histone proteins in hindi , हिस्टोन क्या होते हैं ? वे क्या कार्य करते हैं ? किसे कहते हैं , परिभाषा क्या है ?

पढ़िए histone proteins in hindi , हिस्टोन क्या होते हैं ? वे क्या कार्य करते हैं ? किसे कहते हैं , परिभाषा क्या है ?

क्षारीय प्रोटीन (Histone proteins)

ये छोटे, क्षारीय प्रकृति के प्रोटीन होते हैं, क्योंकि इनमें 10 से 20% क्षारीय अमीनों अम्ल (basic amino acids), आरजिनिन ( arginine) तथा लाइसिन (lysine) पाये जाते हैं । इसलिए ये डीआक्सी- राइबोन्यूक्लिक अम्ल से बँधे रहते हैं। मुख्य हिस्टोन प्रोटीन्स चार होते हैं (H2A, H,B, H, तथा Hg)। इनके अतिरिक्त H, हिस्टोन प्रोटीन भी पाया जाता है ।

DNA के प्रत्येक 200 क्षार जोड़ों पर चारों प्रकार के हिस्टोन प्रोटीन्स के दो-दो अणु पाये जाते हैं। DNA-Histone इकाई संरचना न्यूक्लिओसोम कोर ( Nucleosome core) कहलाती है। यह पास – वाले न्यूक्लिओसोम से DNA खण्डों द्वारा जुड़े रहते हैं । जिन्हें लिंकर DNA कहते हैं। लिंकर DNA के मध्य H, हिस्टोन प्रोटीन पाया जाता है। हिस्टोन प्रोटीन DNA से बँधकर उसमें पायी जाने वाली समस्त आनुवंशिक सूचनाओं को एक साथ अभिव्यक्त (Express) होने से रोकते हैं।

केन्द्रक द्रव्य में क्रोमेटिन धागेनुमा, कुण्डलित संरचना दिखाई देती है, जिसे क्षारीय अभिरंजकों, जैसे-क्षारीय फुकसिन (basic fuchsin) या ऑरसीन (orcein) द्वारा अभिरंजित किया जा सकता है। ये सूत्रवत् संरचनाएँ क्रोमेनिमेटा (chromonematā) कहलाती हैं। ये आपस में गुँथकर जालिका बनाते हैं। कोशिका विभाजन चक्र की अन्तरावस्था ( Interphase) में क्रोमेटिन सूत्र बहुत पतले सूत्रों के रूप में फैल जाते हैं व लाइनिन ( linin) या ऐक्रोमेटिन (achromatin) के बने होते हैं। लेकिन कुछ स्थानों पर क्रोमेटिन बहुत अधिक संघनित ( condensed ) होकर गहरी अभिरंजित होने वाली संहति बनाते हैं । क्रोमेटिन के ये क्षेत्र हिट्रोक्रोमेटिन ( heterochromatin) कहलाते हैं जबकि हल्के फैले हुए क्षेत्र यूक्रोमेटिन (Euchromatin) कहलाते हैं। दोनों ही क्षेत्र DNA के बने होते हैं। कोशिका विभाजन के दौरान यही ‘क्रोमेटिन सूत्र क्रोमोसोम्स ( Chromosomes ) या गुणसूत्रों का रूप ले लेते हैं ।

क्रोमोसोम्स के हिट्रोक्रोमेटिन क्षेत्रों में अनेकों मोती जैसे संरचनायें दिखाई देती हैं जिन्हें क्रोमोमीयर्स (chromomeres) कहते हैं । ऐसा माना जाता है कि इन स्थानों पर अधिक मात्रा में राइबोन्यूक्लिक अम्ल (RNA) पाये जाते हैं। ये क्षेत्र उपापचयी व आनुवंशिक रूप से निष्क्रिय होते हैं, क्योंकि इन स्थानों पर DNA कम व RNA अधिक मात्रा में पाये जाते हैं। जबकि यूक्रोमेटिन (Euchromatin) क्षेत्र में DNA अधिक मात्रा में पाया जाता है। जिससे यह क्षेत्र आनुवंशिक व उपाचयी रूप से सक्रिय होता है। यह क्षेत्र हल्का अभिरंजित होता है ।

