प्रकार्यात्मक पूर्वापेक्षाएं (functional prerequisites in hindi) by talcott parsons in sociology

By   November 26, 2020

(functional prerequisites in hindi) by talcott parsons in sociology  प्रकार्यात्मक पूर्वापेक्षाएं क्या है ? कार्यात्मक पूर्वापेक्षाएँ किसे कहते है ?

प्रकार्यात्मक पूर्वापेक्षाएं (functional prerequisites)
यह आपने पढ़ा ही है कि पार्सन्स के विचार में परिवार, अर्थव्यवस्था, शासन व्यवस्था आदि सभी व्यवस्थाओं की अपनी सीमाएं हैं जिसे वे अपना अस्तित्व कायम रखने के लिए सदैव बनाए रखती है। इन व्यवस्थाओं का आत्म-अनुरक्षण तभी संभव है जब सामाजिक प्राणी के रूप में मानव-पात्रों (व्यक्तियों) का समाज में समाजीकरण हो जाए और उनके अभिप्रेरणात्मक और मूल्यपरक उन्मुखताओं का प्रतिरूपण हो जाए। सामाजिक प्रणालियों को अपने अस्तित्व को बनाए रखने के लिए अपने आंतरिक संगठन और बाहरी वातावरण के बीच कुछ अपरिहार्य व्यवस्थाएं और समझौते करने पड़ते हैं । ये समझौते ठीक उसी तरह से हैं, जैसे कि मनुष्य के शरीर को बाहरी वातावरण के साथ सांस के द्वारा, रक्त संचार के द्वारा और शरीर में निरंतर स्थिर तापमान बनाए रखकर करने पड़ते हैं। पार्सन्स के विचार में सामाजिक प्रणालियों में भी ऐसी ही आत्म समन्वयकारी और अपने रख-रखाव की क्षमता है। ये जो समन्वयकारी प्रक्रियाएं सामाजिक प्रणाली को आंतरिक रूप से और अपनी सीमा अवस्थाओं के द्वारा, बनाए रखती है उन्हें प्रकार्य (function) कहते हैं। प्रकार्य प्रणाली के आत्म-अनुरक्षण की प्रक्रियाएं हैं।

कुछ ऐसे प्रकार्य भी हैं, जिनके बिना सामाजिक प्रणाली जीवित नहीं रह सकती। इसे टालकट पार्सन्स ने “प्रकार्यात्मक-पूवपिक्षाएं‘‘ कहा है। इस प्रकार की चार प्रकार्यात्मक पूर्वपेक्षाएं हैं।

प) अनुकूलन (adaptation)
पप) लक्ष्य प्राप्ति (goal attainment)
पपप) एकीकरण (integration) और
पअ) विन्यास अनुरक्षण (latency)

इन प्रकार्यात्मक पूर्वापक्षाओं की कार्य-पद्धति के क्षेत्र के बारे में असगे यह बताया गया है कि क्या ये पूवपिक्षाएं प्रणाली की बाहरी प्रक्रियाओं से संबंध रखती हैं या आंतरिक। उनका अंतःक्रिया की प्रकृति के रूप से भी विरूपण किया गया है जैसे ये अंतःक्रियाएं प्रयोजनात्मक (consummatory) है या नैमित्तिक (instrumental)। प्रयोजनात्मक अंतःक्रिया से अभिप्राय यह है कि जहां किसी अभीष्ट लक्ष्य को प्राप्त करने पर बल हो और नैमित्तिक अंतःक्रिया में अभीष्ट लक्ष्य को प्राप्त करने में साधनों के अधिग्रहण और समामेलन पर बल होता है।

आइए, अब हम इन प्रकार्यात्मक पूपिक्षाओं में से प्रत्येक का निरीक्षण करें

अनुकूलन (adaptation)
प्रकार्यात्मक पूर्वपक्षा के रूप में अनुकूलन का मतलब है प्रणालियों के बाहर के संसाधनों का उत्पादन और अधिग्रहण, इसका बाहरी वातावरण और प्रणाली में वितरण करना। बाहरी वातावरण का मतलब है, जमीन, पानी आदि । उदाहरण के लिए यहां हम आर्थिक प्रणाली को ले सकते हैं जिसमें समाज में संसाधनों का उपयोग, उत्पादन और वितरण शामिल हैं। अनुकूलन प्रणाली के बाहरी तत्वों की ओर उन्मुख होता है और यह नैमित्तिक प्रकृति का है।

