scorched earth policy in hindi meaning meaning definition in india स्कॉर्च्ड अर्थ पॉलिसी क्या है

By   January 22, 2021

स्कॉर्च्ड अर्थ पॉलिसी क्या है scorched earth policy in hindi meaning meaning definition in india ?

 अच्छा कारपोरेट (कंपनी) शासन कैसे सुनिश्चित किया जाए?

 बाजार शक्तियाँ
एक विचारधारा का मानना है कि बाजार शक्तियाँ कारपोरेट शासन की समस्याओं का ध्यान रखेगीं। अब हम उनके द्वारा प्रस्तुत तर्कों पर विचार करते हैं।

सबसे उपयुक्त की उत्तरजीविता संबंधी तर्क
यदि, दीर्घकाल में एक फर्म अपने लाभ को अधिकतम नहीं करता है तो यह कुशल नहीं है। या तो यह अनावश्यक लागत व्यय कर रहा है अथवा राजस्व अर्जित करने के अवसरों का लाभ उठाने में सक्षम नहीं है। दूसरे फर्म अपने मूल्य में कटौती कर सकेंगे, अथवा बेहतर गुणवत्ता दे सकेंगे इत्यादि, और इससे बाजार में इसका हिस्सा घटता जाएगा। इसलिए, यह तर्क उत्पाद बाजार प्रतिस्पर्धा के अनुशासनिक प्रभावों पर आधारित है।

प्रबन्धकों के लिए बाजार
इस तर्क में, यह कहा जाता है कि जिस तरह से एक साधारण कर्मकार के लिए कार्य बाजार (जॉब मार्केट) है उसी तरह से प्रबन्धकों के लिए भी कार्य बाजार (जॉब मार्केट) है। एक प्रबन्धक जिसके अंतर्गत फर्म का कार्य निष्पादन खराब रहता है उसे नौकरी के बाजार में कम पारिश्रमिक की पेशकश की जाती है।

तथापि, एक फर्म के खराब निष्पादन के बावजूद भी कंपनी से बाहर के व्यक्तियों के लिए यह मूल्यांकन करना कठिन है कि कंपनी का खराब निष्पादन इसके अयोग्य प्रबन्धन के कारण है अथवा यह प्रतिकूल बाजार परिस्थितियों का सामना कर रहा है। इतना ही नहीं, एक फर्म में प्रबन्धकों की एक टीम होती है तथा फर्म के कार्य निष्पादन में प्रत्येक प्रबन्धक के योगदान का अलग-अलग मूल्यांकन करना असंभव होता है।

पूँजी बाजार नियंत्रण
यह तर्क कुछ इस प्रकार से दिया जाता हैः किसी फर्म का अकुशल कार्यकरण उसके शेयरों के कम कीमत से प्रदर्शित होता है क्योंकि कम लाभांश की घोषणा की जाती है। मान लीजिए इस समय शेयर मूल्य 5 रु. है। तब कोई अधिग्रहणकर्ता कम कीमत वाले शेयरों को खरीद कर फर्म को अपने नियंत्रण में ले लेगा और प्रबन्धकों की वर्तमान टीम के स्थान पर अधिक कुशल प्रबन्धकों की टीम रख लेगा। फर्म के कार्य निष्पादन में सुधार के साथ ही शेयरों के मूल्य में भी वृद्धि होगी। मान लीजिए शेयर का मूल्य बढ़ कर 10 रु. हो जाता है तब वह व्यक्ति पहले खरीदे गए शेयरों (5 रु. प्रति शेयर के मूल्य पर) को बढ़े हुए नए 10 रु. के मूल्य पर बेच कर लाभ कमा सकता है।

निःसंदेह इस तर्क में यह मान लिया गया है कि वर्तमान प्रबन्धक अधिग्रहण के खतरे के प्रति उदासीन रहेंगे। पदधारी प्रबन्धक, यदि उनकी स्थिति को आघात पहुँचता है तो, अधिग्रहण के प्रयास के विरोध में एड़ी चोटी एक कर देंगे। अधिग्रहण के प्रयास को विफल करने के लिए प्रबन्धक कई तरह के उपाय कर सकते हैं और हम इनमें से कुछ का उल्लेख यहाँ कर सकते हैं।

