हिंदी माध्यम नोट्स
कोलाइडो के गुण (properties of colloids in hindi) , जीटा विभव , ब्राउनी गति , अवसादन , सतही क्षेत्रफल
9. विद्युत कण संचलन प्रभाव
10. स्कंदन
यह प्रक्रिया अवसादन कहलाती है।
इस विधि द्वारा वृहद् अणुओं का मोलर द्रव्यमान ज्ञात किया जाता है।
- ब्राउनी गति कोलाइडी कणों के आपस में टकराने से उत्पन्न होती है।
- ब्राउनी गति के कारण कोलाइडी विलयन का स्थायित्व बना रहता है।
- कोलाइडी कणों का आकार बड़ा होने पर ब्राउनी गति कम होती है।
- विलयन की श्यानता अधिक होने पर ब्राउनी गति कम होती है।
- ताप बढाने पर ब्राउनी गति बढती है।
- परिक्षिप्त प्रावस्था व परिक्षेपण माध्यम के कणों के अपवर्तनांक में अन्तर अधिक होना चाहिए।
- परिक्षिप्त प्रावस्था के कणों का आकार प्रयुक्त प्रकाश की तरंग दैर्ध्य के आधार पर बहुत कम नही होना चाहिए।
| धनात्मक कोलाइडी विलयन | ऋणात्मक कोलाइडी विलयन |
| 1. क्षारीय रंजक जैसे – मेथिलिन ब्ल्यू | अम्लीय रंजक जैसे- इथ्रोसिन , कांगोरेड |
| 2. धातु हाइड्रोक्साइड सॉल जैसे Fe(OH)2 , Al(OH)2 | धातु सल्फाइड सॉल जैसे As2S3 , CdS , Sb2S3 |
| 3. जलयोजित धातु ऑक्साइड सॉल- Fe2O3.xH2O , Al2O3.xH2O | धातुओ के सॉल जैसे- Au सॉल , Ag सॉल आदि |
| 4. TiO2 सॉल | स्टार्च , जिलेटिन , सिलिसिक अम्ल , मिट्टी आदि 5. हीमोग्लोबिन (रक्त) |
9. विद्युत कण संचलन प्रभाव : विद्युत क्षेत्र की उपस्थिति में कोलाइडी विलयन में उपस्थित सभी कोलाइडी कण किसी एक इलेक्ट्रोड की ओर गमन करने लगते है , यह घटना , विद्युत कण संचलन प्रभाव कहलाती है।
इस प्रभाव द्वारा कोलाइडी कणों पर आवेश की पुष्टि होती है।
इस प्रयोग में एक U आकार की नली में कोलाइडी विलयन लेकर इसके दोनों सिरों पर विपरीत आवेशित इलेक्ट्रोड लगा देते है , विद्युत धारा प्रवाहित करने पर कोलाइड विलयन में उपस्थित सभी कोलाइडी कण किसी एक इलेक्ट्रोड पर एकत्रित हो जाते है।
यदि सभी कोलाइडी कण एनोड (+) पर एकत्रित होते है तो वह ऋणात्मक कोलाइडी विलयन होगा तथा यदि सभी कोलाइडी कण कैथोड (-) पर एकत्रित हो तो वह धनात्मक कोलाइडी विलयन होगा।
कोलाइडी कणों का एनोड (+) की ओर गमन ऋण कण संचलन एवं कैथोड (-) की ओर गमन धन कण संचलन कहलाता है।
कोलाइडी कणों पर आवेश की उत्पत्ति के कारण
- प्रथम विद्युत स्तर का निर्माण : कोलाइडी कण आधिक्य में उपस्थित विलयन में से अपने समान आयनों का अधिशोषण करके प्रथम विद्युत स्तर का निर्माण करते है।
- द्वितीय वैधुत स्तर का निर्माण : आधिक्य में उपस्थित विलयन में से शेष बचे विपरीत आवेशित आयन कोलाइडी कणों पर द्वितीय विद्युत स्तर का निर्माण करते है।
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