उपसर्ग की परिभाषा क्या है ? उपसर्ग किसे कहते है ? prefix in hindi grammar meaning , भेद , उदाहरण

By   June 16, 2020

prefix in hindi grammar meaning उपसर्ग की परिभाषा क्या है ? उपसर्ग किसे कहते है ?  भेद , उदाहरण , प्रश्न और उत्तर , संस्कृत , हिंदी , अरबी उर्दू भाषा के उपसर्ग के उदाहरण ?

उपसर्ग (prefix)

परिभाषा-उस शब्दांश या अव्यय को उपसर्ग कहते हैं जो किसी शब्द के पहले आकर विशेष अर्थ प्रकट करता है। यह ‘उप’ और ‘सर्ग’ दो शब्दों के योग से बना है। उप = निकट या पास में, सर्ग = सृष्टि करना। इस प्रकार उपसर्ग का अर्थ हुआ निकट बैठकर नया अर्थ बना डालने वाला। उपसर्ग शब्द के पहले लगते हैं। परन्तु उनका स्वतन्त्र अस्तित्व नहीं होता, फिर भी वे शब्दों के साथ मिलकर नए अर्थ का बोध कराते हैं। जैसे ‘हार’ और ‘बन’ शब्द के पूर्व क्रमशः ‘प्र’ और ‘अन‘ उपसगों के लग जाने से ‘प्रहार‘ और ‘अनबन‘ नए शब्द बन गए। इनका नया अर्थ हुआ मारना, मनमुटाव। कभी-कभी शब्दों के पूर्व उपसर्गों के लगाने से उनमें कोई परिवर्तन नहीं होता। कुछ उपसर्गों के योग से शब्दों के अर्थ में परिवर्तन न आकर तेजी आती है।

संस्कृत में उपसों की संख्या निश्चित है, शब्दों के पूर्व लगने वाले शेष शब्द अव्यय होते हैं । हिन्दी में ऐसा कोई अन्तर नहीं है। हिन्दी में स्वयं हिन्दी के साथ संस्कृत और उर्दू के भी उपसर्ग मिलते हैं। संस्कृत उपसर्गों का प्रयोग तत्सम शब्दों के साथ होता है और हिन्दी उपसर्गों का प्रयोग तद्भव शब्दों के साथ होता है। इसी तरह उर्दू उपसगों का प्रयोग सामान्यतः उर्दू शब्दों के साथ ही होता है । संस्कृत में 22 उपसर्ग हैं, हिन्दी में 13, उर्दू में 19 उपसर्ग हैं।

संस्कृत उपसर्ग

उपसर्ग अर्थ शब्दरूप

अति अधिक, ऊपर, उसपार अत्याचार, अत्यन्त ।

अघि  श्रेष्ठ, ऊपर, सामीप्य अधिकार, अधिपति ।

अनु  क्रम, पश्चात, समानता अनुशासन, अनुरूप ।

अप  लघुता, हीनता, अभाव, विरुद्ध अपमान, अपशब्द ।

अभि सामीप्य, आधिक्य और इच्छा  अभिप्राय, अभियोग,

प्रकट करना आदि अभिलाषा, अभिमुख ।

अव हीनता, अनादर, पतन  अवगत, अवनति ।

आ सीमा, ओर, समेत, कमी, विपरीत आगमन, आजन्म, आदान, आचरण।

उत्-उद्  ऊपर, उत्कर्ष उत्कर्ष, उत्पन्न, उत्साह ।

उप निकटता, सदृश, गौण, उपकार, उपकूल, उपनाम,

सहायक, हीनताउपासना, उपभेद ।

दूर, दुस् बुरा, कठिन, दुष्ट, हीन दुर्दशा, दुर्जन, दुर्गुण ।

नि भीतर, नीचे, अतिरिक्त नियात, नियुक्त, नियोग।

निर-निस् बाहर, निषेध, रहित निर्वास, निर्भय, निर्मल।

परा उलटा, अनादर, नाश पराजय, पराभव, पराभूत ।

परि आसपास, चारों ओर, पूर्ण,  परिक्रमा, परिपूर्ण, परितोष,

अतिशय, त्याग पर्याप्त ।

प्र अधिक, आगे, ऊपर, यश, गति  प्रकाश, प्रचार, प्रयास, प्रलय, प्रस्थान

प्रति विरोध, बराबरी, प्रत्येक, प्रशिक्षण, प्रतिष्वनि, प्रतिकार, प्रत्यक्ष, परिवर्तन प्रत्युपकार ।

