। इसके साथ ही इसे सबसे कम भ्रष्टाचार एवं सामाजिक रूप से सर्वाधिक प्रगतिशील देश बताया गया है। इसके आप्रवासियों (पउउपहतंदजे) में विश्व के इस श्रेणी की जनसंख्या में सर्वोच्च खुशहाली है। इस देश की नीतियां विश्व में सर्वाधिक भरोसेमंद एवं इसके बैंक सर्वाधिक मजबूत हैं। यह उस देश (जनसंख्या 55 लाख) की उपलब्धिायां हैं जो आज से लगभग 150 वर्षों पूर्व प्राकृतिक भुखमरी से त्रस्त था।
ऽ इस रिपोर्ट यू.एस.ए. पर एक विशेष अध्याय को शामिल किया गया है जिसका वर्तमान खुशहाली रैंक 18वां है (पिछले वर्ष से 4 पायदान नीचे)। यह अध्याय इस बात के अध्ययन से प्रेरित है कि क्यों यह देश जो कि खुशहाली पादानों में सर्वोच्च में से एक पादान पर था लगतार नीचे गिरता गया है जिसकी प्रति व्यक्ति आय विश्व में सर्वोच्च में से एक है। रिपोर्ट के अनुसार, इस देश की खुशहाली को तीन महत्वपूर्ण कारकों ने नियमित (systematic) हृास (सवेे) किया है। ये तीन अंतःसंबंधित महामारियां (epidemic) हैं-मोटापा (obesity), मादक पदार्थों का दुरुपयोग (विशेषकर अफीम की लत) तथा खिन्नता/अवनमन (depression)।
ऽ लैटिन अमेरिका जो उच्च भ्रष्टाचार, हिंसा एवं अपराध दरों, आय की उच्च असमानता एवं उच्च गरीबी के लिए जाग जाता है, खुशहाली रिपोर्ट में इसका पादान सापेक्षिक रूप से उच्च बना रहा है। ऐसी स्थिति के लिए रिपोर्ट द्वारा इसकी कुछ विशेषताओं को जिम्मेवार बताया गया है, यथा-उच्च पारिवारिक स्नेह (family warmth) एवं सहयोगी सामाजिक संबंधा-जिन कारणों से यहां की विकास प्रबंधान की सोच/विचार में इन पर ज्यारा झुकाव रहा है।
ऽ इस रिपांर्ट मंे पहली बार आपवासियांे (immigrants) की खुशहाली को शामिल किया गया है (117 देशों के लिए)। इसके अनुसार इगकी खुशहाली कहां से इगका प्रवसन (migration) हुआ है इस बात पर काफी कम निर्भर करता है (यह निर्माता भी अल्पावधिक है)। वास्तव में इगकी खुशहाली उस देश की खुशहाली पर निर्भर करती है जहां के वे आप्रवासी हैं। वैसे प्रवसन के देश का इन पर एक ऋणात्मक खुशहाली प्रभाव पाया गया (जो 10 से 25 प्रतिशत का अधिक प्रतिकूल प्रभाव छोड़ता है)। उध्र विश्व की सबसे बड़ी प्रवसन प्रक्रिया-चीन में खेांलोगों का ग्रामीण क्षेत्रों से शहरों को होने वा प्रवसन-इस रिपोर्ट का विशेष अध्ययन रहा है। इसके अनुसार शहरों में आगे के बाद इगकी खुशहाली में कोई वृद्धि नहीं आयी है।
ऽ इस बार का रिपोर्ट एक विशेष मोड़ पर जाकर समाप्त होता है जहां इसके द्वारा तीन उभरती हुई स्वास्थ्य समस्याओं की ओर ध्यान आकर्षित कराया गया है-मोटापा, अफीम संकट एवं खिन्नता/ अवनमन। इन समस्याओं के प्रति रिपोर्ट का दृष्किोण वैश्विक है लेकिन सा{यों एवं परिचर्चाओं के केन्द्र में यू.एस.ए. है जहां इन तीन समस्याओं में दुनिया में सर्वाधिक तेज वृद्धि आ रही है।
खुशहाली का अर्थ
(The Meaning of Happiness)
‘खुशहाली’ शब्द जटिल अर्थों वा है और इसका उपयोग हल्के तरीके से नहीं किया जाता। खुशहाली मनुष्य मात्र की आकांक्षा है जो कि सामाजिक प्रगति का पैमाना भी बन सकता है। तब भी, क्या दुनिया भर के देशों केलोग खुश हैं? अगर नहीं, तो इसके लिए और क्या किया जा सकता है? सही माप की कुंजी‘खुशहाली’ शब्द के अर्थ में ही निहित है। डब्लू.एच.आर. 2013 के अनुसार, समस्या है कि खुशहाली शब्द का उपयोग दो अर्थों में किया जाता हैः
1. एक भाव (Emotion) के रूप में (क्या आप कल खुश थे?)
