उत्तल लेंस एवं समतल दर्पण की सहायता से द्रव का अपवर्तनांक हात करना। refractive index of liquid experiment class 12 in hindi

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refractive index of liquid experiment class 12 in hindi उत्तल लेंस एवं समतल दर्पण की सहायता से द्रव का अपवर्तनांक हात करना। ?

प्रयोग संख्या
Experiment No
उद्देश्य (Object):
उत्तल लेंस एवं समतल दर्पण की सहायता से द्रव का अपवर्तनाक हात करना।
उपकरण (Apparatus):
एक उत्तल लेंस एक समतल दर्पण, प्रायोगिक पारदर्शी द्रव, क्लैम्प सहित ऊर्ध्वाधर स्टैण्ड, पिन, साहल सूत्र, मीटर पैमाना, गोलाईमापी तथा कांच पट्टिका आदि ।
किरण आरेख (Ray Diagram) :
सिद्धान्त (Theory) : यदि समतल दर्पण के ऊपर उत्तल लेंस रखकर, वस्तु पिन को लेंस से इतनी दूरी पर रखा जाए कि वस्तु पिन का प्रतिबिम्ब ठीक वस्तु पिन पर ही प्राप्त हो तब लेंस से वस्तु पिन की दूरी लेंस की फोकत्त दूरी के समान होती है।
अब यदि समतल दर्पण पर प्रायोगिक द्रव डालकर इस पर उत्तल लेंस रखा जाए तो दव समतलावतल लेंस का कार्य करता है। यदि द्रव के द्वारा निर्मित समतलावतल लेंस की फोकस दूरी है तब उत्तल लेंस एवं इस समतलावतल लेंस के संयोजन से बने संयुक्त लेंस की फोकस दूरी के लिए
1/F = 1/f ़ 1/f या द्रव लेंस की फोकस दूरी के लिए
1/f = 1/F – 1/f …….(1)
जहां F = संयुक्त लेंस की फोकस दूरी है तथा द्रव की उपस्थिति में वस्तु पिन को लेंस से F दूरी पर रखने पर इसका प्रतिबिम्ब ठीक वस्तु पिन पर ही बनता है।
अब यदि उत्तल लेंस की निचली सतह की वक्रता त्रिज्या ‘R है तब द्रव का अपवर्तनांक
μ = 1़ f/R …….(2)
प्रयोग विधि (Method) :
1. सर्वप्रथम हम सूर्य की किरणों को फोकसित कर लेंस की लगभगा फोकस दूरी ज्ञात कर लेते हैं।
2. अब हम एक समतल दर्पण लेते है तथा इसे स्टैण्ड के क्षैतिज आधार पर रखकर समतल दर्पण पर उत्तल लेंस रखते हैं।
3. अब स्टैण्ड के क्लैम्प में वस्तु पिन को कसले हैं। वस्तु पिन की क्लेम्प से बाहर क्षतिज लम्बाई इस प्रकार रखते हैं कि पिन की नोंक लेंस के मुख्य अक्ष पर हो।
4. अब क्लैम्प को इतना ऊपर या नीचे खिसकाते हैं कि पिन की लेंस से दूरी, लेंस की लगभग फोकस दूरा के समान हो। इस स्थिति में लेंस में प्राप्त पिन के प्रतिबिम्ब की नोक तथा वस्त पिन की नोक स्पर्श करती हुई दिखाई है। यदि नोकें परस्पर स्पर्श करती हुई नहीं दिखाई देती हैं तो वस्तु पिन की बलैम्प से बाहर की क्षैतिज लम्बाई का समायोजित कर नोकों के परस्पर स्पर्श करते हुए दिखने की स्थिति प्राप्त करते हैं।
5. अब वस्तु पिन की नोंक एवं प्रतिबिम्ब की नोंक के मध्य लम्बन को दूर करते हैं इसके लिए वस्तु पिन बहुत धीरे-धीरे स्टैण्ड पर ऊपर या नीचे खिसकाते हैं।
6. अब साहुल सूत्र एवं मीटर पेमाने की सहायता से लेंस के ऊपरी तल से वस्तु पिन की दूरी ग1 तथा कर समतल दर्पण से वस्तु पिन की दूरी ग2 ज्ञात कर लेते हैं। इन दोनों दरियों का माध्य, लेंस की फोकस दूरी  fl  को व्यक्त करता है।
7. अब प्रायोगिक nªo की कुछ मात्रा समतल दर्पण पर डालकर इस पर पुनः ऊतल लेंस को रखते है (यहा ध्यान रखते हैं कि इस बार भी उत्तल लेंस का ऊपरी तल वही हो जो पहले था) .
8. पुनः वस्तु पिन की नोंक एवं उसके प्रतिबिम्ब की नोक के मध्य लम्बन वस्तु पिन को ऊपर नीचे खिसकाकार दूर करते हैं।
9. अब लेंस के ऊपरी तल से तथा समतल दर्पण से वस्तु पिन की दूरियां, साहुल सूत्र एवं मीटर पैमाने की सहायता से ज्ञात कर इन दूरियों का माध्य ले लेते हैं। यह संयुक्त लेंस की फोकस दूरी को व्यक्त करता है।
10. अब गोलाईमापी की सहायता से उत्तल लेंस के निचले तल की वक्रता त्रिज्या ज्ञात कर लेते है।
11. सभी प्रेक्षणों को प्रेक्षण सारणी में नोट कर लेते हैं।

