प्रोटेस्टेंटवाद क्या है | प्रोटेस्टेंटवाद की परिभाषा किसे कहते है protestantism in hindi द प्रोटेस्टेंट एथिक एंड द स्पिरिट ऑफ कैपीटलिज्म

By   November 21, 2020

द प्रोटेस्टेंट एथिक एंड द स्पिरिट ऑफ कैपीटलिज्म किताब पुस्तक प्रोटेस्टेंटवाद क्या है | प्रोटेस्टेंटवाद की परिभाषा किसे कहते है protestantism in hindi The Protestant Ethic and the Spirit of Capitalism in hindi ?

प्रोटेस्टेंटवाद
वेबर द्वारा द प्रोटेस्टेंट एथिक एंड द स्पिरिट ऑफ कैपीटलिज्म का अध्ययन प्रायः उसके सबसे महत्वपूर्ण योगदानों में से एक माना जाता है। वेबर का विश्वास विचारों की, विशेषतः धार्मिक विचारों की प्रभावशीलता में है। ये विचार समाज और विभिन्न सामाजिक स्वरूपों और भौतिक यथार्थ का सृजन व रूपांतरण कर सकते हैं। इस प्रकार दोनों ही की दृष्टियों में पूंजीवाद और समकालीन समाज के सामाजिक संगठनों में पूंजी की प्रमुखता है। पूंजीवाद समाज पर आधिपत्य जमाने का प्रमुख साधन है। वेबर पूंजीवाद को उत्पादनकारी शक्तियों की वृद्धि मानता है लेकिन यह एक विशेष प्रकार की धार्मिक चेतना के उद्भव और विकास का परिणाम है जिसे प्रोटेस्टेंट नैतिकता कहा जाता है। इस प्रोटेस्टेंट नैतिकता को कल्विनवादी नैतिकता कहते हैं। इसका मध्यकालीन प्रोटेस्टेंट मत से संबंध था। सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसमें ईसाई धर्म के परम्परागत सिद्धांतों की तर्कसंगत व्याख्या की गई हैं, जिसमें सांसारिक भौतिक लाभों को पारलौकिक महत्वाकांक्षाओं के साथ जोड़ दिया गया है। वेबर ने उन परिशुद्ध तरीको की ओर ध्यान आकृभट किया जिनमें निजी धार्मिक मुक्ति के साथ-साथ भौतिक समृद्धि और प्रभुता को पाने का भी प्रयास किया गया है। वेबर का कथन है कि इसी उदात तार्किकता के कारण पूंजीवाद का जन्म हुआ। वेबर के अनुसार इस रूपांतरण के संदर्भ में सबसे महत्वपूर्ण तर्कसंगत व्याख्या लौकिक आत्मसंयम के विकसित होने की थी जिसके अंतर्गत विषयासक्ति से दूर रहने तथा बचत एवं संचय की भावना पैदा हुई। इसके द्वारा ईश्वर में विश्वास रखने वाला व्यक्ति प्रभु की कृपा का अधिकारी बन सकता है। वेबर के मत में प्रोटेस्टेंट नैतिकता में सन्निहित तर्कवाद ने आधुनिक पूंजीवाद की भौतिक परिस्थितियों के और अधिक विकास में मदद की (देखिए हर्न 1985ः 76)।

 पूंजीवाद
मैक्स वेबर ने आधुनिक समाज में तर्कसंगत पूंजीवाद के विकास के लिए कुछ महत्वपूर्ण परिस्थितियों की पहचान की। ये हैं – उत्पादन के सभी भौतिक साधनों का निजी स्वामित्व, विपणन स्वातंत्र्य, यंत्रीकरण, लिखित कानून और प्रशासन उन्मुक्त श्रम तथा आर्थिक जीवन का वाणिज्यीकरण। वेबर का दृढ़ विश्वास है कि विश्व के अनेक भागों में ऐसी स्थितियां बन रही हैं लेकिन वे सबसे पहले आधुनिक तर्कसंगत पूंजीवाद में दिखाई दीं जहां प्रोटेस्टेंटवाद की धार्मिक नैतिकता का दबदबा था। उसके अनुसार प्रोटेस्टेंटवाद तर्कसंगत पूंजीवाद के भौतिक आधार के विकास के परम्परागत विरोध को कम करने में सहायक हुआ (देखिए हर्न 1985ः 77)।