2. एक मूल्यांकन (Evaluation) के रूप में (क्या आप अपने जीवन से खुश हैं?)
यदि विभिन्न व्यक्तियों से इन दो अलग प्रश्नों के बारे में पूछा जाए तो उत्तरों से खुशहाली के पैमाने का पता लगना मुश्किल होग। सामाजिक प्रगति का पता लगने के लिए व्यक्तियों के खुशहाली संबंधी उत्तरों से भाव में अस्थाई परिवर्तन से कुछ अधिक जागकारी मिल सकेगी अथवा निर्धन व्यक्ति जो खुशाहाली की अभिव्यक्ति भावनाआंे के रूप मंे करता है, समाज की निर्धानता से लड़ने के संकल्प अथवा इच्छा शक्ति को ही जागे-अनजागे समाप्त कर सकता है। सौभाग्य से, खुशहाली सर्वेक्षणों के उत्तरदाता भ्रमित करने वाली ऐसी गलतियां नहीं करते हैं। दोनों ही विश्व खुशहाली प्रतिवेदनों
(WHRS) ने यह दर्शाया है कि उत्तरदाता ‘खुशहाली एक भावना’ तथा जीवन संतुष्टि के अर्थ में ‘खुशहाली’ में अंतर की पहचान रखते हैं। इन प्रश्नों के उगके उत्तर भी बिल्कुल अलग रहे हैं। अत्यंत गरीब व्यक्ति भी एक समय विशेष में भावनात्मक रूप से खुद को खुशहाल कह सकता है जबकि समग्र रूप में जीवन के प्रति अपनी धरणा के बारे में उसकी खुशहाली का स्तर बहुत कम हो सकता है। वास्तव में जोलोग अति निर्धनता में जीवन जी रहे हैं उनमें समग्र रूप में जीवन के प्रति खुशहाली का स्तर बहुतनीचे होता है। ऐसे उत्तरों से समाज को निर्धनता की स्थिति समाप्त करने के लिए तत्पर होना चाहिए।
विश्व खुशहाली प्रतिवेदन, डब्लू.एच.आर. 2015 व्यक्तिपरक कुशलता (Subjective well being), जीवन मूल्यांकन जीवन संतुष्टि तथा समग्र रूप में जीवन से खुशहाली अथवा खुशी12 के प्राथमिक पैमानों पर आधारित है। इस प्रकार, खुशहाली दो बार सामने आती है -एक बार भावनात्मक प्रतिवेदन के रूप में तथा एक बार जीवन मूल्यांकन के एक भाग के रूप में, दोनों ही अर्थों में खुशहाली की प्रवृत्ति और कारणों के बारे में विचारणीय प्रमा.ा प्रस्तुत करती है।
खुशहाली की प्रवृत्तियाँ (Trends in Happiness)
यह रिपोर्ट दुनिया भर में प्रसन्नता के स्तर, व्याख्याएँ, परिवर्तन तथा समानता संबंधी आँकड़े प्रस्तुत करती है। दुनिया पिछले पाँच वर्षों में तुलनात्मक रूप से थोड़ी और खुशहाल तथा उदार हुई है और यह स्थिति 2007-08 के वित्तीय संकट के बाद बनी है, जिसके खुशहाली के स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव हुए हैं। उप-सहारा क्षेत्रों में बेहतर जीवन के लिए प्रदान किए जा रहे सहयोग में सुधार, साथ ही वृहत्तर यूरोप में सामाजिक बनावट की गुणवत्ता पर केंद्रित लगतार चल रही कोशिशों से दुनिया भर के विभिन्न इकों में कुशलता अथवा सुखानुभूति के समान वितरण की दिशा में प्रगति हुई है। इस व्यापक परिदृश्य के अंदर परस्पर एक-दूसरे को