रेडियोएक्टिव पदार्थ की परिभाषा क्या है , रेडियोएक्टिव पदार्थ की खोज , तत्व नाम radioactive material in hindi

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radioactive material in hindi , रेडियोएक्टिव पदार्थ की परिभाषा क्या है , रेडियोएक्टिव पदार्थ की खोज , तत्व नाम :-

नाभिकीय बल : रदरफोर्ड के एल्फा प्रकीर्णन प्रयोग से नाभिक का आकार 10-15 मीटर कोटि की त्रिज्या का एक गोला है।

इनती कम दूरी पर नाभिक में न्युक्लिऑन उपस्थित रहते है , नाभिक के न्युक्लिऑनो (प्रोटोनो , न्यूट्रोनो) के मध्य इतनी कम दूरी पर विद्युत बल का प्रतिकर्षण बल अधिक लगना चाहिए जिसके कारण न्युक्लियो नाभिक के बाहर आ जाने चाहिए जिससे नाभिक का स्थायित्व नहीं रहेगा परन्तु  फिर भी नाभिक का स्थायित्व रहता है , इससे यह स्पष्ट होता है कि प्रकृति में विद्युत बल , चुम्बकीय व गुरुत्वीय बल के अलावा भी एक अन्य बल है जो नाभिक में इतनी कम दूरी पर स्थित न्युक्लिऑनो को बांधे रखता है , इस अन्य प्राकृतिक बल को नाभिकीय बल कहा गया।

विद्युत बल में दूरी के साथ परिवर्तन दूरी के वर्ग के व्युत्क्रमानुपाती कि दर से होता है परन्तु अभी तक यह ज्ञात नहीं हुआ की नाभिकीय बल में दूरी के साथ परिबर्तन किस दर से होता है लेकिन फिर भी यह ज्ञात हुआ कि नाभिकीय बल में दूरी के साथ परिवर्तन विद्युत बल की तुलना में शीघ्रता से होता है।

किसी निश्चित दूरी के लिए गुरुत्वीय बल , विद्युत बल व नाभिकीय बल के परिमाणों में तुलना करने पर ज्ञात हुआ की नाभिकीय बल प्रबल बल होता है।

नाभिकीय बल के गुण

1. नाभिकीय बल आकर्षणात्मक प्रकृति का होता है।

2. नाभिकीय बल लघु परास का बल होता है क्योंकि न्युक्लिओनो के मध्य की दूरी 10 fm से अधिक होने पर नाभिकीय बल नगण्य हो जाता है।

3. नाभिकीय बल प्रबल बल होता है क्योंकि न्यूक्लिऑनो के मध्य की दूरी 2 fm (दो फर्मी) होने पर नाभिकीय बल विद्युत बल की तुलना में 100 गुना अधिक हो जाता है।

4. नाभिकीय बल आवेश पर निर्भर नहीं करता क्योंकि नाभिक में उपस्थित प्रोटॉन-प्रोटॉन या नाभिक में उपस्थित प्रोटोन-न्युट्रोन या न्यूट्रॉन -न्यूट्रोन प्रत्येक युग्म के मध्य नाभिकीय बल समान होता है।

5. मध्यवर्ती नाभिको की प्रति न्युक्लिओन बंधन ऊर्जा व प्रत्येक नाभिक का घनत्व लगभग नियत होता है जिससे यह स्पष्ट होता है कि नाभिक का न्युक्लिऑन उसके प्रत्येक न्युक्लिऑनो पर नाभिकीय बल आरोपित नहीं करता है। यह केवल अपने समीपवर्ती न्युक्लिऑनो पर ही नाभिकीय बल आरोपित करता है , इसे नाभिकीय बल की संतृप्तता कहते है।

6. हल्के नाभिको के न्युक्लिऑनो के मध्य की दूरी 0.5 fm (फर्मी) से कम होने पर नाभिकीय बल का प्रतिकर्षणात्मक गुण कार्य करता है जिससे न्युक्लिऑन नाभिक से बाहर आ जाते है इसलिए हल्के नाभिक अस्थायी नाभिक होते है परन्तु भारी नाभिकों के न्युक्लिऑनो के मध्य की दूरी 10 फर्मी से अधिक होने के कारण नाभिकीय बल के स्थान पर विद्युत बल का प्रतिकर्षणात्मक गुण कार्य करता है जिसके कारण नाभिक के न्युक्लिऑन (प्रोटोन-प्रोटोन) नाभिक से बाहर आ जाते है इसलिए भारी नाभिक अस्थायी होते है।

रेडियोएक्टिव पदार्थ

हेनरी बैकुरल नामक वैज्ञानिक ने ऐसे यूरेनियम पदार्थ की खोज की जिससे लगातार स्वत: अदृश्य विकिरण उत्सर्जित होती रहती है।
यह अदृश्य किरणें कागज के पतले व मोटे गत्ते को पार करके फोटोग्राफी प्लेट को प्रभावी करती है। इन अदृश्य विकिरणों को बैकुरल विकिरण तथा यूरेनियम पदार्थ को रेडियो एक्टिव पदार्थ तथा इस पदार्थ के गुण को रेडियोएक्टिवता कहा गया।
पोलेंड के दम्पति वैज्ञानिक क्युरी व मैडम क्युरी नामक वैज्ञानिको ने ऐसे रेडियो एक्टिव पदार्थ की खोज की जिनकी रेडिओ एक्टिवता युरेनियम पदार्थ से लगभग 10 लाख गुना अधिक थी जिनका नाम क्रमशः पोलोनियम व रेडियोधर्मी है।
रेडियोएक्टिव प्रक्रम की कुछ महत्वपूर्ण शर्ते या प्रतिबंध :
1. रेडिओएक्टिव एक नाभिकीय प्रक्रम है न कि कोई रासायनिक या भौतिक प्रक्रम क्योंकि रासायनिक व भौतिक प्रक्रम के दौरान प्राप्त ऊर्जा इलेक्ट्रॉन वोल्ट कोटि की होती है जबकि नाभिकीय प्रक्रम के दौरान प्राप्त ऊर्जा मेगा इलेक्ट्रॉन वोल्ट कोटि की होती है।
2. रेडियोएक्टिव प्रक्रम में आवेश संरक्षण द्रव्यमान संख्या संरक्षण , रेखीय संवेग संरक्षण , कोणीय संवेग संरक्षण व द्रव्यमान ऊर्जा संरक्षण नियमो की पालना होती है।
3. रेडियो एक्टिव प्रक्रमो में अभिकारक में उपस्थित नाभिको का कुल द्रव्यमान उत्पाद में उपस्थित नाभिको के कुल द्रव्यमान से अधिक होना चाहिए।