भारत में विज्ञान की परम्परा या विज्ञान का इतिहास History of science in the India in hindi

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History of science in the India in hindi भारत में विज्ञान की परम्परा या विज्ञान का इतिहास : हमारे देश में विज्ञान बहुत ही पहले ही काफी विकसित मानी जाती है और इसके सबूत आये दिए हमें खुदाई में मिलने वाले अवशेषों से प्राप्त होते है।

हमारे भारत देश में खुदाई में मिले सिन्धु घाटी सभ्यता और मोहनजोदाडो के अवशेषों से यह पता चलता है कि इन सभ्यता के अवशेष से यह अनुमान लगाया जाता है कि उस समय में भी विज्ञान बहुत ही अधिक उन्नत थी।  उस सभ्यता में उद्योग प्रणाली , जल निकास व्यवस्था , रहन सहन के लिए निवास व्यवस्था आदि समृद्ध अवस्था में थे और ये सभ्यता लगभग 3000 वर्ष ईसा पूर्व की मानी जाती है।

18 वीं शताब्दी से पूर्व केवल सात तत्वों का ज्ञान प्राप्त था और ये सात तत्व स्वर्ण , लोहा , ताम्बा , सीसा , टिन और पारा।

हालाँकि 18 वीं शताब्दी के बाद नए नए तत्वों की खोज हुई लेकिन आपको यह जानकर आश्चर्य होगा कि इन सात तत्वों के बारे में हमारे प्राचीनतम संस्कृत साहित्य ऋग्वेद , यजुर्वेद और अथर्वेद आदि में विस्तार से वर्णन किया गया है , इनके उपयोग से लेकर इनके गुण और प्रयोग में लेने की विधियों के बारे में भी वर्णन किया गया है इसलिए इनके आधार पर भी कहा जा सकता है कि इस विज्ञान के क्षेत्र में भी हम प्राचीन समय से ही काफी उन्नत रहे है। इनके जीवित प्रमाण खुदाई में मिलने वाली विभिन्न प्रकार के धातुओं से बनी हुई चीजो और मूर्तियों के आधार पर लगा सकते है , पुराने समय की खुदाई में मिलने वाली चीजो में लगभग 99% तक की शुद्धता के तत्वों से बनने वाली चीजे प्राप्त हुई है , अधिकतर ये चीजे ताम्बे या पीतल जैसी मिश्र धातुओं की बनी हुई पायी गयी।

अब बात करते है चिकित्सा क्षेत्र की , इसा से लगभग 200 वर्ष पूर्व पतंजली ऋषि ने मनुष्य के शरीर में नाड़ियो के बारे में विस्तार से बताया था और मनुष्य केंद्र के बारे में भी बताया था , विभिन्न प्रकार के रोगों का कारण और उनका इलाज इन्ही नाड़ियो के द्वारा संभव होता है , इसके अलावा विभिन्न प्रकार के आसन और प्राणायाम आदि का भी उस समय के ग्रंथो में विस्तार पूर्वक वर्णन किया गया है और उनकी आवश्यकता और करने की विधि और इनसे होने वाले फायदों को भी बताया गया था अत: हम प्राचीन समय से ही चिकित्सा विज्ञान में भी काफी सम्पन्न थे।

सुश्रुत ने लगभग 26 वीं शताब्दी में ऐसे पहले रोगी का इलाज किया था जिसकी नाक कटी हुई थी अत: हमारे देश में सर्जरी का विकास भी काफी पहले हो चूका था और यही कारण है कि प्लास्टिक सर्जरी का जलक सुश्रुत कहते है।

वर्तमान समय में भी विज्ञान के क्षेत्र में हम अन्य देशों से आगे है और सबसे अधिक विकसित देशो की श्रेणी में गिने जाते है , विज्ञान और तकनिकी के क्षेत्र में सबसे अच्छा निवेश बिंदु भारत को माना जाता है और यही कारण है कि बाहर से बड़ी बड़ी तकनिकी कंपनी भारत में आती है और निवेश करती है जिससे हमारा देश और अधिक आत्मनिर्भर बनता जा रहा है और विज्ञान और तकनिकी में आगे अग्रसर है।