लक्ष्य प्राप्ति (goal attainment)
लक्ष्य प्राप्ति ऐसी प्रकार्यात्मक पूपिक्षा है जिसमें एक तो लक्ष्य के निर्धारण का समावेश होता है, दूसरे लक्ष्य की प्राप्ति के लिए सामाजिक प्रणाली के सदस्यों को अभिप्रेरित करने की आवश्यकता होती है। तीसरी बात, इन लक्ष्यों को पाने के लिए सदस्यों और उनकी शक्तियों को जुटाने की आवश्यकता होती है। इसकी प्रक्रियाएं प्रयोजनात्मक होती हैं, हालांकि इसमें बाहरी अंतःक्रिया सम्मिलित होती है।

सामाजिक प्रणाली में शक्ति और अधिकार-सरंचना का संगठन उस संस्था का उदाहरण है जिसमें लक्ष्य प्राप्ति का जोरदार प्रयास होता है। राजनीतिक प्रक्रियाएं इसके उदाहरण हैं। यहां यह याद रखना होगा कि लक्ष्य प्राप्ति सामाजिक प्रणाली के वैचारिक और संगठनात्मक ढांचे से संबंधित हैं।
 एकीकरण (integration)
एकीकरण ऐसी प्रकार्यात्मक पूर्वापक्षा है, जिससे किसी प्रणाली में सुसंगति, एकात्मकता और समन्वय स्थापित करने में मदद मिलती है। सामाजिक प्रणाली में यह प्रकार्य मुख्य रूप से सांस्कृतिक और नैतिक मूल्यों द्वारा किया जाता है। इसलिए सांस्कृतिक प्रणाली और इससे संबंधित संस्थाएं और आचरण एकीकरण करने वाले तत्व हैं। एकीकरण के द्वारा किसी प्रणाली में निरंतरता, समन्वय और एकात्मकता सुनिश्चित होती है तथा इससे प्रणाली को टूटने और बिखराव से बचाने में भी मदद मिलती है यह प्रकार्यात्मक पूपिक्षा व्यवस्था के लिए आंतरिक है और प्रयोजनात्मक (consummatory) प्रकृति की है।

 विन्यास अनुरक्षण (latency)
अंत में, विन्यास अनुरक्षण सामाजिक प्रणाली की उस प्रकार्यात्मक पूपिक्षा को कहते हैं जो सामाजिक प्रणाली में उसके तत्वों की अभिप्रेरणात्मक ऊर्जा का संग्रह, संगठन और अनुरक्षण करती है। इसके मुख्य प्रकार्य प्रणाली के अंदर विन्यास अनुरक्षण और तनाव-प्रबंध है।

यह प्रकार्य सामाजिक प्रणाली के सदस्यों के समाजीकरण की प्रक्रिया द्वारा किया जाता है। समाजीकरण की प्रक्रिया इस सामाजिक प्रणाली के विशिष्ट प्रतीकों, मूल्यों, रूचियों और आदतों को अपनाने में सहायता करती है। यहां वह जोड़ देना जरूरी प्रतीत होता है कि पार्सन्स के मत में तनाव-प्रबंधन सभी संस्थाओं में आभ्यंतर रूप में होना चाहिए। इस तरह इसे ‘‘एकीकरण‘‘ के प्रकार्य से अलग किया जा सकता है। यहां एकीकरण का अभिप्राय समाज की विभिन्न प्रणालियों में एकीकरण से है। विन्यास अनुरक्षण की प्रकार्यात्मक पूवपिक्षा का नैमित्तक स्वरूप भी है दिखें तालिका 27.1)।
तालिका 27.1ः सामाजिक प्रणाली की प्रकार्यात्मक पूर्वापेक्षाएं
नैमित्तिक (instrumental) प्रयोजनात्मक (consummatory)
बाह्य (external) अनुकूलन
उदाहरण- आर्थिक
प्रणाली – संसाधन
उपयोगिता, उत्पादन लक्ष्य-प्राप्ति
उदाहरण – राजनैतिक
प्रणाली – राज्य
राजनैतिक दल आदि
अभ्यंतर (internal) विन्यास अनुरक्षण
उदाहरण – परिवार
समाजीकरण, शिक्षा आदि एकीकरण
उदाहरण – सांस्कृतिक
प्रणाली – धर्म
विचारधारा आदि

