कोणीय संवेग का संरक्षण का नियम या सिद्धांत (law of conservation of angular momentum in hindi)

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(law of conservation of angular momentum in hindi)  कोणीय संवेग का संरक्षण का नियम या सिद्धांत : जब किसी निकाय पर इसकी अक्ष पर कार्यरत कुल बाह्य बल आघूर्ण का मान शून्य हो तो उस अक्ष पर कुल कोणीय संवेग का मान नियत रखता है अर्थात संरक्षित रहता है , इसे ही कोणीय संवेग का नियम कहते है।

अत: कोणीय संवेग सिद्धांत के अनुसार निम्न सम्बन्ध पाया जाता है –

कोणीय संवेग के संरक्षण के नियम या सिद्धान्त का प्रमाण

जैसा कि हमने गति के द्वितीय नियम में पढ़ा था कि किसी वस्तु पर कार्यरत कुल बल का मान वस्तु में रेखीय संवेग में परिवर्तन की दर के बराबर होता है।
अत:
दोनों तरफ r का गुणा करने पर
चूँकि हम जानते है की r x F = वस्तु पर कार्यरत बल आघूर्ण होता है जिसे T से व्यक्त करते है , अत: यह समीकरण निम्न प्रकार आता है –
चूँकि r x p = वस्तु का कोणीय संवेग L के बराबर होता है।
अत:
यह समीकरण दर्शाती है किसी कण पर कार्य कर रहे बल आघूर्ण का मान कोणीय संवेग में परिवर्तन की दर के बराबर होता है।
यदि कण पर कार्यरत बलाघूर्ण का मान शून्य हो तो
दोनों तरफ समाकलन करने पर
अत: हम देख सकते है जब किसी कण पर कार्यरत बल आघूर्ण का मान शून्य हो तो कण के कोणीय संवेग का मान नियत या संरक्षित रहता है जैसा हम समीकरण में भी देख सकते है , इसे ही संवेग संरक्षण का नियम या सिद्धांत कहते है।
कोणीय संवेग से
L = I x w
अत: कोणीय संरक्षण के नियम से
L =  I x w = नियत
I ∝ 1/w
अत: हम कह सकते है कि जब किसी वस्तु पर कार्यरत बल आघूर्ण का मान शून्य हो तो इस स्थिति में वस्तु का जडत्व आघूर्ण I , वस्तु के कोणीय वेग के व्युत्क्रमानुपाती होता है।
अर्थात जड़त्व आघूर्ण का मान बढाने पर , कोणीय वेग का मान कम हो होगा तथा जड़त्व आघूर्ण का मान कम होने पर कोणीय वेग अधिक होगा।
उदाहरण : सूर्य के चारों तरफ दीर्घवृत्ताकार कक्षा में जब ग्रह चक्कर लगाता रहता है तो जब ग्रह सूर्य के पास से गुजरता है तो ग्रह का जड़त्व आघूर्ण का मान कम हो जाता है जिसके कारण ग्रह की परिक्रमण गति बढ़ जाती है और सूर्य से ग्रह की दूरी अधिक होने पर उसका जडत्व आघूर्ण अधिक हो जाता है जिससे ग्रह का कोणीय वेग का मान कम हो जाता है , यहाँ कोणीय संवेग संरक्षण का नियम या सिद्धांत लागू होता है।