रेगिस्तान में मरीचिका , हीरे का चमकना , प्रकाशिक तन्तु Mirages in hindi

यहाँ हम पूर्ण आन्तरिक परावर्तन पर आधारित घटनाओ पर चर्चा करेंगे तथा इनका उपयोग कहा किया जा सकता है इसके बारे में भी जानकारी प्राप्त करेंगे।

1. रेगिस्तान में मरीचिका (Mirages) : रेगिस्तान में गर्मी के दिनों में लोगो को कुछ दूरी पर पानी (जलाशय) होने का भ्रम हो जाता है लेकिन वास्तविकता में वहाँ कोई पानी (जलाशय) नहीं होता है , यह भ्रम प्रकाशीय घटना के कारण होता है इस भ्रम को मरीचिका कहते है। ऐसा क्यों होता है ?
रेगिस्तान में कुछ दूरी पर जलाशय या पानी होने का भ्रम (मरीचिका) प्रकाश के पूर्ण आन्तरिक परावर्तन के कारण होता है।
गर्मी के दिनों में रेत बहुत अधिक गर्म हो जाती है जिसके कारण रेत के पास वाली वायु भी गर्म हो जाती है इससे रेत के पास वायु (परत) का घनत्व बहुत कम हो जाता है और यह वायु (परत) विरल माध्यम की भाँती व्यवहार करती है।
ऊपरी परत अपेक्षकृत ठंडी होती है जिससे इसका घनत्व अधिक होता है और यह वायु (परत) सघन माध्यम की तरह व्यवहार करती है।
जब किसी पेड़ या पक्षी के ऊपरी भाग से कोई प्रकाश किरण चलती है तो वह अधिक घनत्व वाली वायु से अर्थात सघन माध्यम से विरल माध्यम में गमन करती है जिसके कारण पूर्ण आन्तरिक परावर्तन की घटना घटित होती है जिससे जमीन पर पेड़ या पक्षी का उल्टा प्रतिबिम्ब बना हुआ प्रतीत होता है।
और जब कोई इसे दूर से देखता है तो ऐसा लगता है की वहाँ पानी या जलाशय है जिसके कारण उसमे पेड़ या पक्षी का प्रतिबिम्ब बन रहा है और उन्हें परिचिका का भ्रम हो जाता है।

 

2. हीरे का चमकना (Brilliance of diamond)

हीरे में चमक पूर्ण आन्तरिक परावर्तन के कारण होती है , यही कारण है की हिरा चमकता रहता है।  हीरे का अपवर्तनांक 2.42 होता है तथा हीरे के लिए क्रांतिक कोण का मान 24.41 होता है।
हीरे को इस प्रकार काटा (घिसा या तराशा) जाता है या बनाया जाता है की इसकी किसी भी फलक से प्रकाश प्रवेश करने के बाद अन्दर पूर्ण आन्तरिक परावर्तित होती रहती है और हिरा चमकता रहता है।

3. प्रकाशिक तन्तु (Optical fiber)

इसका उपयोग उच्च संकेतो जैसे दृश्य डाटा इत्यादि को एक स्थान से दूसरे स्थान तक भेजने के लिए किया जाता है।
प्रकाशिक तन्तु ऐसी युक्ति है जिसमे पूर्ण आन्तरिक परावर्तन का उपयोग किया जाता है।
चित्रानुसार इसके अन्दर के भाग को क्रोड़ (core) कहते है इसका अपवर्तनांक अधिक होता है। यह सघन माध्यम की तरह व्यवहार करता है।
तथा बाहरी भाग cladding (अधिपट्टन) का अपवर्तनांक अपेक्षाकृत कम होता है यह विरल माध्यम की तरह व्यवहार करता है।
 जब प्रकाश को इसके एक सिरे पर क्रान्तिक कोण अन्दर डाला जाता है तो प्रकाश core से cladding में जाता है अर्थात सघन से विरल में जाता है जिससे पूर्ण आन्तरिक परावर्तन की घटना घटित हो जाती है और वह इसके अन्दर इसी प्रकार गति करता हुआ आगे बढ़ता जाता है और दूसरे छोर पर निकल जाता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *