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बोर सिद्धान्त के मुख्य बिंदु , बोर के परमाणु सिद्धांत की कमियां ,स्टार्क, सीमान्त प्रभाव

(bohr model of hydrogen atom in hindi ) बोर सिद्धान्त के मुख्य बिंदु :

1. परमाणु द्वारा ऊर्जा का उत्सर्जन लगातार नहीं होता परन्तु छोटे छोटे बण्डल या पैकेट के रूप में होता है। इन बंडल या पैकेट को फोटॉन या क्वांटा कहते है।
इसमें उपस्थित ऊर्जा का मान प्लांक समीकरण से ज्ञात करते है।
E = hv
यहां h प्लांक नियतांक है
इसका मान6.626 x 10-34 Js
2. इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारो ओर वृताकार चक्कर लगाते है क्योंकि उपकेन्द्रिय बल का मान वैद्युत आर्कषण बल के बराबर होता है।
3. इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारों ओर उन्हें वृत्ताकार कक्षाओं में चक्कर लगाते है जिसमे इलेक्ट्रॉन का कोणीय संवेग (mvr), nh/2πके बराबर हो जायेगा।
अर्थात mvr = nh/2πबराबर हो जायेगा
4. जब इलेक्ट्रॉन एक ऊर्जा स्तर से दूसरे ऊर्जा स्तर में जाता है तो वह या तो ऊर्जा का उत्सर्जन करता है या अवशोषण करता है।
अर्थातE = E2 – E1
यहाँE = ऊर्जा का अंतर
E1= प्रथम कोश की ऊर्जा
E2= दूसरे कोश की ऊर्जा
बोर कक्ष की त्रिज्या ज्ञात करने का सूत्र

इलेक्ट्रॉन की ऊर्जा ज्ञात करने का सूत्र

यदि कोई परमाणु n वें कोश में उपस्थित है तो स्पेक्ट्रमी रेखाओं की कुल संख्या निम्न सूत्र से ज्ञात करते है
रेखाओं की कुल संख्या = n(n – 1)/2

बोर के परमाणु सिद्धांत की कमियां :

1. इस सिद्धांत द्वारा एक इलेक्ट्रॉन वाले परमाणु या आयन के रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या की जा सकती है , परन्तु वे परमाणु जिनमे अधिक इलेक्ट्रॉन होते है उनके रेखीय स्पेक्ट्रम की व्याख्या नहीं की जा सकती।
2. उच्च विभेदन क्षमता वाले स्पेक्ट्रम दर्शी यंत्र से यह पता लगा की ये एक रेखा नहीं है परन्तु कई रेखाओं का समूह है।
3. चुंबकीय क्षेत्र की उपस्थित में एक रेखा अनेक रेखाओ में विभक्त हो जाती है।
इसे सीमान्त प्रभाव कहते है।
इसकी व्याख्या बोर सिद्धांत से नहीं की जा सकती है।
4. विद्युत क्षेत्र की उपस्थिति में एक रेखा अनेक रेखाओ में विभक्त हो जाती है इसे स्टार्क प्रभाव कहते है।
इसकी व्याख्या भी बोर सिद्धान्त से नहीं की जा सकती।

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