नाकों चने चबाना मुहावरे का अर्थ या नाकों चने चबाना मुहावरे का वाक्य प्रयोग nako chane chabana meaning

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nako chane chabana meaning in hindi नाकों चने चबाना मुहावरे का अर्थ या नाकों चने चबाना मुहावरे का वाक्य प्रयोग क्या है ?

221. धाक जमाना (रोब जमाना, प्रभाव जमाना)- राजपूतों ने थोड़े समय में ही सारे भारतवर्ष में अपनी धाक जमा ली थी।
222. धूप में बाल सफेद करना (बहुत अनुभवी होना)- दादा ने पोते से कहा-तुम मुझे बिकी कर के बारे में क्या बताते है।
223. बाएँ हाथ का खेल (बहुत ही आसान काम)- विज्ञान विषय पर लेख लिखना तो मेरे बाएँ हाथ का खेल है।
224. बाल भी बाँका न होना (कुछ भी न बिगड़ना)- मेरे जीते जी किसकी मजाल जो तुम्हारा बाल भी बाँका कर सोहो? मैनें धूप मे बाल सफेद नहीं किए।
225. नाकों चने चबाना (बहुत तंग होना)- शिवाजी से भिड़कर मुगलों ने नाकों चने चबाए।
226. नाक में नकेल डालना ( अच्छी तरह से वश मे करना)- आजकल की पत्नियाँ अपने पतियों की नाक में नकेल डालकर रखती है।
227. मजा किरकिरा होना (आनंद में विघ्न पड़ना)- खेल के समय वर्षा ने मजा किरकिरा कर दिया।
228. निन्यानवे के फेर में पड़ना (धन के लाभ में फँसना)- निन्यानवे के फेर मे न पड़ने से ही मनुष्य चिंता से बचा रहता है।
229. होश सँभालना (समझने लायक होना)- पहले तो मैं छोटी थी पर जब से मैनें होश सँभाला, माँ को दुखी ही माया है।
230. फूला न समाना (बहुत प्रसन्न होना)- लाटरी में इनाम मिलने पर वह फूला नहीं समाया।
231. नींद हराम होना (व्यर्थ जागना, पेरशान होना)- जब से हमारे पड़ोसियों के यहाँ रेडियो आया है तब से हमारी तो नींद हराम हो गई है।
232. मुट्ठी गरम करना (घूस/रिश्वत देना)- आजकल नौकरी प्राप्त करने के लिए न जाने कितनो की मुट्ठी गरम करनी पड़ती है।
233. सिर पर पाँव रखकर भागना (घबराकर बहुत तेज भागना)- पुलिस के आते ही डाकू सिर पर पाँव रखकर भाग खड़े हुए।
234. सिर पर चढ़ना (प्यार के कारण बहुत ढीठ हो जाना)-माँ के लाड़-प्यार ने ही रवि को सिर पर चढ़ा रखा है।
235. नाक पर मक्खी न बैठने देना (अपने पर कोई आक्षेप न आने देना)- सतीश इस बदनामी वाले काम में बिल्कुल साथ नहीं देगा। वह नाक पर मक्खी भी नहीं बैठने देता।
236. नाक कटना (इज्जत जाना)- मनोज बड़ी शान दिखा रहा था पर जब वह मंच पर बोल ही नहीं पाया तो उसकी नाक कट गई।
237. हाथों-हाथ बिक जाना (बहुत जल्दी बिक जाना)- सरस्वती मानक हिंदी व्याकरण का बारहवाँ संस्करण भी हाथों हाथ बिक गया।
238. हक्का -पानी बंद करना( जाति से बाहर कर देना)- यदि कोई व्यक्ति समाज-विरोधी कार्य करता है तो जाति वाले उसका हुक्का पानी बंद कर देते हैं।
239. नींव डालना (आधार खड़ा करना)- विद्यालय ने नैतिक मूल्यों की एक मजबूत नींव हमारे भीतर डाली।
240. चूड़ियाँ पहनना (कायर बनना)- यदि हमारे देश के सिपाही विपत्ति में देश की रक्षा नहीं कर सकते तो उन्हें चूड़ियाँ पहन लेनी चाहिए।
241. चेहरे पर हवाइयाँ उड़ना (डर जाना)- रिश्वत लेने का भेद खुलते देख उसके चेहरे पर हवाइयाँ उड़ने लगी।
242. सठिया जाना (बुद्धि नष्ट होना)- अरे शेखर, यह क्या बक रहे हो? जान पड़ता है तुम इस विपत्ति में सठिया गए
243. साँप को दूध पिलाना (दुष्ट की रक्षा करना)- तुम क्यों व्यर्थ में साँप को दूध पिलाकर स्वयं को परेशानी में डाल रहे हो? वह तुम्हें ही डंक मारेगा।
244. प्राण काँपना (बहुत डर जाना)- तेज भूचाल आया तो मेरे प्राण काँप गए।
245. हवा के घोड़े पर सवार होना (शीघ्रता करना)- तुम तो हवा के घोड़े पर सवार होकर आये हो। जरा ठहरो, अभी तुम्हारा काम करता हूँ।
246. कहर बरपाना (अत्यधिक कष्ट होना)- अत्याचारी कंस ने इतने कहर बरपाए कि आखिर प्रजा की रक्षा के लिए श्रीकृष्ण को अवतार लेना ही पड़ा।
247. चपेट में आना (प्रभावित होना)- लाखों लोग बाढ़ की चपेट में आ गए।
248. छत्र-छाया में रहना (किसी के आश्रय में रहना)- वट वृक्ष की छत्र-छाया में लताएँ फलने-फूलने लगीं।
249. छक्के छुड़ाना (बुरी तरह हराना)- महाराज शिवाजी ने अनेक बार मुगल सेना के छक्के छुड़ा दिए।
250. छाती पर मूंग दलना (जान-बूझकर दुख देना)- पिता ने नालायक पुत्र को घर से निकाल दिया, फिर भी वह उसी मोहल्ले में रहकर उनकी छाती पर मूंग दल रहा है।