इससे पिछले भागों में हमने आपका सामाजिक प्रणाली की अवधारणा से परिचय कराया था। आइए, अब हम पार्सन्स द्वारा दी गई सामाजिक प्रणाली की संरचनाओं के प्रकारों के अनुभवाश्रित उदाहरणों को समझने की कोशिश करें।

सामाजिक प्रणाली की अवधारणा – पार्सन्स
इकाई की रूपरेखा
उद्देश्य
प्रस्तावना
टालकट पार्सन्स और सामाजिक प्रणाली की अवधारणा के संबंध में आरंभिक दृष्टिकोण
उपयोगितावादी (utilitarian), प्रत्यक्षवादी (positivist), और आदर्शवादी (idealist) दृष्टिकोण
पार्सन्स का दृष्टिकोण
पार्सन्स का क्रियात्मक दृष्टिकोण
सामाजिक प्रणाली के संगठन की आधारभूत इकाई
अभिप्रेरणात्मक उन्मुखता (motivational orientation)
मूल्यपरक उन्मुखता (value orientation)
सामाजिक प्रणाली में भूमिकाओं का संस्थागत होना
सामाजिक प्रणाली के रूप में सामूहिकता (collectivity)
विन्यास प्रकारान्तर (pattern variables)
भावात्मकता (ffaectivity) बनाम भावात्मक तटस्थता (ffaective neutrality)
आत्म-उन्मुखता (self&orientation) बनाम सामूहिक उन्मुखता (collective orientation)
सार्वभौमवाद (universalism) बनाम विशिष्टतावाद (particularism)
प्रदत्त (ascription) बनाम अर्जित (achievement)
विनिर्दिष्टता (specificity) बनाम प्रसरणता (dffiuseness)
प्रकार्यात्मक पूर्वापेक्षाएं (functional prerequisites)
अनुकूलन (adaptation)
लक्ष्य प्राप्ति (goal attainment)
एकीकरण (integration)
विन्यास अनुरक्षण (latency)
सामाजिक प्रणाली की संरचना के प्रकार
सार्वभौमवादी-अर्जित विन्यास (the universalistic achievement pattern)
सार्वभौमवादी-प्रदत्त विन्यास (the universalistic ascriptive pattern)
विशिष्टतावादी-अर्जित विन्यास (the particularistic achievement pattern)
विशिष्टतावादी-प्रदत्त विन्यास (the particularistic&ascription pattern)
सारांश
शब्दावली
कुछ उपयोगी पुस्तकें
बोध प्रश्नों के उत्तर

उद्देश्य
इस इकाई को पढ़ने के बाद आपके द्वारा संभव होगा
ऽ सामाजिक प्रणालियों के अध्ययन के लिए आरंभिक दृष्टिकोणों की व्याख्या करना और उनके बारे में पार्सन्स का दृष्टिकोण बताना
ऽ सामाजिक प्रणाली के अध्ययन में पार्सन्स के क्रियात्मक दृष्टिकोण को समझना
ऽ सामाजिक प्रणाली के संगठन की आधारभूत इकाई के रूप में चर्चा करना
ऽ पार्सन्स द्वारा दिए गए विन्यास प्रकारांतरों (pattern variables) का वर्णन करना
ऽ पार्सन्स द्वारा प्रस्तुत सामाजिक प्रणालियों की प्रकार्यात्मक पूर्वपक्षाओं का व्याख्या करना
ऽ पार्सन्स द्वारा अनुभवाश्रित उदाहरणों के आधार पर दिए गए सामाजिक प्रणालियों की संरचनाओं के प्रकारों का विवेचन करना।

