डॉप्लर प्रभाव की परिभाषा क्या है , उदाहरण , सूत्र , संरचना चित्र (doppler’s effect in hindi)

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(doppler’s effect in hindi) डॉप्लर प्रभाव की परिभाषा क्या है , उदाहरण , सूत्र , संरचना चित्र  : जब स्रोत और श्रोता दोनों के मध्य आपेक्षिक गति होती है तो तरंग की आवृत्ति बदल जाती है।
आपने देखा होगा जब आप रेलवे स्टेशन पर खड़े होते है और ट्रेन हॉर्न देती हुई आपकी तरफ आती है तो हॉर्न की आवृत्ति का मान धीरे धीरे बढ़ता है अर्थात जैसे जैसे ट्रेन पास आती है ध्वनि तरंग की आवृत्ति (आवाज) बढती जाती है और जब आपसे दूर जाती है तो आवाज धीरे धीरे कम होती जाती है अर्थात आवृत्ति का मान कम हो जाता है , ध्वनि तरंगों की आवृत्ति में होने आपेक्षिक गति के कारण होने वाले परिवर्तन को ही डॉप्लर प्रभाव कहते है।
डॉप्लर प्रभाव की खोज ” क्रिश्चियन जोहान डोप्लर ” ने की थी , इन्होने सबसे पहले इस प्रभाव को तारों की लाइट का बढ़ना और कम होना समझाया था क्योंकि तारे आपेक्षिक गति करते रहते है जिसके कारण उनके प्रकाश का बढ़ना और कम होना होता रहता है।
डॉप्लर प्रभाव प्रकाश , जल तरंगे ,  और ध्वनि तरंग , आदि में घटित होता है लेकिन हम ध्वनी तरंगो के लिए डॉप्लर प्रभाव प्रभाव को आसानी से महसूस कर सकते है।
इस प्रभाव का प्रयोग खगोलिकी में भी किया जाता है , जब खगोलक को अन्तरिक्ष या तारों के बारे में जानकारी प्राप्त करनी होती है तो खगोलक तारे द्वारा विद्युत चुम्बकीय तरंगों में हुए शिफ्ट के कारण आवृत्ति में परिवर्तन को ज्ञात करता है जो की तारे में आपेक्षिक गति के कारण हो रहा है जिससे उस तारे के बारे में कई जानकारी प्राप्त हो जाती है जैसे उसकी गति इत्यादि।
उदाहरण : जब एक हॉर्न देती हुई कार आपके पास आती है तो धीरे धीरे हॉर्न की आवाज बढती है , जब यह आपके सबसे पास होती है तब आवाज सबसे अधिक होती है और जब यह आपको क्रॉस करके निकल जाती है तो आवाज कम होती जाती है।
ऐसा इसलिए होता है क्योंकि स्रोत और श्रोता में आपेक्षिक गति होने के कारण ध्वनि तरंग के पिच में परिवर्तन होता है , जैसे जैसे कार पास आती है ध्वनी तरंगों का पिच बढ़ता है और जब कार आपसे दूर जाती है तो ध्वनि तरंगो का पिच बढ़ता जाता है जैसा चित्र में दर्शाया गया है।

निम्न सूत्र बताता है की श्रोता द्वारा प्राप्त तरंग और स्रोत द्वारा वास्तविक तरंगों की आवृत्ति में क्या सम्बन्ध है –

यहाँ v = तरंगो की चाल
VL = श्रोता की चाल
Vs = स्रोत की चाल
fL = वह आवृत्ति है जो श्रोता महसूस करता है।
fs = स्रोत की वास्तविक आवृत्ति।
. यहां कब किस राशी को ऋणात्मक या धनात्मक लेनी है इसके लिए निम्न सारणी देखे
1. जब स्रोत , श्रोता की तरफ गतिशील हो तो Vs ऋणात्मक होगा।
2. जब स्रोत , श्रोता से दूर गति करता है तो Vs धनात्मक होगा।
3. जब श्रोता , स्रोत की तरफ गतिशील हो तो VLधनात्मक होगा।
4. जब श्रोता , स्रोत से दूर करता है तो Vऋणात्मक होगा।