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न्यूटन का नियम (ध्वनि गति या संचरण के लिए) newton law sound speed in hindi

(newton law sound speed in hindi ) न्यूटन का नियम (ध्वनि गति या संचरण के लिए) : किसी माध्यम में ध्वनी तरंगो की गति का संचरण का मान ज्ञात करने के लिए हमें माध्यम के प्रत्यास्था गुणों और माध्यम के घनत्व की जानकारी होना आवश्यक है , किसी भी माध्यम के प्रत्यास्थ गुण इसके वेग को परिभाषित करने में अहम योगदान करता है चाहे बाह्य बल की उपस्थिति में इसका आकार कम हो या अधिक।
ध्वनी ऐसे माध्यम में अधिक वेग से गति करती है जिस माध्यम का प्रत्यास्थ अधिक हो अर्थात आसानी से विकृत न हो , जैसे इस्पात (स्टील) में जब ध्वनी तरंग संचरण करती है तो बहुत तेजी से करती है।
ध्वनी तरंग ऐसे माध्यम में धीरे चाल से गति करते है जिन माध्यमों का प्रत्यास्थ गुण कम होता है और जो आसानी से विकृत हो जाते है अर्थात थोडा सा बाह्य बल लगाते ही अपने आकार में परिवर्तन कर लेते है जैसे रबर में ध्वनी का संचरण बहुत धीरे होता है।
न्यूटन के नियम का अन्तिम स्टेटमेंट “ध्वनी संचरण एक समतापीय घटना है , जब संपीडन के समय उत्पन्न उष्म का मान , विरलन के समय खर्च हो जाती है और निकाय का ताप नियत बना रहता है। ”

न्यूटन के नियम के अनुसार ध्वनी संचरण के लिए सूत्र

न्यूटन ने बताया की यदि किसी माध्यम का घनत्व और ध्वनी तरंग पर आरोपित दाब का मान पता है तो उस माध्यम के लिए हम ध्वनि तरंगो की गति को निम्न प्रकार सूत्र द्वारा परिभाषित कर सकते है –
यहाँ c = ध्वनी तरंग का वेग है।
P = ध्वनि तरंग पर आरोपित दाब का मान
ρ = माध्यम का घनत्व है।
न्यूटन ने बताया की यदि किन्ही माध्यमों का घनत्व और प्रत्यास्था बल समान हो तो सभी माध्यमों में ध्वनी समान वेग से गति करेगी।
उन्होंने बताया की पानी की सतह पर वायुमंडल में ध्वनी तरंग एक समान वेग से गति करेगी और इसी प्रकार अन्य समान माध्यम में गति करेगी चाहे वह एक समान ठोस हो या द्रव।
न्यूटन ने कहा की जब किसी माध्यम का घनत्व कम होता है तो ध्वनी संचरण बढ़ता और यदि घनत्व अधिक होता है तो ध्वनि संचरण (वेग) बढ़ता है।
यदि माध्यम का दाब बढ़ता है तो ध्वनि तरंग त्वरित होती है अर्थात उनका वेग बढ़ता है।

न्यूटन के नियम में लाप्लास का संशोधन

लाप्लास ने न्यूटन के दिए गए नियम में एक दोष देखा और इसे ठीक किया , लाप्लास ने कहा की यह पूरी घटना कोई समतापीय नहीं है अर्थात यहाँ ताप का मान समान नही रहता है बल्कि एक रुद्धोष्म प्रक्रिया है अर्थात इसमें ऊष्मा का आदान प्रदान नहीं होता है।
इसके बाद लाप्लास ने न्यूटन के नियम में गामा (gamma) को सम्मिलित किया और सूत्र को निम्न प्रकार लिखा
न्यूटन ने अपने नियम में ध्वनि के वेग पर ताप के प्रभाव को नजरअंदाज किया दिया था लेकिन लाप्लास ने इसको ठीक कर दिया।
यहाँ gamma = ऊष्मा (ताप) का घटक है।
P = ध्वनि तरंग पर आरोपित दाब का मान
ρ = माध्यम का घनत्व है।

 

 

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