काटती महाद्वीपीय धरा,ँ भी महत्वपूर्ण रही हैं। जीवन की गुणवत्ता में सुधार विशेष रूप से तिन अमेरिका तथा कैरिबियन देशों में दृष्टव्य रहा है जबकि वित्तीय संकट के कारण कई क्षेत्र कटौतियों से जूझते रहे हैं, जैसे – पश्चिमी यूरोप तथा अन्य पश्चिमी औद्योगिक देश, अथवा वित्तीय संकट के साथ-साथ राजनीतिक एवं सामाजिक अस्थिरता से जूझते देश, जैसे कि मध्य-पूर्व तथा उत्तरी अफ्रीका के देश।
एच.डी.आर. संबंधा (HDR linkage)
डब्लू.एच.आर. 2013 मानव विकास (मानव विकास रिपोर्ट में प्रयुक्त यू.एन.डी.पी. का विचार) तथा ‘जीवन मूल्यांकन’ दृष्टिकोण के बीच अवधरणात्मक एवं अनुभूतिमूलक सम्बन्धों का अनुसंधान करता है, जिससे कि मानव प्रगति की समझ बनाने में मदद मिले। यह दस्तावेज यह दलील देता है कि दोनों ही दृष्टिकोण उन्नति और विकास को उन रास्तों से समझने की आकंाक्षा रखते हैं जो कि सकल घरेलू उत्पाद (जी.डी.पी.) से अलग जाते हैं औरलोगों को केंद्र में रखते हैं। और चूँकि ‘मानव विकास इस अवधारणात्मक दृष्टिकोण के केंद्र में है तथा ‘जीवन मूल्यांकन’ (Life Evaluation) अनुभूतिमूलक है, व्यवहार में इन दोनों के बीच परस्पर व्यापन की स्थिति बनती है। मानव विकास के अनेक आयाम ‘व्यक्तिपरक कुशलता’ की व्यवस्था के लिए प्रमुख चर राशियों के रूप में प्रयुक्त होते हैं। ये दोनों दृष्टिकोण हमारे लिए पूरक लेंसों की तरह हैं जिनसे हमें यह आकलगी करने में मदद मिलती है कि वास्तव में जीवन में बेहतरी आ रही है या नहीं।
निष्कर्ष (Conclusion)
अंत में यह निष्कर्ष गिका जा सकताा है किए आज की दुनिया में इस बात की माँग बढ़ रही है कि नीतियों को उन चीजों के गिकट, उनसे जोड़कर रखा जाए जो वास्तव मेंलोगों को प्रभावित करते हैं, उगके लिए जरूरी है। ऐसा इसलिए किलोग ही अपने जीवन को चरितार्थ करते हैं, कोई दूसरा नहीं। पिछले कुछ वर्षों में अधिक-से-अधिक विश्व नेता (जैसे-जर्मनी की चांसलर एंजे मार्केल, दक्षिण कोरिया के राष्ट्रपति पार्क ग्यून-हाइ तथा ब्रिटेन के प्रधानमंत्री डेविड कैमरुनद्ध लोगों की कुशलता अथवा सुखानुभूति कोअपने-अपने देशों एवं दुनिया के बेहतरी का मार्गदर्शक कारक मान रहे हैं। विश्व प्रसन्नता प्रतिवेदन (ॅभ्त्) प्रसन्नता कोलोगंें की जागकारी तथा जन-नीतियों के दायरे में ने वाले प्रयासों को मजबूती देता है। यह प्रतिवेदन इस तथ्य के ठोस प्रमाण प्रस्तुत करता है कि प्रसन्नता की व्यवस्थित माप एवं विश्लेषण में दुनिया में खुशहाली तथा धरणीय विकास (ैनेजंपदंइसम क्मअमसवचउमदज) की स्थिति बेहतर बनाने के लिए शिक्षित कर सकता है। अब यह विभिन्न देशों पर निर्भर करता है कि वे इस प्रतिवेदन के निष्कर्षों का किस प्रकार उपयोग करते हैं।