स्वतंत्रता का अधिकार की परिभाषा क्या है ? right of freedom in hindi in india स्वतंत्रता का अधिकार किसे कहते है

By   October 24, 2020

right of freedom in hindi in india स्वतंत्रता का अधिकार किसे कहते है  स्वतंत्रता का अधिकार की परिभाषा क्या है ?

मौलिक अधिकार
मौलिक अधिकार, जिनकी व्यवस्था इस संविधान में दी गई, को इस रूप में संक्षेपित किया जा सकता है: समानता का अधिकार, स्वतन्त्रता का अधिकार, शोषण के विरुद्ध अधिकार, धर्म का अधिकार, सांस्कृतिक एवं शैक्षिक अधिकार और संवैधानिक प्रतिविधानों का अधिकार । संपत्ति का अधिकार चवालीसवें संविधान संशोधन अधिनियम के माध्यम एक विधिसम्मत अधिकार बना दिया गया था, और तब से, यह एक मौलिक अधिकार नहीं है। देश के बृहद्तर हितों को देखते हुए, किसी भी व्यक्ति से सम्बन्धित सम्पत्ति को उसका ‘मुआवजा‘ अदा करके अधिगृहीत किया जा सकता है।

मौलिक अधिकारों को संविधान के भाग-3 में स्थान दिया गया है और उनके परिपालन की सर्वोच्च न्यायालय द्वारा गारण्टी दी गई है। अन्य शब्दों में, मौलिक अधिकार वाद योग्य हैं। वास्तव में, मौलिक अधिकारों में से कुछ, यह गौरतलब है, केवल देश के नागरिकों के लिए प्रयोज्य हैं और विदेशियों के लिए नहीं। अनुच्छेद 20, अनुच्छेद 21 और अनुच्छेद 22, बहरहाल, सभी के लिए प्रयोज्य हैं। यहाँ यह भी अच्छी तरह समझ लिया जाना चाहिए कि जो प्रयोज्य है वह अधिकार की ‘सीमा‘ में है।

एक ‘आपात स्थिति‘ को छोड़कर, मौलिक अधिकार कभी भी निलम्बित नहीं किए जा सकते हैं। हालाँकि, आपास्थिति के दौरान भी अनुच्छेद 20 एवं अनुच्छेद 21 की बहाली नहीं रोकी जा सकती। संविधान में चवालीसवें संशोधन अधिनियम के द्वारा संशोधन किया गया और अनुच्छेद 359-1। के माध्यम से यह बताया गया कि अनुच्छेद 20 और अनुच्छेद 21 निलम्बित नहीं किए जा सकते बेशक उस समय आपास्थिति की घोषणा लागू हो।

स्वतन्त्रता का अधिकार
संविधान अनुच्छेद 19 से 22 के तहत स्वतन्त्रता का अधिकार भी सुनिश्चित करता है। अनुच्छेद 19 इनका वचन देता है ् भारत और अभिव्यक्ति की स्वतन्त्रता, शान्तिपूर्ण सभा करने का अधिकार, परिषदें बनाने का अधिकार, देश के किसी भी भाग में जाने और बसने का अधिकार और अपने धर्म के प्रकटन और आचरण का अधिकार। ये अधिकार भी, उन सभी तर्काधारित प्रतिबंधों के अधीन हैं जो राज्य द्वारा अनुच्छेद 19 के उपवाक्य 2 से 6 के तहत लगाए जा सकते हैं।

अनुच्छेद 20 इनका वचन देता है – किसी भी व्यक्ति को उन कानूनों के आधार पर दण्डित नहीं किया जाएगा जो कि अपराध किए जाने के बाद अधिनियमित किए गए हों (एक्स पोस्ट फैक्टो कानूनों से संरक्षण), एक ही अपराध के लिए एक से अधिक बार दण्डित किए जाने से संरक्षण (दोहरे संकट से संरक्षण) और व्यक्ति को स्वयं के विरुद्ध मुकदमा चलाये जाने से संरक्षण (आत्म-दोषारोपण से संरक्षण)। अनुच्छेद 21 ‘व्यक्तिगत जीवन और स्वतंत्रता‘ के संरक्षण को सुनिश्चित करता है। अन्य शब्दों में, राज्य को कानून द्वारा स्थापित प्रक्रिया के माध्यम को छोड़कर, अन्यथा किसी व्यक्ति के जीवन को छीनने का अधिकार नहीं है, अनुच्छेद 22 बिना मुकदमा चलाये किसी व्यक्ति को नजरबंद किए जाने को निषिद्ध करता है। हालाँकि, किसी व्यक्ति की तीन माह तक, कुछ मामलों में इससे भी अधिक, संरक्षात्मक हिरासत की अनुमति है।