प्रेक्षण (Obsrvations) :
उत्तल लेंस की लगभग फोकस दूरी = …. सेमी.
उत्तल लेंस के निचले तल की वक्रता त्रिज्या = … सेमी.
सारणी:
विवरण वस्तु पिन की दूरी फोकस दूरी = x1़x2/2
(सेमी. )
उत्तल लेंस के ऊपरी तल से x1 (सेमी. ) समतल दर्पण से x2
(सेमी. )
बिना द्रव के f1=
समतल दर्पण पर द्रव
डालकर F=

गणना (Calculations):
1. सर्वप्रथम सूत्र 1/f = 1/F – 1f/l में F व fl के मान रखकर द्रव के समतलावतल लेंस की फोकस दूरी f ज्ञात कर लेते हैं।
2. अब सूत्र μ = 1़ f/R में वक्रता त्रिज्या R फोकस दूरी के f मान रखकर द्रव का अपवर्तनांक ज्ञात कर लेते है।
परिणाम (Result) :
दिए गए द्रव का अपवर्तनांक ……………. प्राप्त हुआ।
सावधानियां (Precautions):
प्रयुक्त उत्तल लेंस तथा समतल दर्पण पूर्णतः साफ होने चाहिए।
वस्तु पिन की नोंक उत्तल लेंस की मुख्य अक्ष पर ही होनी चाहिए।
वस्तु पिन एवं प्रतिबिम्ब की नोंक के मध्य लम्बन पूर्णतः दूर कर लेना चाहिए।
उत्तल लेंस एवं समतल दर्पण के मध्य द्रव की अधिक मात्रा नहीं डालनी चाहिए।
उत्तल लेंस अधिक फोकस दूरी का होना चाहिए।
(मौखिक प्रश्न व उत्तर Viva Voce)
प्रश्न 1. आपका प्रयोग प्रकाश की किस परिघटना पर आधारित है? (प्रयोग 6, 7(प) व 7(पप))
उत्तर- प्रकाश के अपवर्तन पर
प्रश्न 2. प्रकाश के अपवर्तन से आप क्या समझते हैं?
उत्तर- प्रकाश का वेग भिन्न-भिन्न माध्यमों में भिन्न-भिन्न होता है अतः जब प्रकाश किरण एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करती है तो वह अपने मूल पथ से विचलित हो जाती है। इसी घटना को प्रकाश का अपवर्तन कहते हैं।
प्रश्न 3. किसी माध्यम (या पदाथ) के अपवर्तनांक से क्या तात्पर्य है?
उत्तर- किसी माध्यम का अपवर्तनांक, उस माध्यम की प्रकाश किरण के मार्ग में विचलन करने की क्षमता को व्यक्त करता है परंतु यह
एक सापेक्ष राशि है तथा प्रथम माध्यम के भिन्न-भिन्न होने पर, किसी माध्यम का अपवर्तनांक भी भिन्न-भिन्न होता है। प्रथम
माध्यम में प्रकाश के वेग एवं द्वितीय माध्यम में प्रकाश के वेग का अनुपात प्रथम माध्यम के सापेक्ष, द्वितीय माध्यम का अपवर्तनांक कहलाता है अर्थात्
1μ2 = C1/C2

