मोलर चालकता अथवा मोलर चालकत्व क्या है , परिभाषा , इकाई , मात्रक , सांद्रता के साथ परिवर्तन कारक

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(molar conductivity and molar conductance in hindi) मोलर चालकता अथवा मोलर चालकत्व क्या है , परिभाषा , इकाई , मात्रक , सांद्रता के साथ परिवर्तन कारक : जैसा कि हम जानते है कि अलग अलग विलयनो की सांद्रता अलग अलग हो सकती है और इसलिए ही इनमें आयनों की संख्या या मात्रा भी अलग अलग हो सकती है , इसलिए अलग अलग विलयनों की चालकता की तुलना करने के लिए कोलराउस ने थ्योरी दी जिसके आधार पर भिन्न सांद्रता वाले विलयन की चालकता में सम्बन्ध स्थापित किया जा सकता है , इसे मोलर चालकता कहा गया।
मोलर चालकता :एक मोल विद्युत अपघट्य को किसी विलयन में घोलने पर , विलयन में उत्पन्न आयनों के कारण चालकता को मोलर चालकता कहते है।
1980 में जर्मनी के भौतिक वैज्ञानिक जॉर्ज कोहलराश (George Kohlrausch) ने सबसे पहले मोलर चालकता के बारे में बताया।
माना 1 मोल विद्युत अपघट्य किसी V मिली बिलयन में घोला गया है साथ ही माना कि 1 ml विलयन की चालकत्व का मान k है जिसे विलयन की चालकता कहते है तो V ml विलयन की मोलर चालकता को निम्न प्रकार व्यक्त किया जाता है –
मोलर चालकता = 1 मिली विलयन का चालकत्व x V
Λ = k x V
दुसरे शब्दों में मोलर चालकता को निम्न प्रकार भी व्यक्त या परिभाषित किया जा सकता है –
“किसी भी विद्युत अपघट्य विलयन की मोलर चालकता वह होती है जब विलयन की चालकता को विलयन की मोलर सांद्रता द्वारा विभाजित किया जाए। ”
अर्थात मोलर चालकता को निम्न प्रकार भी व्यक्त किया जा सकता है –
Λ = k/C
यहाँ C = विद्युत अपघट्य विलयन की सांद्रता है।
Λ = मोलर चालकता
k = विद्युत अपघट्य विलयन की चालकता
किसी विद्युत अपघट्य विलयन की चालकता की इकाई ‘साइमन प्रति मीटर’ अर्थात (Sm-1) होती है जबकि किसी विद्युत अपघट्य विलयन की मोलर चालकता (S m2 mol-1) होती है।

चालकता और मोलर चालकता में अंतर

चालकता : किसी विद्युत अपघट्य विलयन के प्रतिरोध के व्युत्क्रम को विलयन की चालकता या विद्युत अपघट्य चालकता कहते है। इसे k द्वारा व्यक्त किया जाता है।
मोलर चालकता : किसी विद्युत अपघट्य विलयन की मोलर चालकता , विलयन की चालकता को विलयन की सांद्रता से विभाजित करने पर प्राप्त होती है अर्थात k/C को मोलर चालकता कहते है। मोलर चालकता को Λ द्वारा व्यक्त किया जाता है।

सांद्रता का विलयन की चालकता और मोलर चालकता पर प्रभाव

सांद्रता का विलयन की चालकता (k) पर प्रभाव : जब किसी विलयन की सांद्रता को कम या अधिक किया जाता है विलयन की सांद्रता का मान भी परिवर्तित होता है अर्थात विलयन की चालकता का मान , विलयन की सान्द्रता पर निर्भर करती है।
जब किसी विलयन की सांद्रता को कम किया जाता है अर्थात विलयन को तनु किया जाता है इसकी चालकता कम होती जाती है और सांद्रता को बढ़ाने पर विलयन की चालकता का मान बढ़ता जाता है।
अत: हम कह सकते है कि किसी विलयन की चालकता का मान विलयन में उपस्थित इकाई आयतन में विद्यमान आयनों की संख्या पर निर्भर करता है , चूँकि सांद्रता कम होने पर इकाई आयतन में उपस्थित आयनों की संख्या कम हो जाती है इसलिए चालकता का मान घट जाता है।
सांद्रता का विलयन की मोलर चालकता (Λ) पर प्रभाव : जब किसी विद्युत अपघट्य विलयन की सांद्रता घटायी जाती है या विलयन को तनु किया जाता है तो विलयन की मोलर चालकता का मान बढ़ता है। अर्थात जब सांद्रता अधिक की जाती है मोलर चालकता का मान कम हो जाता है।
मोलर चालकता = k x V
जब सांद्रता घटायी जाती या विलयन को तनु किया जाता है विलयन में पानी आदि मिलाया जाता है , चूँकि सांद्रता कम हुई है तो चालकता (k) का मान तो कम होगा लेकिन दूसरी राशी अर्थात तनु करने पर या सांद्रता घटाने पर आयतन बढ़ जाता है , प्रयोगों से पाया गया कि k का मान जितना कम होता है उससे अधिक आयतन में वृद्धि हो जाती है अर्थात दोनों राशियों के गुणनफल का मान पहले से अधिक हो जाता है इसलिए सांद्रता घटाने पर मोलर चालकता का मान बढ़ता है इसी प्रकार सांद्रता का मान अधिक करने पर मोलर चालकता घट जाती है।