  1. केन्द्रिक (Nucleolus)

केन्द्रक मैट्रिक्स में धँसी हुई अवस्था में पायी जाने वाली घनी, गोलाकार या अण्डाकार, अम्ल स्नेही (acidophilic) संरचना केन्द्रिक कहलाती है । सर्वप्रथम इसकी खोज फोन्टाना (Fontana, 1781) ने की। इसके चारों ओर कला नहीं पायी जाती है किन्तु यह बहुत ही सघन संरचना है इसलिए स्पष्ट दिखाई देती है। इसे पायरोनिन (Pyronine) नामक अभिरंजक से अभिरंजित कर सकते हैं ।

आकार (Size) : केन्द्रिक के आकार का सीधा सम्बन्ध कोशिका में होने वाली संश्लेषी क्रियाओं (synthetic activities) से होता है। जिन कोशिकाओं में संश्लेषी क्रियायें नहीं होती हैं उनमें केन्द्रिक अनुपस्थित हो सकता है। जिनमें संश्लेषी क्रियायें कम होती हैं उनमें केन्द्रिक का आकार छोटा लेकिन जिन कोशिकाओं में प्रोटीन व अन्य पदार्थों का संश्लेषण होता रहता है। उनमें केन्द्रिक बड़ी होती हैं । जैसे न्यूरॉन व स्रवण कोशिकाएँ।

क्रोमोसोम की संख्या से होता है। बहुत सी अगुणित (haploid) क्रोमोसोम संख्या वाली पादप व जन्तु संख्या (Number): किसी भी केन्द्रक में केन्द्रिकों (nucleoli) की संख्या का सीधा सम्बन्ध कोशिकाओं में केवल एक केन्द्रिक (nucleolus) पायी जाती है। मनुष्यों में द्विगुणित ( diploid) केन्द्रक में दो जोड़ी केन्द्रिकाएँ (nucleoli) पायी जाती हैं ।

स्थिति (Position)

कुछ विशिष्ट क्रोमोसोम्स के हिट्रोक्रोमेटिक क्षेत्र केन्द्रिक से जुड़कर, केन्द्रिक संगठक स्थल (nucleolar organizing regions ) बनाते हैं । इससे यह ज्ञात होता है कि यद्यपि सभी क्रोमोसोम्स केन्द्रिक पदार्थ को बनाने में अपना योगदान देते हैं किन्तु संगठन स्थल ही मुख्य रूप से केन्द्रिक निर्माण के लिए जिम्मेदार होते हैं। इन केन्द्रिक संगठक स्थलों में ऐसे जीन पाये जाते हैं, जो 18S, 285 तथा विभिन्न RNAs के लिए कोड (code) करते हैं। 5S RNA का संश्लेषण केन्द्रिक के बाहर क्रोमोसोम्स पर होता है । ये सभी घटक केन्द्रिक में गमन कर जाते हैं तथा वहाँ इकट्ठे होकर राइबोसोम्स बनाते हैं । केन्द्रिक से राइबोसोम्स कोशिकाद्रव्य में गमन कर जाते हैं।

केन्द्रिक का रासायनिक संगठन (Chemical composition of nucleolus)

विभिन्न कोशिकाओं में केन्द्रक में पाये जाने वाले कुल RNA का लगभग 3 से 20% भाग केन्द्रिक में पाया जाता है। इसमें अधिक मात्रा में फॉस्फोप्रोटीन पाये जाते हैं। हिस्टोन प्रोटीन अनुपस्थित होते हैं। केन्द्रिक में पाये जाने वाले RNA का क्षारीय संगठन rRNA के समान ही होता है। इसमें कुछ एन्जाइम, जैसे- एसिड फॉस्फेटेज (acid phosphatase ), न्यूक्लिओसाइड फॉस्फोराइलेज (Nucleoside phosphorylase) तथा NAD संश्लेषी एन्जाइम आदि । ये कोएन्जाइम्स (coenzymes), न्यूक्लिओटाइड (nucleotide) तथा RNA के जीव संश्लेषण में हिस्सा लेते हैं । कुछ केन्द्रिकों में RNA मिथाइलेज एन्जाइम भी पाया जाता है जो मिथाइल समूह (methyl group) को RNA क्षार पर स्थानान्तरित करता है । यद्यपि केन्द्रिक में DNA अनुपस्थित होता है किन्तु इसके चारों ओर DNA वलय पायी जाती है जो कि इससे सम्बद्ध क्रोमोसोम का हिट्रोक्रोमेटिन भाग होता है ।

केन्द्रिक की सूक्ष्म संरचना (Ultra structure of nucleolus)

इलेक्ट्रॉन सूक्ष्मदर्शी द्वारा केन्द्रिक में निम्न भाग दिखायी देते हैं (चित्र 2.49)।

  1. कणिकामय भाग ( Granular zone ) — केन्द्रिक का परिधीय (Peripheral) भाग राइबोन्यूक्लिओप्रोटीन से बनी 150 से 200 A व्यास वाली घनी कणिकाओं द्वारा निर्मित होता है । ये कणिकायें राइबोसोम्स की पूर्ववर्ती (Precursor) होती है ।
  2. रेशेदार भाग (Fibrillar zone ) — इस क्षेत्र को न्यूक्लिओलोनिमा ( nucleolonema) कहते हैं । यह 50 से 80 A लम्बे रेशे से बना होता है। ये भी राइबोन्यूक्लिओप्रोटीन से बने होते हैं।
  3. अक्रिस्टलीय भाग ( Amorphous zone ) — ये सिर्फ प्रोटीन द्वारा निर्मित भाग है जिसमें रेशे (fibrils) व कणिकायें (granules) निलम्बित रहते हैं ।
  4. केन्द्रिक-सम्बद्ध क्रोमेटिन (Nucleolar-associated chromatin) – ये 100 A मोटे सूत्र होते हैं जो केन्द्रिक के चारों ओर पाये जाते हैं तथा केन्द्रिक के अन्दर प्रवेश करके निश्चित अन्तराल पर अन्तराकेन्द्रिकीय जाल बनाते हैं । इनमें DNA पाया जाता है।

केन्द्रिक चक्र (Nucleolar cycle )

जैसा कि विदित है, केन्द्रिक कोशिका विभाजन की प्रथम प्रावस्था (prophase) में विलुप्त हो जाती है, तथा अन्तरावस्था (Inter-phase) में पुनः प्रकट हो जाती है। यह चक्र जिस क्रोमोसोम द्वारा नियन्त्रित रहता है उसे केन्द्रिक संगठक क्रोमोसोम कहते हैं । इसके विषय में पूर्व में भी बताया जा चुका है। इस क्रोमोसोम  का केन्द्रिक निर्माण में भाग लेने वाला विशिष्ट स्थल (specific region) केन्द्रिक क्षेत्र ( nucleolar zone) कहलाता है । बहुधा इस भाग में द्वितीयक संकुचन (Secondary constriction) पाया जाता है । केन्द्रिक इस क्षेत्र से जुड़ी रहती है तथा सीधे ही RNA से सम्बन्ध बनाये रखती है, जिसमें केन्द्रिक व rRNA के संश्लेषण के लिए जीन पायी जाती हैं।

कार्य (Functions)

चित्र 2.50 : एक अनुषंगी गुणसूत्र और उससे संलग्न केन्द्रिक ।

  1. राइबोसोमल आर. एन. ए. (RNA) का संश्लेषण करना ।
  2. इसी में 45SRNA दो उपइकाईयों 18S FRNA तथा 28S FRNA में टूटता है जिनका मिथाइलेशन (methylation) भी केन्द्रिक में ही होता है। 1
  3. राइबोसोम्स (Ribosomes ) का जैविक संश्लेषण भी इसी में होता है।
  4. हिस्टोन प्रोटीन्स का संश्लेषण भी केन्द्रिक में ही होता है ।
  5. केन्द्रिक केन्द्रक की क्रियाशीलता के लिए पर्याप्त ऊर्जा देती है I
  6. कोशिका विभाजन में यह महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाती है। यदि किसी कारणवश केन्द्रिक नष्ट हो जाती है तो कोशिका विभाजन भी सदैव के लिए रूक जाता है।
  7. अन्त:काय (Endosomes ) — ये केन्द्रक द्रव्य में पायी जाने वाली, केन्द्रिक से छोटी क्रोमेटिन संरचनायें हैं। इनकी संरचना बदलती रहती है ।

केन्द्रक का रासायनिक संगठन (Chemical composition of nucleus )

रासायनिक संरचना में केन्द्रक मुख्य रूप से न्यूक्लिक अम्ल ( Nucleic acids) तथा प्रोटीन (Protein) से मिलकर बना होता है । इनके अलावा विभिन्न एन्जाइम (Enzyme) तथा अकार्बनिक लवण ( Inorganic salts) भी पाये जाते हैं। न्यूक्लिक अम्ल व प्रोटीन मिलकर न्यूक्लिओप्रोटीन (Nucleoprotein) कहलाते हैं।

(1) न्यूक्लिक अम्ल ( Nucleic acids) — केन्द्रक द्रव्य का मुख्य घटक DNA (डी. ऑक्सीराइबोन्यूक्लिक अम्ल) है। इसकी मात्रा केन्द्रक के शुष्क भार की लगभग 15-30% होती है, जबकि _RNA (राइबोन्यूक्लिक अम्ल) केन्द्रिक का मुख्य घटक हैं। इसकी मात्रा केन्द्रिक के शुष्क भार की लगभग 8-10% होती है। ये दोनों अम्ल प्रोटीन से जुड़कर डी-ऑक्सीराइबोन्यूक्लिओप्रोटीन तथा राइबोन्यूक्लिओ प्रोटीन बनाते हैं, केन्द्रिक में 90% अम्लीय प्रोटीन भी पाये जाते हैं। केन्द्रक में की मात्रा क्रोमोसोम्स की संख्या पर निर्भर रहती है।

(2) प्रोटीन्स (Proteins) – केन्द्रक में अम्लीय तथा क्षारीय दोनों प्रकार के प्रोटीन पाये जाते हैं। मुख्य क्षारीय प्रोटीन्स हिस्टोन्स (histones) तथा प्रोटामीन्स (Protamines ) हैं । ये केन्द्रक में न्यूक्लिओहिस्टोन्स (nucleohistones) तथा न्यूक्लिओप्रोटामीन्स (nucleoprotamines) के रूप में पाये जाते हैं। इनकी मात्रा अम्लीय प्रोटीन से अधिक होती है । अम्लीय प्रोटीन्स (non-histones) केन्द्रक में अमीनो अम्ल ट्रिप्टोफान (tryptophan ) तथा टायरोसिन ( tyrosine) के रूप में पाये जाते हैं।

