तंत्रिका सक्रिय औषधि , पीड़ाहारी , प्रशांतक औषधि , उदाहरण Nervous active drug

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तंत्रिका सक्रिय औषधि (Nervous active drug or medicines in hindi) : ये तंत्रिका तंत्र पर अपना प्रभाव डालती है ये दो प्रकार की होती है

1. प्रशांतक औषधि (transquilizers) : ये केंद्रीय तंत्रिका तंत्र पर अपना प्रभाव डालती है ये मानसिक रोग के उपचार व निदान में काम आती है , ये अत्यधिक तनाव व अवसाद की स्थिति में काम में आती है।
  • इकवैनिल
  • ल्युमिनल
  • सैकोनल
  • मेंप्रॉबमैट
  • क्लोराइडजेपॉक्साइड
  • वेरोनल
  • एमिटल
  • नेमबूटल
  • वैलियम
  • सेरोटोनिन
  • इम्प्रोनाइजिक
  • फिनलजिन

2. पीड़ाहारी औषधि (analgesics) :

वे रसायन जो पीड़ा अथवा दर्द को कम कर देते है उन्हें पीड़ाहारी औषधि कहते है ये दो प्रकार की होती है।
  • अस्वायक या अनासक्त या नॉन एडिक्टिव (Unacceptable or unacceptable or non-addictive) : 

ये सामान्य पीड़ाहारी औषधि भी कहलाती है क्यूंकि इनके सेवन से व्यक्ति आदि नहीं होता , ये पीड़ाहारी के साथ साथ ज्वर रोधी गुण भी दर्शाते है -जैसे  एस्प्रिन , पैरासिटेमोल

नोट : एस्प्रिन दिल के रोगियों के लिए भी काम में आती है क्यूँकि दिल का दौरा पड़ने से धमनियाँ फट जाती है जिससे रक्त का थक्का बन जाता है तथा रक्त का संचार नहीं होता , यहाँ एस्प्रिन रक्त के थक्के को घोल देती है।
  • स्वापक या नारकोटिक (Narcotic ) :

इन्हे कठोर पीड़ाहारी औषधि भी कहते है असहनीय दर्द होने पर इन्हे काम में लिया जाता है , इनके उपयोग से बचना चाहिए क्योंकि मनुष्य निंद्रा या संशाविहीनता का आदी हो जाता है , कुछ देशो में इनके उपयोग पर प्रतिबन्ध है उदाहरण : मॉर्फिन , कोडीन , हाशिस (हेरोइन)