अधिग्रहण से बचाव
1980 के दशक में उत्तरी अमेरिका और यूनाइटेड किंगडम में बड़ी संख्या में प्रतिस्पर्धियों द्वारा अधिग्रहण के प्रयास देखे गए। प्रतिक्रियास्वरूप, पदधारी प्रबन्धन द्वारा अधिग्रहण से बचाव के लिए अनेक उपाय खोजे गए।

व्हाइट नाइट: जब ‘‘मोबिल आयल‘‘ ने ‘‘मैराथन आयल‘‘ के अधिग्रहण का प्रयास किया तो ‘‘यू.एस. स्टील‘‘ ने व्हाइट नाइट अर्थात् मैत्रीपूर्ण अधिग्रहणकर्ता की भूमिका निभाई, उसने जो बोली लगाई उसका मैराथन के प्रबन्धन ने समर्थन किया तथा उसे अंततः स्वीकार कर लिया।

पॉयजन पिल्स: पॉयजन पिल्स किसी कंपनी के अधिग्रहण कर लिए जाने के पश्चात इसकी संपत्ति को कम करने का तरीका है। इसका एक उदाहरण यह शर्त है कि अधिग्रहण के पश्चात् बहुत ही अधिक लाभांश का भुगतान करना होगा-इससे किसी कंपनी के अधिग्रहण की लागत में अत्यधिक वृद्धि हो जाती है।

स्कॉर्चड अर्थ पॉलिसीज: ये नीतियाँ वे हैं जो बोलीकर्ता के सामने फर्म के मूल्य को जानबूझ कर कम कर देती है, भले ही इस प्रक्रिया में शेयर होल्डरों के शेयरों के मूल्य में कमी हो जाए। ऐसा करने का एक तरीका महत्त्वपूर्ण परिसम्पत्तियों (कंपनी को पहली ही दृष्टि में आकर्षक बनाने वाली परिसम्पत्तियाँ) को अत्यधिक कम मूल्य पर बेच देना है।

गोल्डन पैराशूट्स: गोल्डन पैराशूट्स क्षतिपूर्ति संविदा में एक ऐसी शर्त है जो नियंत्रण में परिवर्तन के पश्चात् यदि प्रबन्धक पदत्याग कर देता है तो उसे अत्यन्त ही आकर्षक मुआवजा देने का प्रावधान करता है। इसके द्वारा पदधारी प्रबन्धक प्रतिस्पर्धी द्वारा अधिग्रहण किए जाने की स्थिति में अपनी वर्तमान नौकरी छूटने के जोखिम की पूरी-पूरी भरपाई करता है।

क्लासीफाइड अथवा स्टैगर्ड बोर्ड: इन बोर्डों में केवल थोड़े से ही सदस्य प्रत्येक वर्ष चुनाव में खड़े होते हैं। इसलिए किसी भी बाहरी व्यक्ति के लिए फर्म पर शीघ्र नियंत्रण स्थापित करना कठिन हो जाता है।

सुपरमेजोरिटी नियम: परिवर्तन के लिए 90 प्रतिशत तक वोट की जरूरत होती है और इसका प्रभाव भी स्टैगर्ड बोर्ड की ही भाँति होता है।

ग्रीनमेल: इसमें आमतौर पर वर्तमान प्रबन्धन द्वारा आकर्षक प्रीमियम पर अधिग्रहणकर्ता से अधिग्रहित शेयरों को खरीदना सम्मिलित है।

