प्रकाश संश्लेषण की क्रियाविधि , photosynthesis process in hindi , Emerson प्रभाव , एमर्सन effect

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प्रकाश संश्लेषण हेतु उपयोग किये जाने वाले प्रकाश की प्रकृति : प्रतिवर्त ऊर्जा का एकमात्र स्रोत सूर्य है जो पृथ्वी की तरफ विद्युत चुम्बकीय तरंगो के रूप में गति करता है।

सूर्य से पृथ्वी पर आने वाली इन विद्युत चुम्बकीय तरंगो की गति में क्रमागत दो श्रृंगो या दो गर्तो के मध्य की दूरी तरंग दैर्ध्य कहलाती है जिसे λ के द्वारा निरुपित किया जाता है।

विद्युत चुम्बकीय तरंगो की तरंग ऊर्जा , तरंग दैर्ध्यता के व्युत्क्रमानुपाती होती है अर्थात छोटी तरंग दैर्ध्य वाली तरंग में अधिक ऊर्जा पायी जाती है वही अधिक तरंग दैर्ध्यता वाली तरंग में कम ऊर्जा पायी जाती है।

सूर्य से पृथ्वी पर पहुचने वाली प्रकाश की सफ़ेद पुंज (दृश्य) प्रकाश या इसे visible spectrum के नाम से जाना जाता है।

उपरोक्त प्रकाश के पुंज की तरंग दैर्ध्यता 390 nm से 760 nm होती है तथा इसे दृश्यमान प्रकाश को सात विभिन्न रंगों में विभेदित किया जा सकता है तथा प्रत्येक रंग की तरंग दैर्ध्य विशिष्ट होती है।

सफ़ेद प्रकाश के पुंज में विभिन्न रंग स्वयं को बढती हुई तरंग दैर्ध्य के अनुसार व्यवस्थित रखती है।  इस दृश्यमान प्रकाश में बैंगनी रंग की तरंग दैर्ध्य सबसे कम (390 से 430 nm) तथा लाल रंग की तरंग दैर्ध्य 660 से 780 nm पाई जाती है।

ऐसे प्रकाश की विकिरण जिसकी तरंग दैर्ध्य बैंगनी रंग की तरंग दैर्ध्य से कम हो पैराबैंगनी विकिरण या ultra voilet Ray कहलाती है , वही प्रकाश की ऐसी विकिरण जिनकी तरंग दैर्ध्य लाल रंग से अधिक हो Infra red radiation या अवरक्त विकिरणें कहलाती है।

सूर्य से आने वाली प्रकाश की विकिरणों में उच्च ऊर्जा के कण पाए जाते है जिन्हें फोटोन के नाम से जाना जाता है।

प्रकाश संश्लेषण की क्रिया के दौरान एक कार्बन डाई ऑक्साइड के अणु के अपचयन हेतु 8 फोटोन की आवश्यकता है जिसे प्रकाश संश्लेषण की क्वांटम आवश्यकता या quantum need के नाम से जाना जाता है।

प्रकाश की विकिरणों में उपस्थित प्रत्येक फोटोन के उपयोग किये जाने पर उत्पन्न होने वाले ऑक्सीजन के अणुओं की संख्या Quantum yield या क्वांटम उत्पादन कहलाती है।

हरे पादपों के द्वारा बैंगनी तथा लाल रंग के प्रकाश में सर्वाधिक मात्रा में प्रकाश संश्लेषण की क्रिया प्रदर्शित की जाती है।

हरित लवक स्वयं हरे रंग का होने के कारण दृश्यमान स्पेक्ट्रम से आने वाली हरे रंग की विकिरणों को पूर्ण रूप से परावर्तित कर देते है जिसके कारण प्रकाश संश्लेषण की दर पूर्णत: शून्य हो जाती है अर्थात हरे रंग की विकिरण की उपस्थिति में प्रकाश संश्लेषण शून्य होता है।

प्रकाश संश्लेषण की क्रियाविधि (photosynthesis process in hindi)

