स्वर्ण क्रांति किससे संबंधित है ? सुनहरी क्रांति का सम्बन्ध किससे हैं ? golden revolution is related to which production in hindi

By   July 8, 2021

golden revolution is related to which production in hindi स्वर्ण क्रांति किससे संबंधित है ? सुनहरी क्रांति का सम्बन्ध किससे हैं ?

उत्तर : स्वर्णिम क्रांति का सम्बन्ध फलों के उत्पादन से है |

प्रमुख कृषि क्रांतियां
हरित क्रांति खाद्यान्न
श्वेत क्रांति दुग्ध
पीली क्रांति तिलहन
स्वर्ण क्रांति फल (सेब)
गुलाबी क्रांति झींगा
ग्रे क्रांति उर्वरक
भूरी क्रांति गैर-परंपरागत ऊर्जा
रजत क्रांति कुक्कुट/अंडा
खाद्य शृंखला क्रांति भोजन, सब्जियों और फलों को नष्ट होने से बचाना
इन्द्रधनुष क्रांति उपर्युक्त सभी क्रांतियों का मिश्रण
काली क्रांति कच्चे तेल (पेट्रोलियम) का उत्पादन
नीली क्रांति मछली उत्पादन

भारत में कृषि

ऽ भारत एक कृषि प्रधान देश है। यहां की दो-तिहाई (58.2%) जनसंख्या कृषि कार्यों में संलग्न है। कृषि व सहायक कार्यों का सकल घरेलू उत्पाद में योगदान 14ण्4ः है।
ऽ भारत कृषि योग्य भूमि की उपलब्धता की दृष्टि से काफी धनी देश है। 2010-11 में खाद्यान्न के अंतर्गत भूमि 125.73 मिलियन हेक्टेयर है।
ऽ मध्य प्रदेश उत्पादन के क्षेत्र में भारत का अग्रणी राज्य है और इसे भारत का सोयाबीन का कटोरा कहा जाता है।
ऽ केरल को भारत का मसालों का राज्य कहते हैं।
ऽ भारत आम, केला, हल्दी, मसाले, काजू और अदरक का सबसे बड़ा उत्पादक है।
ऽ भारत नारियल का तीसरा सबसे बड़ा उत्पादक है।
ऽ भारत दलहन का सबसे बड़ा उत्पादक है।
ऽ भारत तंबाकू का दूसरो सबसे बड़ा उपभोक्ता और दूसरा सबसे बडा उत्पादक है। केवल चीन भारत से आगे है।

भारत की प्रमुख खाद्य फसलें
फसल तापमान वर्षा प्रमुख उत्पादक राज्य
चावल आरंभिक वृद्धि के समय 16°C-20°C 150-300 सेमी पश्चिम बंगाल, पंजाब, उत्तर प्रदेश
फसल पकने के समय 18°C-32°C (भारी वर्षा)
गेंहू वृद्धि के समय 10°C-15°C 50 सेमी-100 सेमी उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा
फसल पकने के समय 25°C-28°C
मक्का 21°C-27°C 50 सेमी-100 सेमी मध्य प्रदेश, आंध्र प्रदेश, कर्नाटक
किसी भी समय पाला सहन धूप इसकी वृद्धि में सहायक, पकने की
नहीं कर सकती अवस्था में ठंडा, सूखा मौसम आवश्यक है
ज्वार उच्च तापमान सूखी फसल के रूप में जानी जाती हैं महाराष्ट्र, कर्नाटक, मध्य प्रदेश
दलहन 20°C-30°C 50-75 सेमी राजस्थान, महाराष्ट्र
नोट: भारत विश्व में दलहन का सबसे बड़ा उत्पादक, उपभोक्ता और आयातक देश है और विश्व की 25% दलहन का उत्पादन करता है।
भारत की प्रमुख नकदी फसले
फसल क्षेत्र और राज्य
गन्ना उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश
कपास गुजरात, महाराष्ट्र, पंजाब
हल्दी आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु
पटसन पश्चिम बंगाल, बिहार, उड़ीसा और असम
चाय असम की पहाड़ियां, पश्चिम बंगाल (दार्जिलिंग), हिमाचल प्रदेश और उत्तर प्रदेश
कॉफी कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल
रबड़ केरल (75%), तमिलनाडु (20%), कर्नाटक (3%), अंडमान और निकोबार द्वीप समूह (2%)
तम्बाकू आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, कर्नाटक और बिहार
काली मिर्च केरल, कर्नाटक और तमिलनाडु
बाजरा राजस्थान, गुजरात, उत्तर प्रदेश
अदरक केरल और मेघालय
इलाइची केरल, तमिलनाडु और कर्नाटक
सोयाबीन मध्य प्रदेश (सोयाबीन राज्य), राजस्थान, तमिलनाडु
मूंगफली गुजरात, तमिलनाडु, आंध्र प्रदेश
सरसों राजस्थान, उत्तर प्रदेश, हरियाणा

भारत में फसलों का मौसम
यहां वर्षभर में मुख्यतः तीन प्रकार की फसलें पैदा की जाती हैं जो निम्नलिखित हैं:
1. रबी की फसल: इसे अक्टूबर-नवंबर में बोया जाता है एवं अप्रैल-मई में काट लिया जाता है। गेहूं, जौ, चना, मटर, सरसों, राई आदि रबी की फसलें हैं।
2. खरीफ की फसल: यह जून-जुलाई में बोकर सिंतबर-अक्टूबर तक काट ली जाती है। इसके अंतर्गत चावल, ज्वार, बाजरा, रागी, मक्का, जूट, मूंगफली, कपास, तंबाकू, मूंग, उड़द, आदि फसलें आती हैं।
3. जायद की फसल: ये फसलें रबी एवं खरीफ के बीच के समय में बोकर काट ली जाती हैं। इनका समय मार्च से जून तक होता है। तरबूज, खरबूज, ककड़ी, खीरा, करेला आदि जायद की फसलें हैं।
फल और सब्जियां
ऽ भारत फलों व सब्जियों का विश्व का दूसरा (पहला चीन) सबसे बड़ा उत्पादक है। फलों व सब्जियों के उत्पादन में इसका हिस्सा क्रमशः 10 प्रतिशत व 13.28 प्रतिशत है।
ऽ भारत आम, केला और नींबू का सबसे बड़ा उत्पादक है।
ऽ भारत फूलगोबी के उत्पादन में पहला, प्याज के उत्पादन में दूसरा और बंदगोभी के उत्पादन में तीसरा स्थान रखता है।
हरित क्रांति
ऽ 1960 के दौरान गेहूं और चावल के उत्पादन में भारी वृद्धि हुई । अमेरिकी वैज्ञानिक डॉ. विलियम गौडे ने इसे हरित क्रांति (Green Revolution) कहा। इसके लिए मैक्सिको से कई शंकर (Hyboid) बीज आयातीत किए गए।
ऽ भारत में इसका श्रेय डॉ. एम एस स्वामीनाथन को जाता है। उन्हें हरित क्रांति का पिता कहा जाता है। उनके अलावा अमेरिकी प्रोफेसर नार्मन बोर्लाग ने भी इसमें महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।