पीसीआर तकनीक क्या है | पॉलिमरेज श्रृंखला अभिक्रिया का महत्व बताएं उपयोग तकनीक क्या है polymerase chain reaction in hindi

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PCR in hindi पीसीआर तकनीक क्या है | पॉलिमरेज श्रृंखला अभिक्रिया का महत्व बताएं उपयोग तकनीक क्या है polymerase chain reaction in hindi ?

पॉलीमरेज श्रृंखला अभिक्रिया
(Polymerase Chain Reaction)
.
परिचय (Introduction)
डीएनए खण्ड अथवा जीन की अनेक प्रतियाँ उत्पन्न करने की प्रक्रिया जीन आवर्धन (gene amplication) कहलाती हैं। आजकल उच्च तकनीक पर आधारित पॉलिमरेज चेन रिएक्शन (polymerase chain reaction) द्वारा डीएनए खण्ड अथवा जीन की हजारों प्रतियाँ कुछ ही घंटों में उत्पन्न की जा सकती हैं। इसके द्वारा विशिष्ट डीएनए अनुक्रमों को पात्रे (in vitro) संश्लेषित किया जाता है।

पॉलिमरेज श्रृंखला अभिक्रिया (Polymerase chain reaction)
पॉलिमरेज अभिक्रिया श्रृंखला द्वारा जीन की एकमात्र प्रति से इसकी असंख्य (अरबों) प्रतियों का उत्पादन कुछ ही समय में प्राप्त होता है। जिस मशीन द्वारा जीन का आवर्धन (amplification) किया जाता है उसे पीसीआर मशीन (PCr~ machine) कहते हैं। इस तकनीक का विकास वैज्ञानिक केरी मुलिस (Kary Mullis) ने 1985 में किया था।
पीसीआर की आवश्यकतायें (Requirements of PCR)
पीसीआर मशीन एक स्वचालित यन्त्र है जो अत्यन्त शक्तिशाली एवं दक्ष तकनीक पर आधारित होती है। इस मशीन के द्वारा जीन के आवर्धन हेतु निम्नलिखित अनिवार्य है
(1) जिस डीएनए खण्ड का आवर्धन प्राप्त करना है उसकी तैयारी
(2) प्राइमर (Primer) रू दो भिन्न प्राइमर का प्रयोग करते हैं जिनकी लम्बाई लगभग 20 न्यूक्लियोटाइड होती है। यह
प्राइमर आवर्धित होने वाले डीनएन खण्ड के दोनों सूत्रों को 3श् सिरे पर अलग-अलग जुड़ते हैं इसमें यह दोनों प्राइमर
ही दोनों 3श् सिरे के पूरक होने आवश्यक है।
(3) ट्राईफास्फेट (Triphosphate) रू चार डीऑक्सी न्यूक्लिओसाइड के निम्न ट्राइफास्फेट की आवश्यकता पॉलिमरेज
अभिक्रिया श्रृंखला के लिए पड़ती है।
डिऑक्सी ट्राइफास्फेट
1. डीऑक्सी एडेनोसिन ट्राइफास्फेट dATP
2. डीऑक्सी साइटोसिसिटिडीन dCTP
3. डीऑक्सी थाइमिडीन ट्राइफास्फेट dTTP
4. डिऑक्सीगुएनोसिन ट्राइफास्फेट dGTP

;4) विशिष्ट डीएनए पॉलिमरेज रू यह प्रक्रिया अत्यन्त उच्च ताप पर सम्पन्न होती है अतः उच्च ताप पर स्थिर (heat
stable) डीएनए पॉलिमरेज इस प्रक्रिया में भाग ले सकता है। इस प्रक्रिया में सामान्यतः ताक पॉलिमरेज (Taq Polymerase) का प्रयोग किया जाता है। यह उच्च ताप पर पाये जाने वाले जीवाण थर्मस एक्वेटिकस (Thermus aquaticus) से प्राप्त होता है। 04 ताप पर स्थिर अन्य डीएनए पॉलिमरेज वनि तथा वेन्ट हैं जो क्रमशः पायरोकोकस फ्यूरियासत तथा थर्मोकोकस लिटोरेलिस नामक जीवाणु से प्राप्त किया जाता है।
डिऑक्सी ट्राइफास्फेट
क्रं सं. उच्च ताप स्थिर डीनएन पॉलिमरेज जीवाणु जिससे प्राप्त होता है
1. ताक् पॉलिमरेज (Taq polymerase) थर्मस एक्वेटिकस (Thermus aquaticus)
