रेडियोऐक्टिवता क्या है ,रेडियोएक्टिवता , रेडियोऐक्टिवता की खोज किसने की (radioactivity in hindi)

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(radioactivity in hindi) रेडियोऐक्टिवता क्या है ,रेडियोएक्टिवता , रेडियोऐक्टिवता की खोज किसने की : सबसे पहले बात करते है कि रेडियोएक्टिविटी या रेडियोसक्रियता की खोज किसने की ?
सन 1896 में फ़्रांस के भौतिक वैज्ञानिक एंटोनी हेनरी बेकुरल (Antoine Henri Becquerel) ने पहली बार इसकी खोज की थी और इसके होने के सबूत पेश किये थे अर्थात प्रयोग द्वारा रेडियोऐक्टिवता के होने को सिद्ध किया था।
रेडियोऐक्टिवता की परिभाषा : प्रकृति में कुछ तत्व या पदार्थ ऐसे होते है जिनसे स्वत: ही अदृश्य किरणें उत्सर्जित होती रहती है , इस घटना को रेडियोऐक्टिवता कहते है।
जिन पदार्थों से ये अदृश्य किरणें निकलती रहती है अर्थात जिन पदार्थों में रेडियोऐक्टिवता की घटना घटित होती है उन पदार्थों को रेडियोऐक्टिवता पदार्थ कहते है।
रेडियोऐक्टिवता पदार्थों से जो किरणें उत्सर्जित होती रहती है उन किरणों को रेडियोऐक्टिवता किरणें कहते है।
किसी पदार्थ से उत्सर्जित होने वाली रेडियोऐक्टिवता किरणें तीन प्रकार की हो सकती है –
1. अल्फा किरणें
2. बीटा किरणें
3. गामा किरणें
रेडियोएक्टिव क्षय :  रेडियोएक्टिव पदार्थों के परमाणुओं से अल्फा बीटा तथा गामा किरणें उत्सर्जित होती रहती है अर्थात निकलती रहती है , पदार्थ के परमाणुओं से इन किरणों के निकलने से मूल पदार्थ का परमाणु भार तथा परमाणु क्रमांक परिवर्तित हो जाता है और फलस्वरूप एक नए परमाणु भार और परमाणु क्रमांक के परमाणुओं का पदार्थ प्राप्त होता है इस घटना को रेडियोएक्टिव विघटन या रेडियोएक्टिव क्षय कहते है।
उदाहरण : युरेनियम एक रेडियोएक्टिव पदार्थ होता है और जब युरेनियम से एक अल्फा कण उत्सर्जित हो जाता है या निकल जाता है तो यह थोरेनियम में परिवर्तित हो जाता है अर्थात युरेनियम का क्षय हो जाता है –

रेडियोएक्टिव क्षय नियम : इस नियम के अनुसार रेडियोएक्टिव पदार्थों के क्षय होने की दर उस क्षण उपस्थित परमाणुओं की संख्या के समानुपाती होता है , चूँकि प्रारंभ में परमाणुओं की संख्या अधिक होती है और क्षय होने के कारण धीरे धीरे परमाणुओं की संख्या कम होती जाती है अत: रेडियोएक्टिव क्षय नियम के अनुसार क्षय की दर भी समय के साथ धीरे धीरे कम होती जाती है क्यूंकि समय के साथ परमाणुओं की संख्या कम होती जाती है।