वि भित्रता, हीनता, असमानता,  विज्ञान, विदेश, विधवा,

विशेषता वियोग, विनाश ।

सम् पूर्णता, संयोग संगम, संग्रह, सम्मुख ।

सु सुखी, अच्छा भाव, सहज, सुन्दर, सुगम, सुदूर, सुवास, सुकवि ।

हिन्दी उपसर्ग

उपसर्ग अर्थ शब्दरूप

अ-अन निषेध के अर्थ में अथाह, अलग, अनजान ।

अध आधे के अर्थ में अधखिला, अघजला ।

उन एक कम उनतीस, उनसठ।

औ (अव) हीनता, निषेध, औगुन, औघट ।

दु बुरी, हीन दुकाल, दुबला।

नि निषेध, अभाव, विशेष निखरा, निडर।

बिन निषेष बिनदेखा, बिनकाम ।

भर पूरा, ठीक भरपेट, भरपूर।

कु-क बुराई, हीनता कुखेत, कपूत।

सु-स श्रेष्ठता और साथ के अर्थ में  सुडौल, सुजान, सहित, सजग ।

उर्दू उपसर्ग (अरबी-फारसी)

उपसर्ग अर्थ शब्दरूप

अल निश्चित अलबत्ता, अलगरज।

कम हीन, थोड़ा कमसिन, कमउम्र, कमजोर।

खुश श्रेष्ठता के अर्थ में खुशबू खुशकिस्मत, खुशहाल, खुशखबरी।

गैर निषेध गैरकानूनी, गैरमुनासिब।

दर में दरअस्ल, दरमियान।

नाअभावनासमझ, नालायक

फिल-फी में प्रति फिलहाल, फी आदमी।

ब से, के, में, अनुसार बदौलत, बनाम, बदस्तूर।

बद बुरा बदनाम, बदकिस्मत, बदबू

बर ऊपर, पर, बाहर बरदाश्त, बरखास्त।

बा साथ बाकायदा, बाइज्जत।

बिल साथ बाकायदा, बाइज्जत।

बिल साथ बिलकुल।

बिला बिना  बिलावजह, बिलालिहाज।

बे बिना बेइमान, बेरहम, बेइज्जत।

ला बिना लाचार, लाजवाब, लापता, लावारिस।

सर मुख्य सरगना, सरताज, सरपंच।

हम बराबर, समान हमदर्दी, हमउम्र, हमराह।

हर प्रत्येक हरसाल, हररोज।

बिना

कुछ उपसर्ग और उनका उपयोग

अ =  नहीं, जैसे-अज्ञान, अप्रिय, अभेद्य, अमंगल।

अति  = अधिक  जैसे-अतिरिक्त, अत्यावश्यक, अत्याचार ।

अन =  नहीं,  जैसे-अनपढ़, अनमोल ।

अनु =  समान, पीछे,  जैसे-अनुगामी, अनुरूप, अनुसार, अनुचर ।

अध = आधा जैसे–अधपका।

अधि = श्रेष्ठ, ऊपर  जैसे-अधिवासी, अधिकार।

अप =  बुरा,  जैसे-अपमान, अपयश ।

अभि =  सामने,  जैसे–अभ्यागत ।

अव = हीन, जैसे-अवगुण, अवगति ।

आ = तक, मुक्त  जैसे-आजीवन, आमरण, आभार ।

उत् = अच्छा,  जैसे-उद्धार, उत्कर्ष।

उप =  गौण,  जैसे-उपवन, उपनाम, उपदेश।

औ =  हीन, नीचा  जैसे-औघट।

क =  बुरा, जैसे-कपूत, कुबात ।

दुर =  कठिन,  जैस-कृदुस्तर, दुर्गम ।

नि =  रहित, हीन  जैसे-निडर, नीरस, निर्जन ।

परि =  उल्टा, जैसे-परिवेष्ठित परिपूर्ण ।

प्र =  अधिक, जैसे-््प्रख्यात, प्रसिद्ध।

प्रति =  प्रत्येक, विरुद्ध जैसे-््प्रतिद्वन्द्वी, प्रशासन ।

सम = अच्छा,  जैसे-स्वभाव।

सु= अच्छा, जैसे-सुयोग, सन्तान।

सु =  पूरा,  जैसे-भरसक।

भर =  बिना,  जैसे-लापरवाह।

ल =  बिना,  जैसे-्-बेगुनाह, बेचैन ।