वेबर पूंजीवादी समाज की तर्कसंगति से तथा सामाजिक स्वरूपों और प्रक्रियाओं की व्यवस्थाबद्ध तर्कसंगति से बहुत प्रभावित था। सामाजिक संगठन और संघ की प्रणाली में राजनीतिक प्रक्रिया के स्वरूप, सत्ता की प्रकृति और लोगों की मनोवृति में तर्कसंगति की झलक मिलती है। वेबर ने काफी विस्तारपूर्वक लिखा है कि विभिन्न प्रकार से पूंजीवादी समाज न केवल पूर्ववर्ती समाज या समाजों से अधिक तर्कसंगत है बल्कि वह तर्क को एक आवश्यक प्रक्रिया और संगठन के सिद्धांत के रूप में प्रवर्तित और स्थापित करता है। वेबर ने अपनी प्रमुख कृति इकोनॉमी एण्ड सोसाइटी में यह बताया है कि किस प्रकार पूंजीवाद समाज में जिसमें उसके अनुरूप तर्क पर आधारित अपने स्पष्ट सिद्धांत और तर्कसंगत संगठन हैं। वेबर ने यह भी जांच की है कि तर्कसंगतिकरण की यह निरन्तर चलने वाली प्रक्रिया किस तरह पूंजीवाद के विकास के तर्क का एक भाग है।

 नौकरशाही
वेबर के अनुसार आधुनिक नौकरशाही व्यवस्था औपचारिक तर्कसंगति की सामाजिक अभिव्यक्ति है। औपचारिक तर्कसंगति का अभिप्राय विश्वास और भावुकता के स्थान पर नियमों और प्रक्रियाओं को महत्व देना है। नौकरशाही का विकास शासको को शासितों से, आम व्यक्तियों को पद की प्रतिष्ठा से और भावनाओं व विश्वासों को कार्यप्रणालियों और विनियमों से अलग करने पर आधारित है। अतः वेबर कई तरह से नौकरशाही को तर्कसंगतिकरण के रूप में देखता है। इनमें से कुछ का उल्लेख नीचे किया गया है।
उदाहरणतः
प) प्रयोजनों और कार्यप्रणालियों को सुव्यवस्थित करने से नौकरशाही व्यवस्था अधिक व्यवहार्य हो जाती है।
पप) पूर्व स्थापित और परिभाषित प्रतिमानों के आधार पर अधिकारों और कर्त्तव्यों को सीमित करने से कार्यक्षमता में वृद्धि होती है और
पपप) सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि नौकरशाही व्यवस्था में कार्यरत अधिकारियों की भर्ती, पदोन्नति और सेवानिवृति की कार्यप्रणालियों की तार्किकता से उनका जीवन अधिक सुरक्षित और व्यवस्थित बन जाता है।

वेबर की दृष्टि से नौकरशाही व्यवस्था तर्कसंगत प्रभुता का ढांचा है। जैसा कि आपने इस खंड में अन्यंत्र पढ़ा है कि नौकरशाही तर्कविधिक सत्ता की विशिष्ट अभिव्यक्ति है। इसलिए शक्ति तभी वैध कही जाती है जब इसका उपयोग औपचारिक, व्यक्ति निरपेक्ष नियमों और विनयमों द्वारा किया जाये जो नौकरशाही व्यवस्था के आधार हैं। इसके साथ ही नौकरशाही व्यवस्था अपने सदस्यों के तर्कसंगत कार्यों को बढ़ावा देती हैं (देखिए हर्न 1985ः 79)। वेबर नौकरशाही के विकास को पूंजीवाद के तर्कसंगत विकास के अनिवार्य अंग के रूप में देखता है क्योंकि यह अत्याधिक तर्कसंगत और तर्कपरक है। वेबर ने एक महत्वपूर्ण विरोधाभास या अंतर्विरोध की ओर भी ध्यान दिलाया है।