_(3) विकर (Enzymes)—ये केन्द्रक के महत्त्वपूर्ण घटक हैं। डाइफॉस्फोपाइरिडिन न्यूक्लिओटाइड सिन्थेटेज (diphosphopyridine-nucleotide-synthetase) केन्द्रक में पाया जाने वाला एक अत्यन्त महत्त्वपूर्ण एन्जाइम है। यह को एन्जाइम (co-enzyme) डाइफॉस्फोपाइरिडिन – न्यूक्लिओटाइड (diphosphopyridine-nucleotide ) के संश्लेषण में भाग लेता है। यह को – एन्जाइम प्रोटीन संश्लेषण के लिए आवश्यक है। इसके अलावा केन्द्रक में DNA संश्लेषण के लिए DNA तथा RNA पॉलीमरेज (Polymerases) एन्जाइम भी पाये जाते हैं । अन्य एन्जाइम जैसे – न्यूक्लिओटाइड फास्फोराइलेज (nucleotide-phosphorylase ), न्यूक्लिओटाइड – ट्राइफोस्फेटेज (nucleotide-triphosphatase), NAD- सिन्थेटेज (NAD-synthetase), डाइअमीनेज ( diaminase), गूवानेज (guanase), ऐल्डोलेज (aldolase), इनोलेज (enolase), डीहाइड्रोजिनेज (de-hydrogenase), पाइरूवेट काइनेज (pyruvate kinase) तथा राइबोन्यूक्लिओज (ribonulcease) आदि भी केन्द्रक में पाये जाते हैं। ATP तथा एसीटाइल – को- एन्जाइम-A-(Acetyl-co-enzyme – A) भी पाये जाते हैं ।

(4) अकार्बनिक पदार्थ (Inorganic substances ) — केन्द्रक में पाये जाने वाले मुख्य अकार्बनिक पदार्थ केल्सियम, पॉटेशियम, सोडियम, मैग्नीशियम, फॉस्फोरस, आयरन तथा जिंक के लवणों के रूप में पाये जाते हैं। ये प्रोटीन्स तथा एन्जाइम से जुड़े रहते हैं। इनकी मात्रा अति सूक्ष्म होती है किन्तु ये जैविक क्रियाओं के लिए अत्यन्त आवश्यक होते हैं ।

केन्द्रक के कार्य (Functions)

केन्द्रक कोशिकाओं में होने वाली विभिन्न क्रियाओं को नियन्त्रित करता है जिससे अन्त में जीवों में पाये जाने वाले लक्षणों का निर्धारण होता है। इस बात को जे. हेमरलिंग (J. Hammerling, 1934 ने प्रमाणित किया। उसने ऐसीटेबुलेरिया (Acetabularia) नामक एककोशिकीय (Unicellular) हरी शैवाल की दो जातियाँ ऐ. क्रेनुलेटा (A. cremlata) तथा ऐ. मेडीटेरेनिया (A. mediterrania), पर कुछ प्रयोग किये। इस शैवाल की कोशिका में 1em व्यास वाली टोपी (cap) पायी जाती है तथा 5 cm लम्बा वृन्त (stalk) पाया जाता है। जिसके आधारीय भाग पर राइजॉइड्स (Rhizoids) तथा केन्द्रक पाया जाता है। दोनों जातियों की टोपियों की संरचना में भिन्नता पायी जाती है (चित्र 2.51 ) । यदि इनकी से कोशिकांग एवं केन्द्रकीय पदार्थ टोपी को काट दिया जाये तो प्रत्येक पर प्रारम्भिक प्रकार की टोपी का विकास हो जायेगा। यदि इनकी टोपियों को हटाकर एक जाति के वृत्त का दूसरी जाति के केन्द्रकधारी मूलाभास पर रोपण

चित्र 2.51: हैमरलिंग का प्रयोग, जिसके द्वारा एसीटेबुलेरिया में केन्द्रक एवं कोशिकाद्रव्य के आपेक्षिक कार्यों (relative roles) को प्रमाणित किया गया था ।

