विकिरण : ऊष्मा का विकिरण विधि radiation heat transfer in hindi

(radiation heat transfer in hindi) विकिरण : ऊष्मा का विकिरण विधि : ऊष्मा संचरण या स्थानांतरण का यह एक मात्र ऐसी विधि है जिसमे माध्यम की आवश्यकता नहीं होती है।

परिभाषा : “ऊष्मा संचरण की वह विधि जिसमे ऊष्मा का स्थानान्तरण चुम्बकीय तरंगो के रूप में होता है , इस विधि में किसी माध्यम की आवश्यकता नहीं होती और यह विधि ऊष्मा संचरण की सबसे तेज विधि है। ”

यहाँ विद्युत चुम्बकीय तरंगो से अभिप्राय है प्रकाश , माइक्रोवेव , रेडियो तरंगे , गामा तरंगो से है , अर्थात इन सब तरंगो के कारण जब ऊष्मा का संचरण होता है तो इसे ऊष्मा का विकिरण विधि से संचरण कहते है।

इन सब में से अवरक्त तरंगो के कारण ऊष्मा का संचरण हम सबसे ज्यादा देख सकते है , जब भी किसी वस्तु को गर्म किया जाता है तो यह अवरक्त तरंगे उत्पन्न करती है जिससे ऊष्मा का संचरण भी होता है।

जैसे जब एक कैंप फायर (खुले में जलाई गयी आग) के आस पास ऊष्मा आ जाती है , हालाँकि इसका कारण यह भी दिया जाता है की वायु के कण गर्म हो जाते है लेकिन इसका कारण यह भी है कि यह अवरक्त तरंगे उत्पन्न करता है जो ऊष्मा का स्थानांतरित करते है।

जब कोई पूरी तरह से ठंडी होती है अर्थात इसका ताप परम शून्य के बराबर है तो यह तरंगे उत्पन्न नहीं करती है अन्यथा हर गर्म वस्तु तरंगे उत्पन्न करती है जो ऊष्मा का भी स्थानांतरण करती है।

विकिरण प्रकाश के वेग से गति करती है तथा ये प्रकाश के हर गुण को दर्शाती है जैसे परावर्तन , अपवर्तन आदि। जब विकरण किसी वस्तु से टकराती है तो विकिरण का कुछ भाग वस्तु द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है और कुछ भाग परावर्तित कर दिया जाता है अर्थात ऊष्मा का कुछ भाग अवशोषित हो जाती है और कुछ भाग संचरित हो जाती है।

कुछ परिभाषाएं

परावर्तन क्षमता : जैसा की हमने पढ़ा की जब विकिरण किसी वस्तु पर आपतित होती है तो कुछ भाग अवशोषित हो जाता है और कुछ भाग परावर्तित हो जाती है , अत: परावर्तित ऊर्जा तथा आपतित ऊर्जा के अनुपात को ही परावर्तन क्षमता कहते है।
संचरण क्षमता : किसी वस्तु पर आपतित उर्जा का कुछ भाग अवशोषित हो जाता है और बाकी संचरित हो जाता है अत: संचरित ऊर्जा और आपतित ऊर्जा के अनुपात को ही संचरण क्षमता कहते है।
अवशोषण क्षमता : अवशोषित उर्जा और आपतित ऊर्जा के अनुपात को अवशोषित क्षमता कहते है।

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