प्रस्तावना
खंड 6 की इकाइयों में आपने रैडक्लिफ-ब्राउन और मलिनॉस्की के समाज के अध्ययन में प्रकार्यवादी और संरचनात्मक प्रकार्यवादी योगदानों के बारे में पढ़ा था। ये दोनों विचारक सामाजिक नृशास्त्र की ब्रिटिश परंपरा से जुड़े हुए हैं। अपने सिद्धांतों का आधार उन्होंने आदिम समाज के अपने अध्ययनों को बनाया।

इस खंड में हमने अमरीकी समाजशास्त्री टालकट पार्सन्स और रॉबर्ट के. मर्टन के प्रकार्यवाद के विकास में किए गए योगदान का वर्णन किया है। कई दशकों से समाजशास्त्र में और विशेष रूप से अमरीकी समाजशास्त्र में पार्सन्स और बाद में मर्टन का दबदबा रहा है। इस पाठ्यक्रम में छठे और सातवें खंडों के बीच पार्सन्स और मर्टन के प्रकार्यवादी दृष्टिकोणों ने सामान्य कड़ी का काम किया है। ब्रिटिश नृशास्त्रियों के विपरीत, पार्सन्स और मर्टन के अध्ययन का केंद्र, आधुनिक औद्योगिक समाज, उसमें भी विशेष रूप से अमरीकी समाज, रही है।

प्रकार्यवाद के समाजशास्त्रीय दृष्टिकोण को समझने के लिए टालकट पार्सन्स की सामाजिक प्रणाली की अवधारणा को समझना आवश्यक है। इकाई 27 में इसी विषय पर विचार किया गया है। इसमें पार्सन्स द्वारा विश्लेषित सामाजिक प्रणाली की अवधारणा का वर्णन है। उसकी अवधारणात्मक व्यवस्था में सामाजिक प्रणालियों की संरचना और प्रक्रियाओं का विश्लेषण किया गया है। पार्सन्स की सामाजिक प्रणाली की अवधारणा का विकास सामान्य समाजशास्त्रीय सिद्धांत के रूप में हुआ, जिसे साधारण आदिम समाजों और जटिल आधुनिक औद्योगिक समाजों पर समान रूप से लागू किया जा सकता है।

इस इकाई का आरंभ सामाजिक प्रणाली के अध्ययन के संबंध में आरंभिक दृष्टिकोणों के बारे में चर्चा से और इनके पार्सन्स द्वारा सुझाए गए इनके विकल्प से होता है। इस विषय में भाग 27.2 में विचार किया गया है । इन दृष्टिकोणों के बारे में पार्सन्स का प्रस्तावित “क्रियात्मक दृष्टिकोणष् है जिसे भाग 27.3 में प्रस्तुत किया गया है। पार्सन्स ने अपने सिद्धांत का विकास सामाजिक प्रणाली के संदर्भ में क्रिया के स्तर पर किया है। इससे अगले भाग 27.4 में पार्सन्स द्वारा प्रतिपादित सामाजिक प्रणाली के संगठन की आधारभूत इकाई का वर्णन है। ये इकाई है, भूमिका और भूमिका-अपेक्षाओं का निरूपण। इस भाग में भूमिकाओं के संस्थागत होने पर विचार किया गया है और सामाजिक प्रणाली का “सामूहिकता‘‘ के रूप में वर्णन किया गया है।

सामाजिक प्रणाली विशेष में व्यक्ति के सामने क्रिया करने के जो विभिन्न विकल्प उपलब्ध हैं, उनके संबंध में द्विविधा की व्याख्या के लिए पार्सन्स ने विन्यास प्रकारान्तर (pattern variables) की अवधारणा का विकास किया। इन विन्यास प्रकारांतरों के बारे में भाग 27.5 में चर्चा की गई है। पार्सन्स के अनुसार, किसी सामाजिक प्रणाली का अस्तित्व चार पूपिक्षाओं पर निर्भर करता है। इन प्रकार्यात्मक पूपिक्षाओं को भाग 27.6 में वर्णित किया गया है। अंत में, भाग 27.7 में पार्सन्स द्वारा प्रतिपादित सामाजिक प्रणाली की संरचना के विभिन्न प्रकारों के बारे में समाज में अनुभव पर आधारित उदाहरणों के साथ विवेचना की गई है।