2. च्नि पायरोकोकस फ्यूरियोसस (Pyrococeus furiosus)
3. वेन्ट (Vent) थर्मोकोकस लिटोरेलिस (Thermocosus litoralis)

जीन के आवर्धन की प्रक्रिया (Process of Amplification of Gene)
. पीसीआर मशीन द्वारा किसी भी वांछित जीन के आवर्धन की प्रक्रिया हेतु सर्वप्रथम ऊपर वर्णित किये चारों आवश्यक सामग्री जैसे वांछित जीनयुक्त डीनएन खण्ड, दो प्रकार के प्राइमर, चार प्रकार के डिऑक्सी न्यूक्लियोसाइड ट्राइंफास्फेट जैसे dTTP, dCTP, dATP, CGTP एवं उच्च ताप पर स्थिर डीनएन पॉलिमरेज जैसे ताक पॉलिमरेज का मिश्रण करके विभिन्न चरणों में क्रमबद्ध क्रियायें पीसीआर में सम्पन्न होती हैं।
1. विकृतिकरण चरण (Denaturation step)
इस चरण में डीएनए के अणुओं के दोनों सूत्रों को अलग करने हेतु इसको 90-98°C तक गर्म करके विकृतिकृत (denatured) करते हैं।
2. संलग्नीय चरण (Annealing step)
विकृतिकृत डीएनए के एक सूत्रीय डीएनए को 40-60°C पर ठण्डा करते हैं। ऐसा करने से दोनों एक सूत्री डीएनए के 1.3′ सिरों पर अलग-अलग प्राइमर पूरक क्रम द्वारा सलग्न (anneal) हो जाते हैं।
3. डीनएन संश्लेषण चरण (DNA synthesis step)
इसके अन्तर्गत डीएनएं पॉलीमरेज प्राइमर के 3’OH का प्रयोग करते हुए डीनएन के पूरक रज्जुकों का संश्लेषण प्रारम्भ कर देता है। डीएनए की प्रतिकृति दोनों प्राइमर के मध्य एक दूसरे की दिशा की ओर होती है।
ताक पॉलिमरेज द्वारा डीनएन खण्ड की प्रतिकृति के लिए इष्टतम (optimum) तापमान 75°ब् है। इस तापमान पर प्राइमर (20 क्षार अनुक्रम लम्बे) तथा आवर्धित होने वाले डीएनए के मध्य एनीलन की प्रक्रिया सामान्य 37°C तापमान की अपेक्षा विशिष्ट होती है। अतः पूरक अनुक्रमों पर ही इनका युग्मन होता है। डीनएन संश्लेषण के साथ ही पीसीआर का एक चक्र समाप्त हो जाता है जिसमें 1-3 मिनट का समय लगता है।
4. द्वितीय चक्र (Second Round)
इसके अन्तर्गत प्रथम चक्र के 1-3 चरण पुनः सम्पन्न होते हैं। इसके अन्तर्गत नये तथा पुराने डीएनए सूत्र एक दूसरे से पृथक हो जाते हैं।
5. यह पांचवा चरण हैं जिसमें प्राइमर नये एवं पुराने डीएनए सूत्रों से पूरक क्षारकों द्वारा युग्मन करके एनीलन करते हैं। इस संयुग्मन द्वारा आवर्धित होने वाले सूत्रों की कुल संख्या पिछले चक्र से दोगुनी हो जाती है। दो नये व दो पुराने अर्थात् 4 डीएनए सूत्र हो जाते हैं। 6. इस छठे चरण के अन्तर्गत पॉलिमरेज द्वारा प्राइमरों के 3’OH सिरे से नये सूत्र का संश्लेषण प्रारम्भ हो जाता है। इसके साथ ही पिछले चक्र के दो नये व दो पुराने (4) से कुल 8 डीएनए सूत्र निर्मित हो जाते हैं।
डीएनए लाइब्रेरी (DNA Library)
पीसीआर द्वारा 20-30 चक्र पूरे किये जाते हैं। प्रत्येक चक्र में पहले उपस्थित डीएनए खण्ड की प्रतियों की कुल संख्या से दोगुनी होती जाती है। अन्त में इन वांछित डीएनए आवर्धित खण्डों को जैल इलैक्ट्रोफोसिस (gel electrophorsis) द्वारा शुद्ध कर लिया जाता है।
क्रं सं. पॉलिमरेज श्रृंखला अभिक्रिया (पीसीआर) जीन क्लोनिंग (Gene cloning)