वर्तमान समय तक किये गए शोध कार्यो के आधार पर प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में निम्न तथ्य परिलक्षित होते है –

  1. पादप के हरे भागो में उपस्थित पर्णहरित या क्लोरोफिल तथा सहायक वर्णको के द्वारा अवशोषित प्रकाश की ऊर्जा का उपयोग जल के प्रकाशिक अपघटन में होता है जिससे ऑक्सीजन , हाइड्रोजन आयन (H+) व इलेक्ट्रॉन मुक्त होते है।
  2. उपरोक्त अभिक्रिया में मुक्त हुए इलेक्ट्रॉन पादप में पाए जाने वाले विभिन्न प्रकाश ग्राहियो के माध्यम से होते हुए ATP तथा NADPH2के रूप ऊर्जा को संग्रहित करते है।
  3. उपरोक्त उच्च ऊर्जा युक्त अणुओं का या पदार्थो का उपयोग मुख्यतः कार्बन डाई ऑक्साइड के अपचयन हेतु किया जाता है जिसके फलस्वरूप ग्लूकोज रुपी कार्बोहाइड्रेट का उत्पादन होता है अत: हरे पादपो में संपन्न होने वाली प्रकाश संश्लेषण की क्रिया ऑक्सीकरण – अपचयन के नाम से जानी जाती है या रेडोक्स अभिक्रिया कहलाती है।
  4. हरे पादपों में संपन्न होने वाली प्रकाश संश्लेषण की क्रिया दो चरणों में सम्पन्न होती है तथा यह दोनों चरण एक दुसरे से पूर्णत: भिन्न होते है परन्तु परस्पर सम्बन्धित होते है।

प्रकाश संश्लेषण के अन्तर्गत संपन्न होने वाले दो चरण निम्न है –

(1) प्रकाशिक अभिक्रियाएँ / light reaction

इन्हें प्रकाश रासायनिक अभिक्रियाओं के नाम से भी जाना जाता है जिसके अन्तर्गत प्रकाश की उपस्थित में स्वांगीकरण ऊर्जा का निर्माण होता है तथा यह अभिक्रिया हरितलवक के ग्रेना (granna) भाग में सम्पन्न होती है।

(2) अप्रकाशिक अभिक्रिया / black mann’s reaction या dark reaction

प्रकाश संश्लेषण के इस दुसरे चरण के अन्तर्गत प्रकाश की आवश्यकता नहीं होती है तथा प्रथम चरण में निर्मित स्वांगीकरण ऊर्जा को कार्बन डाई ऑक्साइड के अपचयन के लिए उपयोग में लिया जाता है जिसके फलस्वरूप शर्करा रुपी कार्बोहाइड्रेट का निर्माण होता है।

यह अभिक्रिया हरितलवक के स्ट्रोमा भाग में सम्पन्न होती है।

नोट : light reaction प्रकाश से प्रभावित रहती है वही dark reaction तापमान से प्रभावित होती है।

प्रकाश अभिक्रिया का तापमान गुणांक लगभग 1 होता है वही डार्क रिएक्शन का तापमान गुणांक 2 या 3 होता है।

प्रकाश संश्लेषण के अन्तर्गत संपन्न होने वाली प्रकाशिक अभिक्रियाओ का विस्तृत वर्णन

उपरोक्त अभिक्रिया निम्न चरणों में संपन्न होती है –

(i) प्रकाश का अवशोषण तथा पर्णहरित के अणु का सक्रीय होना : सूर्य से आने वाले प्रकाश में उपस्थित ऊर्जा के पैकेट या क्वांटम पर्णहरित अणुओं के द्वारा अवशोषित कर लिया जाता है जिसके कारण पर्णहरित का अणु कुछ समय के लिए उत्तेजित अवस्था में आ जाता है तथा इससे इलेक्ट्रॉन का उत्सर्जन हो जाता है।