प्रश्न 4. निरपेक्ष अपवर्तनांक क्या है?
उत्तर- यदि किसी द्वितीय माध्यम का अपवर्तनांक वायु या निर्वात् के सापेक्ष ज्ञात किया जाता है तो यह द्वितीय माध्यम का निरपेक्ष
अपवर्तनांक कहलाता है।
प्रश्न 5. क्या वायु एवं निर्वात् का अपवर्तनांक पूर्णतरू समान है?
उत्तर- नहीं, वायु का अपवर्तनांक, निर्वात के अपवर्तनांक से कुछ अधिक होता है।
प्रश्न 6. कांच का अपवर्तनांक 3/2 तथा जल का अपवर्तनांक 4/3 है तब कांच के सापेक्ष जल का अपवर्तनांक कितना होगा?
उत्तर- दिए गए मान वायु के सापेक्ष हैं अर्थात्

aμg = Ca/Cg = 3/2 rFkk aμw = Ca/Cw = 4/3

vr% gμw = Cg/Cw = 2/3 × 4/3= 8/9

प्रश्न 7. कांच के सापेक्ष जल का अपवर्तनांक 8/9 है इसका क्या अर्थ है?
उत्तर- इसका अर्थ है कि कांच में प्रकाश का वेग, जल में प्रकाश के वेग की तुलना में 8/9 गुना है।
प्रश्न 8. एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करने पर प्रकाश से सम्बन्धित किन-किन राशियों में परिवर्तन होता है?
उत्तर- प्रकाश के वेग पकाश की तरंगदैर्य एवं प्रकाश की तीव्रता में परिवर्तन होता है।
प्रश्न 9. एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करने पर प्रकाश से सम्बन्धित किस राशि में परिवर्तन नहीं होता?
उत्तर- प्रकाश की
प्रश्न 10. किसी माध्यम के अपवर्तनांक एवं प्रकाश की तरंगदैर्ध्य में क्या सम्बन्ध है?
उत्तर- माध्यम का अपवर्तनांक μ त्र ।़ठध्λ2 जहां । व ठ, दिए गए माध्यम के लिए नियतांक हैं।
प्रश्न 11. वायु से कांच में प्रवेश करने पर प्रकाश वेग एवं तरंगदैर्ध्य पर क्या प्रभाव पड़ता है?
उत्तर- वेग तथा तरंगदैर्ध्य कम हो जाते हैं जबकि आवृत्ति अपरिवर्तित रहती है।
प्रश्न 12. किसी माध्यम का अपवर्तनांक प्रकाश के किस वर्ण के लिए अधिकतम तथा किस वर्ण के लिए न्यूनतम होता है?
उत्तर- बैंगनी रंग के लिए अधिकतम तथा लाल रंग के लिए न्यूनतम होता है।
प्रश्न 13. कांच माध्यम में प्रकाश के बैंगनी एवं लाल रंग में से कौन अधिक तेजी से गमन करेगा?
उत्तर- लाल वर्ण का वेग बैंगनी वर्ण से अधिक होगा।
(प्रयोग संख्या 6 विशेष)
प्रश्न 14. कांच के गुटके से आप क्या समझते हैं?
उत्तर- यह 6 आयताकार फलकों से घिरा पारदर्शी माध्यम है।
प्रश्न 15. कांच के गुटके की मोटाई से क्या अभिप्राय है?
उत्तर- गुटके में होकर प्रकाश किरण जिस दिशा में अनुगमन करती है उस दिशा में फलक की लम्बाई, गुटके की मोटाई कहलाती है।
प्रश्न 16. प्रयोग में चल सूक्ष्मदर्शी से देखने पर गुटके की मोटाई कम प्राप्त होती है या अधिक?
उत्तर- वास्तविक मोटाई से कम ।
प्रश्न 17. क्यों?
उत्तर- क्योंकि अपवर्तन के कारण गुटके की तली पर बना चिन्ह कुछ ऊपर उठा हुआ दिखता है?
प्रश्न 18. यदि प्राकश किरण कांच पर अभिलम्बवत् आपतित हो तो आपतन कोण एवं अपवर्तन कोण के मान क्या होंगे?
उत्तर- दोनों के मान शून्य होंगे।
प्रश्न 20. प्रिज्म की भांति, कांच का गुटका, विचलन नहीं दर्शाता क्यों?
उत्तर- क्योंकि प्रिज्म के अपवर्तक तल परस्पर समान्तर नहीं होते फलतः प्रकाश किरण का प्रथम तल पर अपवर्तन कोण, द्वितीय तल पर आपतन कोण के समान नहीं होता जबकि कांच के गुटके में दोनों अपवर्तक तल परस्पर समान्त होते हैं, जिससे प्रथम तल पर आपतन कोण के समान होता है तथा निर्गत प्रकाश किरण प्रथम तल पर आपतित किरण के समान्तर ही होती है।
