WhatsApp Group Join Now
Telegram Join Join Now

उत्तापमापी ,अदृश्य तंतु उच्च तापमापी , सिद्धांत (pyrometer in hindi and invisible filament pyrometer)

(pyrometer in hindi and invisible filament pyrometer) उत्तापमापी क्या है , अदृश्य तंतु उच्च तापमापी , सिद्धांत : जब किसी वस्तु का तापमान बहुत अधिक होता है तो इसका ताप का मापन सामान्य तापमापी से ज्ञात नहीं किया जा सकता है जैसे यदि हमें किसी भट्टी का तापमान ज्ञात करना हो तो हम यह किसी सामान्य थर्मोमीटर से नहीं कर सकते।

किसी उच्च ताप के मापन के लिए प्रयुक्त होने वाली तापमापी को उत्तापमापी कहते है। यह एक ग्रीक शब्द है जो दो शब्दों से मिलकर बना है , pyro का मतलब होता है आग या बहुत अधिक तापमान तथा meter का मतलब होता है मापन। अत: pyrometer का अभिप्राय है आग का मापन।

उत्तापमापी या पाइरोमीटर का सिद्धांत (principle of pyrometer)

जब हम जलती हुई आग के पास जाते है तो आग से कुछ दूर भी हमें गर्मी का अहसास होता है , क्योंकि आग चारों दिशाओ में ऊष्मा विकिरण उत्सर्जित करती है और इसी कारण गर्म वस्तु से या आग से कुछ दूरी पर भी हमें ऊष्मा का अनुभव हो जाता है।
यदि भौतिक विज्ञान के सभी नियमों का पालन किया जाए तो हम पाएंगे आग भी भौतिक विज्ञान के नियम के अनुसार ही व्यवहार करती है। जो बताता है कि आग ऊष्मा विकिरण उत्सर्जित करती है और इन विकिरणों का सम्बन्ध सीधा आग के तापमान से होता है , अत: यदि हम इन उत्सर्जित विकिरणों कीतरंग दैर्ध्य (wavelength) ज्ञात कर ले तो हम उस आग के तापमान की भी गणना कर सकते है और इसी सिद्धांत पर यह उत्तापमापी (पाइरोमीटर ) कार्य करता है।
अर्थात इसके द्वारा गर्म वस्तु से प्राप्त उष्मीय विकिरण की तीव्रता के द्वारा उस गर्म वस्तु का तापमान का मान ज्ञात किया जा सकता है , यही इसका कार्य करने का सिद्धान्त है।

अदृश्य तंतु उच्च तापमापी ( invisible filament pyrometer)

इसमें किसी इमेज की तीव्रता को ऊष्मा के स्रोत और सन्दर्भ लैंप के साथ तुलना की जाती है , और इमेज की तीव्रता का मान ऊष्मा के स्रोत के बराबर करने के लिए सन्दर्भ लैंप की तीव्रता का मान बढाया जाता है और जब दोनों का मान समान हो जाता है तो लैंप की तीव्रता द्वारा ऊष्मा के स्रोत के ताप की गणना की जाती है।
अर्थात यह तापमापी वस्तु से प्राप्त उष्मीय विकिरण की तीव्रता के माध्यम से ताप को ज्ञात करने के लिए किया जाता है तथा यह स्टीफन का नियम पर आधारित होती है जिसके अनुसार किसी वस्तु के इकाई क्षेत्रफल से प्रति सेकंड में उत्सर्जित ऊष्मा वस्तु के ताप के चार घात के समानुपाती होती है।