अंग्रेजी भाषा का आधुनिक भारतीय साहित्य क्या हैं ? modern history of english language literature

By   July 30, 2021

modern history of english language literature in hindi ?

अंग्रेजी भाषा का आधुनिक भारतीय साहित्य
राममोहन राय को अंग्रेजी गद्य लिखने वाला प्रथम भारतीय माना जा सकता है। विभिन्न धार्मिक और सामाजिक विषयों पर उनके निबंध और लेख बड़ी सरल शैली में लिखे गए थे। 1820 ई. में उन्होंने पुस्तक प्रीसैप्ट्स आफ जीसस लिखी। कविता के क्षेत्र में डेरोजियो ने (1807-1831) ई. अपने भारतीय शिष्यों के लिए उदाहरण प्रस्तुत किया कि एक भारतीय मन की भावनाओं शिष्यों के लिए उदाहरण प्रस्तुत किया कि एक भारतीय मन की भावनाओं औश्र अनुभूतियों को लेकर अंग्रेजी में कविताएं कैसे लिखती जाती हैं। ‘माइकिल मधसदन दत्त‘ ने अंग्रेजी कविता में अपनी प्रवीणता का परिचय दिया और अपनी प्रसिद्ध वर्णनात्मक कविता ‘दि कैप्टिव लेडी‘ 1849 ई. में लिखी। इसका विषय भारतीय इतिहास में से लिया गया था और शैली उस जमाने की अंग्रेजी की थी। 19वीं शताब्दी के 7वें दशक में ‘अरूदत्त‘ और ‘तरूदत्त‘ के हाथों अंग्रेजी कविता का सर खूब ऊंचा उठा। तरूदत्त की मृत्यु 1877 ई. में हुई। उनकी कृति ‘एंशियेंट बैलेड्स एंड लीजेंड्स ऑफ हिंदुस्तान‘ पांच साल बाद छपी। यह अंग्रेजी में एक पूर्ण काव्य कति थी, जिसमें विषयवस्तु और चरित्र दोनों ही भारतीय थे। शताब्दी के अंत में ‘रमेश चन्द्र‘ ने अंग्रेजी कविता में रामायण और महाभारत लिखे। लेकिन ये छोटे रूप में थे। उन्होंने अंग्रेजी उपन्यास ‘द लेक ऑफ पाम्स‘ और ‘द स्लेव गर्ल ऑफ आगरा‘ लिखे। 19वीं शताब्दी के अंतिम भाग में, अंग्रेजी साहित्य को समृद्ध बनाने वाले अन्य भारतीयसों में ‘रामकृष्ण पिप्ले,‘ ‘बी. मालाबारी‘ और ‘नागेश वी. पाई‘ के नाम उल्लेखनीय हैं।
20वीं शताब्दी के दूसरे दशक से उपन्यासकारों ने अंग्रेजी गद्य को संपन्न बनाया। ‘के. एस. बैंकट रामानी‘ ने 1927 ई. में अपना उपन्यास ‘मिरूमान द टिलर‘ और 1932 ई. में ‘कंडन द पैट्रियट‘ प्रकाशित किए और दोनों ही अत्यंत महत्वपूर्ण थे। ‘शंकर राम‘ का उपन्यास ‘लव आफ डस्ट‘ 1938 ई. में छपा। इन उपन्यासों में बड़े यथार्थवादी ढंग से भारतीय जीवन का चित्रण किया गया था। भारतीय जीवन का इससे भी सजीव विवरण ‘मुल्कराज आनंद‘ के उपन्यासों में मिला। इनमें से कुछ हैं- ‘टू लीव्स एंड ए वड‘, ‘द कूली‘, ‘द अनटचेबल अक्रॉस द ब्लेक वाटर्स, दा सोर्ड एंड द सिकली‘ और ‘द विपेज‘। उन्होंने परंपराओं और रूढ़ियों की बेड़ियों में जकड़े समाज के दलित वर्ग को उठाकर मानव के उच्च स्तर तक पहुंचाया और सिद्ध किया कि उनमें भी मानवीय सद्गुण और कमियां सामान्य रूप से हैं। कुछ और भारतीयसों ने भी अंग्रेजी में उपन्यास लिखे, जिसके नाम, लेखक और प्रकाशन वर्ष इस प्रकार हैंः
‘द डार्क रूम‘. आर. के. नारायण (1938), ‘लाइफ्ज शैडोज‘, कुमार गुरू (1938), ‘टवाइलाइट इन देहली‘, अहंमद अली (1940), ‘देयर ले द सिटी‘, डी. एफ. कराका (1941), ‘मेन एंड रीवर्स, ‘हुमायुं कविर (1945), ‘द अपवार्ड स्पायरल.‘ दिलीप कुमार राय (1949), ‘इन्किलाब‘, अहमद अब्बास (1948), ‘सो मनी हंगर्स‘, भवानी भट्टाचार्य (1948), ‘ट्रेन टु पाकिस्तान‘, खुशवंत सिंह (1956), ‘ही हू राइड्स एक टाइगर,‘ भवानी भट्टाचार्य (1954), ‘सम इनर फ्यूरी,‘ कमला मारकंडेय उपन्यासकार एवं पत्रकार, मैसूर (1956), ‘ए टाइम टू बी हैपी‘, नयनतारा सहगल (1957)।