कर दिया जाये तो विकसित हुई टोपी की संरचना उस जाति के समान होती है जिसका केन्द्रक था । इस प्रयोग में यदि केन्द्रक ऐ. क्रेनुलेटा जाति का है तो टोपी की संरचना भी ऐ. क्रेनुलेटा प्रकार की होगी। लेकिन जब दोनों जातियों के केन्द्रक युक्त हिस्सों को एक साथ रोपित कर दिया जाता है तो बनने वाली टोपी मध्यवर्ती प्रकार की हो जायेगी। इससे स्पष्ट रूप से प्रमाणित होता है कि जीवों के लक्षण केन्द्रक द्वारा ही नियन्त्रित होते हैं। हालाँकि कोशिकाद्रव्य में कुछ समय तक स्वनियन्त्रित क्रियाशीलता बनी रहती है, किन्तु वह भी केन्द्रक पर निर्भर होती है। ऐसा माना गया कि इस शैवाल में टोपी बनाने के लिए सूचना केन्द्रक द्वारा कोशिकाद्रव्य में टोपी बनने से पूर्व दे दी जाती है । वहाँ यह निष्क्रिय अवस्था में निहित रहती है। ऐ. क्रेनुलेटा जाति में अन्धेरे में टोपी का निर्माण नहीं हुआ, सिर्फ वृन्त का निर्माण हुआ। इस प्रकार के वृन्त से केन्द्रक हटा कर प्रकाश देने पर टोपी का निर्माण हुआ । इस प्रकार प्रकाश देने से टोपी बनने के लिए, केन्द्रक में कोई नयी सूचना नहीं दी जबकि टोपी निर्माण के लिए सूचना पहले से ही कोशिकाद्रव्य में उपस्थित थी, लेकिन जब तक प्रकाश नहीं दिया गया तब तक वह संक्रिय नहीं हो पायी। इस प्रकार हम कह सकते हैं कि केन्द्रक द्वारा दी गयी सूचना कोशिका द्रव्य में बहुत समय तक निहित रहती है। कोशिका के दोनों भाग मिलकर जीवों के लक्षणों को निर्धारित करते हैं ।

अभ्यास-प्रश्न

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न/रिक्त स्थानों की पूर्ति (Very short answer questions/Fill in the blanks) :

  1. ‘जीवद्रव्य सिद्धान्त’ (Protoplasm theory) को प्रतिपादित करने वाले वैज्ञानिक का नाम लिखिए ।
  2. जीवाणु में श्वसनीय कोशिकांग का नाम लिखिए ।
  3. केन्द्रिका (Nucleolus) की खोज किसने की ?
  4. प्रोकैरिओटिक कोशिकाओं में
  5. जीवाणु कोशिकांगों में वर्णक

प्रकार के राइबोसोम्स पाये जाते हैं । में पाये जाते हैं।

  1. प्रोकैरिओटिक कोशिकांगों में पाया जाने वाला DNA अणु होता है ।
  2. आंत्रज्वर के कारक जीवाणु का नाम लिखिए।
  3. क्षय रोग किस जीवाणु से होता है ।
  4. पादपों में पायी जाने वाली कोशिका भित्ति एक
  5. कोशिका भित्ति का पाया जाना केवल संरचना है। कोशिकाओं का लक्षण है।
  6. कोशिका भित्ति के निर्माण के समय कोशिका पट्टी को बनाने वाली पुटिकाएँ . कहलाती हैं ।
  7. प्लाज्मा झिल्ली की मोटाई कितनी होती है ?
  8. प्लाज्मा झिल्ली की संरचना हेतु तरल मोजेक मॉडल किसने दिया ?
  9. किसी कोशिका में प्लाज्मा कला द्वारा ठोस पदार्थों का सीधा भक्षण क्या कहलाता है ?
  10. कोशिका के अन्दर जीवद्रव्य चलन कहलाता है।
  11. कॉलोडाइल विलयन के अलावा जीवद्रव्य की अन्य दो अवस्थाएँ हैं।
  12. ATP का पूरा नाम लिखो ।
  13. राइबोसोम्स की खोज किसने की ?
  14. टमाटर में पाये जाने वाले वर्णक का नाम लिखो ।
  15. पादप कोशिका की रसोई (kitchen ) कहलाते हैं 1
  16. F, कणों का दूसरा नाम है ।
  17. गाल्जीकाय का मुख्य कार्य है ।
  18. माइटोकॉन्ड्रीया शब्द किसने दिया ?
  19. हाइड्रोजन परॉक्साइड उपापचय किस कोशिकांग में होता है ?
  20. रसधानियों को संवर्धित फ्राइब्रोब्लास्ट कोशिकाओं में किसने देखा ?
  21. केन्द्रक की खोज सर्वप्रथम किसने की ?
  22. ऐसीटेबुलेरिया एक
  23. न्यूक्लियोप्लाज्मिक सूचकांक
  24. क्रोमेटिन को है । ने दिया । द्वारा अभिरंजित किया जा सकता है।
  25. अन्त: प्रद्रव्यी जालिका (E.R.) का मुख्य कार्य है ।
  26. प्रकाशीय श्वसन किस कोशिकांग में होता है ?

