न्यूटन का शीतलन का नियम (newton’s law of cooling in hindi) , क्या है , ग्राफ , सूत्र

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(newton’s law of cooling in hindi) न्यूटन का शीतलन का नियम : न्यूटन के इस नियम के अनुसार किसी भी पिंड या वस्तु के ठण्डा होने की दर का मान वस्तु के ताप तथा वस्तु के चारो ओर के वातावरण के ताप में अंतर के समानुपाती होता है।
जैसा कि हम जानते है कि जब दो वस्तुओं या दो स्थानों के मध्य ताप में अंतर पाया जाता है तो ऊष्मा ऊर्जा उच्च स्तर से निम्न स्तर की ओर प्रवाहित होने लगती है।
यही कारण है कि जब वस्तु और इसके इसके चारो तरफ के वातावरण के ताप में अंतर पाया जाता है तो ऊर्जा उच्च स्तर से निम्न स्तर की ओर बहती है , हम यह मान रहे है कि वस्तु का ताप , वातावरण के ताप से अधिक है अत: उष्मीय ऊर्जा वस्तु से वातावरण में जाती है या उत्सर्जित होती है जिससे धीरे धीरे वस्तु के ताप में कमी आती है और वस्तु ठंडी होने लगती है।
न्यूटन का यह नियम कई जगह काम आता है जैसे जल हीटर में , जब गर्म पानी पाइप में होता है तो इस नियम के अनुसार हम यह पता लगा सकते है कि उस पाइप का पानी ठंडा होने में कितना समय लेगा इत्यादि।
यह नियम तभी लागू होता है जब ये दोनों शर्ते पूरी होती है –
१. वस्तु में ऊष्मा हानि उष्मीय विकिरण विधि द्वारा होना चाहिए।
२. वस्तु तथा वातावरण के ताप के मध्य कम अंतर होना चाहिए अर्थात यह अधिक तापान्तर के लिए लागू नहीं होता है।
माना किसी वस्तु का ताप T है , जिसे खुले में ठंडा होने के लिए छोड़ दिया जाता है , यहाँ वातावरण का ताप T0 है
अत: न्यूटन के नियमानुसार वस्तु के ठंडा होने की दर तापान्तर के समानुपाती होती है अर्थात

जब समय और ताप के मध्य ग्राफ खिंचा जाता है यह निम्न प्रकार प्राप्त होता है , अर्थात समय के साथ ताप में परिवर्तन को ग्राफ द्वारा निम्न प्रकार दर्शाया जाता है

ग्राफ से स्पष्ट है कि जैसे जैसे समय गुजरता है , वस्तु का ताप कम होता जाता है , और यदि वस्तु का ताप वातावरण के ताप के बराबर हो जाता है तो ऊष्मा संचरण या उत्सर्जन रुक जाता है।