1. इसके लिए जीन की एकमात्र प्रति आवश्कयकता होती है। अधिक डीएनए की आवश्यकता की पड़ती है।
2. इसके लिए मात्र डीएनए पॉलिमरेज जो उच्च ताप स्थिर होता है आवश्यक है। इसके लिए महंगे प्रतिबन्ध एन्जाइम, लाइगेज तथा वाहकों की आवश्यकता होती है।
3. यह सस्ती तकनीक है। यह अधिक एन्जाइम की उपस्थिति में सम्पन्न होती है अतः महंगी तकनीक साबित हुई है।
4. यह कम समय लेती है मात्र 4-6 घंटे यह अधिक समय में 2-4 दिन में सम्पन्न होती है।
5. इसके विभिन्न क्षेत्रों में अनेक अनुप्रयोग (Application) हैं। इसके उपयोग सीमित हैं।
6. यह स्वचालित (Automatic) मशीन द्वारा सम्पन्न होती है। यह स्वचालित तकनीक नहीं है।

पीसीआर के अनुप्रयोग (Applications of PCR) .
1. किसी भी जीव की कोशिका की जीन की अनेक प्रतियां मिनटों में प्राप्त की जा सकती हैं।
2. पीसीआर किसी मानव में उपस्थित एकमात्र सूक्ष्मजीव द्वारा उत्पन्न संक्रमण को चिन्हित (detect) कर सकता है जो
कितनी ही कम मात्रा में क्यूं न उपस्थित हो। इस तरह यह बीमारी के निदान में अत्यन्त सहायक है इसके लिए मरीज के सीरम को लेकर उसे आवर्धित (amplify) कर लेते हैं।
3. यह जीवाणु, वायरस एवं जन्तु परजीवी (parasite) इत्यादि को पहचान कर उसमें सम्बन्धित बीमारी चिहिन्त कर लेता
है। इसके द्वारा एड्स, टीबी, हीपेटाइटिस इत्यादि बीमारियों का .निदान संभव है।
4. यह आनुवंशिक रोगों जैसे सिकल सेल एनीमिया (sinckle cell anaemia) तथा फिनाइलकीटोनूरिया
(Phenylketonuria) की पहचान करने में सक्षम हैं।
5. यह फोरेन्सिक विज्ञान (forensic science) के लिए भी महत्वपूर्ण सिद्ध हुआ है। अपराधी से सम्बन्धित डीएनए के
छोटे सेम्पल से भी फिंगर प्रिन्टिग तकनीक आसानी से सम्पन्न हो जाती है तथा अपराधी की पहचान में मददगार है।
6. यह पादप रोग जैसे टीएमवी, कॉलीफ्लावर मुसेक वायरस, पीतशिरा मोसेक वायरस,माइकोप्लाज्मा, एग्रोबैक्टीरियम
ट्मीफेसेन्स इत्यादि को भी पहचान करने में सहयक हुए हैं।
7. पीसीआर के द्वारा डीनएन के क्षारक अनुक्रम (sequence) को भी कम समय में ज्ञात किया जा सकता है। इसके लिए
डीएनए की सीधी सिक्वेन्सिग (sequencing) पीसीआर के प्रयोग, से की जा सकती है। इसके लिए पहले सेंगर तथा गिल्बर्ट का रसायन अपघटन (degradation) विधि तथा सेंगर का डाइ डीऑक्सी न्यूक्लिओटाइड संवर्धन विधि प्रयोग की जाती थी जो अधिक समय लेती थी।
8. किसी जीव में हुये उत्परिवर्तन (mutation) द्वारा उत्पन्न व्याधि का पता लगाया जा सकता है।
9. इसके द्वारा पादपों की वंशावली ज्ञात की जा सकती है। वर्गिकी (taxonomy) में यह अत्यन्त उपयोगी सिद्ध हुआ है।
10. जीवों के जनकों की पहचान की जा सकती है।
11. ऐतिहासिक फॉसिल जैविक पदार्थ (जैसे मिश्र की ममी) के डीएनए की जानकारी प्राप्त हो सकती है।
विभिन्न प्रकार के पीसीआर रूपान्तरण (Modifications of PCR)
पीसीआर के बहुआयामी प्रयोगों हेतु साधारण पीसीआर से रूपान्तरण द्वारा अनेक मॉडल विकसित किये गये हैं जो विभिन्न प्रकार्यों में प्रयुक्त होते हैं। प्रमुख रूपान्तरित पीसीआर निम्न हैं- .