क्लोरोफिल + क्वांटम → क्लोरोफिल → इलेक्ट्रॉन

(ii) जल का प्रकाशिक अपघटन तथा ऑक्सीजन का निकास :

2H2O → O2 + 4H+ + 4e

  • क्लोरोफिल के अणु के द्वारा अवशोषित ऊर्जा का उपयोग पादप में उपस्थित जल के प्रकाशिक अपघटन हेतु किया जाता है जिसके फलस्वरूप O2 का निर्माण होता है। निष्काषित होने वाली O2 की कुछ मात्रा पादपो के द्वारा श्वसन हेतु अवशोषित कर ली जाती है वही शेष O2 बाह्य वायुमण्डल में निष्कासित कर दी जाती है।
  • जल के प्रकाशिक अपघटन हेतु Mn2+ , Cl , तथा Ca2+ के आयन के द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जाती है।

(iii) NADPH + H+ का निर्माण : जल के प्रकाशिक अपघटन के द्वारा उत्सर्जित होने वाले 4H+ आयन के द्वारा NADPH से NADPH + H+ के दो अणुओं का निर्माण किया जाता है। जो कार्बन डाई ऑक्साइड के एक अणु के अपचयन हेतु आवश्यक होते है।  इस अभिक्रिया हेतु 4 इलेक्ट्रॉन की आवश्यकता होती है जो photosystem-I या PS-I या प्रकाश तंत्र-I से प्राप्त होते है।

नोट : NADPH + H+ → ग्रेना ले Thylakoid में बाह्य सतह पर पाया जाता है।

(iv) प्रकाशिक फोसफोरिलीकरण : प्रकाश ऊर्जा से उत्तेजित क्लोरोफिल  के अणुओं के द्वारा मुक्त इलेक्ट्रॉनविभिन्न ग्राहियो से गुजरते है तथा इस इलेक्ट्रॉन स्थानान्तरण से मुक्त ऊर्जा ATP का संश्लेषण करती है जिसे प्रकाशिक फोसफोरिलीकरण के नाम से जानते है।

(v) लाल पतन (Red drop) Emerson प्रभाव तथा दो प्रकाश तन्त्र : Emorson तथा उनके साथियो ने प्रकाश की विभिन्न तरंग दैर्ध्य में प्रकाश संश्लेषण की दर का मापन किया तथा इस मापन में उपरोक्त वैज्ञानिक को निम्न परिणाम प्राप्त हुए –

  • उपरोक्त वैज्ञानिक के द्वारा जब एक पादप को 680 nm से अधिक तरंग दैर्ध्य का प्रकाश प्रदान किया तो प्रकाश संश्लेषण की दर आश्चर्यजनक रूप से घट गयी क्योंकि यह तरंग दैर्ध्य लाल प्रकार से सम्बन्धी थी अत: इसे लाल पतन के नाम से जाना जाता है।
  • Emerson तथा उनके साथियो के द्वारा जब उच्च तरंग दैर्ध्य व निम्न तरंग दैर्ध्य वाले प्रकाश को सामूहिक रूप से किसी पादप पर डाला गया तो संपन्न होने वाली प्रकाश संश्लेषण की दर पृथक पृथक डाले गए प्रकाश की दर से अधिक प्राप्त हुई अत: इस एमर्सन प्रभाव या emerson वृद्धि प्रभाव के नाम से जाना जाता है।
  • उपरोक्त प्रयोग से यह निष्कर्ष किया गया की एक पादप में प्रकाश संश्लेषण हेतु दो वर्णको का समूह पाया जाता है जिनमे से एक उच्च तरंग दैर्ध्य वाले प्रकाश को अवशोषित करता है वही दुसरे समूह के द्वारा निम्न तरंग दैर्ध्य वाले प्रकाश को अवशोषित किया जाता है।
  • उपरोक्त परिणामो के आधार पर वर्णको के समूह को क्रमशः प्रकाश तंत्र-I तथा प्रकाश तन्त्र-II के नाम से जाना गया।