प्रश्न 21. क्या चल सक्ष्मदर्शी विधि से किसी द्रव का अपवर्तनांक ज्ञात कर सकता है?
उत्तर- हां
प्रश्न 22. चल रक्ष्मदर्शी विधि से द्रव के अपवर्तनांक ज्ञात करने की विधि क्या होगा है?
उत्तर- इसमे कांच के गटके के स्थान पर पहले एक खाली बीकर की वास्तविक गहराई (इसकी तला पर चिन्ह बनाकर) तथा बाद में इस बीकर में प्रायोगिक द्रव भरकर आभासी गहराई ज्ञात कर लेते हैं तथा इनका अनुपात द्रव के अपवर्तनांक को व्यक्त करता है।
प्रश्न 23. चल सूक्ष्मदर्शी से प्रयोग करते समय एक चश्मा पहने छात्र को चश्मा सहित प्रयोग करना चाहिए या चश्मा उतारकर?
उत्तर- चश्मा उतारकर अन्यथा गोलीय विपथन दोष उत्पन्न हो जाता है। सूक्ष्मदर्शी के लेस में स्वतः फोकसन की समंजन क्षमता होती है अतः चश्मा उतारन से लखने में कोई परेशानी नहीं होती।
(प्रयोग 7. (प) विशेष)
प्रश्न 24. द्रव का अपवर्तनांक ज्ञात करने में प्रयुक्त अवतल दर्पण कैसा होना चाहिए?
उत्तर- छोटे द्वारक एवं अधिक वक्रता त्रिज्या का।
प्रश्न 25. दर्पण पर द्रव डालने से उसकी वक्रता त्रिज्या में कमी प्रतीत होती है या वृद्धि एवं क्यों?
उत्तर- कमी, अपवर्तन के कारण।
प्रश्न 26. अवतल दर्पण पर द्रव की मात्रा कितनी होनी चाहिए?
उत्तर- कम होनी चाहिए ताकि आसानी से दर्पण का प्रतिबिम्ब प्राप्त हो सके।
प्रश्न 27. दर्पण पर द्रव का लेंस किस प्रकार का बनता है?
उत्तर- समतलोत्तल।
प्रश्न 28. क्या यह विधि महंगे पारदर्शी द्रव का अपवर्तनांक ज्ञात करने के लिए उपयुक्त है।
उत्तर- हां, क्योंकि इसमें द्रव की कम मात्रा ही प्रयुक्त की जाती है।
प्रश्न 29. पारे का अपवर्तनांक ज्ञात करने के लिए यह विधि उपयुक्त है या नहीं?
उत्तर- नहीं, क्योंकि पारा अपारदर्शी है।
(प्रयोग 7. (पप) विशेष)
प्रश्न 30. लेंस-दर्पण विधि में लेंस के नीचे समतल दर्पण ही क्यों रखते हैं?
उत्तर- ताकि लेंस से अपवर्तित, दर्पण पर आपतित किरण दर्पण पर अभिलम्बवत् हों तथा अपने ही मार्ग पर वापिस परावर्तित होकर, वस्तुं पर (फोकस पर) ही प्रतिबिम्ब निर्माण करें।
प्रश्न 31. लेंस के नीचे गोलीय दर्पण रखने से क्या होगा?
उत्तर- गोलीय दर्पण पर प्रत्येक आपतित किरण अभिलम्बवत् नहीं होगी तथा वापिस अपने ही मार्ग पर नहीं लौटेगी।
प्रश्न 32. लेंस एवं दर्पण के मध्य द्रव डालने पर द्रव का लेंस किस प्रकार का बनता है?
उत्तर- समतलावतला
प्रश्न 33. द्रव डालने पर संयुक्त लेंस की फोकस दूरी में कमी होती है या वृद्धि?
उत्तर- वृद्धि ।
प्रश्न 34. क्यों?
उत्तर- क्योंकि द्रव का समतलावतल लेंस किरणों को अपसारित करता है।
प्रश्न 35. इस प्रयोग में द्रव के लेंस की वक्रता त्रिज्याएं क्या होती हैं?
उत्तर- द्रव लेंस की निचली सतह की वक्रता त्रिज्या अनन्त जबकि ऊपरी सतह की वक्रता त्रिज्या उत्तल लेंस की निचली सतह की वक्रता त्रिज्या के समान होती है।
प्रश्न 36. लेंस निर्माता सूत्र क्या है?
उत्तर- यदि किसी लेंस के पृष्ठों की वक्रता त्रिज्याएं त्1 व त्2 तथा लेंस के पदार्थ का अपवर्तनांक μ है तो लेंस की फोकस दूरी ि के लिए