नौकरशाही मनोवृति के विकास से सृजनशीलता और साहसिकता की भावना समाप्त हो जाती है, ये ही ऐसे कारण हैं जिनकी वजह से पूंजीवादी व्यवस्था संभव हुई है।

इकाई के इस बिंदु पर बोध प्रश्न 2 तथा सोचिए और करिए 1 को पूरा करें।
बोध प्रश्न 2
प) मैक्स वेबर ने अपनी कृति में तर्कसंगति को कैसे प्रस्तुत किया है? उत्तर छः पंक्तियों में लिखिए।
पप) उस प्रक्रिया का वर्णन कीजिए जिसमें प्रोटेस्टेंट नैतिकता ने ईसाई धर्म के विश्वासों को तर्कसंगत बनाया और जो यूरोप में पूंजीवाद के उद्भव के लिए अनुकूल थी। लगभग पांच पंक्तियों में उत्तर दीजिए।

सोचिए और करिए 1
किसी सरकारी या अर्धसरकारी कार्यालय में जाइए और उस कार्यालय की विशेषताओं की जांच नौकरशाही के तर्कसंगतिकरण के संदर्भ में कीजिए। अपने प्रेक्षण के आधार पर दो पृष्ठ की टिप्पणी लिखिए। यदि संभव हो तो अपने अध्ययन केंद्र के अन्य विद्यार्थियों की टिप्पणियों से अपनी टिप्पणी की तुलना कीजिए।

बोध प्रश्न 2 उत्तर
प) मैक्स वेबर के अध्ययन में तर्कसंगति दो भिन्न-भिन्न प्रकारों में दिखाई देती है। सर्वप्रथम उसने समाज का अध्ययन तर्कसंगतिकरण की प्रक्रिया के रूप में किया अर्थात् समाज में परिवर्तन का एक नियम है जो कम तर्कसंगत रूप से अधिक तर्कसंगत रूप की ओर होता है, दूसरे उसने तर्कसंगति का प्रयोग विचार पद्धति के साधन के रूप में किया, जिसे विचारपद्धति का सिद्धांत या शोध की विधि कहा जाता है। इस दृष्टि से तर्कसंगति शोध की एक पद्धति है, जिसके द्वारा सामाजिक स्वरूप या विकास के पीछे निहित तर्क की खोज की जाती है।
पप) वेबर का कथन था कि परंपरागत प्रोटेस्टेंट नैतिकता के पीछे तर्कसंगतिकरण के कारण पूंजीवाद का उद्भव हुआ। सबसे महत्वपूर्ण तर्कसंगत व्याख्या अंतर्मुखी संयम के विकसित होने की है, जिसके कारण प्रोटेस्टेंटवाद को मानने वालों के मन में विषयसक्ति से दूर रहने और बचत व संचय करने की भावना पैदा होती है। इसके द्वारा ईश्वर पर विश्वास रखने वाला व्यक्ति प्रभु की कृपा का पात्र बनने के लिए आश्वस्त हो जाता है।

सारांश
इस इकाई में आपने तर्कसंगति और इसकी सहगामी प्रक्रिया अर्थात तर्कसंगतिकरण के बारे में पढ़ा। ये दोनों विषय मैक्स वेबर की रचना के आधारभूत विषय हैं। इन शब्दों के भाव को समझने के बाद आपने देखा कि कैसे वेबर ने प्रोटेस्टेंटवाद, पूंजीवाद और नौकरशाही व्यवस्था के अपने विश्लेषण में इनका अध्ययन किया। आपने यह भी देखा कि कैसे वेबर ने तर्कसंगति को स्वैकरैशनलिटैट और वैर्टरैशनलिटैट दो प्रकारों में वर्गीकृत किया। अंत में आपने पढ़ा कि किस तरह वेबर ने तर्कसंगति का प्रयोग समाजशास्त्रीय जांच में किया और मूल्य-विमुक्त समाजशास्त्र का समर्थन किया।