लघुत्तरात्मक प्रश्न ( Short Type Answer Questions) :

  1. न्यूक्लिओइड्स पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ।
  2. मीजोसोम्स क्या होते हैं ? समझाइए ।
  3. प्लाज्मिड्स क्या होते हैं ? जीवाणु कोशिका में इनका क्या महत्त्व होता है ?
  4. जीवाणु कोशिका में पायी जाने वाली कोशिका भित्ति की रासायनिक संरचना का संक्षिप्त वर्णन कीजिए ।

कोशिकांग एवं केन्द्रकीय पदार्थ

  1. । फ्रेगमोसोम्स क्या होते हैं ?

6.कोशिका भित्ति के चार मुख्य रासायनिक घटकों के नाम लिखो 7. कोशिका भित्ति का एक मुख्य कार्य लिखो ।

  1. जैविक कला के दो मुख्य लक्षण लिखो ।
  2. कोशिका पायन परिभाषित कीजिए ।
  3. परिवेशित गर्त व साधारण गर्त में क्या अन्तर होता है ?
  4. ‘साइक्लोसिस’ (cyclosis) से आप क्या समझते हैं ? 12. कॉलाइडल विलयन किसे कहते हैं ?
  5. ब्राउनियन गति से आप क्या समझते हैं?
  6. एमाइलोप्लास्ट क्या होते हैं ?
  7. नीले-हरे शैवालों में पाये जाने वर्णकों का नाम लिखो ।
  8. थायलेकॉइड्स क्या होती है? कहाँ पायी जाती है?
  9. क्वांटोसोम्स क्या होते हैं? इनमें प्रकाश संश्लेषण की कौनसी क्रिया सम्पन्न होती है ?
  10. क्रिस्टी पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए ।
  11. ऑक्सीसोम्स (F, – कणों) पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखो ।
  12. कोशिका पट्टिका ( cell plate) बनाने में गाल्जीकाय की क्या भूमिका होती है ? 21. कणिकामय अन्तःप्रद्रव्यी जालिका का मुख्य कार्य क्या होता है ?
  13. पॉलीसोम्स क्या होते हैं ?
  14. 70s व 80s प्रकार के राइबोसोम्स की तुलना कीजिए ।
  15. लाइसोसोम्स को आत्मघाती थैला क्यों कहते हैं ? बतलाइये ।
  16. संक्षिप्त में परॉक्सीसोम्स के कार्य लिखो ।
  17. ‘सिन्सिशिया’ क्या होती है ? उदाहरण सहित लिखो ।
  18. केन्द्रक, केन्द्रिका तथा केन्द्रक द्रव्य में अन्तर बताइये ।
  19. क्रोमोमीयर्स क्या होती है ? सर्वप्रथम इनका वर्णन किसने किया? 29. केन्द्रक में हिस्टोन प्रोटीन्स का क्या कार्य होता है ?
  20. केन्द्रिका पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिये ।
  21. हैमरलिंग के प्रयोग का महत्त्व बतलाइये ।

बन्धात्मक प्रश्न (Essay Type Questions ) :