नयनतारा सहगल
पहली भारतीय लेखिका जिन्हें अंग्रेजी लेखक के लिए पहचान मिली। वे भारत के प्रधानमंत्री जवाहर लाल नेहरू की बहिन एवं विजयलक्ष्मी पंडित की पुत्री है। अभी हाल ही में इन्होंने अपना साहित्य अकादमी पुरस्कार लौटाया है। जो ष्रिच लाइफ अस‘ उपन्यास के लिए साहित्य अकादमी पुरस्कार (1986) प्रदान किया गया।
कैलाश वाजपेयी
हिन्दी के वरिष्ठ साहित्यकार कैलाश वाजपेयी का 79 वर्ष की आयु में 1 अप्रैल, 2015 को निधन हो गया। वाजपेयी का जन्म 1936 में उत्तर प्रदेश के हमीरपुर में हुआ था। वाजपेयी की 34 पुस्तक प्रकाशित हुई, जिनमें ‘हवा में हस्ताक्षर‘ ‘हिन्दी कविता में शिल्प‘, ‘संक्रांत‘, ‘देहांत से हटकर‘, ‘तीसरा अंधेरा‘ और ‘सूफीनामा‘ प्रमुख है। उन्हें हिंदी साहित्य पुरस्कार अकादमी पुरस्कार, व्यास सम्मान, एस.एस. मिलेनियम पुरस्कार, मानव देखभाल ट्रस्ट पुरस्कार, विश्व हिंदी साहित्य से सम्मानित किया जा चुका है।
आर.के. नारायण ख्त्।ै डंपदश्े 2008,
आर.के. नारायण अंग्रेजी साहित्य के सबसे महान उपन्यासकारों में गिने जाते हैं- उन्होंने दक्षिण भारत के काल्पनिक शहर मालगुडी के आधार पर अपनी रचनाएं की। स्वामी ऑड फ्रेंडस (1935), द बेचलर आफ आटस (1937), द डार्ककम (1938), द गाइड (1958), द इंगलिश टीचर आदि उपन्यास, मालगुडीज डेज (1942), बेनियर ट्री ऑड स्टोरीफन सकलन, नेक्स्ट सण्डे, नाईट मेयर निबंध तथा माय डेज, द महाभारत अन्य ग्रंथ है।
महाश्वेता देवी
बांग्ला की जानी-मानी साहित्यकार और सामाजिक कार्यकर्ता महाश्वेता देवी का 28 जुलाई, 2016 को कोलकाता में निधन गया है। 14 जनवरी 1926 को ढाका में जन्मी महाश्वेता देवी की मूल विधा कविता ही थी। पर 1956 में ‘झासी की रानी‘ उन्हें कथाकार बना दिया। ये किताब कालजयी थी। यह सिर्फ कलमकार की कल्पना नहीं थी, बल्कि सच का आईना थी।
महाश्वेता देवी का पूरा लेखन वंचितों-उपेक्षितों के अधिकार का उदघोष है। साहित्य जगत में अतुलनीय योगदान के लिए इन्हें कई महत्वपूर्ण पुरस्कारों से सम्मानित किया गया। इनमें साहित्य अकादमी पुरस्कार (1979), पद्मश्री (1986), ज्ञानपीठ पुरस्कार (1996), रेमन मैग्ससे अवार्ड (1997), पदम विभूषण (2006), सार्क लिटरेचर अवार्ड (2007), बंगाल विभूषण (2011) आदि सम्मानीय पुरस्कार प्रदान किए गए। उनकी चर्चित कृतियों में अरण्य का अधिकार, सालगिरह की पुकार पर टेरोडेक्ट्रिल चोट्टिमुण्डा और उसका तीर, अग्निगर्भ, हजार चैरासी की माँ, मास्टर साब, श्री श्री गणेश महिमा, तारार आंधार, आन्धार माणिक, नील छवि आदि उपन्यास शामिल हैं। उन्होंने अनेक कहानियों की रचना भी की हैं, जिनमें रुदाली. बाढ़, शिकार, बेहुला, द्रौपदी आदि चर्चित रही हैं।
उपन्यास और कहानियों के अतिरिक्त इन्होंने श्वर्तिकाश् पत्रिका का सम्पादन और हिन्दुस्तान समाचार-पत्र के लिए भी कार किया। हजार चैरासी की माँ ‘रुदाली‘, ‘संघर्ष‘ और ‘माटी माय‘ महाश्वेता देवी के उपन्यासों पर आधारित फिल्में हैं।