धात्विक चालकों में वैद्युत आवेश का प्रवाह flow of electric charge in metallic conductors

flow of electric charge in metallic conductors in hindi धात्विक चालकों में वैद्युत आवेश का प्रवाह : प्रत्येक पदार्थ परमाणुओं से मिलकर बना होता है और परमाणु में नाभिक होती है और इलेक्ट्रॉन नाभिक के चारो ओर निश्चित कक्षाओं में चक्कर लगाते रहते है , जो इलेक्ट्रॉन नाभिक के समीप वाली कक्षाओं में चक्कर लगाते है वो नाभिकीय बल से आकर्षित रहते है अर्थात बंधे रहते है और जो इलेक्ट्रॉन नाभिक से दूर स्थित कक्षाओं में चक्कर लगाते है उन पर नाभिक का आकर्षण बल कम होता है और वो विचरण के लिए स्वतंत्र होते है इन्हे मुक्त इलेक्ट्रान कहते है।

चित्र को देखकर इसे आसानी से समझा जा सकता है
धात्विक चालकों में परमाणुओं के नाभिक तथा बाह्य इलेक्ट्रोनो पर लगने वाला नाभिकीय आकर्षण बल नगण्य होता है इसलिए धातुओं में इलेक्ट्रॉन नाभिक से बंधे नहीं रहते है और सम्पूर्ण धातु में स्वतंत्र रूप से गति करते है इनको मुक्त या चालन इलेक्ट्रॉन कहते है।
धात्विक चालकों में मुक्त इलेक्ट्रोनो की संख्या बहुत अधिक होती है।
धातुओं में मुक्त इलेक्ट्रॉन उसी तरह गति करते रहते है जिस तरह किसी पात्र गैस के अणु यादृच्छ गति करते है।
धातुओं में यादृच्छ गति इसलिए होती है क्योंकि मुक्त इलेक्ट्रॉन स्वतंत्र रूप से गति करते रहते है और कभी अशुद्धि से टकराते है , कभी अन्य आयनों से , इस प्रकार परिणामी गति यादृच्छ गति प्राप्त होती है।
जब ये मुक्त इलेक्ट्रॉन अन्य आयनों से टकराते है तो इनकी दिशा तथा वेग अचानक ही बदल जाते है। जैसा हम अणु गति सिद्धान्त में गैसों के लिए पढ़ते है।
किसी बाह्य विद्युत क्षेत्र की अनुपस्थिति में धारा का मान शून्य होता है क्योंकि जितने किसी एकांक क्षेत्रफल S से जितने इलेक्ट्रॉन गति करते है उसी समय में इसी क्षेत्रफल से उतने ही इलेक्ट्रॉन विपरीत दिशा में गति करते है जिससे परिणामी धारा का मान शून्य होता है।
 लेकिन जब धात्विक चालक को बाह्य विद्युत क्षेत्र से जोड़ा जाता है तो सभी इलेक्ट्रॉन पर क्षेत्र की विपरीत दिशा में एक बल (F = -eE ) कार्य करता है जिससे सभी इलेक्ट्रॉन एक निश्चित दिशा में अर्थात क्षेत्र के विपरीत दिशा में गति करते है जिसे अपवाह गति कहते है।

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