तरंगों का परावर्तन और अपवर्तन (reflection and refraction of waves in hindi) , तरंग का परावर्तन

(reflection and refraction of waves in hindi) तरंगों का परावर्तन और अपवर्तन : जब कोई वस्तु जैसे एक बॉल , किसी दृढ दिवार पर फेकी जाती है तो हम देखते है की बॉल टकराने (परावर्तन) के बाद वापस उसी तरफ आ जाती है जिस तरफ से उसे फेंका गया था , बॉल के परावर्तन का अध्ययन हम उसकी गति अर्थात चाल और ऊर्जा संरक्षण के आधार पर करते है , यदि बॉल और दिवार के मध्य प्रत्यास्थ टक्कर हो रही है तो बॉल टकराने के बाद उसी गति से वापस आती है जिस गति से गयी थी और इस स्थिति में ऊर्जा का भी कोई हास नही होता है।
लेकिन यदि टक्कर अप्रत्यास्थ है तो दिवार या बॉल कुछ ऊर्जा को अवशोषित कर लेती है जिससे बॉल उस गति से वापस नही आती , जिस गति से वह गई थी।
“तरंगो में भी ऊर्जा और गति का समावेश होता है , जब कोई तरंग किसी बाधा से टकराती है तो यह बाधा से टकराकर पुन: उसी माध्यम में लौट आती है , यहाँ तरंग की ऊर्जा और गति अपरिवर्तित रहती है।  इसे तरंग का परावर्तन कहते है। ”
“जब तरंग एक माध्यम से दूसरे माध्यम में प्रवेश करती है तो दोनों माध्यम के पृष्ठ से ये कुछ परावर्तित होकर पुन: उसी माध्यम में लौट आती है और कुछ तरंगे दूसरे माध्यम में चली जाती है , यहाँ तरंगो की चाल एक माध्यम से दूसरे माध्यम में परिवर्तित हो सकती है लेकिन तरंग की आवृति नियत बनी रही है इसे तरंगों का परावर्तन कहते है। ”

1. तरंग का तार पर गति करना : जैसा चित्र में दिखाया गया है की एक तरंग किसी तार के साथ गति कर रही है –

जो तरंग तार के साथ गति कर रही है , इस तरंग की चाल , तार के तनाव (T) और तार के जडत्व (μ) पर निर्भर करता है।
तरंग की गति के लिए निम्न सूत्र दिया जाता है –
चाल (v) = μT
2. दृढ सिरे से परावर्तन (reflection from rigid end) : जैसा चित्र में दिखाया है की एक डोरी के एक सिरे को दृढ आधार से बाँध देते है और डोरी के दूसरे सिरे में तरंग उत्पन्न करवाते है तो तरंग दृढ सिरे से परावर्तन के बाद अपनी कला π से परिवर्तित कर लेती है।

अर्थात परावर्तन के बाद तरंग में 180o का कलान्तर उत्पन्न हो जाता है।
3. मुक्त सिरे से परावर्तन (reflection from open end) : एक एक डोरी के एक सिरे को इस प्रकार बाँधा जाए की यह ऊपर व नीचे की तरफ गति करने के लिए स्वतंत्र हो और डोरी के दूसरे सिरे पर तरंग उत्पन्न की जाए तो परावर्तन के बाद कला में कोई परिवर्तन नही होता है।

4. पतली डोरी से मोटी डोरी की तरफ तरंग की गति (कम घनत्व से अधिक घनत्व की तरफ) : जब कोई तरंग किसी कम घनत्व वाली पतली डोरी से अधिक घनत्व वाली मोटी डोरी की तरफ गति करती है तो इसके कारण परावर्तन और अपवर्तन की घटना निम्न प्रकार घटित होती है।

इस स्थिति में तरंग की चाल अधिक घनत्व में कम हो जाती है , जैसा चित्र में देख सकते है।
5. मोटी डोरी से पतली डोरी की ओर तरंग की गति (अधिक घनत्व से कम घनत्व की ओर) : जब कोई तरंग अधिक घनत्व से कम घनत्व की ओर गति करती है तो तरंग की गति अधिक हो जाती है क्योंकि तरंग अधिक घनत्व से कम घनत्व की ओर गति कर रहा है।

इस स्थिति में तरंगों का परावर्तन और अपवर्तन निम्न प्रकार घटित होता है

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