कायान्तरित शैल metamorphism rocks in hindi

metamorphism rocks in hindi कायान्तरित शैल : ताप , दाब और रासायनिक वातावरण में परिवर्तनो से पूर्व निर्मित शैलो के खनिजो के भौतिक एवं रासायनिक संतुलन बदल जाते है।  खनिज नवीन स्थितियों के अनुकूल पुन: क्रिस्टलित या संतुलित होने का प्रयास करते है।  अधिक गहराई पर ताप , दाब और रासायनिक वातावरण में प्रमुख परिवर्तनों के प्रभाव में उत्पन्न इस संरचनात्मक एवं खनिजात्मक अनुक्रिया को कायांतरित शैल कहते है।

Agents of metamorphism (कायान्तरण के कारक)

कायांतरण के निम्न लिखित कारक है –

1. ताप

2. दाब

  • द्रव स्थैतिक , एक समान (uniform pressure)
  • असमान , दिष्ट दाब या प्रतिबल (directive pressure)

3. रासायनिक क्रियाशील तरल तथा गैसीय पदार्थ जल , कार्बन डाई ऑक्साइड , HF , बेरिक अम्ल इत्यादि।

ये तीनो ही कारक कायान्तरण में विभिन्न मात्राओ में सहयोगी होते है।

1. ताप : 

भू पृष्ठ के नीचे गहराई के साथ ताप में वृद्धि होती जाती है और यही कारण है की पृथ्वी की अधिक गहराई में बहुत अधिक ताप होता है।  पृथ्वी के बाहरी भाग में सामान्य तापक्रम का प्रमुख कारण गर्म आग्नेय राशियों का अंतर्वेध है।

2. दाब : कायान्तरण में दो प्रकार का दाब कार्य करता है

  • द्रव स्थैतिक , एक समान (uniform pressure) : यह दाब शैल पर अधिक गहराई में होने वाली क्रियाओ के कारण लगता है।  ऊपर वाली शैलो के वजन से भी यह दाब उत्पन्न होता है।  जैसे की ताप ग्रेडिएंट पृथ्वी की गहराइयों में exists है , द्रव स्थैतिक भी सामान्तया: अधिक ताप के साथ ही लगता है।
  • असमान , दिष्ट दाब या प्रतिबल (directive pressure) : पर्वतीय अंचलो में folding movement के दौरान दिष्ट दाब अथवा प्रतिबल उत्पन्न होता है।  सामान्तया: भूपृष्ठ के निकट एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।  गहराई के बढ़ने पर दिष्ट दाब का प्रभाव कम होता जाता है और द्रवस्थैतिक दाब बढ़ने लगता है।

3. रासायनिक क्रियाशील तरल तथा गैसीय पदार्थ :

जब रासायनिक क्रियाशील तरल तथा गैसीय पदार्थ शैलो के रंध्रो से होकर गुजरते है तो उनके मूल कारको के स्रोत सामान्यत: क्षेत्रीय शैलो में आग्नेय शैलो का अन्तर्वेध है।

process of metamorphism

कायान्तरण की प्रक्रिया निम्न operaters के कार्य करने से होती है –
1. Granulation : यदि शैल पर दबाव और घर्षण इतना अधिक हो की शैल आंशिक रूप से मिल जाते है तो यह प्रक्रिया जहाँ crushing शैल स्थान ले बिना किसी पार्ट को छोड़े “ग्रानुलेशन ” कहलाती है।
2. plastic deformation : जब एक ठोस पर बल आरोपित करते है इसकी आकृति में परिवर्तन आ जाता है।  बल हटाने पर यदि ये ठोस अपनी मूल आकृति में नहीं आते तो इसे plastic deformed कहा जाता है।
3. Recrystallization : “रिक्रिस्टलाइजेशन” का अर्थ है – पहले से निर्मित खनिजो से या तो नए खनिजो का निर्माण या नए क्रिस्टलों का निर्माण होना।  कायान्तरण के दौरान पुन: क्रिस्टलन से शैलो में खनिजात्मक और गठनात्मक परिवर्तन होते है।
4. Metasomatism : मेटासोमेटीज्म वह प्रक्रिया है जिसमे पदार्थ के जुड़ने अथवा हटने से शैलो के मूल संघटन में परिवर्तन आ जाते है।  यह परिवर्तन सामान्यत: शैलो के नीचे high ताप व दाब पर हाइड्रोथर्मलक्लुड्स की गति के कारण होते है।
ऊपर वर्णित ये सभी प्रक्रम सामान्यत: एक साथ operate होकर कायांतरित शैलो का निर्माण करते है।

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