संघ: कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका
जैसा कि राजनीति शास्त्र के सभी विद्यार्थी जानते हैं, सरकार के तीन अंग अथवा शाखाएँ हैं, यानी, कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका। इन तीनों के बीच सामञ्जस्यपूर्ण रूप से कार्य-सम्पादन करना देश के विकास हेतु अत्यावश्यक है।

अपनी स्वतन्त्रता के समय भारत ने सरकार के एक संसदीय रूप को अपनाया जाना चुना। इस प्रकार की सरकार में, राष्ट्रपति राज्य का मुखिया होता है जबकि वास्तविक कार्यकारी शक्ति का प्रयोग सरकार के मुखिया, प्रधानमंत्री, द्वारा उसकी मन्त्रिपरिषद् के सहयोग से किया जाता है। ये मन्त्री संसद के प्रति सामूहिक रूप से उत्तरदायी होते हैं।

कार्यपालिका
भारत में, विधायिका और कार्यपालिका एक-दूसरे से ही निष्कर्षित हैं जबकि न्यायपालिका एक स्वतन्त्र निकाय है। विधायिका में होते हैं – लोक सदन (लोक सभा), राज्य परिषद् और भारत का राष्ट्रपति । संघीय मन्त्रिपरिषद् का सदस्य आवश्यक रूप से किसी भी सदन — लोक सभा अथवा उच्च सदन, राज्य सभा दृ का सदस्य होता है।

राष्ट्रपति
संसद के दोनों सदन और राज्यों के विधान-मंडल राष्ट्रपति को एक ‘एकल हस्तांतरणीय मत‘ के द्वारा चुनते हैं। राष्ट्रपति कार्यालय, उसके प्रकार्य, शक्तियाँ, कार्यकाल, चुनाव-विधि और पुनर्निर्वाचन, महाभियोग, और पदभार सम्भालने हेतु वांछित योग्यताएँ अनुच्छेद 52 से 62 में व्यक्त हैं। राज्य की सभी गतिविधियाँ राष्ट्रपति के नाम की जाती हैं क्योंकि कार्यकारी अधिकार राष्ट्रपति में ही निहित हैं (अनुच्छेद 52)। संयुक्त राज्य अमेरिका की भाँति, भारत में भी, राष्ट्रपति सशस्त्र सेनाओं का सर्वोच्च कमाण्डर होता है। राष्ट्रपति संसद के दोनों सदनों की बैठक बुलाता है और उसके संयुक्त सत्र को सम्बोधित करता है। उसे दण्डादेश में छूट देने और मृत्युदण्ड-स्थगन प्रदान करने का अधिकार है। वह राज्य के सभी महत्त्वपूर्ण कार्यकर्ताओं की नियुक्ति करता हैय जैसे प्रधानमंत्री और मन्त्रिपरिषद्, सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों के न्यायाधीश, महान्यायवादी, राज्यों के राज्यपाल, भारतीय चुनाव आयोग जैसे आयोगों के अध्यक्ष और भारत के मुख्य लेखा-नियन्ता एवं लेखा-परीक्षक (सी. एण्ड ए. जी.) जैसे संस्थानों के प्रमुख ।

प्रधानमंत्री और मंत्रिपरिषद्
प्रधानमंत्री सरकार का मुखिया होता है और संघीय मन्त्रिपरिषद् की बैठक की अध्यक्षता करता है। यह ध्यान में रखने की आवश्यकता है कि मन्त्रिमण्डल और मन्त्रिपरिषद् में अन्तर हैय मन्त्रिमण्डल में कैबिनेट स्तर के मंत्री और राज्य-मंत्रीगण होते हैं, जबकि परिषद् में उप-मन्त्री भी शामिल होते. हैं। मन्त्रि-परिषद् सामूहिक रूप से संसद के प्रति उत्तरदायी होती है। मन्त्रियों की गतिविधियाँ संसदीय सत्र के प्रत्येक दिवस के आरम्भ में दो घण्टे तक चलने वाले प्रश्न काल‘ के दौरान प्रतिपक्ष द्वारा की जाने वाली संवीक्षा के अन्तर्गत आती हैं। मन्त्रिपरिषद् राष्ट्रपति को अपनी सिफारिशें प्रस्तुत करती है, जो देश के मामलों में राष्ट्रपति को ‘मदद और सुझाव‘ देने के रूप में जानी जाती हैं। सिफारिशों में महत्त्वपूर्ण, जो हमें पता रखनी चाहिए, हैं – लोकसभा के भंग किए जाने, युद्ध की घोषणा किए जाने अथवा ‘आपात स्थिति‘ की घोषणा किए जाने से संबंधित सिफारिशें ।