संगठनों में प्रोत्साहन

शेयरधारकों और प्रबन्धकों के उद्देश्यों में सामंजस्य स्थापित करने का एक तरीका प्रबन्धकों को शेयर विकल्प योजना की पेशकश करना है। ये योजनाएँ निम्नलिखित आधार पर कार्य करती हैं। प्रबन्धक को दी गई अवधि में (मान लीजिए अगले 2 वर्षों में) किसी भी समय एक निर्धारित मूल्य च् पर एक निश्चित संख्या में फर्म का शेयर खरीदने का अधिकार दिया जाता है। तब प्रबन्धक को लाभ और लाभांश बढ़ाने के लिए एक प्रकार का प्रोत्साहन रहता है ताकि इस अवधि के अंतर्गत शेयरों के मूल्य में वृद्धि हो। तब प्रबन्धक अपना शेयर प्रति शेयर च् मूल्य पर खरीद सकता है तथा इसे अधिक बाजार मूल्य प्रति शेयर च्’ पर बेच सकता है और इस प्रकार प्रति शेयर च्’ऋच् का लाभ कमा सकता है। दूसरा तरीका प्रबन्धक को बोनस देना है जो कि बिक्री अथवा लाभ में सीधे-सीधे उनका कुछ प्रतिशत हिस्सा है। प्रोत्साहन अन्तर्निहित भी हो सकता है। खराब कार्य निष्पादन के लिए प्रबन्धक की आलोचना करके उसे दण्डित किया जाता है तथा अच्छे कार्य निष्पादन के लिए पदोन्नति और अनुवर्ती वेतन लाभ द्वारा पुरस्कृत किया जाता है।

 बाहरी निवेशकों के अधिकारों का संरक्षण
हमने देखा कि बाजार शक्तियाँ अच्छे कारपोरेट से शासन की गारंटी नहीं कर सकती है। अधिकांश देशों में बाहरी निवेशकों के अधिकारों को कानूनी रूप से संरक्षण दिए जाने की आवश्यकता होती है। व्यापक अर्थ में अच्छे कारपोरेट शासन के लिए आवश्यक है कि विभिन्न ‘‘स्टेकहोल्डरों‘‘ के अधिकारों की पर्याप्त रक्षा की जाए।

सामान्यतया ‘‘बाहरी निवेशकों‘‘ के अधिकारों की रक्षा विनियमों और कानूनों के प्रवर्तन के माध्यम से की जाती है। इनमें से कुछ का उल्लेख हम इस प्रकार कर सकते हैं:

ऽ प्रकटीकरण और लेखाकरण नियम निवेशकों को उनके अधिकारों के प्रयोग के लिए आवश्यक जानकारी उपलब्ध कराने का प्रावधान करते हैं।
ऽ संरक्षित शेयरधारकों के अधिकारों में समानुपातिक आधार पर लाभांश प्राप्त करना, निदेशकों के लिए मतदान करना, शेयर धारकों की बैठक में भाग लेना, प्रतिभूतियों के नए निर्गमों में अंदर के शेयरधारकों (इन्साइडर्स) की भाँति समान शर्तों पर अभिदान करना इत्यादि-इत्यादि सम्मिलित है।
ऽ ऋणदाताओं को संरक्षित करने वाले कानून दिवालियापन और पुनर्गठन प्रक्रियाओं से संबंधित हैं।

यहाँ यह उल्लेखनीय है कि इन नियमों और विनियमों के स्रोत अलग-अलग हैं- कंपनी, प्रतिभूति, दिवालियापन, अधिग्रहण, प्रतिस्पर्धा कानून, शेयर बाजार विनियमन और लेखाकरण मानदंड। ये सब एक दूसरे के साथ मिलकर एक ऐसे वातावरण का सृजन करते हैं जिसमें अच्छा कारपोरेट शासन फलता-फूलता है।

कारपोरेट (कंपनी) शासन संहिता
कभी-कभी यह महसूस किया जाता है कि अच्छे कंपनी शासन के लिए इस बात की आवश्यकता होती है कि उद्योग को स्वैच्छिक रूप से कतिपय आचरण संहिता का पालन करना चाहिए। बाद के भाग में हम शासन की प्रतिपादित दो संहिताओं पर विचार करेंगे।

बोध प्रश्न 2
1) क्या आपको विश्वास है कि अच्छा कारपोरेट शासन सुनिश्चित करने के लिए बाजार शक्तियों पर निर्भर किया जा सकता है? अपने उत्तर के समर्थन में तर्क दें।
2) अधिग्रहण, शेयरधारकों के हितों में कार्य करने के लिए प्रबन्धकों को कैसे बाध्य कर सकता है?
3) शेयर विकल्प योजना क्या है? प्रबन्धन के उद्देश्यों और शेयरधारकों के उद्देश्यों में सामंजस्य स्थापित करने के लिए इनका उपयोग कैसे किया जा सकता है?