Four Foolish bulls story with moral | The lion and the bulls story in english and hindi

By   April 28, 2020

The lion and the bulls story in english and hindi , Four Foolish bulls story with moral , चार मुर्ख बैल और शेर की कहानी और नैतिक या इस कहानी से सिख ? :-

Once upon a time , there were four bulls . they lived in a forest . They were young and very strong . these four bulls were fast friends (good friends) .

A lion also lived in the forest . The lion wanted to kill the bulls and eat them . The bulls always lived together so they were very powerful and that why the lion could not harm them .

The lion thought of a plan to reduced the friendship of them so that they get weak and lion can easily hunt them.

One day the lion went to a bull and said “you are a very beautiful and strong bull , the other bulls are jealous of you , they eat fresh and green grass and leave bad grass for you , you should leave the other bulls and eat fresh grass .”

The foolish bull though that the lion was speaking the truth . Next day he went far away to eat grass . He was alone there . The lion attacked on the bull and killed him . He ate up the bull .

After some days he went to another bull and said the same thing . the other bull also went alone and the lion killed him .

In this way , The lion killed all the bulls on by one .

Moral : union is strength 

If the bulls do not get divide , the lion never harm them . Because The bulls were have good strength when they were together and when they got divide the strength get lost and the lion wanted to break this strength so that he can easily hunt them . that is why the moral of this story is union is strength.

चार मुर्ख बैल और शेर की कहानी ( The lion and the bulls story in in hindi)

एक जंगल में चार स्वस्थ और बेहद सुन्दर बैल रहते थे | वे चारो बैल एक दुसरे के बहुत अच्छे मित्र थे और हमेशा एक साथ रहते थे और कही पर भी जाते थे तो एक साथ ही जाते थे |

उसी जंगल में एक शेर भी रहता था और इन चारो बैलो को खाना चाहता था लेकिन वह जब भी इन्हें देखता था तो एक साथ ही मिलते थे जिसके कारण उसमे कभी इतनी हिम्मत न हुई कि वह इन चारो पर एक साथ आक्रमण करके इन्हें मारकर खा सके क्योंकि शेर जानता था कि ये एक दुसरे के बहुत अच्छे मित्र है और यदि मैं किसी एक पर आक्रमण करूँगा तो अन्य तीन मुझे क्षति पहुंचा सकते है |

एक दिन शेर ने उन्हें अलग अलग करने और फिर एक एक पर आक्रमण करने की योजना बनाई |

वह उन चारों बैलो में से एक बैल के पास गया और उसे कहने लगा “तुम बहुत ही बलवान और बेहद सुन्दर बैल हो , और इसी बात से अन्य तीन बैल जो कहने को तुम्हारे मित्र है लेकिन वे इस बात पर तुमसे जलते है , वे सभी फ्रेश और हरी घास खाते है और तुम्हारे लिए खराब और सुखी हुई ख़ास छोड़ते है , तुम्हे ऐसे मित्रो को छोड़ देना चाहिए |”

मुर्ख बैल को लगा कि वह शेर सही बोल रहा है और अगले दिन वह उनसे दूर हो गया और जंगल में बहुत दूर अकेला ही चरने के लिए चला गया , शेर ने उसे अकेला देखकर उस पर हमला किया और उसे मारकर खाने लगा |

कुछ दिनों बाद वह दुसरे बैल के पास गया और उसे भी वह सब बोलने लगा जो उसने पहले बैल को बोली थी |

दूसरा बैल भी उसकी बातो में आ गया और शेर ने उसे भी हमला करके मार डाला और इसी तरह से उस चतुर शेर ने उन सभी मुर्ख बैलों को एक एक करके मार डाला |

कहानी का नैतिक या सीख : संगठन में शक्ति

यदि वे सभी बैल उस शेर की बातों में न आते और एक साथ रहते तो वह शेर कभी भी उन्हें हानि नहीं पहुंचा सकता था , इसलिए कहा जाता है कि संगठित रहना चाहिए क्योंकि संगठन में अधिक शक्ति होती है जिसे दुश्मन आसानी से नहीं तोड़ सकता है | इसलिए इस कहानी का नैतिक संगठन में शक्ति दिया गया है |