  1. एक प्रारूपिक जीवाणु कोशिका का वर्णन कीजिए ।
  2. प्रोकैरिओटिक एवं यूकैरियोटिक कोशिकाओं का तुलनात्मक विवरण दीजिए ।
  3. कोशिका भित्ति की उत्पत्ति व वृद्धि का वर्णन कीजिए ।
  4. कोशिका भित्ति में होने वाले विभिन्न प्रकार के रासायनिक परिवर्तनों का वर्णन कीजिए ।
  5. प्लाज्मा झिल्ली को परिभाषित कीजिए। इसकी संरचना व कार्य का वर्णन कीजिए ।
  6. प्लाज्मा झिल्ली की रासायनिक संरचना का वर्णन कीजिए ।
  7. प्लाज्मा कला के विभिन्न गुणों का विस्तृत वर्णन कीजिए ।
  8. प्लाज्मा कला संरचना के माइसेलर सिद्धान्त का वर्णन कीजिए ।
  9. प्लाज्मा कला संरचना के तरल मोजेक मॉडल का वर्णन कीजिए । 10. जीव द्रव्य की भौतिक प्रकृति का वर्णन कीजिए ।
  10. जीवद्रव्य के रासायनिक संगठन का वर्णन कीजिए ।
  11. प्लास्टिड्स में संचित भोजन व वर्णकों की उपस्थिति के आधार पर प्लास्टिड्स के वर्गीकरण

का वर्णन कीजिए।

  1. क्लोरोप्लास्ट की संरचना का वर्णन कीजिए ।
  2. क्लोरोप्लास्ट की परासंरचना व क्वांटोसोम परिकल्पना का वर्णन कीजिए ।
  3. माइटोकॉन्ड्रीकी संरचना का वर्णन कीजिए ।

17.या की सूक्ष्म संरचना व कार्यों का वर्णन कीजिए ।

  1. गाल्जीकाय

गाल्जीकाय के कार्यों का वर्णन कीजिए।

  1. राइबोसोम्स की संरचना व कार्यों का वर्णन कीजिए ।
  2. राइबोसोम्स के रासायनिक संगठन का वर्णन कीजिए ।
  3. यूकैरिओटिक कोशिका में राइबोसोम्स के निर्माण को समझाइए । 21. अन्तःप्रद्रव्यी जालिका के मुख्य कार्यों का वर्णन कीजिए ।
  4. लाइसोसोम्स क्या होते हैं? इनकी संरचना व कार्यों का वर्णन कीजिए । 23. कोशिका के जीवन में लाइसोसोम्स की उपयोगिता के बारे में लिखिए । 24. पराक्सीसोम्स की संरचना व कार्यों का विस्तृत वर्णन करो ।
  5. रिक्तिकाएँ क्या होती हैं ? इनकी संरचना व कार्य के बारे में लिखिए । 26. केन्द्रक की सूक्ष्म संरचना का सचित्र वर्णन कीजिए ।
  6. प्राथमिक संकीर्णन क्या होता है ? इसकी संरचना व कार्य का वर्णन कीजिए । उत्तरमाला (Answers)

अतिलघूत्तरात्मक प्रश्न / रिक्त स्थानों की पूर्ति :

  1. मैक्स शुल्ट्ज (1861)
  2. मीजोसोम्स
  3. फोन्टाना
  4. 70S
  5. क्रोमेटोफोर्स

6.

  1. सालमोनेला टायफोसा

8.

  1. निर्जीव
  2. फ्रेगमोसोम्स
  3. सिंगर व निकोल्सन ने
  4. साइक्लोसिस
  5. एडीनोसीन ट्राइ फास्फेट
  6. लाइकोपीन
  7. आक्सीसोम्स
  8. स्रवण
  9. पोर्टर, 1945
  10. शैवाल
  11. क्षारीय अभिरंजक (Basic fuchsin) 31. परॉक्सीसोम्स

वृत्ताकार व द्विकुण्डलित माइकोबेक्टीरियम ट्यूबरकुलोसिस

  1. पादप
  2. 70-90 A
  3. कोशिकाशन (phagocytosis) 16. सॉल व जैल
  4. पैलेडे 1953 में जन्तु कोशिका में 20. क्लोरोप्लास्ट
  5. बेन्डा ने
  6. परॉक्सीसोम्स में
  7. रॉबर्ट ब्राऊन ने
  8. हर्टबिग (Hertwig)
  9. कॉलेस्ट्रॉल व स्टिरॉइड का संश्लेषण