कॉलोनी पीसीआर (Colony PCR)
इसके द्वारा जीवाणु ई.कोलाई के क्लोन को स्क्रीन करके सही डीएनए वाहक (बवदेजतनबजपअम) का पता लगाया जाता है। जीवाणु की कॉलोनी को निर्जम (sterile) टूथपिक द्वारा अगरोज प्लेट (Agarose plate) पर निर्जल जल पर लेकर पीसीआर में 95°C पर रखते हैं कॉलोनी का बाद में परीक्षण (test) कर लिया जाता है।
प्रतिलोम पीसीआर (Inverse PCR)
यह प्रयोग तब करते हैं जब मात्र एक आन्तरिक अनुक्रम ज्ञात होता है। इसके द्वारा अनेक निवेशित जीनोमिक (genomic inserts) को आन्तरिक ज्ञात अनुक्रम के दोनों तरफ के क्षारकों को ज्ञात करने के लिए प्रयोग करते हैं।
संलागी पीसीआर (Anchored PCR)
जब किसी क्छ। के एक खण्ड पर एक सिरे का क्षार ज्ञात होता है तब इस 3श् सूत्र के पूरक क्रम को प्रायमर के रूप में उपयोग कर इसकी कई प्रतियाँ प्राप्त कर लेते हैं। इस 3′ सिरे पर पॉली G पॉली । पॉली ज् या पॉली C कोई भी पुच्छ (tail) जोड़ते हैं व इसके पश्चात् द्विसूत्री डीएनए प्राप्त करके पीसीआर प्रक्रिया द्वारा इसका आवर्धन कर लेते हैं।
एलील विशिष्ट पीसीआर (Allele specific PCR)
पीसीआर के द्वारा एकमात्र न्यूक्लिओटाइड के बहुरूपता (polymorphism) को एक ही क्षारक के अन्तर द्वारा पहचाना जा सकता है। ऐसा विशिष्ट प्राइमर के उपयोग से संभव होता है।
एसेम्बली पीसीआर (Assembly PCR)
यह कृत्रिम रूप से लम्बा जीन उत्पाद संश्लेषित करता है। इसके लिए पीसीआर का लव ओलिगोन्यूक्लियोटाइड की आवश्यकता रहती है जिसमें छोटे अतिव्यापित (overlapping) खण्ड उपस्थित रहते हैं । यह सेन्स (sense) तथा एन्टीसेन्स (antisense) दिशा में एकान्तरित क्रम से व्यवस्थित होते हैं तथा पीसीआर को उत्पाद निर्मित करने के लिए निर्देश देते हैं ।
असममित पीसीआर (Assymetric PCR)
यह डीनएन के एक ही सूत्र को अन्य की अपेक्षा आवर्धित (amplify) करता है जिससे डीनएन खण्ड की असंख्य एकल-रज्जु की प्रतियाँ निर्मिल की जा सकती हैं। इनका प्रयोग डीनएन अनुक्रमण (sequencing) हेतु किया जाता है। दो डीनएन खण्ड के दोनों 3′ सिरे के पूरक प्राइमर को 100 रू 1 के अनुपात में अभिक्रिया मिश्रण में डालते हैं। .. .
इस विशिष्ट अनुपात के फलस्वरूप दूसरा प्राइमर पहले से लगभग 10 चक्र पहले खत्म हो जाता है। फलस्वरूप अन्तिम 10 चक्रों में मात्र एक सूत्रीय की ही प्रतिकृति निर्मित होती है।
मात्रात्मक पीसीआर (Quantitative PCR)
इस विशिष्ट पीसीअर द्वारा टार्गेट डीएनए (target DNA) की मात्रा को ज्ञात किया जा सकता है।